# संपूर्ण कर्मकांड विधि > Karmkand - कर्मकांड पूजा पद्धति ## Posts - [विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत की ज्योतिष विद्या](https://karmkandvidhi.in/rogaurjyotish/): भारतीय ज्योतिष शास्त्र रोगों की उत्पत्ति और उनके उपचार के लिए आवश्यक ज्ञान प्रदान करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन को इसका समुचित उपयोग करके विश्व को लाभान्वित करने की आवश्यकता है। इससे चिकित्सा विज्ञान और रोगी दोनों का लाभ होगा। भारत को इस विषय पर ढेर सारे शोध और संशोधन करके पाठ्यपुस्तकों में जोड़ने की जरूरत है ताकि विश्व को चिकित्सा में नए आयाम देखने को मिलें। ज्योतिष शास्त्र पर किए गए शोध और उनके नतीजों को साझा करने में आंतरराष्ट्रीय स्थापनाओं को उत्साहित करना चाहिए। - [कमजोर चंद्रमा के लक्षण और उपाय - आत्महत्या विषय के सन्दर्भ में](https://karmkandvidhi.in/chandrdoshsseatmhatya/): चन्द्रमा मन का कारक होता है, मन के द्वारा सोच-विचार किया जाता है। विचारों की उत्पत्ति मन में होती है और आत्महत्या संबंधी विचार का जन्म भी मन में ही होता है; लेकिन इससे यह कैसे सिद्ध होता है कि चन्द्रमा आत्महत्या का भी कारक है? जितने भी शुभ-अशुभ विचार होते हैं सभी मन में ही आते हैं तो क्या सभी गतिविधियों का एक मात्र कारक या मुख्य कारक चन्द्रमा ही है ? वैसे अधिकतर ऐसा ही सुना जाता है कि आत्महत्या में मुख्य भूमिका चन्द्रमा की होती है, आत्महत्या के लिये पीड़ित चन्द्रमा जिम्मेवार होता है आदि-आदि। न्यूज चैनलों ने... - [धर्मो रक्षति रक्षितः - पूर्ण श्लोक अर्थ सहित](https://karmkandvidhi.in/dharmorakshatirakshitah/): धर्मो रक्षति रक्षितः पूर्ण श्लोक क्या है ? धर्मो रक्षति रक्षितः श्लोक का अर्थ क्या है ? इस लेख में हम इस श्लोक के ऊपर विस्तृत चर्चा करेंगे। क्या आप धर्मो रक्षति रक्षितः पूर्ण श्लोक को जानते हैं ? यह श्लोक किस ग्रंथ का है ? धर्मो रक्षति रक्षितः का क्या अर्थ है ? हम यहाँ इस विषय पर गंभीरता से विचार करेंगे। इसके संदर्भ को समझने का प्रयास करेंगे। - [आत्महत्या के कारण - आत्महत्या रोकथाम के उपाय](https://karmkandvidhi.in/atamhatyakekaran/): आत्महत्या की मूल समस्या आत्मबल की कमी मानी जाती है। सूर्य के सबल होने से आत्मबल बढ़ता है। निराशावादी और असफलतापूर्ण व्यक्ति के आत्मबल में कमी होती है। इस मुद्दे को दूर करने के लिए आत्महत्या रोकथाम के प्रयासों पर चर्चा करनी अत्यंत महत्वपूर्ण है। आत्मशक्ति को बढ़ाने, सूर्य उपासना, आशावादी सोच, और परिवारिक एकता को बढ़ाने, और सनातन विद्या को मान्यता देने के बारे में सुझाव दिए गए हैं। आत्महत्या को दूर करने का सफल रास्ता आत्मबल में वृद्धि करना है। - [आत्महत्या क्या है ? आत्महत्या के कारण - या मूल कारण क्या हैं ?](https://karmkandvidhi.in/atmahatyakyahai/): ईश्वर द्वारा प्रदत्त अमूल्य जीवन को स्वतंत्र रूप से समाप्त करना आत्महत्या है, जिस पर विचारणीय रूप से कम ही चर्चा होती है। इस लेख में, आत्महत्या का स्वरूप, इसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई, और क्यों किसी को आत्महत्या का अधिकार नहीं होता है पर विचार किया गया है। आत्मायुक्त शरीर का सम्मान किया जाना चाहिए क्योंकि इसमें ईश्वर का ही अंश विद्यमान होता है। आत्महत्या को अक्षम्य पाप माना जाता है और इसके प्रतीक आत्महत्या को रोकने का उपाय आत्मा से संबंधित जीवन को समझने और सूर्य की उपासना करने में निहित है। - [रविवार व्रत के नियम क्या-क्या हैं ?](https://karmkandvidhi.in/ravivrat/): रविवार व्रत के नियम : रविवार व्रत भगवान सूर्य को समर्पित होता है। इसे वृश्चिक राशि में सूर्य के होने पर जो शुक्ल पक्ष होता है, उसमें शुरू किया जाता है और मेष राशि में सूर्य के होने पर शुक्ल पक्ष में समाप्त किया जाता है। इसे करने से सूर्य प्रसन्न होते हैं जिससे आरोग्य लाभ होता है, नेत्र पीड़ा से मुक्ति मिलती है, हृदय रोग निवारित होते है और सरकारी नौकरी, पदोन्नति आदि की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, दरिद्रता का नाश भी होता है। यदि व्रत का आरंभ और समापन सही समय पर नहीं किया जाता, तो इसके कुछ नकरात्मक परिणाम भी हो सकते हैं। - [देवोत्थान एकादशी पूजा विधि एवं मंत्र - Dev uthani ekadashi mantra](https://karmkandvidhi.in/devotthanpujavidhi/): देवोत्थान एकादशी पूजा विधि एवं मंत्र - Dev uthani ekadashi mantra : पहले पूजा की तैयारी कर लें। चौक पूरकर (रंगोली सजाकर) एक चौकी या पीढिया पर चारों कोने में दीप जलाकर बीच में ताम्रपात्र में शालिग्राम (अथवा विष्णु प्रतिमा हो या पान पर सुपारी और तिलपुंज बनाकर) स्थापित करें। - [एकादशी व्रत कथा - संक्षेप में 26 एकादशी की व्रत कथा](https://karmkandvidhi.in/ekadashivratkatha/): एकादशी व्रत कथा : सभी एकादशी के अलग-अलग नाम कहे गए हैं अरु सभी एकादशी में भगवान विष्णु की पूजा भी विभिन्न नामों से की जाती है। सभी एकादशी के फल भी अलग-अलग बताये गए हैं जो नामानुसार परिलक्षित भी होते हैं। यहाँ सभी एकादशी के कथा संक्षेप में प्रस्तुत की जा रही है। यथाशीघ्र प्रत्येक एकादशी की अलग-अलग पूर्ण कथा भी प्रस्तुत की जाएगी। - [एकादशी के नाम क्या-क्या हैं ? क्या आप 26 एकादशी के नाम जानते हैं ?](https://karmkandvidhi.in/ekadashikenam/): एकादशी के नाम क्या-क्या हैं ? क्या आप 26 एकादशी के नाम जानते हैं ? : एकादशी व्रत को विभिन्न पुराणों और ग्रंथों में महत्वपूर्ण माना जाता है, यह भगवान विष्णु के प्रति समर्पित होता है। यह व्रत विविध कामनाओं की पूर्ति, स्वर्ग और मोक्ष की प्राप्ति सुनिश्चित करता है। सभी 12 महीनों में 26 एकादशी व्रत होते हैं, जिनहें उत्पन्ना, मोक्षदा, सफला, पुत्रदा और अन्य नाम से जाना जाता है। एकादशी व्रत का आरंभ मार्गशीर्ष माह की उत्पन्ना एकादशी से किया जाता है, लेकिन अगर किसी व्यक्ति में प्रबल उत्साह हो, तो वह किसी अन्य माह में शुरू कर सकता है। - [कोहरा क्या है ? अक्षय नवमी के दिन क्या करना चाहिए ?](https://karmkandvidhi.in/kohradan/): अक्षय नवमी का महत्व सनातन धर्म में अत्यंत उच्च है। इस साल 2023 में यह पर्व 21 नवम्बर मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन कूष्माण्ड (कोहरा) दान करने का विशेष महत्व होता है, जिससे पुण्य प्राप्त किया जाता है। कूष्माण्ड दान से पापों की शमन होती है और पुत्र, पौत्र, धन सम्पत्ती की वृद्धि होती है। इसमें दान की विधि और मंत्र भी सम्पूर्ण रूप से निर्धारित किए गए हैं, जिन्हें जानकर व्यक्ति अधिक से अधिक पुण्य प्राप्त कर सकता है। - [दण्ड क्या है ? दण्ड का उद्देश्य क्या है?](https://karmkandvidhi.in/dandkyahai/): दण्ड क्या है : "दण्ड" शब्द कई अर्थों में प्रयोग होता है: एक डंडा, चोट, सजा, एक समय मापन की इकाई, व्यायाम, और एक प्रणाम. राजनीतिक उपायों में भी इसकी पहचान दण्ड के रूप में की जाती है। इसका अन्य विशेष अर्थ छठ महापर्व में पाया जाता है, जब व्रती सूर्य को प्रणाम कर दण्ड देते हैं, जिसका उद्देश्य किसी कामना की पूर्ति होती है। यहाँ पर "दण्ड" शब्द का अर्थ पूजा घाट तक दण्डवत प्रणाम कर जाना होता है। इसे सूर्य को दण्ड देना कहा जाता है। - [छठ व्रत की पूजा विधि](https://karmkandvidhi.in/chathpujavidhi-2/): 2023 में छठ व्रत की पूजा विधि में विशेष नियम के अनुसार, सप्तमी तिथि सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी और अगले दिन, 20/11/2023 सोमवार को, सूर्योदय से पहले ही अष्टमी आरंभ हो जाएगी। इसलिए, सूर्योदय से पहले ही प्रातः कालीन अर्घ्य दिया जाएगा। यह निर्देश सभी पंचांगों में स्पष्ट रूप से दिया गया है। इस वर्ष की छठ पूजा की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं, आपके जीवन में सुख-शांति-समृद्धि की कामना की जाती है। - [कार्तिकेय की पूजा क्यों नहीं होती है](https://karmkandvidhi.in/karthikeya2/): कार्तिकेय की पूजा क्यों नहीं होती है : दक्षिण भारत में मुरुगन के नाम से उनकी पूजा होती है, जो उत्तर भारत में कम होती है। हालांकि, कार्तिकेय उत्तर में भी पूजे जाते हैं और उसके कई प्रमाण हैं, जैसे कि दुर्गा पूजा, यज्ञानुष्ठान, और स्कंद षष्ठी त्यौहार। विभिन्न मान्यताओं के हिसाब से, महिलाएं कार्तिकेय की पूजा नहीं करतीं हैं क्योंकि उन्होंने कभी नारी जाति को श्राप दिया था। वह कहते हैं कि जो स्त्री उनका मांस और खाल से रहित स्वरूप देखेगी, वह सात जन्मों तक विधवा रहेगी। - [अक्षय नवमी कब है - akshaya navami](https://karmkandvidhi.in/akshanynavamikabhai/): अक्षय नवमी कब है : शास्त्र पुराणों में अक्षय नवमी का बहुत अधिक महत्व बताया गया है। अक्षय नवमी करने वाला अक्षय पुण्य का भागी बनकर सुख का भाजन बनता है, उसे यम यातना नहीं मिलती अर्थात नरक नहीं जाना पड़ता है। - [छठ पूजा का महत्व क्या है - 8 Points](https://karmkandvidhi.in/chathpujakamahatwa/): छठ पूजा का महत्व क्या है : अपनी विशेष उपासना विधि और आकर्षकों के कारण, छठ पूजा एक भारतीय सांस्कृतिक धरोहर मानी जाती है। प्रचलित झूठी और मनगढंत बातें छठ पूजा के वास्तविक महत्व को छिपाती हैं। यह लेख विस्तार पूर्वक छठ पूजा के विभिन्न पहलुओं को उजागर करता है, जिसके माध्यम से हमें इसकी गूढ़ बातें और महत्व का ज्ञान होता है। - [कर्मकांड के प्रकार](https://karmkandvidhi.in/karmkandkeprakar/): कर्मकांड के प्रकार : कर्मकांड के विभाजन की चर्चा करते समय हमें 'कर्म (actions)' के प्रकार को समझना नहीं चाहिए। यह भी स्पष्ट है कि वेदों के आधार पर कर्मकांड के प्रकार का विभाजन करने का विचार भी प्रासंगिक नहीं होता है। कर्मकांड को वास्तव में केवल दो प्रकार से विभाजित किया जा सकता है: 1) अब्राह्मण कर्मकांड, जिसे स्वयं किया जा सकता है और इसमें ब्राह्मण की आवश्यकता नहीं होती। 2) सब्रह्माण कर्मकांड, जिसे बिना ब्राह्मण के सम्पादन नहीं किया जा सकता है। अत: कर्मकांड की प्रकारों का निर्धारण कर्मों के आधार पर होता है, लेकिन वे कर्म के प्रकार से भिन्न हो - [कर्मकांड में क्या क्या आता है ?](https://karmkandvidhi.in/karmkandmekyahai/): कर्मकांड में क्या क्या आता है : यह पोस्ट जीवन में कर्मकाण्ड की आवश्यकता व्याख्या करती है। ऐसा दावा किया गया है कि जन्म से लेकर मृत्यु तक और सोने से जागने तक, हमारे सभी कर्म कर्मकाण्ड के अंतर्गत आते हैं। कर्मकाण्ड में प्रत्येक कर्म की विधियाँ, विहित, निषिद्ध इत्यादि संकलित होती हैं जो धार्मिक ग्रंथों में मिलती हैं। सुख, दुःख या शांति की प्राप्ति के लिए हमें अनुचित कर्म करने पड़ते हैं, जिसकी विधि शास्त्रों में वर्णित है। ऐसा भी माना गया है कि कर्म का त्याग करना संभव नहीं है, हालाँकि कर्म फल की इच्छा का त्याग किया जा सकता है। - [कर्मकांड क्या है - Karmkand kya hai](https://karmkandvidhi.in/karmkandkyahai/): कर्मकांड क्या है - Karmkand kya hai : कर्मकांड से पहले 'कर्म' और 'कांड' को समझना जरूरी है। कर्म जीवन में हमारे द्वारा किए गए सभी कार्य हैं, जो अनेक दृष्टीकोणों से विश्लेषित किए जा सकते हैं। 'कांड' हमारे द्वारा किए गए कार्यों के खंड, भाग या घटना होते हैं। 'कर्मकांड' में, 'कर्म' अध्यात्मिकता का एक खंड होता है और इस खंड के विधान को 'कर्मकांड' कहते हैं। इसका उद्देश्य लौकिक और पारलौकिक सुख की प्राप्ति का मार्ग प्रदान करना है। - [छठ पूजा विधि : Day 1 and 2](https://karmkandvidhi.in/chathpujavidhi/): इस आलेख में छठ पूजा विधि बतायी गयी है एवं पूजा के मंत्र भी दिये गये हैं। इसमें छठ व्रत, नहाय-खाय, खरना, सायंकाल और प्रातः काल की पूजा तथा अर्घ्य दान, नमस्कार और विसर्जन की विधि का उल्लेख है। मंत्र समेत यह पूजा विधि, आधी हिंदू धर्म और संस्कृति में बहुत ही महत्त्वपूर्ण होती है। सूर्य को प्रत्यक्ष जल देने की अनुशंसा भी की गई है। - [कौन सी पुस्तक - सबसे अच्छी है?](https://karmkandvidhi.in/bestbooktoread/): कौन सी पुस्तक - सबसे अच्छी है? यह विचार करने का विषय है कि दुनियां की सर्वश्रेष्ठ पुस्तक कौन सी हो सकती है। 'जीवनचर्या' अर्थात 'नित्यकर्म' की व्याख्या करने वाली पुस्तक ही सर्वाधिक उपयोगी और महत्त्वपूर्ण हो सकती है। ऐसी पुस्तक; ज्ञानार्जन, आर्थिक सफलता, स्वास्थ्य, और अन्य सभी महत्वपूर्ण पहलुओं में सहायक हो सकती है। 'नित्यकर्म पद्धति' जैसी पुस्तकें हमें जीवन के प्रतिदिन के क्रिया-कलापों को सही ढंग से पूरा करने में सहयोग करती है। - [घर में लक्ष्मी कब आती है - 1 Important Days](https://karmkandvidhi.in/laksmikabaatihai/): घर में लक्ष्मी कब आती है : अर्द्धरात्रि को लक्ष्मी अपना निवास स्थान ढूंढने के लिये भ्रमण करती है। अतः घर को फूल-माला आदि से सजाकर; स्वयं अलंकृत होकर (सज-संवरकर) लक्ष्मी के स्वागत में दीपोत्सव करें। - [मां काली की पूजा कैसे करें](https://karmkandvidhi.in/kalipujamantr/): मां काली की पूजा कैसे करें : कार्तिक कृष्ण अमावस्या के दिन अर्द्धरात्रि में काली/श्यामा पूजा की जाती है। यह पूजा विशेषतः मंदिरों में प्रतिमा बनाकर की जाती है। दीपावली की रात घरों में लोग लक्ष्मी पूजा करते हैं लेकिन काली उपासक माता काली की पूजा भी घर में करते हैं। काली माता की पूजा के सभी मंत्र यहां दिये गये हैं। सभी मंत्र संस्कृत में हैं। - [घर में लक्ष्मी क्यों नहीं आती है](https://karmkandvidhi.in/lakshmikiakripa/): घर में लक्ष्मी क्यों नहीं आती है : यह पोस्ट माता लक्ष्मी की अकृपा और दरिद्रता के कारणों पर आधारित है। यह सुझाव देती है कि कुण्डली दोष, वास्तु दोष, पितृ दोष, कर्म का फल, धन का दुरुपयोग, और कुदृष्टि, इन सभी चीजों से बचना महत्वपूर्ण है। पितरों का श्राद्ध-तर्पण, ब्राह्मण और गाय की सेवा, और मंदिरों की सफाई, ये सब चीजें लक्ष्मी की कृपा को बनाए रखने में मदद करती हैं। अगर धन उपलब्ध हो, तो उसका उपयोग दान और भोग में करना चाहिए, नहीं तो उसका नाश संभावित है। इस पोस्ट में लक्ष्मी की अकृपा के प्रमुख कारणों पर प्रकाश डाला गया है - [पूजा क्या है - Puja Kya hai](https://karmkandvidhi.in/pujakyahai/): पूजा क्या है - Puja Kya hai : प्रत्येक मनुष्य जीवन में सुख, समृद्धि, शांति आदि की इच्छा करता है और जीवन के बाद भी स्वर्गादि की प्राप्ति हो। ये सभी कामना हैं जो दो प्रकार के सिद्ध होते हैं; पहला लौकिक और दूसरा पारलौकिक। शास्त्रों में चार पुरुषार्थ कहे गये हैं - धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। लेकिन पुरुषार्थ चतुष्टय भी इन दोनों प्रकारों में सन्निहित है। पूजा की सामान्य परिभाषा इस प्रकार से की जाती है कि जो लौकिक व पारलौकिक सुखों/भोगों को उत्त्पन्न करती है वह पूजा है। वास्तविक अर्थ में कल्याण कामना से भगवान, देवताओं, गुरु और ब्राह्मणों की विविध द्रव्यों से आराधना करना ही पूजा है। अन्यत्र आदर-सम्मान-सेवा-सुश्रुषा करना पूजा का समानार्थी है। - [kali puja 2024 - काली पूजा कब है ? श्यामा पूजा या काली पूजा से सम्बंधित विशेष बातें](https://karmkandvidhi.in/shyamapuja/): काली पूजा कब है : kali puja 2024 - कार्तिक कृष्ण अमावस्या को प्रदोषकाल में जहां लक्ष्मी पूजा होती है वहीं निशीथ यानि मध्य रात्रि में काली पूजा या श्यामा पूजा भी की जाती है। काली पूजा भी दुर्गा पूजा के तरह ही बड़े-बड़े पंडाल बनाकर किये जाते हैं। बंगाल में काली पूजा विशेष रूप से होती है और बिहार में भी बहुत धूम-धाम से किया जाता है। - [दीपक के नीचे रखे चावल का क्या करें - deepak ke niche rakhe chawal ka kya karen](https://karmkandvidhi.in/dipakkeniche/): दीपक के नीचे रखे चावल का क्या करें : दीपक के नीचे चावल तब रखा जाता है, जब दीपक के लिए आसन नहीं होता, क्योंकि दीपक को भूमि पर सीधे नहीं रखा जाता हैं। चावल को वैकल्पिक आसन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। और कारण यह होता है कि दीपक में भी देवत्व होता है, और शास्त्रों के अनुसार भूमि पर दीपक को रखने के निषेध होता है। इसलिए, दीपक के लिए आसन की आवश्यकता होती है, और जब यह नहीं होता, तब चावल का प्रयोग किया जाता है। दीपक देवताओं के दाहिनी ओर और देवियों के बांयी ओर रखनी चाहिए। - [उल्काभ्रमण का शास्त्रीय प्रमाण क्या है? पितृ विसर्जन कब करें? पितृ विसर्जन कैसे किया जाता है?](https://karmkandvidhi.in/ulkabhramanvidhi/): उल्काभ्रमण का शास्त्रीय प्रमाण क्या है? पितृ विसर्जन कब करें? पितृ विसर्जन कैसे किया जाता है? - पितृपक्ष में यमलोक से पितृगण पृथ्वी पर अन्न-जलादि की आकांक्षा से आते हैं; और पितरों के आने से ही महालय सिद्ध होता है। पितृपक्ष में तर्पण-श्राद्ध आदि के द्वारा पितरों को अन्न-जलादि प्रदान किया जाता है। यदि पितर गण यमलोक से आते हैं तो वापस भी जाना ही चाहिए। कार्तिक अमावास्या को पितर वापस यमलोक जाते हैं। - [अकाल मृत्यु से बचने के लिए क्या करना चाहिए : yam deep daan](https://karmkandvidhi.in/akalmrityunivarankaupay/): अकाल मृत्यु से बचने के लिए क्या करना चाहिए : yam deep daan - अकाल मृत्यु का वास्तविक तात्पर्य है सहज मृत्यु न होकर वृद्धावस्था से पूर्व रोग, दुर्घटना आदि कारणों से मृत्यु होना । जिस किसी घर में अकालमृत्यु होती है वह घर विपत्ति में आ जाता है, शोकाकुल रहता है। अकालमृत्यु निवारण हेतु महामृत्युंजय जप - [सोमवती अमावस्या कब है - सोमवती अमावस्या पूजा विधि](https://karmkandvidhi.in/somwatiamawasya/): सोमवती अमावस्या कब है - सोमवती अमावस्या पूजा विधि : जब कभी भी अमावास्या के दिन सोमवार होता है तो उसे सोमवती अमावास्या कहा जाता है। अर्थात सोमवार और अमावास्या के योग को सोमवती अमावास्या कहा जाता है। आगे हम सोमवती अमावस्या से सम्बंधित सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर शास्त्रसम्मत चर्चा करेंगे। - [छठ पूजा कब है 2024 - छठ पूजा क्यों मनाई जाती है ?](https://karmkandvidhi.in/chath-puja-2024/): सूर्य और छठी मैया में क्या संबंध है? छठ पूजा से क्या लाभ होता है? छठ व्रत 2024 में कब है? बिहार में छठ पूजा कब है 2024 ? इत्यादि-इत्यादि। यहां हम आपके सभी प्रश्नों का उत्तर ढूंढने का प्रयास करेंगे। - [दीपावली 2023](https://karmkandvidhi.in/dipawalikabhai/): दीपावली की रात को क्या करना चाहिए? घर में दीपावली की पूजा कैसे करें? दीपावली के दिन लक्ष्मी जी की पूजा कैसे करें? इत्यादि। यहां हम आपके इन सभी प्रश्नों पर चर्चा करेंगे और दीपावली पर की जाने वाली पूजा विधि को भी समझेंगे। - [ज्ञानवापी सर्वे का निष्कर्ष क्या है ?](https://karmkandvidhi.in/gyanwapi-sarave-ka-nishkarsh/): वर्षों से चल रहे ज्ञानवापी प्रकरण का सर्वे रिपोर्ट न्यायालय के आदेश से 25 जनवरी 2024 को सार्वजनिक की जा चुकी है। सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद कई महत्वपूर्ण बातें सामने आयी है। सनातनियों का दृढ विश्वास की ज्ञानवापी ही भगवान विश्वनाथ का वास्तविक मंदिर है यह और पुष्ट हो गया है। - [राम राज्य कब आयेगा ?](https://karmkandvidhi.in/ram-rajya-kab-aayega/): राम राज्य का सीधा भाव यह होता है कि सभी सुखी-सम्पन्न हों, चिन्तामुक्त जीवन हो, किसी प्रकार का भय न हो इत्यादि-इत्यादि । इसको अगर थोड़ा शब्दांतर से समझने का प्रयास करें तो इस प्रकार का भी अर्थ प्रकट हो सकता है :- - [प्रासाद स्नपन विधि](https://karmkandvidhi.in/prasad-snapan/): पवित्रीकरणादि करके त्रिकुशा, तिलजलादि संकल्प द्रव्य लेकर संकल्प करे : ॐ अद्य ….......... अस्मिन्नूतनप्रासादे सकलदोषनिवृत्ति पूर्वकं प्रासादशुद्धयर्थं आचन्द्रतारकं प्रासादपुरुष सान्निध्यहेतवे सप्रासादप्रतिष्ठाङ्गभूतं स्नपनपूर्वकं प्रासादाधिवासनं करिष्ये॥ - [रथयात्रा विधि - प्राण प्रतिष्ठा](https://karmkandvidhi.in/rathyatra-vidhi/): अब हम रथयात्रा करने की विधि को समझेंगे। विभिन्न प्रतिष्ठा पद्धतियों में रथयात्रा विधि के सम्बन्ध में मौन भाव का आभासित होता है। तथापि कर्मकाण्ड विधि के द्वारा इस विषय में शास्त्र सम्मत विधियों के आलोक में मौन को भंग करने का प्रयास किया जा रहा है। इस विषय में आप अपना विचार मार्गदर्शन हमें प्रदान कर सकते हैं। - [अयोध्या राम मंदिर निर्माण और राम लला की प्राण प्रतिष्ठा से क्या सीख मिली ?](https://karmkandvidhi.in/ayodhya-se-aage/): बुद्धिमान वो होता है जो गलतियों से सीख ले, विद्वान वो होता है जो आत्म कल्याण करते हुए औरों का कल्याण करने में सक्षम हो। मंदिर, मूर्ति, प्राण-प्रतिष्ठा, महोत्सव आदि सभी विषयों पर कुछ विवाद भी उत्पन्न हुए, जिससे आगे काशी, मथुरा आदि के संबंध में कुछ सीख प्राप्त हुई । - [भारतीय राजनीति में धर्म की भूमिका और राम लला की प्राण प्रतिष्ठा](https://karmkandvidhi.in/bhartiy-rajniti-me-dharm/): भारतीय संस्कृति का इतिहास धरती के ऊपर ही नहीं धरती के भीतर तक लिखा हुआ है, नदियों से समुद्र तक लिखा हुआ है, पत्थरों पर ही नहीं पहाड़ों पर भी लिखा हुआ है, सूर्य-चन्द्रमा-नक्षत्र-तारों तक लिखा हुआ है जिसे पन्नों में इतिहास लिखने-पढ़ने वाले कैसे पढ़ें ? उन्हें तो यह भाषा/विधा ही नहीं आती है। - [रथयात्रा - प्राण प्रतिष्ठा विधि](https://karmkandvidhi.in/rathyatra/): प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व एक विशेष महत्वपूर्ण विधि रथयात्रा है। जब किसी मंदिर में नई प्रतिमा स्थापित करनी होती है तो उस प्रतिमा को मंदिर में स्थापित करने से पूर्व सम्बंधित गांव/नगर में भ्रमण कराया जाता है जिसे रथयात्रा कहते हैं। इस आलेख में हम रथयात्रा विधि को समझने से पहले रथयात्रा के उचित समय को समझेंगे। - [देवस्नपनं उत्तरवेदी – प्राण प्रतिष्ठा विधि](https://karmkandvidhi.in/snapan-uttarvedi/): प्राणप्रतिष्ठा में देवस्नपन के लिये स्नपन मंडप और वेदी की तैयारी, कलश स्थापन संबंधी जानकारी पूर्व आलेखों में दी जा चुकी है। इसके साथ ही दक्षिण वेदी स्नपन और मध्य वेदी स्नपन (नेत्रोन्मीलन सहित) विधि की जानकारी भी पूर्व आलेख में दी जा चुकी है - [देवस्नपनं मध्यवेदी - प्राण प्रतिष्ठा विधि](https://karmkandvidhi.in/snapann-madhyavedi/): प्राण प्रतिष्ठा में देव प्रतिमा को स्नान कराने की विशेष विधि है। इसमें नेत्रोन्मीलन और मध्य वेदी स्नपन की विधि और मंत्र बताई गई है। - [श्री राम के अयोध्या आगमन पर हनुमान नाच और और भक्त गा रहे हैं](https://karmkandvidhi.in/nach-rahe-hanuman/): राम लला के अयोध्या आगमन पर सबसे अधिक प्रसन्न होकर हनुमान जी नाच रहे हैं और भक्त गा रहे हैं - राम हमारे अयोध्या पधारे, नाच रहे हनुमान। जय श्री राम :- इस भजन में इतिहास को भी समाहित किया गया है। - [ये क्या हो गया ? शंकराचार्य शास्त्रार्थ करेंगे या पदत्याग - दो ही विकल्प हैं एक ओर गड्ढा दूसरी ओर खाई।](https://karmkandvidhi.in/challenge-to-hankarachrya/): श्रीमद् जगद्गुरु वैदेही वल्लभ देवाचार्य का कहना है कि जिस शंकराचार्य ने प्राण-प्रतिष्ठा के इस आधार को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया है, उन्हें स्वयं सनातन धर्म शास्त्र का ज्ञान नहीं है। - [देवस्नपन दक्षिण वेदी - प्राण प्रतिष्ठा विधि](https://karmkandvidhi.in/snapan-vidhi/): कुशादि से आच्छादित दक्षिणवेदी पर प्रतिमा को पूर्वाभिमुख स्थापित करे : ॐ स्तीर्णं बर्हि: सुष्टरीमा जुषाणोरुपृथु प्रथमानं पृथिव्याम्‌ । दवेर्भिर्युक्तमदिति: सजोषा:स्योनं कृण्वाना सुविते दधातु ॥ ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवा ᳪ सस्तनूभिर्व्यशेमहि देवहितं यदायुः ॥ - [क्या देश के लाखों ठाकुरबाड़ी में असुर की पूजा हो रही है - शंकराचार्य जी ?](https://karmkandvidhi.in/thakurbari-mandir/): जिस प्रकार से ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद इस बात को लेकर अड़े हुये हैं कि बिना शिखर के मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा नहीं की जा सकती और यदि अयोध्या राम मंदिर में ऐसा किया जा रहा है तो वह आसुरी हो जायेगा तो इससे एक नया प्रश्न उठ गया है : क्या देश के लाखों ठाकुरबाड़ी में भगवान राम की नहीं असुर की पूजा हो रही है ? - [देव स्नपन - प्राण प्रतिष्ठा विधि](https://karmkandvidhi.in/snapan/): प्रतिमा निर्माण, प्रतिमा निर्माण में मुहूर्त दोष, प्रतिमा निर्माण में हुई जीवहत्या, अनुक्तमंत्र प्रयोग, स्पृष्य दोष, स्थान दोष आदि अनेक दोषों के निवारण हेतु स्नपन अनिवार्य होता है। - [शंकराचार्य पद का महत्व - ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य का योगदान; शिखर संबंधी नया विषय प्रकट हुआ](https://karmkandvidhi.in/shankrachary-ka-yogdan/): इस आलेख में मंदिरों में शिखर की अनिवार्यता से सम्बंधित एक नये विषय के प्रकट होने की चर्चा कि गयी है, जो देश के लाखों राम और कृष्ण मंदिरों (ठाकुरवारियों) के सन्दर्भ में विचारणीय है। - [शंकराचार्य का कथन 100% सही है - लेकिन राम लला की प्राण प्रतिष्ठा भी गलत नहीं है।](https://karmkandvidhi.in/ramlala-ki-pranpratishtha-shankarachary/): कर्मकांड विधि का इस आलेख में मात्र इतना उद्देश्य है कि देशभर के श्रद्धालु रामभक्तों के मन में जो संशय उत्पन्न करने का प्रयास किया जा रहा है उसका निस्तारण हो सके। प्रलाप करने वालों के लिये समय नष्ट करना भी अनावश्यक है। प्रलाप करने वालों के लिये गोस्वामी तुलसीदास की सर्वोत्तम चौपाई जो उन्हें सचेत करती है वह है : संकर सहस विष्णु अज तोहिं । सकहिं न राखि राम कर द्रोही॥ - [फलाधिवास विधि - प्राण प्रतिष्ठा विधि](https://karmkandvidhi.in/faladhiwas/): संकल्प मंत्र : ॐ अद्यादि ……………………… प्रतिष्ठाङ्गगत्वेन प्रतिमासंशुद्ध्यर्थं ममगृहे प्रचुरधान्यपुत्र-पौत्रादिसुखसम्पत्यादि अभिवृद्धयर्थं फलाधिवासं करिष्ये ॥ - [राम लला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर - शंका और समाधान](https://karmkandvidhi.in/ramlala-pranpratishtha/): इस आलेख में सभी मुख्य प्रश्नों के उत्तर समाहित किया जा रहा है जिससे श्रद्धालुओं को संशय न रहे। इस विषय में उमाशंकर पांडेय (येन केन प्रकारेण शंकराचार्य) के द्वारा भी बहुत प्रलाप किये जा रहे हैं तो निश्चित रूप से उनकी चर्चा समाहित की जानी चाहिये। - [मुख्य न्यायाधीश कौन है - कर्मकाण्ड](https://karmkandvidhi.in/karmkand-ka-nyaymurti/): इस आलेख में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा से सबंधित विवादों ने जो नया आयाम लिया है कि न्यायालय में इसके लिये याचिका तक चली गयी तो शास्त्र-सम्मत विशेष महत्वपूर्ण विमर्श किया जायेगा। शंकराचार्यों से सम्बन्धित चर्चा करना नहीं चाहता था किन्तु पुनः करने की आवश्यकता है। इस आलेख से कर्मकांड में आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं को भी विशेष महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी। - [यज्ञ मंडप पूजन विधि](https://karmkandvidhi.in/yagya-mandap-pujan/): यज्ञ-प्राणप्रतिष्ठा आदि में मंडप पूजन की विशेष विधि बताई गयी है। यहाँ आपकी सुविधा के लिये सम्पूर्ण मंडप पूजन विधि उपलब्ध किया गया है। - [पुष्पाधिवास विधि - प्राण प्रतिष्ठा विधि](https://karmkandvidhi.in/pushpadhiwas/): संकल्प मंत्र : ॐ अद्यादि ……………………… प्रतिष्ठाङ्गगत्वेन प्रतिमासंशुद्ध्यर्थं ममगृहे प्रचुरधान्यपुत्र-पौत्रादिसुखसम्पत्यादि अभिवृद्धयर्थं पुष्पाधिवासं करिष्ये ॥ - [प्राण प्रतिष्ठा में शीशा टूटना - क्या चमत्कार है ? शास्त्र क्या कहता है ?](https://karmkandvidhi.in/sisa-tutna/): प्राण प्रतिष्ठा विधि में एक क्रिया नेत्रोन्मीलन है। नेत्रोन्मीलन में एक परंपरा चल पड़ी है देवता के सामने शीशा/कांच रखने की और टूटने की। वैदिक विधि से प्राण प्रतिष्ठा में इसका क्या महत्व है हम इसे समझने का प्रयास करेंगे। - [सनातन धर्म और इस्लाम में सबसे बड़ा अंतर क्या है ?](https://karmkandvidhi.in/sanatan-aur-islam/): यहाँ सनातन धर्म और इस्लाम पंथ के दो ऐसे ऐतिहासिक उदाहरण को प्रस्तुत किया गया है जिसके द्वारा बिना कुछ कहे भी सनातन धर्म और इस्लाम पंथ का अंतर भलीभांति समझा जा सकता है। - [सनातन धर्म और इस्लाम में क्या अंतर है ?](https://karmkandvidhi.in/sanatan-dharm-aur-islam/): इस आलेख में हम चर्चा करेंगे की सनातन धर्म और इस्लाम में मुख्य अंतर क्या है। दोनों के बीच बहुत सारे बाह्य अंतर भी हैं लेकिन मुख्य अंतर जो कि आंतरिक है, विचार या सोच का है हम उसे ऐतिहासिक उदहारण से समझने का प्रयास करेंगे। - [शय्याधिवास - प्राण प्रतिष्ठा विधि](https://karmkandvidhi.in/shyyadhiwas/): धान्याधिवास के उपरांत क्रमशः जो भी अन्य अधिवास करना हो करके स्नपन करे। स्नपन के बाद पुरुष सुक्तादि से स्तुति करे। सजाया हुआ रथ तैयार करे इन मंत्रों से प्रतिमाओं को उठाये : - [बाबरी विध्वंस कांड - अयोध्या का राम मंदिर](https://karmkandvidhi.in/babari-vidhwans/): सर्वप्रथम बाबरी विध्वंस का सही तात्पर्य समझना होगा। अभी तक जो तात्पर्य समझा-समझाया जाता है वह है बाबरी ढांचे का गिरना। लेकिन यह अर्थ सही नहीं लगता है। - [राम मंदिर किसने बनवाया था ? आप कौन हैं - मोदी ?](https://karmkandvidhi.in/ram-mandir-kisane-banvaya-tha/): श्री अयोध्या पुरी को शकों ने उजाड़ दिया था। अन्य मंदिरों के साथ-साथ श्री राम का प्राचीन मंदिर भी विध्वंस कर दिया था और विध्वंस ऐसा था कि उस स्थान का पता करना भी असंभव कार्य था। - [हिंदुस्तानी योद्धा - पंडित देवीदीन पांडे, इतिहास में पूर्वाग्रह के कारण जिसे छुपाया गया](https://karmkandvidhi.in/devideen-pandey/): पंडित देवीदीन पांडे एक शूरवीर ब्राह्मण थे, जिन्होंने मुग़ल सेना के विरुद्ध रणभूमि में वीरगति प्राप्त किया था। उनकी वीरता का इतिहास गोपनीय रहा पर उन्होंने भारतीय धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए अपना जीवन न्योछावर किया। उनका और राम मंदिर के नाम सदैव जुड़ा रहेगा। - [नारायण सूक्त अर्थ सहित - शुक्ल यजुर्वेदोक्त](https://karmkandvidhi.in/narayan-sukta/): नारायण सूक्त में ब्रह्मज्ञान विषयक गूढ़ार्थ सन्निहित है। इसे पुरुष सूक्त का परभाग भी कहा जा सकता है। यह ब्रह्म ज्ञान के महत्व को भी बताता है। देवता ब्रह्मज्ञानियों के वश में होते हैं इसमें ऐसा भी बताया गया है। इसमें परमात्मा के विषय में यह बताया गया है की वह सर्वव्यापी तो है ही अर्थात उसे बाहर भी देखा जा सकता है किन्तु वह सबके भीतर भी है और उसे भीतर भी पाया या जाना जा सकता है। इसमें यह भी बताया गया है कि परमात्मा को जाने बिना कल्याण अर्थात मोक्ष का कोई अन्य उपाय नहीं है। - [पुरुष सूक्तं - सामवेदीय](https://karmkandvidhi.in/purushsukta-samved/): प्रायः ऐसा देखा जाता है कि सामवेदीय सूक्तों के पाठ क्रम में शुक्ल यजुर्वेदी मात्र ᳪ (ग्गूं) का उच्चारण अनुस्वार कर देते हैं। परन्तु बात इतनी नहीं है; सामवेदीय सूक्तों में अन्य परिवर्तन भी होते हैं जो यहाँ दिये गये सामवेदीय पुरुष सूक्त से स्पष्ट हो जाता है। - [राम लला की प्राण प्रतिष्ठा में पुरी शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती को क्या दर्द है](https://karmkandvidhi.in/shankrachary-ka-dard/): शंकराचार्य ज्ञान पक्ष में होते हैं। कर्मकांड में शंकराचार्य की भूमिका नगण्य होती है अथवा बिल्कुल ही नहीं होती। राम लला की प्राण प्रतिष्ठा में विरोधियों को बड़ा अच्छा प्रश्रय मिल रहा है और वह है शंकराचार्यों के वक्तव्य। लेकिन शंकराचार्यों के वक्तव्य में कुछ प्रच्छन्न पीड़ा भी है जो पूर्व से है। जहां तक प्राण प्रतिष्ठा संबंधी विहित-निषिद्ध, उचित-अनुचित आदि वाली बातें हैं उसके लिये शंकराचार्य का कोई दायित्व ही नहीं है यदि उपस्थित न हों । - [पुरुष सूक्तं - कृष्ण यजुर्वेदीय](https://karmkandvidhi.in/krishnvediy-purushsuktm/): जहां शुक्लयजुर्वेद के पुरुषसूक्त में १६ ऋचायें मिलती है वहीं कृष्ण यजुर्वेद में १८ ऋचायें प्राप्त होती हैं। कृष्ण यजुर्वेदियों को कृष्णयजुर्वेद के मंत्रों का ही उपयोग करना चाहिये। सर्वत्र शुक्ल यजुर्वेद की ऋचायें इसलिये उपलब्ध होती है क्योंकि अधिकांश लोग शुक्ल यजुर्वेद के ही माध्यन्दिन शाखा का पालन करने वाले हैं। किन्तु अन्य वेदों व शाखा वाले लोग भी हैं। सबको अपने वेद व शाखा का ही पालन करना श्रेयस्कर कहा गया है। - [पितृ सूक्त](https://karmkandvidhi.in/pitri-sukt/): जिस तरह से विभिन्न देवताओं के सूक्त होते हैं उसी तरह पितरों के लिये भी विभिन्न वेदों में सूक्त हैं जिसे पितृसूक्त कहा जाता है। जिसमें से अन्य सभी सूक्तों की तरह ही शुक्ल यजुर्वेदोक्त पितृसूक्त ही मुख्य रूप से प्रयुक्त होता है। - [सरल रुद्राष्टाध्यायी - रुद्री पाठ संस्कृत : 8 Rudri](https://karmkandvidhi.in/rudrashtadhyayi/): सरल रुद्राष्टाध्यायी - रुद्री पाठ संस्कृत : यहां संपूर्ण रुद्राष्टाध्यायी सरल करके प्रस्तुत किया गया है। लेकिन प्रायः ऐसा देखा गया है कि सरल करने के क्रम में विसंगतियां या असंगतियां उत्पन्न हो जाती है। यहां सरल पाठ के साथ-साथ त्रुटियों को दूर करके सर्वाधिक शुद्ध पाठ देने का प्रयास किया गया है, जिस कारण रुद्राभिषेक में यह विशेष उपयोगी हो जाता है। इसके साथ ही एक और महत्वपूर्ण समस्या को दूर करने का भी प्रयास किया गया है। प्रायः मंत्रों के बीच में भी विज्ञापन आते हैं यहां इसका भी निवारण किया गया है। - [सर्प सूक्त स्तोत्र](https://karmkandvidhi.in/sarp-sukt/): इस लेख में हम सर्प सूक्त के बारे में जानेंगे साथ ही शुद्ध सर्पसूक्त भी देखेंगे। सर्पों के लिये जो स्तुति हो उसे सर्प सूक्त कहते हैं। सर्प सूक्त पाठ करने के कई लाभ भी होते हैं। - [श्री सूक्त संस्कृत पाठ - सस्वर संपूर्ण](https://karmkandvidhi.in/shri-suktam/): ऋग्वेद के पांचवें मंडल के अंत में माता लक्ष्मी का श्री सूक्त के १६ मंत्रों से होम किया जाता है। यहाँ सस्वर और स्वररहित दोनों प्रकार से श्री सूक्त दिया गया है। इससे धन, संपत्ति, ऐश्वर्य की वृद्धि होती है और दुःख-दरिद्रता का नाश होता है। - [रुद्र सूक्त - Rudra Suktam pdf, रुद्र सूक्त के लाभ](https://karmkandvidhi.in/rudra-suktam/): यह आलेख शुक्ल यजुर्वेद के रुद्रसूक्त का महत्वपूर्ण वर्णन करता है। यह पूजा और हवन के लिए उपयुक्त है और दुःख, पाप, ताप का नाश करता है। इसमें रुद्र की स्तुति की गई है और इससे विशेष लाभ होता है। "शुक्ल यजुर्वेद अध्याय १६" के पीडीऍफ़ डाउनलोड के लिए भी लिंक दिया गया है। - [मैत्र सूक्त अर्थात सूर्य सूक्त](https://karmkandvidhi.in/maitr-sukat/): -मित्र भगवान सूर्य का नाम है, और भगवान सूर्य के सूक्त का नाम ही मैत्रसूक्त है। -भगवान सूर्य की स्तुतियों वाली वैदिक ऋचाओं का समूह मैत्र सूक्त कहलाता है। -रुद्राष्टाध्यायी का चतुर्थ अध्याय ही मैत्र सूक्त है। -मैत्रसूक्त भी विशेष महत्वपूर्ण सूक्त है और इसलिए इसे भी रुद्राष्टाध्यायी में संग्रहित किया गया है। - [अप्रतिरथ सूक्त - Apratirath Suktam](https://karmkandvidhi.in/apratirath-sukat/): यजुर्वेद के सत्रहवें अध्याय में ऋचा ३३ से लेकर ४९ तक जो १७ ऋचायें हैं वो इंद्र की विशेष स्तुति है। इंद्र की स्तुति वाली इस ऋचा का नाम अप्रतिरथ सूक्त है। अर्थात वेद में मिलने वाला इंद्र स्तोत्र अप्रतिरथ सूक्त ही है। रुद्राष्टाध्यायी में तीसरा अध्याय अप्रतिरथ सूक्त ही है। - [पुरुषसूक्त - Purush Shuktam - 1](https://karmkandvidhi.in/purushasukta/): वेदों में वर्णित पुरुषसूक्त विशेष महत्वपूर्ण सूक्त है। पुरुषसूक्त के मंत्रों से सभी देवताओं की षोडशोपचार पूजा की जाती है। विष्णु यज्ञ, महा विष्णु यज्ञ, अतिविष्णु यज्ञों में पुरुष सूक्त के मंत्रों द्वारा ही आहुति दी जाती है। - [पवमान सूक्त - यजुर्वेदोक्त, विभिन्न यज्ञ, पूजा, पाठ आदि कर्मकांड के लिये विशेष महत्वपूर्ण सूक्त](https://karmkandvidhi.in/pawman-sukt/): पवमान सूक्त यज्ञ में महत्वपूर्ण है। यह सामग्री को पवित्र करता है और जल प्रोक्षण में उपयोग होता है। ऋग्वेद में इसका वर्णन है। इसमें देवों की पूजा और अनुष्ठान का विवरण है। - [रक्षोघ्न सूक्त - ऋग्वेदोक्त, यजुर्वेदोक्त - रक्षोघ्न मंत्र](https://karmkandvidhi.in/rakshoghn-sukt/): रक्षोघ्न सूक्त यजुर्वेद, ऋग्वेद, और अथर्ववेद में पाया जाता है और यज्ञ-पूजा में इसका प्रमुख उपयोग होता है। श्राद्ध में भी इसका पाठ किया जाता है, लेकिन यह पूजा-यज्ञ-अनुष्ठानों में भी होता है। इसे पितरों का मंत्र मानना एक भ्रम है। - [धान्याधिवास - प्राण प्रतिष्ठा विधि](https://karmkandvidhi.in/dhanyadhiwas/): किसी भी प्रतिमा में देवता की प्राण प्रतिष्ठा करने से प्रतिमा को कई प्रकार की वस्तुओं में अधिवास कराया जाता है जिनमें से तीन प्रमुख अधिवास माने गये हैं : १. जलाधिवास, २. धान्याधिवास और ३. शय्याधिवास - [जलाधिवास - जलाधिवास क्या होता है ? जलाधिवास मंत्र क्या है ?](https://karmkandvidhi.in/jaladhiwas/): "जलाधिवास" आलेख में प्राण-प्रतिष्ठा का महत्वपूर्ण अंग जलाधिवास के विषय में चर्चा करते हुए विधि और मंत्र बताया गया है। जलाधिवास का तात्पर्य शास्त्रीय विधि से एक निर्धारित समय तक जल में वास करना है। इससे प्राण प्रतिष्ठा करने की क्षमता बढ़ती है और दाहत्व का निवारण होता है। जलाधिवास करने की विधि में पूजा, मंत्र और संस्कारों का वर्णन किया गया है। - [अग्न्युत्तारण विधि - प्राण प्रतिष्ठा](https://karmkandvidhi.in/agnyuttaran/): प्रतिमा की प्राणप्रतिष्ठा से पहले अग्न्युत्तारण संस्कार किया जाता है। इस लेख में अग्न्युत्तारण मंत्र दिया गया है जो प्राण प्रतिष्ठा के लिए उपयोगी हैं। अग्न्युत्तारण के महत्वपूर्ण बिंदु और विधि तत्व बताए गए हैं। मंत्र पाठ और आहुति द्वारा इसे पूर्ण करने के लिए विस्तृत जानकारी दी गई है। - [वास्तु शांति पूजा विधि - गृह वास्तु, मंडपांग वास्तु](https://karmkandvidhi.in/vastu-shanti/): वास्तु शांति पूजा विधि - गृह वास्तु, मंडपांग वास्तु ~ यदि नया घर बनाया गया हो तो वास्तु शांति की विधि सर्वविदित है। यदि पुराना घर हो तो भी वास्तु शांति अपेक्षित होती है। यदि पुराने घर के ऊपर या बगल में नया घर बनाया जाता है तो उसमें भी मुख्य रूप से वास्तु शांति ही कर्तव्य होता है। - [जलयात्रा विधान - शास्त्रोक्त विधि के अनुसार](https://karmkandvidhi.in/jalyatra-vidhan/): जल यात्रा, धार्मिक आयोजन के रूप में सूचीत की जाती है। इसमें कुमारी कन्याओं और सौभाग्यवती स्त्रियों के साथ नदी या जलाशय से जल ग्रहण करके यात्रा करते हुए देवी-देवताओं के पूजन का कार्य होता है। इसके लिए शास्त्रों की विधि का पालन किया जाता है। यह एक पवित्र तीर्थ यात्रा के रूप में मानी जाती है। - [प्राण प्रतिष्ठा विधि - विधि-विधान की सम्पूर्ण जानकारी](https://karmkandvidhi.in/pran-pratishtha-vidhi/): इस आलेख में सर्व देव प्राण प्रतिष्ठा विधि की विस्तृत जानकारी दी गयी है। मातृकादि पूजन पूर्वक आरंभ, संकल्प मंत्र, जलयात्रा, नेत्रोन्मीलन, अग्न्युत्तारण, जलाधिवास, धान्याधिवास, शय्याधिवास, वेदी पूजन, हवन आदि सभी विषयों की विस्तृत विधि का वर्णन करते हुये सबके लिंक भी दिये गये हैं। - [राम लला की प्राण प्रतिष्ठा और शास्त्र विधि व राजनीतिक प्रदर्शन, शंकराचार्य और मोदी](https://karmkandvidhi.in/ram-lala-ki-pran-pratishtha/): राम लला की प्राण प्रतिष्ठा में नया विवाद है, जिसमें शंकराचार्य का अनपेक्षित विडिओ सामने आया है। राम मंदिर निर्माण में राजनीतिक होने के साथ प्राण प्रतिष्ठा का धार्मिक महत्व भी है। इस प्रकार के कर्म में शास्त्रीय मर्यादा का पालन अत्यंत आवश्यक है। पर्षद की अहमियत और अनुचित आमंत्रण के विषय में विचार करना चाहिए। - [राम मंदिर में घोटाले का खुलासा - आखिर कैसे हुआ घोटाला ?](https://karmkandvidhi.in/ram-mandir-me-ghotala/): आज मन्दिर निर्माण घोटाले की सच्चाई जानने के लिए, हमें सारे तथ्यों को समझने की आवश्यकता है। आरोप और आरोपियों के बारे में सच्चाई से पहले हमें समझना चाहिए। यह निश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि क्या गलती हुई है और कैसे हुई है। - [सरस्वती चालीसा](https://karmkandvidhi.in/saraswati-chalisa/): जो संस्कृत स्तोत्र आदि का पाठ न कर सकें उनके लिये चालीसा पाठ करना सरल और लाभकारी भी होता है। यहाँ सरस्वती चालीसा हिंदी में लिखा हुआ दिया जा रहा है जिसे पाठ करके माता सरस्वती की कृपा प्राप्त की जा सकती है। सरस्वती चालीसा आरती हिन्दी में दोनों दिया गया है। - [सिद्ध सरस्वती स्तोत्र](https://karmkandvidhi.in/siddh-saraswati-stotra/): विद्यार्थियों के लिये विद्या प्राप्ति हेतु एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है सिद्ध सरस्वती स्तोत्र। सिद्ध सरस्वती स्तोत्र श्री सनत्कुमान संहिता में वर्णित है। भक्तिभाव से जो मनुष्य (विद्यार्थी) प्रतिदिन उषाकाल में सिद्ध सरस्वती स्तोत्र का पाठ करता है उसे वाणी का वैभव प्राप्त होता है, वाक्पटु और मुक्तकंठ हो जाता है। - [सरस्वती पूजा विधि मंत्र सहित ~ Saraswati Puja Vidhi](https://karmkandvidhi.in/sraswati-puja-vidhi/): सरस्वती पूजा विधि मंत्र सहित ~ Saraswati Puja Vidhi : इस लेख में, हम आपको माता सरस्वती की पूजा विधि और मंत्रों के बारे में बताएँगे। विद्या की देवी सरस्वती की पूजा के दिन मंदिर, मंडप, विद्यालय में पूजा की जाती है और जहाँ भी विशेष पूजा हो, वहां लक्ष्मी और गणेश की प्रतिमा भी स्थापित की जाती है। - [22 या 23 जनवरी? जानें 2026 में सरस्वती पूजा की सही तिथि और सटीक शुभ मुहूर्त।](https://karmkandvidhi.in/saraswati-puja-kab-hai/): 22 या 23 जनवरी? जानें 2026 में सरस्वती पूजा की सही तिथि और सटीक शुभ मुहूर्त : जानें बसंत पंचमी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और शास्त्रीय महत्व। माँ सरस्वती की कृपा पाने के लिए राशि अनुसार उपाय और विशेष मंत्रों की पूरी जानकारी यहाँ विस्तार से दी गई है। - [वारवेला क्या है ? काल वेला का अर्थ, - अर्द्ध प्रहर विचार .](https://karmkandvidhi.in/adhpahra/): अर्द्धप्रहर क्या है, कालवेला क्या है, वारवेला क्या है, कालरात्रि क्या है, अर्द्धप्रहर कैसे ज्ञात करते हैं इत्यादि विषय इस आलेख में समाहित किये गये हैं। - [भद्रा क्या है ? भद्रा कैसे देखते हैं - भद्रा वास विचार](https://karmkandvidhi.in/bhadra-vichar/): भद्रा के तीनों परिहार दो कार्यों का त्याग करके ही किया जाता है। परिहार का विचार रक्षाबंधन और होलिका दहन में नहीं किया जा सकता। होलिका दहन रात्रि में ही किया जाना होता है अतः यदि भद्रारहित काल न मिले तो होलिका में भी पुच्छ भाग वाला परिहार ग्राह्य होता है। - [शिववास विचार - शिव वास देखने का नियम , फल और परिहार।](https://karmkandvidhi.in/shivwas/): मुख्य रूप से जब शिव का प्रथम आवाहन करना होता है तब शिववास का विचार करना आवश्यक होता है तथापि बहुत विद्वान रुद्राभिषेक के लिये भी शिववास विचार करने का मत व्यक्त करते हैं। - [नामकरण कैसे करें ? नामकरण संस्कार](https://karmkandvidhi.in/namkaran-sanskar/): सूतिका को पंचगव्य प्राशन करा दे। फिर पूर्व बताई विधि के अनुसार बालक को लेकर सूतिका पूजा स्थान पर आये। बालक को गोद में ली हुई माता अग्नि की प्रदक्षिणा करके संस्कारकर्ता के बांयी ओर बैठे । आचमन करके पूजित देवताओं का स्मरण करके पुष्पांजलि दे। फिर आचार्य अथवा बालक का पिता स्वर्ण शलाका से अष्टगंधादि द्रव्य का द्वारा पीपल के पांच पत्ते या श्वेत वस्त्र पर बच्चे के लिये निर्धारित पंचनाम लिखे। फिर पंचनामों को तण्डुलपूर्ण पात्र में रखकर अक्षत-पुष्पादि लेकर उसकी प्रतिष्ठा करे : - [बिना पंडित के हवन कैसे करें](https://karmkandvidhi.in/havan-karana-sikhen/): हवन का जो सबसे महत्वपूर्ण तथ्य वो यह है कि मात्र एक हवन जिसे नित्य होम कहा जाता है और नित्य होम करने वाले को अग्निहोत्री कहा जाता है, उस नित्य होम को छोड़कर अन्य कोई भी हवन बिना ब्राह्मण के नहीं हो सकता। - [अग्नि वास चार्ट 2024](https://karmkandvidhi.in/agnivas-2024/): यहां अग्नि वास चार्ट 2024 दिया जा रहा है जिसके द्वारा बिना किसी गणितीय क्रिया के अग्निवास की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। यह हवन करने वालों के लिये बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकता है। साथ ही यदि आप सभी महीनों के अग्नि वास चार्ट 2024 pdf फाइल डाउनलोड करना चाहें तो डाउनलोड भी कर सकते हैं। - [अग्निवास विचार - Agnivas Vichar](https://karmkandvidhi.in/agnivas/): अग्निवास (agnivas) का मतलब है की कर्मकांड के परिप्रेक्ष्य में सूक्ष्म रूप से अग्नि पृथ्वी, पाताल और आकाश में वास किया करते हैं, जिसका निर्धारण विशेष ज्योतिषीय गणना द्वारा किया जाता है। अग्नि जब भूमिवास में हों तभी हवन करना चाहिये। - [भूमि पूजन मुहूर्त 2024 - गृहारम्भ मुहूर्त](https://karmkandvidhi.in/griharambh-2024/): जब भी घर का निर्माण करना होता है तो निर्माण से पूर्व अनेकानेक विचार करके फिर गृहारंभ का मुहूर्त बनाया जाता है। मुहूर्त निर्धारण तो पंचांगकर्ता ज्योतिर्विद ही किया करते हैं और पंचांगों में अंकित करते हैं। - [संपूर्ण पुण्याहवाचन विधि](https://karmkandvidhi.in/punyahwachan/): पुण्याहवाचन विधि : प्रत्येक विशेष पूजा-अनुष्ठान, मंगलकार्य आदि में पुण्याहवाचन का विशेष विधान किया गया है। ब्राह्मणों ईश्वर का मुख बताया गया है और ब्राह्मण के वचन का विशेष महत्व होता है। ब्राह्मण के वचन के ही व्रत-पूजा आदि की पूर्णता भी होती है। इसी क्रम में कल्याण कामना हेतु ब्राह्मणों से कल्याणकारी वचन प्राप्त करना पुण्याहवाचन कहलाता है। - [नववधू गृह प्रवेश - अर्थात वधूप्रवेश की शास्त्रीय विधि क्या है ?](https://karmkandvidhi.in/vadhupravesh-vidhi/): जब किसी नये वर-वधू का विवाह होता है तो विवाहोपरांत वधू विदा होती है और वर के घर जाती है। वर के घर में जब वधू प्रथम बार प्रवेश करती है तो उसे वधू प्रवेश कहा जाता है। वधू प्रवेश के लिये भी मुहूर्त का विधान है तथापि विवाह से 16 दिनों तक वधूप्रवेश हेतु मुहूर्त बनाने की आवश्यकता नहीं होती है। - [भूमि पूजन किस दिशा में करें - खात की दिशा कैसे ज्ञात करें ?](https://karmkandvidhi.in/bhumipujan-ki-disha/): भूमि पूजन किस दिशा में करें - खात की दिशा कैसे ज्ञात करें : फाल्गुन, चैत्र, वैशाख - वायव्य कोण ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण - नैऋत्यकोण भाद्र, आश्विन, कार्तिक - अग्निकोण और मार्ग, पौष, माघ - ईशानकोण में खात को प्रशस्त बताया जाता है। - [बिना पंडित के गृह प्रवेश कैसे करें ?](https://karmkandvidhi.in/grihapravesh-kaise-karen/): अन्य किसी विधि-व्यवस्था में अपेक्षित व्यक्ति के बिना करने की चर्चा नहीं की जाती है किन्तु सनातन में लगभग सभी कर्मकांड बिना पंडित के करने के लिये प्रेरित किया जा रहा है। नाना प्रकार के आलेख-विडियो आदि माध्यमों से उत्प्रेरित करते हुये ऐसा प्रयास किया जाता है कि कर्मकांड बिना पंडित कैसे कैसे किया जा सकता है - [गृह प्रवेश मुहूर्त 2024](https://karmkandvidhi.in/grihpravesh-muhurt/): 2024 में गृहप्रवेश की अत्यल्प मुहूर्त है। उसमें भी अधिकतर प्रातःकालीन अथवा दोपहर तक ही है जिसमें वास्तु शांति कर्म सविधि संभव नहीं है। - [गृह प्रवेश के नियम - गृह प्रवेश पूजा विधि की 21 महत्वपूर्ण बातें](https://karmkandvidhi.in/grihapravesh-ke-niyam/): गृह प्रवेश के नियम - गृह प्रवेश पूजा विधि की 21 महत्वपूर्ण बातें : इसके साथ ही गृहप्रवेश के संबंध में भी कई महत्वपूर्ण बातें होती हैं जो सामान्य जन नहीं जान पाते। यहां गृहप्रवेश से संबंधित 21 महत्वपूर्ण बातें बताई गयी है जो गृहप्रवेश करने से पहले जानना आवश्यक होता है। - [गृह प्रवेश पूजा विधि - Grihpravesh vidhi](https://karmkandvidhi.in/grihapravesh-vidhi/): गृह प्रवेश पूजा विधि - Grihpravesh vidhi :गृहप्रवेश की संपूर्ण विधि एवं मंत्रों का इस आलेख में वर्णन किया गया है एवं गृहप्रवेश से संबंधित कई महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर भी दिये गये हैं। इस आलेख में गृह प्रवेश करने की संपूर्ण पूजा और विधि समाहित की गयी है साथ इसे डाउनलोड करके अधिक सुविधा पाने के लिये गृह प्रवेश पद्धति pdf file भी अंत में दिया गया है। जो विषय (लेख/विधि) पूर्व प्रकाशित है वह नीले रंग में रेखांकित किया गया है जिसमें उसका लिंक समाहित है और अनुगमन को आसान करता है। - [गृह प्रवेश पूजा सामग्री - Grihapravesh Samagri](https://karmkandvidhi.in/grihapravesh-samagri/): गृह प्रवेश पूजा सामग्री : सामान्यतया व्यवहार में गृहप्रवेश करने के बाद पूजा आदि करते हुये देखा जाता है। किन्तु यहां ऐसा माना गया है कि गृह प्रवेश के लिये शास्त्रानुसार एक मंडप निर्माण करके पूजा आदि किया जाना चाहिये और उसी के अनुसार सामग्री का विचार किया गया है। - [भूमि पूजन विधि - गृहारंभ विधि पूजन मंत्र सहित](https://karmkandvidhi.in/griharambh-vidhi/): भूमि पूजन विधि - गृहारंभ विधि पूजन मंत्र सहित : जब किसी नये घर का निर्माण आरंभ करते हैं तो उसके लिये जो पूजा की जाती है उसे गृहारंभ या भूमि पूजन कहा जाता है। गृहारंभ का सर्वप्रथम शुभ मुहूर्त बनवाया जाता है तत्पश्चात गृहारंभ सामग्रियां व्यवस्थित की जाती है फिर शुभ मुहूर्त में भूमि-वास्तु आदि पूजन करके गृहारंभ किया जाता है। - [भूमि पूजन सामग्री अर्थात गृहारंभ पूजन सामग्री](https://karmkandvidhi.in/bhumi-pujan-samagri/): भूमि पूजन सामग्री अर्थात गृहारंभ पूजन सामग्री : आवास गृहस्थों की अनिवार्य आवश्यकता है। पैतृक आवास कितना भी सुदृढ़ हो उसमें दो पीढ़ी का निवास करना भी असंभव सा ही होता है। घर बनाने से पूर्व गृहारंभ की विशेष विधि बताई गयी है। इस आलेख में गृहारंभ सामग्रियों की सूची दी गई है। - [संध्या तर्पण विधि](https://karmkandvidhi.in/sandhya-tarpan/): संध्या तर्पण विधि : शारीरिक शुद्धि अर्थात शुचिता के बाद नित्यकर्म में संध्या, तर्पण, पंचदेवता व विष्णु पूजन का क्रम आता है। संध्या तो त्रैकालिक होती है अर्थात प्रातः, मध्यान और सायाह्न तीनों कालों में करणीय है, किन्तु तर्पण व पंचदेवता विष्णु पूजन प्रातः का ही नित्यकर्म है ये दोनों त्रैकालिक नहीं हैं। - [नित्यकर्म विधि - भाग ३, शुचिता](https://karmkandvidhi.in/shuchita/): यहाँ शुचिता के महत्त्व एवं विधान के विषय में जानकारी दी गई है। शरीर और आत्मा की शुद्धता बनाए रखने के लिए शौच, दन्तधावन, स्नान जैसे विधियों का पालन करना आवश्यक है। इसमें दिशा, वस्त्र-यज्ञोपवीत एवं स्नान के नियम तथा महत्वपूर्ण विधियाँ सम्मिलित हैं। इससे स्पष्ट होता है कि शुचिता का पालन करना शारीरिक और आत्मिक शुद्धता के लिए कितना महत्वपूर्ण है। - [क्या आप ये प्रातः स्मरण मंत्र जानते हैं ? प्रातः वंदना करने की पूरी विधि](https://karmkandvidhi.in/nityakarm/): प्रातः स्मरण मंत्र - प्रातः वंदना : यह पोस्ट ब्रह्ममुहूर्त में उठने, अपना स्वर जाँचने, करदर्शन, पृथ्वी से क्षमा और गण्डूष के नियम जैसी प्रातः कृत्यों की महत्ता पर बात करता है। इसमें वर्णित है कि ब्रह्ममुहूर्त रात्रि का चौथा पहर होता है और इसका काल सूर्योदय से 3 घंटे पहले शुरू होता है और ३६ मिनट पहले समाप्त होता है। यह पोस्ट विशेषरूप से प्रातःरिति और धार्मिक अभ्यासों की प्रामाणिकता एवं महत्व को स्पष्ट करने में सहायक होती है। - [नित्य कर्म पूजा पद्धति मंत्र - Nitya Karm Puja](https://karmkandvidhi.in/nitya-karm/): नित्य कर्म पूजा पद्धति मंत्र - Nitya Karm Puja : यह लेख नित्यकर्म और उनके महत्व के बारे में है। यह बताता है कि नित्यकर्म मानव जीवन के दोषों को मार्जित करने और उत्तरदायित्वों को निभाने के लिए आवश्यक होते हैं। ऐसे कर्म, जो शास्त्रोक्त विधि के अनुसार प्रतिदिन किये जाते हैं, नित्यकर्म कहलाते हैं। ये न केवल सामान्य नित्यकर्म होते हैं, बल्कि मनुष्यत्व के सार्थकता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। - [राम भजन हिंदी में लिखित](https://karmkandvidhi.in/ram-ji-ke-bhajan/): Ram Bhajan - राम भजन हिंदी में लिखित भजन १. स्वर - दिल में फिर आज तेरी याद भजन २. स्वर - हुजूर आते आते बहुत देर कर दी भजन ३. स्वर - तेरी बेवफाई का शिकवा करूं तो - [रामार्चा पूजा विधि - संपूर्ण विधि](https://karmkandvidhi.in/ramarcha-puja/): रामार्चा पूजा विधि : रामार्चा राजसी पूजा है जिसमें एक मंडप की भी आवश्यकता होती है। जब कभी भी मंडप निर्माण किया जाता है तो मंडप स्थापना विधि पूर्वक ही करना चाहिये। इसके साथ ही रामार्चा में जिस प्रकार अधिक धन व्यय होता है उस प्रकार से ही सविधि हवन करना भी अनिवार्य समझा जाना चाहिये। सविधि हवन करने के लिये एक सुयोग्य आचार्य की आवश्यकता होती है। - [मंडप स्थापना - मंडप पूजन विधि | Mandap Sthapna](https://karmkandvidhi.in/mandap-sthapna/): मंडप स्थापना - मंडप पूजन विधि | Mandap Sthapna : मंडप, एक धार्मिक कार्यक्रमों के लिए अस्थायी पूजा स्थल होता है, जिसमें चारों ओर द्वार होते हैं और बांस, काश, मूंज की डोरी का इस्तेमाल होता है। श्राद्ध को छोड़कर बाकी सब मंडपों का स्थापना शुभ मुहूर्त में की जाती है। विवाह और उपनयन के मंडप में कम से कम पांच स्तंभ होने चाहिए, जबकि रामार्चा मंडप में कम से कम बारह स्तंभ होने चाहिए। - [रामार्चा पूजन सामग्री - Ramarcha Pujan Samagri](https://karmkandvidhi.in/ramarcha-pujan-samagri/): रामार्चा पूजन सामग्री - Ramarcha Pujan Samagri : रामार्चा पूजा भगवान श्रीराम की अराधना है, जिसमें भौतिक और आध्यात्मिक उन्नती मिलती है। इस पूजा की विधि विशेष और अन्य पूजाओं से अलग है। यह पूजा विशेष सामग्री के साथ की जाती है और इसमें छप्पन भोग और विशेष नैवेद्य भी शामिल होते हैं। रामार्चा पूजा के बारे में विस्तृत जानकारी, जैसे कि सामग्री की सूची, पूजा विधि और कथा, इस लेख में उपलब्ध है। - [दुर्गा आरती & माता के भजन हिन्दी में](https://karmkandvidhi.in/durga-bhajan/): दुर्गा आरती : इस सामग्री में माता दुर्गा के विभिन्न आरती और भजन मिलेंगे, जिनमें से कुछ चर्चित बॉलीवुड गीतों पर आधारित हैं। ये भजन माता की कृपा, करुणा और भक्ति की महिमा केंद्रित करते हैं। भजनों में विभिन्न समस्याओं का निवारण, कृपा प्राप्ति और दीर्घायु की कामनाएं व्यक्त होती हैं। इनमें विभिन्न भाषाओं में भजन भी शामिल हैं, जैसे कि हिन्दी और मैथिली। - [दुर्गा पूजा विधि मंत्र सहित](https://karmkandvidhi.in/durga-pujan/): दुर्गा पूजा विधि - ॐ अद्यैतस्य ब्रह्मणोह्नि द्वितीय परार्द्धे ......... सपरिवारस्योपस्थित शरीराविरोधेन महाभयाभावपूर्वक विपुलधन धान्य सुतान्विताऽतुल विभूति चतुर्वर्ग फलप्राप्तिपूर्वक सर्वाऽरिष्ट निवारणार्थं सकल मनोरथ सिद्ध्यर्थं श्रीदुर्गायाः प्रीत्यर्थं साङ्गसायुधसवाहन सपरिवारायाः भगवत्याः श्रीदुर्गादेव्याः पूजनमहं करिष्ये । - [दुर्गा पूजा सामग्री - durga puja samagri](https://karmkandvidhi.in/durga-puja-samagri/): दुर्गा पूजा सामग्री - durga puja samagri : यह सामग्री दुर्गा पूजा की पूजन विधि, सामग्री और महत्वपूर्ण तिथियों के बारे में जानकारी देती है। दुर्गा पूजा की सामग्री विशेष रूप से उल्लेखित की गयी है और उनकी सूची दी गयी है, जिसे डाउनलोड भी किया जा सकता है। यह विशेष रूप से नवरात्री और अक्षय नवमी आदि के दौरान दुर्गा पूजा के लिए है। - [श्राद्ध कर्म विधि मंत्र](https://karmkandvidhi.in/shraddh-vidhi/): आजकल कई ब्राह्मण श्राद्ध कर्म सीखना चाहते हैं, परन्तु कई बाधाएँ इसमें आती हैं। हमारी पुस्तक 'सुगम श्राद्ध विधि' इसमें मदद करती है, जिसका PDF डाउनलोड करने का विकल्प भी है। पुस्तक में विभिन्न श्राद्ध विधियों का वर्णन है। इसके अतिरिक्त, विभिन्न विषयों पर श्राद्ध सम्बंधी वीडियो भी उपलब्ध हैं। - [16 संस्कार क्या है ? सनातन धर्म के 16 संस्कार](https://karmkandvidhi.in/16-sanskar-kya-hai/): 16 संस्कार क्या है ? सनातन धर्म के 16 संस्कार : मनुष्य जन्म अत्यंत दुर्लभ होता है और यह पुण्योदय के परिणामस्वरूप प्राप्त होता है। मनुष्य शरीर की प्राप्ति का प्रमुख उद्देश्य मोक्ष प्राप्ति करना होता है। इसके लिए, हमें अपने पहले संचित दोषों को साफ करना होता है और नए सद्गुणों को स्थापित करना होता है, जिसे "संस्कार" कहा जाता है। सनातन या हिंदू धर्म में कुल 16 संस्कार बताए गए हैं, जो गर्भाधान से लेकर अंतिम संस्कार तक होते हैं और ये हमें मोक्ष प्राप्ति के योग्य बनाने में मदद करते हैं। - [व्यापार कैसे बढ़ाएं - रेस्टोरेंट (भोजनालय)](https://karmkandvidhi.in/vyapar-kaise-bahayen-restaurant/): यह आलेख भोजनालय व्यवसाय की वृद्धि के उपायों पर केंद्रित है, जिसमें ग्रहों के प्रसन्नता का महत्व बताया गया है। यदि किसी का व्यवसाय मिठाईयों आदि पर है, तो चंद्र ग्रह को प्रसन्न करना चाहिए, जबकि यदि नास्ते-भोजन आदि मुख्य वस्तु है, तो शुक्र ग्रह को प्रसन्न करना चाहिए। - [मेरे पास किराने की दुकान है, व्यापार वृद्धि के उपाय कौन से हैं](https://karmkandvidhi.in/mere-pas-kirane-ki-dukan/): यदि आपके पास विविध सामान बेचने की दुकान है, तो व्यापार वृद्धि के लिए बुद्ध ग्रह की उपासना सबसे सही है। व्यापार या कारोबार का कारक ग्रह बुद्ध है और ऐसी स्थिति में उसकी उपासना विशेष रूप से उपयुक्त है। बुद्ध यंत्र की स्थापना, मंत्र-स्तोत्र का जप व्यापार की उन्नति में सहायक साबित हो सकता है। - [खरमास कब से कब तक है ~ Kharmas](https://karmkandvidhi.in/kharmas-kab-se-kab-tak/): खरमास कब से कब तक है ~ Kharmas : जब सूर्य धनु और मीन राशि में होता है, उसे खरमास कहते हैं। इस दौरान सूर्य का तेज मंद हो जाता है और सभी प्रकार के मांगलिक कार्य निषिद्ध होते हैं। 2023 में खरमास 13 दिसम्बर से 14 जनवरी तक और 2024 में 14 मार्च से 13 अप्रैल और फिर 15 दिसम्बर 2024 से 14 जनवरी 2025 तक रहेगा। इस महीने में मांगलिक कार्यों के आयोजन का निषेध होता है। - [सत्यनारायण पूजा विधि मंत्र सहित - Satyanarayan Puja Vidhi](https://karmkandvidhi.in/satynarayan-puja-vidhi/): सत्यनारायण पूजा विधि मंत्र सहित - Satyanarayan Puja Vidhi : १. पवित्रीकरण मंत्र : ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थाङ्गतोऽपि वा। य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: बाह्याऽभंतर: शुचि:॥ ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु ॥ हाथ में गंगाजल/जल लेकर इस मंत्र से शरीर और सभी वस्तुओं पर छिड़के ।२. आसन पवित्रीकरण मंत्र : ॐ पृथ्वि त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुनाधृता। त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्॥ इस मंत्र से आसन पर जल छिड़क कर आसनशुद्धि करें। - [सत्यनारायण भगवान के भजन - भक्ति भजन हिंदी लिखित में](https://karmkandvidhi.in/satynarayan-ke-bhajan/): सत्यनारायण भगवान के भजन - भक्ति भजन हिंदी लिखित में : यह पोस्ट सत्यनारायण भगवान की आराधना के गानों, आरतियों और भजनों से संपन्न हैं, उनकी कहानियों और पूजा विधान के विषय में जानकारी प्रदान करते हैं। ये श्रद्धा और भगवान के प्रति अपनी समर्पण की भावना को व्यक्त करने का एक अद्वितीय माध्यम प्रस्तुत करते हैं। यह संपूर्ण पोस्ट भक्ति, विश्वास और भगवान के प्रति अद्वितीय प्रेम को उजागर करती है। - [सत्यनारायण पूजा सामग्री एवं नियम](https://karmkandvidhi.in/satynarayan-puja-samagri/): सत्यनारायण पूजा सामग्री : कलयुग में भगवान सत्यनारायण की पूजा का विशेष महत्व कहा गया है। सत्यनारायण पूजा को शीघ्र फल प्रदान करने वाला भी कहा गया है। भगवान विष्णु ने नारद को सत्यनारायण-व्रत-पूजा का महत्व बताते हुये स्वयं कहा है - सत्यनारायणस्येदं व्रतं सम्यग्विधानतः। कृत्वा सद्यः सुखं भुक्त्वा परत्र मोक्षमालभेत्।। - [कारोबार बढ़ाने के उपाय जो सबसे अधिक प्रभावशाली है](https://karmkandvidhi.in/karobar-bahane-ke-upay/): यह आलेख व्यापार वृद्धि के विभिन्न उपायों पर प्रकाश डालता है। इसमें बताया गया है कि कारोबार की वस्तु से संबंधित ग्रह को प्रसन्न करना कारोबार को बढ़ाने का प्रमुख उपाय है। ग्रहों के साथ जुड़ी विभिन्न वस्तुएँ, उनके मंत्र-रत्न, और उनसे मिलने वाले लाभ के विषय में चर्चा की गई है। यह आलेख व्यापारी के लिए श्रीदुर्गा सप्तशती के एक प्रभावशाली मंत्र का भी वर्णन करता है जो व्यापार वृद्धि में सहायता करता है। - [व्यापार बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए ? व्यापार बढ़ाने का सबसे बड़ा उपाय](https://karmkandvidhi.in/vyapar-badhane-k-liye/): इस पोस्ट में यदि किसी व्यापार की वृद्धि नहीं हो रही हो, तो उसके व्रद्धि के लिए उपायों पर विचार किया गया है। इसमें बताया गया है कि सेवाओं को बेहतर बनाने, ग्राहकों की आवश्यकताओं को समझने, व्यापार स्थल को स्वच्छ बनाए रखने, कर्तव्यनिष्ठा और आत्मनिरीक्षण के माध्यम से व्यापार की संभावनाएं बढ़ाई जा सकती हैं। सबसे महत्वपूर्ण उपाय के रूप में, अपने व्यापार के वस्तु के ग्रह को समझने और उसके प्रति सकारात्मक रवैया अपनाने का सुझाव दिया गया है। यहां कई तरह की वस्तुओं और उनके संबंधित ग्रहों, मंत्रों की चर - [मकर संक्रांति का महत्व और दान विधि - Makar Sankranti Significance](https://karmkandvidhi.in/makarsankrantidan/): मकर संक्रांति का महत्व और दान विधि - Makar Sankranti Significance : मकर संक्रांति का महत्व, दान विधि और शुभ मुहूर्त की संपूर्ण जानकारी प्राप्त करें। जानें सूर्य के उत्तरायण होने का धार्मिक व वैज्ञानिक कारण और संक्रांति पर तिल, खिचड़ी व वस्त्र दान के विशेष मंत्र और नियम। - [मकर संक्रांति कब है 14 या 15 को - Makar Sankranti](https://karmkandvidhi.in/makarsankranti2024/): मकर संक्रांति कब है 14 या 15 को - Makar Sankranti : मकर संक्रांति 2024 में 15 जनवरी; सोमवार को होगी। मकर संक्रांति हर बार 14 जनवरी को होता है; तो अब 15 जनवरी को क्यों होगा? इसका उत्तर यह है कि सूर्य मकर राशि में 14 जनवरी की आधी रात के बाद प्रविष्ट होंगे। पुण्यकाल का निर्धारण यह स्वीकार करता है कि सूर्य का निकटतम उदित होने का दिन ही प्रमाणिक होता है। मकर संक्रांति का अर्थ है सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना। सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो देवताओं का दिन आरम्भ होता है। मकर संक्रांति में किया गया स्नान-दान विशेष पुण्यदायक होता है। - [षोडशोपचार पूजन विधि मंत्र - क्या है ?](https://karmkandvidhi.in/16upcharpuja/): षोडशोपचार पूजन विधि में 16 उपचारों से पूजा की जाती है। पूजा की कई विधियां हैं जिनमें दो मुख्य हैं पञ्चोपचार एवं षोडशोपचार। प्रधान देवता की षोडशोपचार पूजा ही करनी चाहिये। षोडशोपचार पूजा में 16 उपचारों से; जो कि शास्त्रवर्णित है कम या हटकर नहीं होनी चाहिये। - [सरल पूजा विधि या दैनिक पूजा विधि](https://karmkandvidhi.in/saralpujavidhi/): सरल पूजा विधि या दैनिक पूजा विधि : सरल पूजा विधि वह होती है, जिसमें ब्राह्मणों और मंत्रों की आवश्यकता नहीं होती और उपलब्ध सामग्री से पूजा की जा सकती है। इसे दैनिक पूजा विधि भी कहा जाता है। स्थान की सफाई, पवित्र और धुले वस्त्रों में पूजा करना, और दैनिक पूजा एक निर्धारित समय और स्थान पर करना कुछ मूल नियम होते हैं। पूजा के समय आत्मा को संसार से उन्मुक्त करके, भगवान में लगाना चाहिए। दैनिक पूजा में सरलता एवं शास्त्रानुसार पञ्चोपचार पूजा विधि को माना जाता है, जहाँ चंदन, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य का ही उपयोग होता है। - [पूजा विधि मंत्र सहित - कर्मकांड सीखना](https://karmkandvidhi.in/pujavidhi/): कर्मकांड सीखना : यह भारतीय कर्मकांड की भौमिक को समझाने का प्रयास करता है। कर्मकांड का सीखना मिश्रित प्रक्रिया है जिसमें विभिन्न संस्कार, पूजन विधि, हवन विधि, और यज्ञ विधि शामिल हैं। एक कर्मकांडी बनने के लिए, सटीकता, इंद्रियों पर नियंत्रण, और सत्याग्रह की आवश्यकता होती है। यद्यपि ऑनलाइन साधारण कर्मकाण्ड उपयोगी मान गया है, लेकिन यह विशदीकरण के बिना शास्त्रीय कर्मकांड का प्रशिक्षण प्रदान करने में सक्षम नहीं होता है। वेबसाइट karmkandvidhi.com पर विस्तृत सामग्री उपलब्ध है जो कर्मकांड सीखने में सहायक हो सकती है। - [Dharm : धर्म क्या है ? दुनिया का सबसे पुराना धर्म कौन सा है ?](https://karmkandvidhi.in/dharmkyahai/): Dharm - धर्म क्या है ? दुनिया का सबसे पुराना धर्म कौन सा है - धर्म एक जटिल विषय है जिसे समझने के लिए शास्त्रों का सन्दर्भ लेना पडता है। धर्म की परिभाषा ही है - वास्तविकता की सत्य धारणा जो वेदों द्वारा प्रेरित कर्त्तव्यों का पालन और अकर्त्तव्यों का त्याग करवाती है। वेद-विहित कार्य, वेद निषिद्ध कार्य, कर्त्तव्य और अकर्त्तव्य, सभी शास्त्रीय सिद्धांतों का हिस्सा होते हैं। सनातन धर्म, जो अनादि और अनंत है, किसी विचारधारा के समूह को नहीं इंगित करता, बल्कि एक कोणतीय धनुष की तरह सत्य जीवन के मार्ग को दर्शाती है। धर्मपालन के बिना आत्मकल्याण असंभव है। धर्म एक - [सनातन धर्म की स्थापना किसने की ? कब कैसे और कहां ?](https://karmkandvidhi.in/sanatandharm/): सनातन धर्म की स्थापना किसने की - सनातन धर्म का अर्थ है वह धर्म जो अनादि काल से है और अनंत काल तक रहेगा। इसकी स्थापना का प्रश्न इतिहासकारों के लिए कठिन है, क्योंकि यह अत्यंत पुराना है। वैज्ञानिकों द्वारा पृथ्वी की उम्र करीब 2 अरब वर्ष मानी जाती है, जबकि सनातन धर्म सृष्टि के आरम्भ होने को करीब 1955885124 वर्ष पुराना बताता है। सनातन धर्म की स्थापना भगवान ने की और जब भी धर्म की हानि होती है, तभी भगवान मनुष्य रूप में अवतरित होकर उसकी पुनर्स्थापना करते हैं। - [छन्दोगी त्रिपिंडी श्राद्ध विधि - पितृदोष शांति के उपाय](https://karmkandvidhi.in/tripindi-shraddh-vidhi/): सभी प्रकार की प्रेतबाधा या पितृ दोष से मुक्ति होने के लिए त्रिपिण्डीश्राद्ध किया जाता है। सामान्यतः उपलब्ध सभी त्रिपिंडी श्राद्ध वाजसनेयी पद्धति हैं और छन्दोगी विधि अनुपलब्ध है। - [ब्रह्मसूक्तं - brahm suktam](https://karmkandvidhi.in/brahm-suktam/): ॐ तेजोऽसि शुक्रममृतमायुष्पाऽआयुर्मेपाहि । देवस्य त्वा सवितुः प्रसवेऽश्विनोर्बाहुभ्याम्पूष्णोहस्ताभ्यामाददे ॥१॥ इमामगृभ्णन्रशनामृतस्य पूर्व ऽआयुषिव्विदथेषुकव्या । सा नो ऽअस्मिन्सुत ऽआ बभूवऽऋतस्य सामन्त्सरमारपन्ती ॥२॥ - [त्रिपिंडी श्राद्ध pdf सहित - विधि और मंत्र, पितृदोष शांति के उपाय](https://karmkandvidhi.in/tripindi-shraddh/): जिन घरों में श्राद्ध सही विधि से नहीं किया जाता उनके पितर अतृप्त होकर कुपित हो जाते हैं। किसी भी प्रकार से यदि पितृ दोष ज्ञात हो तो त्रिपिंडी श्राद्ध करना चाहिये। जब प्रेत बाधा हो और किसी प्रकार से शांत न हो रही हो तो उस स्थिति में त्रिपिण्डी श्राद्ध करना चाहिये। - [श्राद्ध में क्या करना चाहिए - श्राद्ध की महत्वपूर्ण जानकारी](https://karmkandvidhi.in/shraddh-kaise-karen/): श्राद्ध के दिन किये जाने वाले कार्यों को तीन भागों में विभाजित करके बताया गया है जिससे समझने में आसान है। साथ ही साथ शास्त्रों के प्रमाण भी दिये गये हैं जिससे विश्वनीयता में भी वृद्धि हो सके। - [दान करने की विधि और मंत्र](https://karmkandvidhi.in/dan-vidhi/): दान करने की विधि और मंत्र : पूर्वाभिमुख तण्डुल पाकपात्र (चावल सहित) पर तीन बार इस मंत्र से पुष्पाक्षत छिड़के : ॐ सतण्डुल पैत्तल तण्डुल पाकपात्राय नमः नमः ॥३॥ ब्राह्मण के दाहिने पैर की पुष्पाक्षत से तीन बार पूजा करे : ॐ ब्राह्मणाय नमः ॥३॥ - [देश के सम्मान से जुड़े राम मंदिर में ऐसे निर्णय कौन लेते हैं](https://karmkandvidhi.in/pujari-ki-pagari/): राम मंदिर ऐतिहासिक मंदिर है जो देश के इतिहास और राष्ट्रसम्मान से जुड़ा हुआ है। इस कारण राम मंदिर में जो भी हो उसमें शास्त्रोक्त वचनों का अक्षरशः पालन किया जाना चाहिये। यदि उपस्थित निर्णेता शास्त्र से अनभिज्ञ हों तो उन्हें विद्वानों से परामर्श लेना चाहिये और फिर कोई निर्णय करना चाहिये। अभी कुछ नये नियम बनाये गये हैं जिसकी चर्चा यहां की गयी है। - [श्राद्ध सामग्री लिस्ट pdf सहित - shraddh samagri](https://karmkandvidhi.in/shraddh-samagri/): श्राद्ध सामग्री लिस्ट : उजला चन्दन - 1, उजला कपड़ा - आधा मीटर, कच्चा सूता - 1, जौ - 1 पुड़िया, तिल - 50 ग्राम, अरबा चावल - 1 किलो, दाल - 250 ग्राम, केराव (मटर) - 100 ग्राम, आलू - 250 ग्राम, हरी सब्जी - 250 ग्राम, कच्चा केला - 3, ओल - 100 ग्राम, पका केला - 3 - [पार्वण श्राद्ध विधि - छन्दोगी](https://karmkandvidhi.in/parwan-shraddh-2/): विश्वेदेव आसन : सव्य-पूर्वाभिमुख-त्रिकुशा-जौ-जल - पूर्वदिशा में उत्तरभाग में पित्रादि सम्बन्धी विश्वेदेवा का आसन दे और उनसे दक्षिण भाग में मातामहादि सम्बन्धी विश्वेदेवा का आसन दे - - [पार्वण श्राद्ध करने की विधि और मंत्र - वाजसनेयी](https://karmkandvidhi.in/parwan-shraddh/): पार्वण श्राद्ध संकल्प : सव्य-पूर्वाभिमुख त्रिकुशा धारण कर तिल-जलादि संकल्प द्रव्य लेकर इस प्रकार संकल्प करे - ॐ अद्य ………. मासे ……….. पक्षे ……….. तिथौ ……..… गोत्रस्य ……….. शर्मणः पार्वण श्राद्धमहं करिष्ये ॥ स.पू.त्रि. - [द्वादशाह विधि | सपिण्डीकरण सहित - छन्दोग](https://karmkandvidhi.in/shraddh-vidhi-5/): मासिक श्राद्ध और सपिण्डीकरण श्राद्ध द्वादशाह के दिन किया जाता है जो यहां दिया गया है। श्राद्ध करने की विधि और श्राद्ध के मंत्रों को विशेष शुद्ध रखने का प्रयास किया गया है - [एकादशाह श्राद्ध विधि | छन्दोग | shraddh vidhi](https://karmkandvidhi.in/shraddh-vidhi-3/): एकादशाह श्राद्ध विधि | छन्दोग | shraddh vidhi : दीप जलाकर यदि पाककर्त्ता द्वारा पाककर्म हुआ हो तो श्राद्धकर्त्ता पाककर्त्ता से पूछे “सिद्धम्” और पाककर्त्ता कहे “ॐ सिद्धम्” ॥ यदि पाककर्ता न हो तो पूछने की आवश्यकता नहीं है। - [द्वादशाह विधि | सपिंडी श्राद्ध विधि | वाजसनेयी](https://karmkandvidhi.in/shraddh-vidhi-4/): मासिक श्राद्धों में प्रथम के स्थान पर क्रमशः प्रयोग करे : द्वितीय - तृतीय - चतुर्थ - पञ्चम - ऊनषाण् - षष्ठ - सप्तम - अष्टम - नवम - एकादश - ऊनवार्षिक और द्वादश। 11 मास के मध्य यदि अधिकमास हो तो त्रयोदश मासिक की वृद्धि होगी। लेकिन फिर क्रम में परिवर्तन होगा - एकादश-द्वादश-ऊनवार्षिक और त्रयोदश। - [एकादशाह श्राद्ध विधि pdf - सहित | shraddh vidhi | वाजसनेयी - 11 Shraddh](https://karmkandvidhi.in/shraddh-vidhi-2/): एकादशाह श्राद्ध विधि pdf : हम प्रेत श्राद्ध की बात करते हैं तो वर्त्तमान में उसका तात्पर्य दो-दिवसीय एकादशाह और द्वादशाह श्राद्ध से होता है। इसे षोडश श्राद्ध भी कहा जाता है - [जानिये 16 श्राद्ध में क्या करना चाहिए ? षोडश श्राद्ध विधि - shraddh karm](https://karmkandvidhi.in/shraddh-karm/): shraddh karm : षोडशी श्राद्ध विधि उसकी क्रियाओं, श्राद्ध देश, श्राद्ध के अधिकारी, पात्र, सपात्रक और अपात्रक श्राद्ध, श्राद्ध में क्या करना चाहिए आदि की विस्तृत चर्चा की गयी है जो की श्राद्ध में आस्था रखने वालों के लिये विशेष उपयोगी है। - [दौहित्र (नाती) मातामह श्राद्ध (नाना) का - श्राद्ध कैसे करें](https://karmkandvidhi.in/shraddh-kaise-kare/): अपुत्र होने पर नाना का श्राद्ध नाती कर सकता है या नहीं। यदि अपुत्र नाना का श्राद्ध नाती कर सकता है तो अड़चन क्या है अथवा क्यों नहीं कर सकता? दौहित्र (नाती) मातामह श्राद्ध (नाना) का - श्राद्ध कैसे करें - [श्राद्ध कर्म विधि मंत्र की विस्तृत जानकारी - shraddh](https://karmkandvidhi.in/shraddh/): श्राद्ध कर्म विधि मंत्र : पिता, पितामह और प्रपितामह पिण्डभाज अर्थात पिण्ड के अधिकारी पुरुष होते हैं, उनसे ऊपर के वृद्धप्रपितामह, अतिवृद्धप्रपितामह और परमातिवृद्धप्रपितामह ये तीनों लेपभाजी पितर होते हैं। - [दशगात्र विधि pdf सहित । घटदान और दशगात्र करने की विधि - dashgatra vidhi](https://karmkandvidhi.in/dashgatra-vidhi/): मृतात्मा की शांति व कल्याण के लिये मृत्यु के बाद भी कई प्रकार के कर्मकांड किये जाते हैं। सबसे पहले तो दाह-संस्कार करके मृतक के पाञ्चभौतिक देह को पंचतत्वों में विलीन किया जाता है जिसकी विधि पूर्व आलेख में बताई जा चुकी है। - [अन्त्येष्टि संस्कार pfd सहित। दाह संस्कार विधि मंत्र । dah sanskar](https://karmkandvidhi.in/dah-sanskar/): स्वजातीय (भइयारी) भोज के शास्त्रीय प्रमाण सहित दाह संस्कार की विधि। जीवन समाप्त होने के बाद पञ्चभूतों से निर्मित शरीर को पञ्चभूतों में विधिवत विलीन करने की क्रिया दाह-संस्कार कहलाती है। - [अशौच निर्णय pdf सहित । भाग १ । अशौच के प्रकार । सूतक क्या होता है](https://karmkandvidhi.in/ashauch-nirnay/): शुचि का अर्थ होता है पवित्र, शुद्ध, निर्मल, देव-पितृ कर्म के योग्य, आदि। इसी के आगे अशुचि का अर्थ होता है शुचि अर्थात शुद्धता, पवित्रता, निर्मलता, देवपितृ कर्म की योग्यता आदि का अभाव होना। अतः अशुचि अपवित्रता, अशुद्धि, देव-पितृ कर्म में अयोग्यता का बोधक है। - अशौच निर्णय pdf सहित । भाग १ । अशौच के प्रकार । सूतक क्या होता है - [वर्ष श्राद्ध - छन्दोग](https://karmkandvidhi.in/varshik-shraddh-vidhi-chandog/): प्रति संवत्सर अर्थात प्रति वर्ष मृतक की तिथि पर जो श्राद्ध किया जाता है उसे वार्षिक श्राद्ध या सांवत्सरिक श्राद्ध कहते हैं और बोल-चाल में वर्षी या बरखी भी कहा जाता है। इसे क्षयाह श्राद्ध भी कहा जाता है और एकोद्दिष्ट विधि का पालन करना चाहिए। - [अर्क विवाह विधि । जानिये अर्क विवाह क्या होता है ? अर्क विवाह पद्धति pdf के साथ](https://karmkandvidhi.in/ark-vivah/): ॐ तत्सदद्येति श्रुतिस्मृतिपुराणोक्त फलप्राप्ति पूर्वक करिष्यमाण तृतीय मानुषी विवाह तज्जन्य-वैधव्यादि दोषापनुत्यनन्तर वृद्धि हेतवेऽर्कविवाहमहं करिष्ये । तन्निविघ्नतार्थं च गणपत्यादि देवानहं पूजयिष्ये ॥ - [वार्षिक श्राद्ध विधि pdf सहित - वार्षिक श्राद्ध विधि मंत्र - वाजसनेयी](https://karmkandvidhi.in/varshik-shraddh/): इस आलेख में वार्षिक श्राद्ध जिसे वर्षी (बरखी) भी बोला जाता है के बारे में विस्तृत जानकारी के साथ वार्षिक अर्थात सांवत्सरिक श्राद्ध अर्थात एकोद्दिष्ट की विधि और मंत्र भी दिया गया है साथ ही जो pdf फाइल डाउनलोड करना चाहते हैं - [कुम्भ विवाह की विधि - कुम्भ विवाह पद्धति pdf सहित](https://karmkandvidhi.in/kumbh-vivah/): कुम्भ विवाह की विधि - कुम्भ विवाह पद्धति pdf सहित : किसी कन्या की कुण्डली में यदि मंगली, वैधव्य आदि दुर्योग हों तो उसके परिहार हेतु कुम्भ विवाह व विष्णु प्रतिमा विवाह का उपाय बताया गया है। इस आलेख में हम कुम्भ विवाह के बारे में जानेंगे साथ ही कुम्भ विवाह की विधि भी जानेंगे । - [श्री राम नवमी व्रत कथा - ram navami vrat vidhi](https://karmkandvidhi.in/ram-navami-vrat-katha/): श्री रामनवमी व्रत से जितना पुण्य प्राप्त होता है उतना पुण्य कठिन तपस्या करने से भी प्राप्त नहीं होता। श्री रामनवमी व्रत से जितना पुण्य प्राप्त होता है उतना पुण्य पूरी पृथ्वी दान करने से भी नहीं होता। - [रामनवमी पूजा विधि और मंत्र संस्कृत में - Ram navami puja vidhi](https://karmkandvidhi.in/ram-navami-puja-vidhi/): कुलकोटि समुद्धरण पूर्वक भूरिदक्षिणानेकयज्ञ जन्यफल समफल दुष्करानेकतपोजन्यफल समफल द्वारकाधिकरण कपिलगवी कोटि दानजन्यफल समफल धरादानजन्यफल समफल बहुजन्मार्जितैकाददश्युपवास जन्य फल समफल प्राप्तिपूर्वकाऽनन्तकालिक विष्णु लोकमहितत्व कामनया साङ्गसायुधसपरिवार श्रीरामचन्द्रपूजनमहं करिष्ये ॥ - [रामनवमी कब है 2025 में - Ram navami](https://karmkandvidhi.in/ram-navami-2024/): Ram navami : रामनवमी कब है 2025 में - रामनवमी कब मनाई जाती है, रामनवमी क्यों मनाई जाती है : रामनवमी 2025 : वर्ष 2025 में रविवार 6 अप्रैल को चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की औदयिक नवमी है जो 7:22 pm तक है अर्थात मध्याह्न व्यापिनी है अतः वर्ष 2025 में रामनवमी 6 अप्रैल रविवार को रामनवमी है। इस दिन पुनर्वसु नक्षत्र उपलब्ध नहीं है। - [नवरात्रि कब है - navratri kab hai 2024](https://karmkandvidhi.in/navratri-kab-hai/): वर्ष में चार नवरात्रायें होती हैं जो आश्विन, माघ, चैत्र और आषाढ मासों के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी दिन तक का होता है। इस आलेख में नवरात्रा 2024 के विषय में पूरी जानकारी दी गयी है, इसके साथ ही नवरात्रा के महत्व, नवरात्रा व्रत के नियम, नवरात्रा की कथा आदि के बारे में भी चर्चा की गयी है। - [होली कब है 2024 में 25 या 26 मार्च को, होली कैसे मनाया जाता है ?](https://karmkandvidhi.in/holi-kab-hai/): इस आलेख में हम होली निर्णय को शास्त्रीय प्रमाणों के साथ समझते हुये होली 2024 में कब है इसे जानेंगे। साथ ही होली से सम्बंधित और भी महत्वपूर्ण तथ्यों को समझेंगे। - [होलिका दहन मंत्र और विधि - holika dahan kab hai](https://karmkandvidhi.in/holika-dahan-vidhi/): होलिका दहन मंत्र और विधि - holika dahan kab hai : होलिका दहन मात्र एक परम्परा नहीं है। होलिका दहन की विधि एवं मंत्रों का उल्लेख शास्त्रों में हैं। होलिका दहन मुहूर्त के लिये कई विशेष नियम भी है। इस आलेख में हम होलिका दहन विधि और मंत्रों को समझेंगे। - [होलिका दहन कब है 2025 - Holika Dahan](https://karmkandvidhi.in/holika-dahan/): होलिका दहन कब है 2025 - Holika Dahan : होलिका पौर्णमासी तु सायाह्न व्यापिनी मता । भूतविद्धे न कर्तव्ये दर्शपूर्णे कदाचन ॥ ब्रह्मवैवर्त पुराण - सबसे पहला प्रमाण यह है कि होलिका दहन सायं काल में उपलब्ध पूर्णिमा को करना चाहिये अर्थात् सायं काल को कर्मकाल बताया जा रहा है यह प्रमाण ब्रह्मपुराण का है। - [नटराज स्तुति संस्कृत में - natraj stuti](https://karmkandvidhi.in/natraj-stuti/): शत सृष्टि तांडव रचयिता, नटराज राज नमो नमः । हे आद्य गुरु शंकर पिता, नटराज राज नमो नमः ॥ - [शिव तांडव स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित](https://karmkandvidhi.in/shiv-tandav/): शिव ताण्डव स्तोत्र रावण रचित एक प्रसिद्ध स्तोत्र है। नित्य शिव ताण्डव स्तोत्र का पाठ करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। इस आलेख में अर्थ सहित शिव ताण्डव स्तोत्र दिया गया है। शिव ताण्डव स्तोत्र के दो प्रकार पाये जाते हैं - - [रुद्राष्टक स्तोत्र संस्कृत में अर्थ सहित - rudrashtak stotra](https://karmkandvidhi.in/rudrashtak-stotra/): रुद्राष्टक स्तोत्र गोस्वामी तुलसीदास के रामचरितमानस के उत्तरकाण्ड में वर्णित है। इस स्तोत्र का भक्ति पूर्वक पाठ करने से भगवान शिव शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं। इस आलेख में रुद्राष्टक स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है साथ ही विशेष लाभ हेतु हिन्दी अर्थ भी दिया गया है। - [लिङ्गाष्टकं स्तोत्रम् - lingashtakam stotram](https://karmkandvidhi.in/lingashtakam-stotram/): भगवान शिव को प्रसन्न करने वाले स्तोत्रों में से एक है लिङ्गाष्टकं स्तोत्रम्। लिङ्गाष्टकं स्तोत्रम् में कुल 8 मंत्र हैं जिसमें शिवलिङ्ग की स्तुति की गई है। यहां लिङ्गाष्टकं स्तोत्रम्त्र अर्थ सहित दिया गया है। - [शिव पंचाक्षर स्तोत्र अर्थ सहित - shiv panchakshar stotra](https://karmkandvidhi.in/shiv-panchakshar-stotra/): पंचाक्षर मंत्र भगवान शिव की पूजा के लिये सबसे महत्वपूर्ण मंत्र है और पंचाक्षर मंत्र के पांचों वर्णों द्वारा की गयी भगवान शिव की स्तुति जिसे पंचाक्षर स्तोत्र कहा जाता है भगवान शिव का सबसे महत्वपूर्ण स्तोत्र है। यहां पंचाक्षर स्तोत्र अर्थ सहित दिया गया है। - [भोले बाबा के भजन लिखित में - शिव भजन हिंदी](https://karmkandvidhi.in/shiv-bhajan/): भगवान शिव की अराधना के लिये वेद मंत्र, पौराणिक स्तोत्र आदि का तो महत्व है ही किन्तु भगवान शिव की अराधना में भजन का भी विशेष महत्व सिद्ध होता है। भगवान शिव के भजन को नचारी भी कहा जाता है। - [महाशिवरात्रि पूजन सामग्री लिस्ट](https://karmkandvidhi.in/mahashivratri-pujan-samagri/): प्रत्येक वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को महाशिवरात्रि महोत्सव मनाया जाता है। महाशिवरात्रि व्रत 14 वर्षों तक करने का विधान बताया गया है। महाशिवरात्रि व्रत में दिन भर उपवास करके रात में भगवान शिव की विशेष पूजा-कथा की जाती है। महाशिवरात्रि के दिन विशेष पूजा का विधान है। यहां महाशिवरात्रि में उपयोगी पूजन सामग्री की वह लिस्ट दी जा रही है जो शिवालय में पूजा करने के लिये आवश्यक होती है। - [महाशिवरात्रि पूजा विधि और मंत्र- mahashivratri puja vidhi](https://karmkandvidhi.in/mahashivratri-puja-vidhi/): भगवान शिव और पार्वती का विवाह फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को हुआ था और इसी कारण इसे महाशिवरात्रि कहा जाता है। महाशिवरात्रि व्रत १४ वर्षों तक करना चाहिए। इस व्रत में रात के चारों पहर भगवान भोलेनाथ की पूजा की जाती है, रात्रिजागरण, नृत्य-गीत, मन्त्र जप, स्तोत्र पाठ आदि करना चाहिए। - [महाशिवरात्रि कब है ? Mahashivratri kab hai](https://karmkandvidhi.in/mahashivratri-kab-hai/): फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का आयोजन होता है। पञ्चाङ्गों के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ 26 फरवरी 2025 बुधवार को मध्याह्न में 11 बजकर 08 मिनट पर होगा और अगले दिन यानी 27 फरवरी 2025 गुरुवार को पूर्वाह्न 8 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगी। - [राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) राजनीतिक संगठन है या धार्मिक](https://karmkandvidhi.in/rss-2/): जब नये धर्म-शास्त्रों का निर्माण करना चाहते हैं या धर्म-शास्त्रों में परिवर्तन करना चाहते हैं तो जनता को जो-जो शंकायें हों उन शंकाओं का निवारण भी तो करना होगा। - [स्वस्तिवाचन - चारों वेदों का - swastiwachan mantra](https://karmkandvidhi.in/swastiwachan-mantra/): स्वस्तिवाचन - चारों वेदों का - swastiwachan mantra : इस प्रकार यहां सम्पूर्ण स्वस्तिवाचन मंत्र (यजुर्वेदीय) के साथ-साथ ऋग्वेद स्वस्तिवाचन, सामवेद का स्वस्तिवाचन और अथर्ववेद का स्वस्तिवाचन भी संकलित किया गया जो बहुत सारे लोगों के लिये उपयोगी सिद्ध होगा। - [क्या स्त्री हवन कर सकती है ? हवन करने की विधि](https://karmkandvidhi.in/havan-karane-ki-vidhi/): शास्त्रों द्वारा स्त्री को पति के द्वारा किये गये हवन में ही फल का भागी बताया गया है तो अलग से हवन करने की आवश्यकता ही सिद्ध नहीं होती और पतिहीन (विधवा) के लिये आचार्य का वरण करके हवन का नियम ज्ञात होता है। - [करम प्रधान विश्व करि राखा का मूल तात्पर्य क्या है ? - karm pradhan vishwa kari rakha](https://karmkandvidhi.in/karm-pradhan-vishwa-kari-rakha/): सत्तालोलुप समूह, षड्यंत्रकारी आदि अपने ही कुतर्कों के जाल में किस प्रकार फंसते हैं इसे इस प्रकार से समझा जा सकता है : आज के समय में वर्णव्यवस्था का महत्व नहीं है । - [राष्ट्रहित सर्वोपरि मानकर राष्ट्र की सुरक्षा के लिये सेना को विशेषाधिकार की आवश्यकता है](https://karmkandvidhi.in/rashtra-ki-suraksha/): एक गंभीर प्रश्न है कि जब सत्ता एवं विपक्ष की राजनीतिक लड़ाई चल रही हो और संविधान का संरक्षक मूकदर्शक बन जाये तो खतड़े में पड़ी राष्टीय सुरक्षा व आम नागरिकों के मौलिक अधिकार को कौन बचायेगा ? - [हवन विधि - महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर](https://karmkandvidhi.in/havan-vidhi-prashnottari/): हवन विधि - महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर : प्रथम भाग में वो प्रश्न लिये गये हैं जो इंटरनेट पर अधिकतर पूछे जाते हैं और द्वितीय भाग में वो प्रश्न लिये गये हैं जो इंटरनेट पर तो नहीं पूछे जाते एवं श्रद्धालुओं के मन में होते हैं एवं जिनका उत्तर भी इंटरनेट पर लगभग नहीं मिलता है। इस कारण हवन को समझने के लिये यह आलेख विशेष महत्वपूर्ण है। - [अचला सप्तमी - अचला सप्तमी कब है - अचला का अर्थ - अचला सप्तमी 2025](https://karmkandvidhi.in/achala-saptami/): अचला सप्तमी - अचला सप्तमी कब है - अचला का अर्थ - अचला सप्तमी 2025 : माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को अचला सप्तमी कहा जाता है। इसका एक अन्य नाम रथ सप्तमी भी है। शास्त्रों के नियमानुसार इस दिन किया गया प्रत्येक कर्म चाहे पुण्य कर्म हो या पाप कर्म अनन्त काल तक फलित होता है। - [हवन विधि - छन्दोग](https://karmkandvidhi.in/havan-vidhi-4/): छन्दोग हवन विधि में पञ्चभूसंस्कार के समय बांयां हाथ भूमि पर रखने का विधान है अतः पञ्चभूसंस्कार के समय अग्निस्थापन तक बांयां हाथ भूमि पर रखे और सभी क्रियायें एक ही हाथ से करें; अङ्गिरा - सव्यं भूमौ प्रतिष्ठाप्य प्रोल्लिखेद्दक्षिणेन तु । तावन्नोस्थापयेत्पाणिं यावदग्निं निधापयेत् ॥ - [हवन विधि मंत्र सहित - वाजसनेयी](https://karmkandvidhi.in/havan-vidhi-3/): वैदिक हवन विधि में संपूर्ण हवन विधि को तीन भागों में बांटा गया है : पूर्वाङ्ग - पवित्रीकरणादि के उपरान्त पञ्चभूसंस्कार से पञ्चमहावारुणी होम तक की सभी क्रियायें पूर्वाङ्ग कहलाती है। सभी प्रकार के हवनों में पूर्वाङ्ग समान ही रहता है। मध्याङ्ग - पूजित देवी-देवता सहित मुख्य देवता का हवन मुख्य अंग होता है; जिसे समझने में सुविधा के लिये यहां मध्याङ्ग भी कहा गया है, जिसकी विधि, हविर्द्रव्य, मंत्र परिवर्तित होते रहते हैं। उत्तराङ्ग - मध्याङ्ग अर्थात मुख्य देवता का होम करने के बाद की शेष क्रियायें उत्तराङ्ग कहलाती है। सभी प्रकार के वैदिक हवन विधि में उत्तराङ्ग भी समान रहता है। - [हवन विधि पूर्वाङ्ग व उत्तराङ्ग - पारस्कर गृह्यसूत्र के अनुसार](https://karmkandvidhi.in/havan-vidhi-2/): मुख्य रूप से आपस्तम्बकृत पारस्करगृह्यसूत्र के हवन सूत्रानुसार हवन विधान पर विमर्श करते हैं। इस विमर्श का तात्पर्य यह है कि हवन विधि को सरलतापूर्वक समझा जा सके। सरल हवन पद्धति का तात्पर्य यही होता है कि शास्त्रोक्त हवन विधि को सरलता पूर्वक जिस पद्धति में समझाया गया हो। - [हवन करने की विधि एवं मंत्र - संपूर्ण हवन विधि मंत्र - havan vidhi](https://karmkandvidhi.in/havan-vidhi/): सरल हवन विधि कहकर भ्रमित करने वालों की संख्या बहुत अधिक है, यहां हम हवन विधि को समझेंगे। पहले हवन के विषय-क्रियाविधि को समझने का प्रयास करेंगे और तत्पश्चात संपूर्ण हवन विधि एवं मंत्र का भी अवलोकन करेंगे। - [पवित्रीकरण अर्थात शुद्धिकरण की संपूर्ण विधि](https://karmkandvidhi.in/pavitrikaran/): सम्पूर्ण कर्मकांड में पवित्रीकरण अर्थात शुद्धिकरण की सर्वप्रथम आवश्यकता होती है। चाहे पूजा स्थल की बात हो, पूजा सामग्री की बात हो अथवा शारीरिक या मानसिक शुद्धि का विषय हो, प्रत्येक कर्म का आरम्भ पवित्रीकरण से ही होता है। इस आलेख में पवित्रीकरण की संपूर्ण विधि बताई गयी है जो अत्यंत उपयोगी विषय है। - [वर्ण व्यवस्था की उत्पत्ति के सिद्धांत - जन्म से या कर्म से](https://karmkandvidhi.in/varn-jati/): वर्ण व्यवस्था की उत्पत्ति के सिद्धांत - जन्म से या कर्म से : आज के भारत में वर्ण और जाति का आधार क्या है, इसका निर्णय अब शास्त्र और शास्त्रार्थ से नहीं होगा, जैसे सारे निर्णय राजनीतिक होते हैं उसी तरह वर्ण और जाति का निर्णय भी राजनीति से किया जाएगा धर्मशास्त्रों और प्रमाणों से नहीं। अथवा ये निर्णय आर्यसमाजी करेगा जो स्वयं धर्म-शास्त्रों को नहीं मानता या केवल उतना मानता है जितना प्रचार-प्रसार के लिये अर्थात अस्तित्व के लिये आवश्यक है। - [देश का विकास और शांति के लिये चाहिये एक नया कानून - जैसे को तैसा …](https://karmkandvidhi.in/naya-kanun/): वास्तविक न्याय भी उसी को कहा जा सकता है जिसका मूल सिद्धांत "जैसे को तैसा" हो। न्याय तंत्र का ध्येय ये होना कि अपराध होने के बाद ही हम सक्रिय होंगे लेकिन अपराध रोकने के लिये हम सक्रिय नहीं हो सकते और सरकार/प्रशासन/समाज सबके हाथ भी बांध देंगे ताकि अपराध हो जिससे हमारा (न्याय तंत्र) औचित्य, प्रभाव, शक्ति बढ़ता जाये उचित नहीं है। - [वृद्धि श्राद्ध विधि अर्थात आभ्युदयिक श्राद्ध विधि](https://karmkandvidhi.in/nandi-shraddh-vidhi/): नान्दी श्राद्ध : आचमन, पवित्रीकरणादि करके गया, विष्णु भगवान एवं पितरों का ध्यान करे : ॐ श्राद्धकाले गयां ध्यात्वा ध्यात्वा देवं गदाधरं। मनसा च पितृन ध्यात्वा वृद्धिश्राद्धं समारभे॥ फिर संकल्प करे । - [नान्दी श्राद्ध - षोडश मातृका पूजन, सप्तघृत मातृका पूजन सहित](https://karmkandvidhi.in/nandimukh-shraddham/): दाह संस्कार के अतिरिक्त सभी संस्कारों में नान्दीमुख श्राद्ध किया जाता है। इसके साथ ही यज्ञ, प्राण-प्रतिष्ठा आदि कर्मों में नान्दीश्राद्ध आवश्यक होता है। लेकिन जिस प्रकार पवित्रीकरण, संकल्प, सम्पूर्ण कर्मकाण्ड का अनिवार्य प्रारंभिक अंग होता है उस प्रकार से सभी कर्मों में अनिवार्य नहीं होता। जिस प्रकार कलश स्थापन सभी पूजा पाठ में आवश्यक होता है उस प्रकार से नान्दी श्राद्ध सभी शुभ कर्मों में अनिवार्य नहीं है। जैसे सत्यनारायण पूजा करनी हो तो नान्दी श्राद्ध आवश्यक नहीं है। - [भगवती स्तोत्र - जय भगवती देवी नमो वरदे लिखा हुआ](https://karmkandvidhi.in/bhavati-stotra/): जय भगवति देवि नमो वरदे, जय पापविनाशिनि बहुफलदे। जय शुम्भनिशुम्भ कपालधरे, प्रणमामि तु देवि नरार्तिहरे॥१॥ - [हिन्दू आतंकवाद और असहिष्णुता - क्या हिन्दुओं को अपना अस्तित्व त्याग देना चाहिये ?](https://karmkandvidhi.in/hindu-atankwad-aur-asahishnuta/): जिसने हिन्दुओं के बड़े भू-भाग को हड़प लिया है वो असहिष्णु है या जिसका बड़ा भू-भाग हड़पा गया है वो असहिष्णु है ? जिसने पारसियों के देश को हड़प लिया वो असहिष्णु है या जिसने पारसियों को शरण दिया वो असहिष्णु है ? जिसने रक्तपात किया था वो असहिष्णु है या जिसका रक्त बहा वो असहिष्णु है ? - [क्या आप जानते हैं राम लला की प्राण प्रतिष्ठा बाल रूप में क्यों हुई ?](https://karmkandvidhi.in/ramlala-ki-pran-pratishtha/): यहां दिये गये 14 प्रश्नों से ही ये स्पष्ट होता है कि राम लला की प्राण प्रतिष्ठा बाल रूप में क्यों हुई ? और हम यह आशा करते हैं कि सभी को इस प्रश्न का उत्तर मिल भी गया होगा। - [मंदिर मस्जिद विवाद में एक नये कानून की आवश्यकता है](https://karmkandvidhi.in/mandir-maszid/): हिन्दुओं ने गैर हिन्दुओं को या तो भीख में बड़े-बड़े भू-भाग दिया था या उन्होंने हड़प लिया। हिन्दुओं ने दिया है इसलिये हिन्दू का अधिकार स्वतः सिद्ध है। - [भवान्यष्टकम् संस्कृत - न तातो न माता](https://karmkandvidhi.in/bhavanyatakam/): भगवती को प्रसन्न करने के लिये पूजा अनुष्ठानों में भवान्यष्टक बड़े भक्ति भाव से गाते देखा जाता है। इस स्तुति में भक्त स्वयं को सभी प्रकार से दीन-हीन होने की घोषणा करता है - [एकादशी उद्यापन की सामग्री - ekadashi udyapan samagri](https://karmkandvidhi.in/ekadashi-udyapan-samagri/): एकादशी उद्यापन की सामग्री - ekadashi udyapan samagri : दान सामग्री के संबंध में मुख्य नियम यही है कि यजमान का सामर्थ्य क्या है। यजमान से सामर्थ्य के अनुसार दान सामग्री में कमी भी हो सकती है और अधिक भी किया जा सकता है। यहां एक पुनरावृत्ति पुनः करना अपेक्षित है "एक दरिद्र यजमान यदि कुछ दान करने में समर्थ न हो तो मात्र ब्राह्मण भोजन कराकर भी उद्यापन कर सकता है।" - [दस महाविद्या स्तोत्र संस्कृत में](https://karmkandvidhi.in/das-mahavidya-stotra/): दस महाविद्यायें वास्तव में आदिशक्ति का ही अवतार है और इन महाविद्याओं की शक्तियां ही सम्पूर्ण संसार को चलाती है। इन सब महाविद्याओं का प्रयोग ज्ञान और शक्ति को अर्जन के लिए किया जाता है। इन दस महाविद्या काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी, षोडशी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्तिका, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातङ्गी माता आदि के नाम से जानी जाती है। - [दुर्गा आपदुद्धारक स्तोत्र हिन्दी अर्थ सहित - durga apaduddharaka stotram](https://karmkandvidhi.in/durga-apaduddharaka-stotram/): दुर्गा आपदुद्धार स्तोत्र सिद्धीश्वरीतंत्र में उमामहेश्वर संवाद के रूप में वर्णित है। इसके पाठ से सभी प्रकार के आपदाओं का निवारण होता है। प्राणीमात्र के लिये सबसे बड़ी आपदा जन्म-मृत्यु का बंधन है। इसके साथ ही सांसारिक जीवन में भी कई प्रकार के आपत् देखे जाते हैं। दुर्गा आपदुद्धार स्तोत्र का पाठ करना सांसारिक आपत् का भी निवारक है। - [अयोध्या धर्मशाला कांटेक्ट नंबर](https://karmkandvidhi.in/ayodhya-dharmshala/): कई शताब्दी के बाद २२ जनवरी २०२४ को राम लला पुनः अपने श्री अयोध्या धाम के मंदिर में विराजमान हुये हैं। ऐसे में देश विदेश के श्रद्धालु भक्त जन राम लला का दर्शन करना चाहते हैं। - [महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र - अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते](https://karmkandvidhi.in/mahishasurmardini/): महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र एक बहुत ही सुंदर स्तोत्र है जिसे भगवती की अर्चना में लयपूर्वक पढ़ा जाता है। इसका प्रयोग पुष्पांजलि हेतु भी किया जा सकता है। महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र में कुल २२ श्लोक मिलते हैं। इस आलेख में महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित दिया गया है। इसके साथ ही भगवती के अनेकों अन्य स्तोत्रों के अनुगमन पथ भी दिये गये हैं जिसका अनुसरण करते हुये अन्य स्तोत्रों का भी अवलोकन करना सरल हो जाता है। - [देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम् - देवी अपराध क्षमापन स्तोत्र](https://karmkandvidhi.in/kshamapan-stotra/): इसका प्रार्थना का भाव इतना गंभीर है कि कुटिल जीव का भी हृदय द्रवित हो जाये। फिर जो माता स्वभावतः भक्तों के ऊपर दया करने को आतुर रहती है उनके लिये तो कहना ही क्या ? - [दुर्गाद्वात्रिंशन्नाममाला - दुर्गा के 32 नाम](https://karmkandvidhi.in/durga-32/): यह रहस्य अत्यंत गोपनीय और दुर्लभ हैं। मेरे बत्तीस नामों की माला सब प्रकार की आपत्ति का विनाश करने वाली हैं। तीनों लोकों में इस के समान दूसरी कोई स्तुति नहीं हैं। यह रहस्यरूप हैं। - [दुर्गा मानस पूजा अर्थ सहित - durga manas puja](https://karmkandvidhi.in/durga-manas-puja/): दुर्गा मानस पूजा अर्थ सहित - durga manas puja : मानस पूजा उत्तम प्रकार है। अपने इष्ट का मन में ध्यान करके उनके मानस पूजा स्तोत्र का पाठ करते हुये मन में ही पूजा के विभिन्न दिव्य उपचारों (आसन, पाद्य, अर्घ्य आदि) की कल्पना करके अर्पित की जाती है। मानस पूजा में किसी वस्तु की नहीं केवल भाव की आवश्यकता होती है। - [क्षमा प्रार्थना मंत्र](https://karmkandvidhi.in/kshama-prarthana/): क्षमा प्रार्थना का तात्पर्य है अपने अपराधों (गलतियों) के लिये क्षमा याचना की विनती करना। यहां दिये गये क्षमा प्रार्थना में एक मंत्र "आवाहनं न जानामि" का प्राकारांतर भी दिया गया है एवं एक अतिरिक्त मंत्र "प्रसीद भगवत्यम्ब" भी दिया गया है। - [मूर्ति रहस्य दुर्गा सप्तशती](https://karmkandvidhi.in/rahasyatray-3/): ॐ नन्दा भगवती नाम या भविष्यति नन्दजा। स्तुता सा पूजिता भक्त्या वशीकुर्याज्जगत्त्रयम्॥ कनकोत्तमकान्तिः सा सुकान्तिकनकाम्बरा। देवी कनकवर्णाभा कनकोत्तमभूषणा॥ - [वैकृतिक रहस्य - दुर्गा सप्तशती पाठ](https://karmkandvidhi.in/rahasyatray-2/): ॐ त्रिगुणा तामसी देवी सात्त्विकी या त्रिधोदिता। सा शर्वा चण्डिका दुर्गा भयहां श्रीदुर्गा सप्तशती के रहस्यत्रयों में से एक वैकृतिक रहस्य दिया गया है। संस्कृत पाठ के साथ-साथ हिंदी में भी दिया गया है एवं अभ्यास हेतु विडियो भी दिया गया है।द्रा भगवतीर्यते॥१॥ योगनिद्रा हरेरुक्ता महाकाली तमोगुणा। मधुकैटभनाशार्थं यां तुष्टावाम्बुजासनः॥२॥ - [प्राधानिक रहस्य](https://karmkandvidhi.in/rahasyatray/): भगवन्नवतारा मे चण्डिकायास्त्वयोदिताः। एतेषां प्रकृतिं ब्रह्मन् प्रधानं वक्तुमर्हसि॥१॥ आराध्यं यन्मया देव्याः स्वरूपं येन च द्विज। विधिना ब्रूहि सकलं यथावत्प्रणतस्य मे॥२॥ - [न्यास - नवार्ण मंत्र जप](https://karmkandvidhi.in/durgaranyas-2/): श्रीगणपतिर्जयति। ॐ अस्य श्रीनवार्णमन्त्रस्य ब्रह्मविष्णुरुद्रा ऋषयः, गायत्र्युष्णिगनुष्टुभश्छन्दांसि, श्रीमहाकाली महालक्ष्मी महासरस्वत्यो देवताः, ऐं बीजम्, ह्रीं शक्तिः, क्लीं कीलकम्, श्रीमहाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वतीप्रीत्यर्थे जपे विनियोगः॥ - [देवी सूक्त संस्कृत - वेदोक्त देवी सूक्त, तंत्रोक्त देवी सूक्त](https://karmkandvidhi.in/ratrisukt/): सप्तशती पाठ के बाद देवीसूक्त पाठ करना चाहिये। देवीसूक्त भी वेदोक्त और तंत्रोक्त दो प्रकार के हैं। यहां ऋग्वेदोक्त देवीसूक्त और तंत्रोक्त (जो कि श्रीदुर्गासप्तशती का ही है) देवी सूक्त, दोनों दिया गया है। - [दुर्गा सप्तशती पाठ अध्याय 13](https://karmkandvidhi.in/durga-path-13/): ॐ बालार्कमण्डलाभासां चतुर्बाहुं त्रिलोचनाम्। पाशाङ्‌कुशवराभीतीर्धारयन्तीं शिवां भजे॥ - [दुर्गा सप्तशती पाठ अध्याय 12](https://karmkandvidhi.in/durga-path-12/): स्तुति से प्रसन्न होकर देवताओं को बाधानिवारण का वरदान देने के पश्चात् बारहवें अध्याय में भगवती स्वयं ही सप्तशती के पाठ, श्रवण आदि का माहात्म्य बताती हैं। ग्यारहवां अध्याय वास्तव में सप्तशती का माहात्म्य ही है जो स्वयं भगवती द्वारा ही बताया गया है। - [दुर्गा सप्तशती पाठ अध्याय 11](https://karmkandvidhi.in/durga-path-11/): देवी द्वारा शुम्भ वध के उपरांत दशों दिशाओं में हर्ष व्याप्त हो गया, देवताओं के मुखकमल खिल गये और हर्षित होकर देवताओं ने देवी की स्तुति किया। स्तुति से प्रसन्न होने के बाद देवी ने वर मांगने के लिये कहा तो देवताओं ने सभी बाधाओं को शमन करने के लिये कहा। - [दुर्गा सप्तशती पाठ अध्याय 10](https://karmkandvidhi.in/durga-path-10/): देवी द्वारा निशुम्भ वध के उपरांत शुम्भ लांछन करता है कि औरों के बल पर आश्रित होकर गर्व करती हो तब देवी कहती है इस अखिल विश्व में एक मैं ही हूँ, - [दुर्गा सप्तशती पाठ अध्याय 9](https://karmkandvidhi.in/durga-path-9/): सभी प्रमुख असुरों की मृत्यु के उपरांत शुम्भ-निशुम्भ विशाल सेना के साथ युद्ध करने आया। भयंकर युद्ध के साथ ही नौवें अध्याय में निशुम्भ वध की कथा है। - [दुर्गा सप्तशती पाठ अध्याय 8](https://karmkandvidhi.in/durga-path-8/): ॐ अरुणां करुणातरङ्‌गिताक्षीं धृतपाशाङ्‌कुशबाणचापहस्ताम्। अणिमादिभिरावृतां मयूखै- रहमित्येव विभावये भवानीम्॥ - [दुर्गा सप्तशती पाठ अध्याय 7](https://karmkandvidhi.in/durga-path-7/): ॐ ध्यायेयं रत्‍नपीठे शुककलपठितं शृण्वतीं श्यामलाङ्‌गीं न्यस्तैकाङ्‌घ्रिं सरोजे शशिशकलधरां वल्लकीं वादयन्तीम्। कह्लाराबद्धमालां नियमितविलसच्चोलिकां रक्तवस्त्रां मातङ्‌गीं शङ्‍खपात्रां मधुरमधुमदां चित्रकोद्भासिभालाम्॥ - [दुर्गा सप्तशती पाठ अध्याय 6](https://karmkandvidhi.in/durga-path-6/): ॐ नागाधीश्‍वरविष्टरां फणिफणोत्तंसोरुरत्‍नावली- भास्वद्देहलतां दिवाकरनिभां नेत्रत्रयोद्भासिताम्। मालाकुम्भकपालनीरजकरां चन्द्रार्धचूडां परां सर्वज्ञेश्‍वरभैरवाङ्‌कनिलयां पद्मावतीं चिन्तये॥ - [दुर्गा सप्तशती पाठ अध्याय 4](https://karmkandvidhi.in/durga-path-4/): ॐ कालाभ्राभां कटाक्षैररिकुलभयदां मौलिबद्धेन्दुरेखां शड्‌खं चक्रं कृपाणं त्रिशिखमपि करैरुद्वहन्तीं त्रिनेत्राम्। सिंहस्कन्धाधिरूढां त्रिभुवनमखिलं तेजसा पूरयन्तीं ध्यायेद् दुर्गां जयाख्यां त्रिदशपरिवृतां सेवितां सिद्धिकामैः॥ - [दुर्गा सप्तशती पाठ अध्याय 5](https://karmkandvidhi.in/durga-path-5/): ॐ घण्टाशूलहलानि शङ्‌खमुसले चक्रं धनुः सायकं हस्ताब्जैर्दधतीं घनान्तविलसच्छीतांशुतुल्यप्रभाम्। गौरीदेहसमुद्भवां त्रिजगतामाधारभूतां महा- पूर्वामत्र सरस्वतीमनुभजे शुम्भादिदैत्यार्दिनीम्॥ - [दुर्गा सप्तशती पाठ अध्याय 3](https://karmkandvidhi.in/durga-path-3/): ॐ उद्यद्भानुसहस्रकान्तिमरुणक्षौमां शिरोमालिकां रक्तालिप्तपयोधरां जपवटीं विद्यामभीतिं वरम्। हस्ताब्जैर्दधतीं त्रिनेत्रविलसद्वक्त्रारविन्दश्रियं देवीं बद्धहिमांशुरत्‍नमुकुटां वन्देऽरविन्दस्थिताम्॥ - [दुर्गा सप्तशती अध्याय 2 संस्कृत](https://karmkandvidhi.in/durga-path-2/): ॐ मध्यमचरित्रस्य विष्णुर्ऋषिः, महालक्ष्मीर्देवता, उष्णिक् छन्दः, शाकम्भरी शक्तिः, दुर्गा बीजम्. वायुस्तत्त्वम्, यजुर्वेदः स्वरूपम्, श्रीमहालक्ष्मीप्रीत्यर्थं मध्यमचरित्रजपे विनियोगः॥ - [दुर्गा सप्तशती पाठ 1 अध्याय - श्री दुर्गा सप्तशती](https://karmkandvidhi.in/durga-path-1/): ॐ नमश्चण्डिकायै - "ॐ ऐं" मार्कण्डेय उवाच ॥१॥ सावर्णिः सूर्यतनयो यो मनुः कथ्यतेऽष्टमः। निशामय तदुत्पत्तिं विस्तराद् गदतो मम॥२॥ - [नवार्ण जप विधि , सप्तशती न्यास - श्री दुर्गा सप्तशती पाठ](https://karmkandvidhi.in/durgaranyas/): "ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" - यहां प्रणवरहित पक्ष का अवलंबन किया गया है। "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" - कई पुस्तकों में और अधिकतर गीताप्रेस की पुस्तक का प्रयोग होता है इस कारण सप्रणव प्रयोग होता है। - [देवी अथर्वशीर्ष संस्कृत](https://karmkandvidhi.in/durgaraatharvshirsh/): देव्यथर्वशीर्ष का सायंकाल में पाठ करने वाला दिन में किये हुए पापों का नाश करता है, प्रातः काल में पाठ करने वाला रात्री में किये हुए पापों का नाश करता है। दोनों समय पाठ करने वाला निष्पाप होता है। मध्यरात्रि में तुरीय संध्या के समय पाठ करने से वाकसिद्धि प्राप्त होती है। - [रात्रि सूक्त - श्री दुर्गा सप्तशती पाठ](https://karmkandvidhi.in/durgaratrisukt/): वास्तविक सृजन रात्रि की अधिष्ठात्री देवी भुवनेश्वरी के ही हाथों में होता है और जब प्रलय के बाद भगवान भी सो जाते हैं तब भी रात्रि की अधिष्ठात्री देवी जाग्रत रहती है और सृजन कार्य को सम्पादित करती रहती है। ये सृजन सामान्य जीवों में स्पष्टतः दृष्टिगत होता है और विज्ञानसिद्ध भी होता है। कोई भी जीव जब सो रहा होता है तब यही अधिष्ठात्री देवी उसके शरीर का निर्माण (विकास, क्षतिपूर्ति आदि) करती हैं। - [कीलक स्तोत्र मंत्र - श्री दुर्गा सप्तशती पाठ](https://karmkandvidhi.in/durgakilak/): जैसे कोई भी फाइल लॉक है तो उसे पढ़ने के लिये अनलॉक करने की आवश्यकता होती और अनलॉक करने के लिये पासवर्ड की आवश्यकता होती है। यदि पासवर्ड (उत्कीलन विधा) नहीं पता हो तो उस फाइल को खोला नहीं जा सकता। कीलक स्तोत्र का महत्व समझाने के लिये ये वैकल्पिक उदहारण है जो पूर्ण सटीक कदापि नहीं हो सकता किन्तु समझने में सहयोग अवश्य कर सकता। - [अर्गला स्तोत्र संस्कृत में](https://karmkandvidhi.in/durgaargla/): जिनके जीवन में असफलता, विवादादि में पराजय, अपयश की प्राप्ति, शत्रुओं से परेशानी, विवाह में विलम्ब इत्यादि अनेक प्रकार की समस्यायें होती हैं उनके लिये नित्य अर्गला स्तोत्र का पाठ करना विशेष लाभकारी होता है। अर्गला स्तोत्र के पाठ से पहले यदि कवच का पाठ भी किया जाय तो विशेष फल की प्राप्ति होती है। - [दुर्गा कवच स्तोत्र - दुर्गा कवच संस्कृत](https://karmkandvidhi.in/durgakawach/): दुर्गा कवच स्तोत्र - दुर्गा कवच संस्कृत : ॐ अस्य श्रीचण्डीकवचस्य ब्रह्मा ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, चामुण्डा देवता, अङ्गन्यासोक्तमातरो बीजम्, दिग्बन्ध देवतास्तत्त्वम्, श्रीजगदम्बाप्रीत्यर्थे सप्तशतीपाठाङ्गत्वेन जपे विनियोगः ॥ - [दुर्गा सप्तशती पाठ - मूल दुर्गा सप्तशती संस्कृत पाठ](https://karmkandvidhi.in/durga-saptashati-path/): या चण्डी मधुकैटभादिदैत्यदलनी या माहिषोन्मूलिनी या धूम्रेक्षणचण्डमुण्डमथनी या रक्तबीजाशनी। शक्तिः शुम्भनिशुम्भदैत्यदलनी या सिद्धिदात्री परा सा देवी नवकोटिमूर्तिसहिता मां पातु विश्वेश्वरी॥ - [श्री सत्यनारायण व्रत कथा संस्कृत में - संपूर्ण कथा सातों अध्याय](https://karmkandvidhi.in/satynarayan-vrat-katha/): श्री सत्यनारायण व्रत कथा संस्कृत में : सत्यनारायण व्रत कथा संस्कृत में अवश्य सुनें। कथा सुनने का पुण्य संस्कृत (देववाणी) में सुनने से ही मिलता है। हिन्दी या अन्य भाषाओं में समझने के लिये कर सकते हैं। कथा का पुण्य पाने के लिये ब्राह्मण के द्वारा ही सुने। कथा सुनते समय कथावाचक से नीचे आसन रखें। हाथों में फूल रखकर कथा सुने और कथा के बाद भगवान को चढ़ा दें। कथा के समय आपस में बातचीत न करें। यदि संस्कृत समझ में न भी आये तो भी ध्यान से संस्कृत पाठ को अवश्य सुनें। - [नरक निवारण चतुर्दशी (narak nivaran chaturdashi) कब है - पूजा विधि](https://karmkandvidhi.in/narak-nivaran-chaturdashi/): नरक निवारण चतुर्दशी (narak nivaran chaturdashi) कब है - पूजा विधि : लिङ्गपुराण में नरक निवारण चतुर्दशी की कथा है जिसमें इसकी महिमा बताते हुये कहा गया है : अश्वमेधसहस्राणि वाजपेयशतानि च। प्राप्नोति तत्फलं सर्वं नात्र कार्या विचारणा॥ एक हजार अश्वमेध यज्ञ और एक सौ वाजपेय यज्ञ करने से जो फल प्राप्त होता है वो फल नरक निवारण चतुर्दशी व्रत करने से प्राप्त होता है, इसमें विचार नहीं करना चाहिये अर्थात शंका नहीं करनी चाहिये। - [प्रासाद उत्सर्ग विधि - प्राण प्रतिष्ठा विधि](https://karmkandvidhi.in/prasad-utsarg/): प्रासाद के ईशानकोण अथवा नैर्ऋत्य कोण में सपत्नीक यजमान सुंदर आसन पर पवित्रीकरणादि करके त्रिकुशा, तिल, जलादि संकल्प द्रव्य लेकर संकल्प करे : ॐ अद्य ........ अस्य वास्तोः शुभता सिद्ध्यर्थं .......... देवता प्रतिष्ठाङ्गभूतं वास्तुदेवतास्थापनं पूजनं च करिष्ये ॥ - [मंगल गीत - मङ्गलमंजुलगीतं - जय जयदेव हरे](https://karmkandvidhi.in/jai-jai-dev-hare/): जय जय देव हरे - श्री जयदेव कृत मंगल गीत बहुत अद्भुत प्रभावकारी है। इसका श्रवण मन को तरंगित कर देता है। - [बलि प्रथा एक अभिशाप क्यों](https://karmkandvidhi.in/balipratha-kyon/): सब मम प्रिय सब मम उपजाये - ये भगवान राम का कथन है और इसे किसी प्रकार से नकारा नहीं जा सकता कि सारी सृष्टि ईश्वर की ही कृति है। इस अध्याय में हम बलि जिसे प्रथा कहा जाने लगा है और एक अभिशाप सिद्ध किया जा रहा है इसकी उपादेयता, प्रमाणिकता आदि की चर्चा करेंगे। - [क्या आप जानते हैं सबसे बड़ा भगवान कौन है ?](https://karmkandvidhi.in/sabase-bade-bhagwan-kaun-hai/): सबसे बड़े भगवान के बारे में निर्णय करना अत्यंत कठिन है और अपराध भी है, किन्तु स्वयं के लिये सबसे बड़े भगवान के बारे में जानना अत्यंत सरल है। इस विषय को गंभीरतापूर्वक चिंतन करने, बार-बार विचार करने पर ही समझा जा सकता है केवल एक बार इस अध्याय को पढ़ लेने से नहीं समझा जा सकता। - [नवरात्रि पूजन विधि : संकल्प, स्वस्तिवाचन, कलशस्थापन, दुर्गा पूजा, अंग पूजा - Puja No. 1](https://karmkandvidhi.in/kalash-sthapan-2024/): नवरात्रि पूजन विधि : संकल्प, स्वस्तिवाचन, कलशस्थापन, दुर्गा पूजा, अंग पूजा - नवरात्र में दुर्गा पूजा करने की भिन्न विधि होती है और उसमें भी दो विधि हो जाती है एक मंदिरों में पूजा की विधि और दूसरी घर में पूजा करने की विधि। - [शारदीय नवरात्र दुर्गा महोत्सव निर्णय - durga mahotsav 2025](https://karmkandvidhi.in/durga-mahotsav-nirnay/): शारदीय नवरात्र दुर्गा महोत्सव निर्णय : वर्ष में चार मुख्य नवरात्रायें होती हैं जिनमें से शारदीय नवरात्र अर्थात जो शरद् ऋतु में पड़े वो विशेष महत्वपूर्ण होती है। इसमें भगवती दुर्गा की महापूजा होती है। नवरात्र विधान की बात करें तो मंदिरों के लिये जो विधि है घर में उससे भिन्न हो जाती है। पुनः घर में भी जो विद्वान ब्राह्मण के आचार्यत्व में करें उनके लिये और जो स्वयं करे उसके लिये भी भिन्न विधियां हो जाती है। - [पितृपक्ष श्राद्ध तर्पण की सम्पूर्ण जानकारी - पितृपक्ष 2024](https://karmkandvidhi.in/pitru-paksha-shradh/): पितृपक्ष श्राद्ध तर्पण - सम्पूर्ण जानकारी : आश्विन माह का कृष्ण पक्ष पितृपक्ष कहलाता है, पितृपक्ष कहने का तात्पर्य है कि संपूर्ण पक्ष में पितरों के निमित्त श्राद्ध किया जाता है। पितृपक्ष में किये गये श्राद्ध से पितरों की वर्षपर्यंत की तृप्ति होती है अतः पितृपक्ष में किये जाने वाले श्राद्ध का विशेष महत्व होता है। - [ऋषि पंचमी व्रत पूजा विधि और कथा](https://karmkandvidhi.in/hrishi-panchami/): भाद्र शुक्ल पंचमी को ऋषि पंचमी कहा जाता है। इस दिन व्रत पूर्वक अरुंधतिसहित सप्तर्षियों का पूजन करना चाहिये। पूजा करने के उपरांत कथा श्रवण करे और फिर विसर्जन दक्षिणा करे। इस व्रत का माहात्म्य चकित करने वाला है क्योंकि यह व्रत प्रायश्चित्तात्मक है। स्त्रियां जो रजस्वला संबंधी स्पर्शास्पर्श नियमादि का उल्लंघन करती हैं चाहे ज्ञात रूप से हो अथवा अज्ञात रूप से ऋषि पंचमी के प्रभाव से उस दोष का शमन हो जाता है। - [कर्मकांड की क्रमावली अर्थात पूजन क्रम, वेदी पूजन क्रम 1.2.3.](https://karmkandvidhi.in/vedipuja/): पूजा-अनुष्ठान-यज्ञादि संबंधी कर्म में अनेकानेक कर्म होते हैं और उनकी विशेष क्रियाविधि ही नहीं है, विशेष क्रम भी है और क्रम पूर्वक ही करना चाहिये। विस्तृत पूजा-अनुष्ठान-यज्ञ से लेकर सामान्य पूजा संबंधी, वेदी पूजन, क्रमों का इस आलेख में व्यापक वर्णन किया गया है जो कर्मकांड सीखने वालों के लिये बहुत ही उपयोगी है। - [क्षेत्रपाल मंडल पूजा - क्षेत्रपाल स्तुति मंत्र](https://karmkandvidhi.in/kshetrapal/): क्षेत्रपाल मंडल वायव्यकोण में स्थापित किया जाता है जिसमें अजर आदि 49 देवताओं की पूजा की जाती है। क्षेत्रपाल मंडल दिये गये चित्रानुसार बनाकर नीचे दिये गये मंत्रों से सबका पृथक-पृथक आवाहन करते पूजन करे। - [६४ योगिनी पूजा विधि - 64 Yogini](https://karmkandvidhi.in/yoginipujanmantr/): योगिनी पूजा विधि : योगिनी मंडल में आवाहन पूजन वामावर्त्त अर्थात अप्रदक्षिण/अपसव्य क्रम से किया जाता है। चतुःषष्टि योगिनी मंडल में आठ पंक्तियां होती है अतः आठ आवरणों में मंडल पूजा की जाती है। इस आलेख में योगिनी मंडल का आवाहन मंत्र और पूजा विधि दी गयी है। - [नवग्रह मंडल पूजा](https://karmkandvidhi.in/navagrahpuja/): सभी प्रकार के पूजा-हवनों में नवग्रह मंडल पूजा विशेष रूप से की जाती है। जब सामान्य पूजा कर रहे होते हैं अर्थात वेदियां नहीं बनाते हैं तब भी नाममंत्र से ही सही नवग्रह और दश दिक्पाल की पूजा करते ही हैं। लेकिन जब नवग्रह मंडल बनाकर पूजा की जाती है तो नवग्रह मंडल पर अधिदेवता-प्रत्यधिदेवता-पंचलोकपालादि का भी आवाहन-पूजन किया जाता है। - [चतुर्लिंगतो भद्र पूजन : प्रधान वेदी 2](https://karmkandvidhi.in/chaturlingatobhadr/): चतुर्लिंगतो भद्र पूजन : भगवान शिव की पूजा लिंग में की जाती है इसी प्रकार जब भगवान शिव की पूजा हेतु वेदी निर्माण का प्रसंग आता है तो उसमें भी लिंगतोभद्र बनाने का विधान है। अन्य सभी वेदियां एक से दो प्रकार की ही होती है, जिनमें से एक प्रकार ही प्रचलन में होता है। किन्तु बात जब लिंगतोभद्र की आती है तो इसके अनेक प्रकार होते हैं : एक लिंगतोभद्र, चतुर्लिंगतो भद्र, अष्टर्लिंगतो भद्र, द्वादशर्लिंगतो भद्र। - [सर्वतोभद्र मंडल वेदी - पूजन](https://karmkandvidhi.in/sarvatobhadrapujamantr/): सर्वतोभद्र मंडल सबसे मुख्य मंडल है जो सभी देवताओं की पूजा के लिये भी बनाया जा सकता है तथापि कुछ अन्य देवता विशेष वेदियां भी होती हैं। सर्वतोभद्र मंडल मुख्य रूप से भगवान विष्णु की पूजा में प्रयुक्त होता है। प्रधानवेदी प्रधानदेवता के अनुसार बनायी जाती है और सर्वतोभद्र विष्णु पूजा के लिये प्रधान वेदी होती है। इस पर ब्रह्मा सहित कुल 57 देवताओं का आवाहन-पूजन किया जाता है। - [वास्तु मंडल - पूजा](https://karmkandvidhi.in/vastupuja/): वास्तु मंडल के दो प्रकार देखे जाते हैं - यज्ञ-मंदिर आदि के लिये अलग प्रकार होता है एवं गृह में पूजन कर रहे हों तो उसका दूसरा प्रकार होता है। घर में पूजा करने वाले वास्तु मंडल में ८१ कोष्ठ होते हैं जिसपर ४५ देवताओं का आवाहन पूजन किया जाता है। - [सप्त घृत मातृका पूजन विधि - सप्तमातृका | 7 mothers shloka](https://karmkandvidhi.in/saptghritmatrikapuja/): षोडश मातृका पूजन के उपरांत सप्तघृत मातृका (सप्तमातृका) की पूजा और वसोर्द्धारा की जाती है। यद्यपि मिथिला में भित्ति, फलक आदि पर गोमय रक्षिका निर्मित करके ही षोडश मातृका पूजन करके श्री पूजन की पद्धति/परम्परा है। किन्तु कर्मकांड की विभिन्न पुस्तकों/पद्धतियों में सप्तघृत मातृका पूजा विधि और वसोर्द्धारा प्राप्त होती है। इस आलेख में सप्तघृत मातृका चक्र और पूजा विधि दी गयी है। - [षोडश मातृका पूजा विधि और मंत्र | 16 matrika](https://karmkandvidhi.in/shodashmatrikapuja/): मातृका पूजन वामावर्त क्रम अर्थात अप्रदक्षिण या अपसव्य क्रम से किया जाता है। षोडश मातृका वेदी के लिये पीढ़े में वस्त्र बांधकर उसपर 16 गेहूं पुञ्ज या रंगे चावलों का पुञ्ज बनाकर गणपति के लिये अतिरिक्त पुंज भी बनाये और चित्रानुसार क्रम से पूजन किया जाता है। इस आलेख में षोडश मातृकाओं के वैदिक मंत्र और पूजा विधि दी गयी है। - [नान्दीमुख श्राद्ध विधि pdf](https://karmkandvidhi.in/matrikapujavriddhishradh/): यदि नान्दीमुख श्राद्ध करनी हो तो मातृका पूजा व वसोर्द्धारा करे और यदि नान्दीमुख श्राद्ध नहीं हो रहा है तो मातृकापूजा न ही करे। वृद्धि श्राद्ध अथवा आभ्युदयिक श्राद्ध भी नान्दी श्राद्ध को ही कहा जाता है। नान्दीमुख श्राद्ध विधि pdf - [कलश स्थापना विधि और मंत्र - kalash sthapana 1st Day](https://karmkandvidhi.in/kalashsthapan/): कलश स्थापना विधि और मंत्र : कर्मकांड में सामान्यतः सभी पूजन-हवन आदि पूजा-अनुष्ठानों में कलशस्थापन पूजन करने का विधान है। मात्र कुछ कर्म ही ऐसे होते हैं जिनमें कलशस्थापन पूजन नहीं किया जाता है; जैसे : अन्त्यकर्म-श्राद्ध, कुछ व्रत की पूजा आदि। कलश स्थापन में एक विशेष नियम यह भी है कि रात्रि में कलश स्थापना का निषेध प्राप्त होता है, तथापि जिन कर्मों में कलश स्थापन आवश्यक होता है उन कर्मों के आरंभ में रात्रि में भी कलश स्थापन अवश्य ही किया जाता है भले ही अमंत्रक क्यों न करे। - [गणेशाम्बिका पूजन अर्थात गौरी गणेश पूजन विधि मंत्र | Ganeshambika Puja No 1](https://karmkandvidhi.in/ganeshambika/): गणेशाम्बिका पूजन अर्थात गौरी गणेश पूजन विधि मंत्र | Ganeshambika Puja : गौरी गणेश पूजा हेतु किसी पात्र में चावल भर कर उसपर कुंकुमादि से अष्टदल या स्वास्तिक बना लें। दो सुपारी में मौली लपेट कर उस पात्र में रख दें एक पात्र आगे में रख लें जिसमें जल-पंचामृत अर्पित करना है और आगे की विधि से पूजा करें । - [संकल्प विधि और मंत्र - Sankalp](https://karmkandvidhi.in/sankalp/): कर्मकांड में पूजा, पाठ, जप, हवन, अनुष्ठान, यज्ञ, प्राण प्रतिष्ठा, नित्यकर्म, नैमित्तिक कर्म, शांति कर्म, श्राद्ध किसी भी प्रकार का कोई भी कर्म हो कर्म से पूर्व उस कर्म का संकल्प करना आवश्यक होता है। संकल्परहित कर्म का औचित्य ही नहीं होता। संकल्प हेतु हेमाद्रि संकल्प जैसे विस्तृत संकल्प से लेकर अत्यंत लघु संकल्प का भी विधान पाया जाता है और कर्म-काल आदि के अनुसार विवेकानुसार संकल्प का प्रयोग किया जाता है। - [स्वस्तिवाचन मंत्र संस्कृत में - Swastiwachan No.1](https://karmkandvidhi.in/swastiwachan/): स्वस्ति अर्थात कल्याण, वाचन अर्थात बोलना, इस प्रकार स्वस्तिवाचन (Swastiwachan) अर्थात जिन वचनों/मंत्रों से कल्याण हो। वेद में कल्याणकारी ऋचाओं के समूह को भद्रसूक्त या स्वस्तिवाचन कहा जाता है। ब्राह्मण को विराट्पुरुष का शिर कहा गया है और ब्राह्मणों के वचन को विशेष महत्व दिया गया है। इस लिये वैदिक ब्राह्मणों द्वारा कल्याण की कामना से भद्रसूक्त का पाठ करना स्वस्तिवाचन कहलाता है। इस आलेख में हस्तस्वर सहित भद्रसूक्त अर्थात स्वस्तिवाचन मंत्र संस्कृत में दिया गया है। - [दिग्रक्षण : रक्षा विधान मंत्र या भूतोत्सारण, संक्षिप्त नित्यकर्म सहित, दिग्बंधन विधि](https://karmkandvidhi.in/digrakshan/): देव-दानवों का प्राकृतिक वैर है एवं असुरादि गणों का नैसर्गिक स्वभाव भी शुभ कर्मों में विघ्नादि उपस्थित करना है। इस कारण किसी भी प्रकार के पूजा-पाठ आदि करने से पूर्व रक्षा विधान किया जाता है। रक्षा विधान को ही दिग्रक्षण या अपसारन आदि भी कहा जाता है। - [दूध का दूध और पानी का पानी, गया श्राद्ध की गजब कहानी](https://karmkandvidhi.in/gaya-shraddh-kab/): गया श्राद्ध की शास्त्रों में अतिशय महत्वपूर्ण स्थान और माहात्म्य है। यहां तक कहा गया है कि पितरगण लालायित रहते हैं कि मेरे वंश में कोई गया श्राद्ध करे । गया श्राद्ध की महिमा का वर्णन करना संभव नहीं है और इस असीम महिमा के कारण लोगों की धारणायें भी शास्त्र-उल्लंघन करने वाली हो रही है। - [पितृपक्ष कब है 2024, तर्पण-श्राद्ध](https://karmkandvidhi.in/pitri-paksha-2024/): पितृपक्ष कब है : 2024 में पितृपक्षीय तर्पण-श्राद्ध का आरंभ 18 सितंबर 2024 बुधवार से ही होगा। अतः 2024 में पितृपक्षीय तर्पण-श्राद्धादि आश्विन कृष्ण अमावास्या 2 अक्टूबर बुधवार तक होगा। - [जीवित्पुत्रिका व्रत कथा - Jitiya Vrat Katha](https://karmkandvidhi.in/jitiya-vrat-katha/): जीवित्पुत्रिका व्रत कथा : स्त्रियां पुत्र और पति की दीर्घायु कामना से जितिया का कठिन व्रत किया करती हैं। यह व्रत इतना कठिन होता है कि सामान्य व्रतों की तुलना में अधिक काल तक उपवास करना पड़ता है और उसमें भी बड़ी बात है कि जल आदि का ग्रहण करना भी निषिद्ध होता है। - [जीवित्पुत्रिका व्रत पूजा विधि और मंत्र](https://karmkandvidhi.in/jitiya-puja-vidhi/): जीवित्पुत्रिका व्रत पूजा विधि : प्रदोषकाल में जीमूतवाहन की पूजा की जाती है। जितिया की पूजा विधि भी विशेष है जिसकी जानकारी आवश्यक है और सामान्य जनों को यह जानकारी नहीं दी जाती है। इस आलेख में जितिया पूजा विधि बताई गयी है। - [Jitiya 2024 : जीवित्पुत्रिका व्रत कब है](https://karmkandvidhi.in/jitiya-2024/): आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जीवित्पुत्रिका व्रत होता है जिसे जितिया व्रत भी कहा जाता है। स्त्रियां पति और पुत्र की लम्बी आयु के लिये जितिया व्रत करती हैं। जितिया व्रत का विधान सभी व्रतों से भिन्न है और यह व्रत सभी व्रतों में कठिन भी है। - [अगस्त्य अर्घ्य (अगस्त्यार्घ्य) दान विधि - agastya arghya](https://karmkandvidhi.in/agastyargh-dan-vidhi/): तर्पण नित्यकर्म है तथापि संध्या-तर्पणादि नित्यकर्म कुछ कर्मकाण्डी ब्राह्मणों तक ही सीमित रह गया है। अगस्त्य अर्घ्य देने के विषय में विधि यह है कि भाद्र पूर्णिमा को ऋषि तर्पण करने के पश्चात् अर्थात् पितृतर्पण से पूर्व अगस्त्य को अर्घ्य देना चाहिये। - [विश्वकर्मा पूजा विधि – विश्वकर्मार्चा : Vishwakrma puja 2024](https://karmkandvidhi.in/vishwakrma-puja-vidhi/): किसी पात्र में गंधादि से अष्टदल बनाकर उसपर अष्टवसुओं का आवाहन करे  : ॐ द्रोणमावा‌हयामि ॥ ॐ प्राणमावा‌हयामि ॥ ॐ ध्रुवमावाहयामि ॥ ॐ अर्कमावाहयामि ॥ ॐ अग्निमावाहयामि ॥ ॐ दोषमावाहयामि ॥ ॐ वास्तुमावा‌हयामि ॥ ॐ विभावसुमावा‌हयामि ॥ - [अनन्त व्रत कथा - Anant Vrat Katha](https://karmkandvidhi.in/anant-puja-katha/): भाद्र शुक्ल चतुर्दशी को अनंत व्रत - पूजा की जाती है और कथा श्रवण करके अनंत धारण किया जाता है। बात जब कथा श्रवण की आती है तो देववाणी अर्थात संस्कृत का विशेष महत्व व फल होता है। - [अनंत पूजा कब है 2024 - अनंत पूजा विधि](https://karmkandvidhi.in/anant-puja-vidhi/): संकल्प के उपरांत कलश में जल-गंध-पवित्री-पूगीफल-पल्लवादि देकर पूजन करे। कलश के ऊपर एक स्वर्ण-रजत अथवा ताम्र पात्र में चंदनादि से अष्टदल निर्माण करके रखे। उसपर कुशाओं से सात फनों वाला सर्पाकृति बनाकर रखे। उनके आगे चौदह ग्रंथि वाला अनंत रखे। फिर नवग्रह-दशदिक्पाल आदि का पंचोपचार पूजन करके अनंत भगवान की पूजा करे। - [महालक्ष्मी व्रत कथा - Mahalaxmi Vrat Katha](https://karmkandvidhi.in/mahalaxmi-vrat-katha/): पूजा करने के बाद प्रतिदिन कथा भी श्रवण करनी चाहिये। कथा श्रवण के विषय में जो महत्वपूर्ण तथ्य है वो यह है कि हिन्दी आदि अन्य स्थानीय भाषाओं में भाव समझने के लिये तो सुना जा सकता है किन्तु फलदायकता हेतु संस्कृत में ही श्रवण करनी चाहिये। - [महालक्ष्मी व्रत पूजा विधि - Mahalaxmi Vrat Puja](https://karmkandvidhi.in/mahalaxmi-vrat-puja/): संकल्प करने के बाद 16 बार जल से हाथ-मुंह और पैर का प्रक्षालन करे (धोये) तत्पश्चात 16 तंतु युक्त सुंदर धागे में 16 गांठ लगाये और चंदन-पुष्पादि से अलंकृत कर दे, सोलह दूर्वा भी पूजा में रखे। - [सिद्धिविनायक व्रत कथा - Siddhivinayak Vrat Katha](https://karmkandvidhi.in/siddhivinayak-katha/): सिद्धिविनायक व्रत कथा में भरद्वाज मुनि सूत से पूछते हैं कि विघ्नों का निवारण कैसे होगा। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा दिया गया उत्तर में सिद्धिविनायक की पूजा व्रत करने को कहा गया, जिससे नष्टराज्य की पुनर्प्राप्ति हो सकती है। सिद्धिविनायक की पूजा से सभी कार्यों की सफलता होती है और चाहे विद्या हो या धन, विजय या सौभाग्य, सब इच्छाएं पूर्ण होती हैं। - [सिद्धिविनायक पूजा विधि और मंत्र - siddhivinayak puja](https://karmkandvidhi.in/siddhivinayak-puja/): भाद्र शुक्ल चतुर्थी को सिद्धिविनायक की पूजा की जाती है। पूजा के लिये मध्याह्नकाल को प्रशस्त बताया गया है। यह तिथि वर्ष में एक बार ही उपलब्ध होती है किन्तु यदि भक्तिभाव हो तो अन्य दिनों में भी सिद्धिविनायक की पूजा की जा सकती है। - [चौरचन पूजा विधि मंत्र](https://karmkandvidhi.in/chaurchan-puja-vidhi/): पूजा से पहले नित्यकर्म किया जाता है। चौरचन पूजा यद्यपि पुरुष भी कर सकते हैं तथापि अधिकांशतः स्त्रियां ही करती है। स्त्रियों के लिये नित्यकर्म का तात्पर्य पंचदेवता व गौरी पूजा है। पूजा सूर्यास्त के बाद होती है इसलिये गणपत्यादि पंचदेवता और गौरी की पूजा करे। विधवा स्त्री गणपत्यादि पंचदेवता व विष्णु पूजा करे। तत्पश्चात संकल्प करके चतुर्थी चंद्र पूजा करे। - [चौरचन पूजा कब है 2024 : चतुर्थी (चौथ) चंद्र निर्णय](https://karmkandvidhi.in/chaurchan-kab-hai/): इस प्रकार दृश्य व अदृश्य दोनों पंचांगों के आधार पर प्रदोषकालीन चतुर्थी 6 सितम्बर 2024 शुक्रवार को उपलब्ध है और चतुर्थी चंद्र या चौरचन व्रत होना सिद्ध होता है। पंचांगों में भी इसी दिन चौरचन व्रत पूजा बताया गया है। - [हरितालिका तीज पूजा विधि और कथा](https://karmkandvidhi.in/teej-ka-mahatwa-aur-vrat-puja-katha/): पूजा का काल प्रदोषकाल ही होता है अतः प्रदोषकाल में ही पूजा करे। पवित्रीकरणादि करके सर्वप्रथम संकल्प करे। यदि चौदह वर्षों तक ही करना हो तो प्रथम वर्ष चौदह वर्ष करने का संकल्प करे, अन्य वर्षों में संकल्प करे। यदि 14 वर्ष से अधिक भी करना हो तो 14 वर्षों वाला संकल्प प्रथम वर्ष न करे। - [तीज त्यौहार : हरितालिका तीज का महत्व व व्रत-पूजा विधि](https://karmkandvidhi.in/teej-ka-mahatwa-aur-vrat-puja-vidhi/): जैसे दिन में आँखें मूंद लेने से रात नहीं हो जाती उसी तरह सत्य को नकारने मात्र से वह असत्य नहीं हो जाता। विधवा का नयी व्यवस्थानुसार पुनर्विवाह कर देने से जीवन में व्यस्तता तो आ जाती है किन्तु वैधव्य का दुःख समाप्त नहीं होता। हरितालिका तीज व्रत वैधव्य निवारण के लिये किया जाता है। - [तीज कब है 2024, हरतालिका तीज कब है](https://karmkandvidhi.in/teej-kab-hai-2024/): हरितालिका तीज के संबंध में दृश्य और अदृश्य में पंचांगों में तिथि काल में 3 घंटे का अंतर होते हुये भी दोनों ही प्रकार से 5 सितम्बर 2024 गुरुवार को द्वितीयायुता तृतीया है एवं 6 सितम्बर शुक्रवार को चतुर्थीयुता तृतीया है। 2024 में सभी प्रकार के पंचांगों से विचार करने पर भी 6 सितम्बर शुक्रवार को ही हरितालिका तीज व्रत सिद्ध होता है। - [कृष्ण जन्माष्टमी कब है ? जन्माष्टमी 2024](https://karmkandvidhi.in/janmashtami-kab-hai/): वेधसिद्ध अर्थात दृश्य पंचांगों द्वारा 26 अगस्त 2024 सोमवार को ही औदयिक व निशीथव्यापिनी दोनों अष्टमी उपलब्ध है, 27 अगस्त को तनिक भी नहीं है इस कारण 26 अगस्त सोमवार को ही जन्माष्टमी व्रत की सिद्धि होती है। - [रक्षाबंधन निर्णय 2024 : रक्षाबंधन कब करें विस्तृत जानकारी](https://karmkandvidhi.in/rakshabandhan-nirnay-2024/): यह सिद्ध होता है कि रक्षाबंधन व होलिका में भद्रा का पूर्ण त्याग करना चाहिये बिना किसी परिहार का विचार किये। चूंकि 19 अगस्त 2024 को भद्रा की समाप्ति 1:32 बजे मध्याह्न में हो रही है अतः मध्याह्न 1:32 के पश्चात् ही रक्षाबंधन करना चाहिये। - [लखि सुबेष जग बंचक जेऊ। बेष प्रताप पूजियउ तेहु॥](https://karmkandvidhi.in/bhakti-ki-shakti-part-three/): लखि सुबेष जग बंचक जेऊ। बेष प्रताप पूजियउ तेहु॥ : जनभावना और भारतीय परंपरा या व्यवहार यही है कि गांवों के लोग आज भी "न जाने किस वेश में नारायण मिल जाय" में विश्वास रखते हैं भले ही कितने ही पाखंडियों ने ठगा क्यों न हो। - [भक्ति की शक्ति भाग 2](https://karmkandvidhi.in/bhakti-ki-shakti-bhag-two/): भक्ति की शक्ति का वर्णन यदि भगवान भी करना चाहें तो बड़ी विकट स्थिति उत्पन्न हो जायेगी। भगवान स्वयं भी स्वयं का पूर्ण वर्णन नहीं कर सकते हैं और जैसे भगवान स्वयं का वर्णन नहीं कर सकते वैसे ही भक्ति की महिमा या शक्ति का वर्णन भी नहीं कर सकते। - [भक्ति की शक्ति भाग - 1](https://karmkandvidhi.in/bhakti-ki-shakti-part-one/): भक्ति की शक्ति : ये विज्ञान का अहंकार है जो चमत्कार को अस्वीकार करता है। ये विज्ञान की तानाशाही है जो ऐसे कानून बनवा देता है जिससे चमत्कार संबंधी वार्तालाप भी अपराध सिद्ध हो जाये। हमें उस कानून के बारे में विशेष ज्ञात तो नहीं कि वो कानून क्या कहता है और हमारा आलेख किसी प्रकार से उस कानून का उल्लंघन भी करता है या नहीं, तदपि यदि ऐसा कानून है जिसका इस आलेख से उल्लंघन हो रहा हो तो वो कानून गलत है उस कानून को बदलने की आवश्यकता है। - [भक्ति मार्ग की प्राचीनता](https://karmkandvidhi.in/bhaktimarg-ki-prachinata/): भक्ति मार्ग की प्राचीनता : भारत की संस्कृति और सनातन का इतिहास पुस्तकों में ही नहीं नदियों और पहाड़ों में भी लिखी हुयी है किन्तु यदि उसे झुठलाने का ही दुराग्रह लेकर इतिहास लिखा जाये तो ये षड्यंत्र के अतिरिक्त और कुछ नहीं माना जा सकता। आधुनिक भारतीय इतिहास को संवत से क्यों नहीं व्यक्त किया जा सकता ? - [सुख कैसे प्राप्त करें | सुख प्राप्ति के शाश्वत उपाय](https://karmkandvidhi.in/sukh-kaise-prapt-karen/): सुख कैसे प्राप्त करें : शांति प्राप्त करना सुख है, विश्राम करना सुख है। एक पथिक जो यात्रा (श्रम) कर रहा है वह दुःख प्राप्त कर रहा है; पैर दुखने लगता है, शरीर थक जाता है, मन व्यथित होने लगता है आदि-आदि। जब विश्राम करता है तो सुख का अनुभव करता है, जो दुःख भुगत रहा था उससे आराम मिलता है, पैर का दर्द मिलना बंद हो जाता है और दर्द दूर भी होने लगता है, शरीर की थकान दूर होने लगती है। यह सुख को समझने का एक उदहारण है। - [स्वर्ग नरक क्या है ? स्वर्ग नरक सब यहीं है, सुख ही स्वर्ग और दुःख नरक है](https://karmkandvidhi.in/swarg-narak-kya-hai/): स्वर्ग नरक क्या है : शास्त्रों में ऐसा प्रमाण नहीं है जो यह सिद्ध करता हो कि स्वर्ग और नरक कुछ भी पृथक नहीं है और संसार में ही स्वर्ग नरक है, ऐसा प्रमाण नहीं मिलता है कि सुख ही स्वर्ग है और दुःख ही नरक है। काव्यों में सुख की स्वर्ग से और दुःख की नरक से तुलना करने की परंपरा अवश्य रही है। - [कर्म का फल भोगना ही पड़ता है तो दुःख का कारण अज्ञान कैसे](https://karmkandvidhi.in/cause-of-sadness/): कर्म का फल : एक ओर कर्मफल के भुक्ति का प्रमाण है वहीं दूसरी ओर दुःख का कारण अज्ञान है ये प्रमाण है, परस्पर विरोधाभाषी प्रतीत होता है, यदि कर्मफल के कारण सुख-दुःख की प्राप्ति होती है तो फिर अज्ञान कैसे कारण सिद्ध होता है। वहीं कर्म के विषय में भी ऐसा प्रमाण है कि बिना भोगे कर्म का क्षय नहीं होता है तो दूसरी ओर पाप नाश का भी प्रमाण है और अनंत कथायें हैं जिसमें भगवान की कृपा से पाप का नाश भी होता है यह सिद्ध होता है। - [क्या संसार में कोई सुखी नहीं है, दुःख के प्रकार](https://karmkandvidhi.in/why-are-u-sad-3/): दुःख के प्रकार : "आहार निद्रा भय मैथुनं च" ये चार चीजें सभी प्राणियों में समान रूप से ही पायी जाती है। इन चार चीजों के कारण मनुष्य अन्य किसी प्राणियों से तनिक भी भिन्न नहीं है तथापि भिन्न है भी। ये भिन्नता वर्त्तमान युग में अत्यधिक दिखती है। - [जन्म दुःखं जरा दुःखं : दुःख ही जनम भेल दुःख ही गंवाओल, सुख सपनेहुं नहीं भेल](https://karmkandvidhi.in/why-are-u-sad-2/): जन्म दुःखं जरा दुःखं : धर्मराज युधिष्ठिर, गांडीवधारी अर्जुन, गदाधारी भीम, भाला वाला नकुल सहदेव, साथ में सहयोगी थे साक्षात् नारायणावतार भगवान श्रीकृष्ण। लेकिन कितना दुःख झेला था ये तो सोचो ? इनको दुःख क्यों मिला ? इन्हें तो संसार के सर्वश्रेष्ठ सुखी व्यक्तियों में जाना जाया चाहिये था। इनके जीवन चरित्र का अवलोकन करो और ज्ञात करो कब सुख भोगा था। - [आप दुःखी क्यों हैं - why are u sad](https://karmkandvidhi.in/why-are-u-sad/): why are u sad : संसार का एक नाम ही दुःखालय है। जैसे पुस्तकालय में पुस्तक मिलता है, औषधालय में औषधि, चिकित्सालय में चिकित्सा, विद्यालय में विद्या, वस्त्रालय में वस्त्र उसी प्रकार दुःखालय में क्या होगा या मिलेगा यह समझना अधिक कठिन नहीं है, समस्या इसे मानने और न मानने की है। - [जागते रहो : सच्चे बाबा और पाखंडी बाबा को कैसे पहचाने](https://karmkandvidhi.in/real-and-fake-baba/): दूध के धुले नेता और दूध की धुली मीडिया लालटेन लेकर ढूंढने पर भी नहीं मिलेंगे लेकिन सच्चे बाबा की कमी नहीं है हां कुछ पाखंडी भी अपना व्यापार चला रहे हैं और उन पाखंडियों से सच्चे बाबा स्वयं भी त्रस्त हैं क्योंकि कभी बाबा को चोर समझकर पीटा जाता है तो कभी कुछ और समझकर। कई जगहों पर झूठा आधार कार्ड बनाकर मुसलमान भी बाबा बना हुआ पकड़े जाते रहे हैं। - [जागते रहो : बाबाओं का लगा है मेला, हो रहा है ठेलम-ठेला](https://karmkandvidhi.in/narrator-or-robber/): यत्र-तत्र-सर्वत्र उन चोर-उचक्कों ने वेष बदल कर, तिलक लगाकर, मालाओं का बोझ उठाते हुये बाबाओं का रूप धारण कर लिया है और इनसे बचाने वाला कोई नहीं है। जो भी हैं इनका सहयोग ही करते हैं चाहे मीडिया हो या राजनीति, सिस्टम हो या इको सिस्टम ! सबकी मोटी कमाई होती है, किसी को नोट मिलता है तो किसी को वोट। - [मंगल शांति के उपाय | मंगल शांति पूजा 5th](https://karmkandvidhi.in/mangal-shanti/): मंगल शांति के उपाय : मंगल शांति का तात्पर्य है मंगल के अशुभ फलों के निवारण की शास्त्रोक्त विधि। यदि मंगल निर्बल हो तो सबल करने के लिये मूंगा आदि धारण करना लाभकारी होता है। किन्तु यदि मंगल के कोई अशुभ प्रभाव हों तो उसका निवारण रत्न धारण करना नहीं होता, अशुभ प्रभाव का निवारण करने के लिये शांति ही करनी चाहिये। - [एक्सीडेंटल हिन्दू जवाहर लाल नेहरू के परनाती, फिरोज खान का पोता राहुल गांधी क्या हिन्दू है](https://karmkandvidhi.in/rahul-gandhi-hates-hindus/): हिंदूद्रोही राहुल गांधी के अक्षम्य अपराध और हिन्दुओं से असीमित घृणा रखने के कारण इसे एक ही शब्द से सम्बोधित किया जाना चाहिये वो शब्द हिन्दुद्रोही है। ये सम्मान का पात्र नहीं है भले ही कितने भी बड़े पद पर हो, इसके लिये सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करना अनुचित है। - [ये कौन लोग मंदिरों में जमे हुये हैं जब-जैसे जो करे पूजा करा देते हैं](https://karmkandvidhi.in/amit-shah-in-kashi/): किन्तु पुनः प्रश्न है कि ज्ञाननगरी काशी में भगवान विश्वनाथ मंदिर में भी ऐसे ब्राह्मण किस प्रकार जमे हुये हैं जो बिना धोती-धारण किये पूजा करा रहे थे ? अमित शाह ने एक हाथ से प्रणाम किया, तो ब्राह्मणों ने बताया क्यों नहीं कि दोनों हाथ से प्रणाम करें ? - [दशाश्वमेध घाट पर मोदी का गंगा पूजन और समझने वाली गंभीर तथ्य](https://karmkandvidhi.in/ganga-puja-modi/): आज मोदी ने लोकसभा चुनाव के लिये तीसरी बार मुक्तिधाम काशी से अपना नामांकन कराया, जिसका आरम्भ दशाश्वमेध घाट पर गंगा पूजन करके किया। इस आलेख में सकारात्मक तथ्य तो उजागर किया ही गया है साथ ही नकारात्मक पक्ष जो कोई नहीं उठाने वाला है उजागर किया गया है और अपेक्षा की जाती है कि आगे से ऐसी त्रुटियां देश को देखने न मिले। मोदी ने दशाश्वमेध घाट पर गंगा पूजन किया मोदी ने लगभग 15 मिनट 9:35 से 9:50 प्रातः तक 7 ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार पूर्वक गंगा पूजन किया। फिर क्रूज पर सवार होकर नमो घाट के लिये प्रस्थान किया।... - [चंद्र ग्रह शांति विधि | कमजोर चंद्रमा के लक्षण और उपाय 4th](https://karmkandvidhi.in/chandra-shanti/): चंद्र ग्रह शांति विधि : हम सभी जानते हैं कि चन्द्रमा मन का कारक है और चन्द्रमा यदि अशुभ हो तो क्या-क्या दुष्परिणाम होते हैं ? मुख्य रूप से चन्द्रमा मन को ही प्रभावित करता है एवं कमजोर चंद्रमा के लक्षण और उपाय समझने के लिये पूर्व में ही आलेख प्रकाशित किया - [सूर्य ग्रह शांति | surya shanti](https://karmkandvidhi.in/surya-shanti/): सूर्य ग्रह शांति - रत्नादि धारण का तात्पर्य निर्बल ग्रह को बलयुक्त करना। अर्थात रत्नादि धारण करने का तात्पर्य अनिष्टफलों का निवारण करना नहीं होता है, तथापि किञ्चित लाभ अवश्य प्राप्त होता है। - [नवग्रह शांति पूजा विधि - navgrah shanti puja 2nd](https://karmkandvidhi.in/navgrah-shanti-puja/): नवग्रह शांति पूजा विधि - कोई भी ग्रह न तो सदा शुभ फल प्रदान करते हैं न ही सदा अशुभ फल प्रदान करते हैं अर्थात सभी ग्रहों के शुभाशुभ मिश्रित फल होते ही हैं। नवग्रह शांति का तात्पर्य किसी एक अशुभ ग्रह की शांति नहीं है, अपितु सभी ग्रहों की शांति है। - [नवग्रह शांति उपाय - navagrah : 1st](https://karmkandvidhi.in/navagrah/): नवग्रह शांति उपाय - ग्रहाः राज्यं प्रयच्छन्ति ग्रहाः राज्यं हरन्ति च .... इस आलेख में नवग्रह शांति के विभिन्न उपायों पर प्रकाश डाला गया है और साथ-साथ नवग्रहों के वैदिक मंत्र, तांत्रिक मंत्र, नवग्रह स्तोत्र आदि दिया गया है। - navagrah - [क्या आप दृष्टिकोण का अर्थ जानते हैं ? दृष्टिकोण के प्रकार, उपादेयता समग्र जानकारी](https://karmkandvidhi.in/drishtikon/): दृष्टिकोण का अर्थ : दृष्टिकोण में दो शब्द हैं दृष्टि और कोण। दृष्टि का अर्थ देखना है और कोण का अर्थ एक आंशिक भाग होता है। प्रत्यक्ष नेत्रों से भी जब हम किसी वस्तु को देखते हैं तो वह आंशिक भाग ही दिखता है सम्पूर्ण नहीं। - [उपनयन संस्कार और व्रात्य](https://karmkandvidhi.in/vratya/): उपनयन संस्कार और व्रात्य, व्रात्य का अर्थ - ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य तीनों वर्णों के लिये यज्ञोपवीत की एक सुनिश्चित अवधि है, व्रात्य का अर्थ होता है उस अवधि का अतिक्रमण हो जाना। निर्धारित अवधी व्यतीत हो जाने पर जिस व्यक्ति का उपनयन नहीं होता अथवा 10 संस्कारों का लोप हो जाता है उसे व्रात्य कहा जाता है । - [मन की बात मोदी जी के साथ](https://karmkandvidhi.in/man-ki-bat/): मोदी जी तो लगातार कई वर्षों से मन की बात करते आ रहे हैं; आज इस आलेख में हम अपने मन की बात मोदी जी के साथ करेंगे। - [रजस्वला स्त्री का अर्थ | काल, नियम इत्यादि सम्पूर्ण जानकारी](https://karmkandvidhi.in/rajaswala/): रजस्वला स्त्री का अर्थ | काल, नियम इत्यादि सम्पूर्ण जानकारी - रजस्वला के सन्दर्भ में कई प्रश्न आते हैं। इस आलेख में पौराणिक आख्यानों, शास्त्रोक्त प्रमाणों का आधार ग्रहण करते हुये रजस्वला के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी देते हुये रजस्वला स्त्री होने का क्या अर्थ है, रजस्वला स्त्री के लिये शास्त्रों में क्या-क्या नियम बताये गये हैं, क्या-क्या दोष कहा गया है, कालमान क्या होता है इत्यादि कई महत्वपूर्ण प्रश्नों का उत्तर भी दिया गया है। - [उपनयन संस्कार मुहूर्त 2024](https://karmkandvidhi.in/upnayan-sanskar-muhurt-2024/): उपनयन संस्कार मुहूर्त 2024 - उपनयन संस्कार मुहूर्त से मुख्य तात्पर्य उपनयन संस्कार ही होता है, किन्तु उपनयन संस्कार मुहूर्त में ही उपनयन के साथ मुंडन, वेदारम्भ और समावर्तन भी किये जाते हैं। - [मुंडन संस्कार मुहूर्त 2024 - mundan muhurat](https://karmkandvidhi.in/mundan-muhurat/): मुंडन संस्कार मुहूर्त 2024 - 8 जुलाई 2024, सोमवार, आषाढ़ शुक्ल तृतीया, नक्षत्र पुष्य 6:02 am तक। 12 जुलाई 2024, शुक्रवार, आषाढ़ शुक्ल (षष्ठी) सप्तमी में 12:32 pm से, नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी और हस्त दोनों प्रशस्त। - [हेमाद्रि संकल्प प्रयोग - विस्तृत संकल्प (Sankalp 2)](https://karmkandvidhi.in/hemadri-sankalp/): हेमाद्रि संकल्प बृहद् होने के कारण सामान्यतः प्रयोग नहीं किया जाता है किन्तु, प्रयास करना चाहिये। इसमें भारत का विशद विवरण किया गया है और जो लोग भारत को किसी मुगल या आक्रमणकारी से जोड़कर सिद्ध करने का प्रयास करते हैं उनको इसका विशेष रूप से अध्ययन करना चाहये। - [समावर्तन संस्कार - samavartan sanskar](https://karmkandvidhi.in/samavartan-sanskar/): समावर्तन संस्कार - सामान्य जन एक ही दिन में उपनयन के उपरान्त प्रतीकात्मक रूप से वेदारम्भ और पारायणरहित ही समावर्तन करते हैं। - [कैसे करते हैं वेदारम्भ संस्कार - vedarambh](https://karmkandvidhi.in/vedarambh/): वेदारम्भ संस्कार - वेदाध्ययन का मूल स्वरूप गुरुकुल में आचार्य से दीक्षित होकर ब्रह्मचर्यधारण पूर्वक सभी नियमों का पालन करते हुये वेदाध्ययन करना है। सामान्य जनों की वेदाध्ययन से निवृत्ति हो गयी है। - [क्या आप उपनयन संस्कार के इन महत्वपूर्ण तथ्यों को जानते हैं - upnayan sanskar](https://karmkandvidhi.in/upnayan-sanskar/): उपनयन संस्कार (upnayan sanskar) - उपनयन के द्वारा इन तीनों वर्णों का नया जीवन आरम्भ होता है जिसमें गायत्री, वेद, यज्ञ आदि का अधिकार प्राप्त होता है। उपनयन होने के बाद ही उपनीत को श्रौत और स्मार्त कर्म का अधिकार प्राप्त होता है। - [क्या है मुंडन संस्कार ? विधि और मंत्र - चूडाकरण - mundan](https://karmkandvidhi.in/mundan/): मुंडन संस्कार - विशेष विधि से केशाधिवासन पूर्वक संस्कार की प्रक्रिया से हवनादि करके प्रथम बार मुंडन किया जाता है तो वह चूडाकरण कहा जाता है। - [उपनयन संस्कार विधि - वाजसनेयी](https://karmkandvidhi.in/upnayan-sanskar-vidhi/): उपनयन संस्कार विधि - यद्यपि उपनयन एक ही संस्कार है तथापि युगव्यवस्था से उपनयन में एक साथ 4 संस्कार सम्पन्न किया जाता है :- चूडाकरण, उपनयन, वेदारंभ व समावर्तन । - [क्या आप हनीमून का हिंदी अर्थ जानते हैं | हनीमून क्या होता है ?](https://karmkandvidhi.in/honeymoon/): हनीमून क्या होता है : हनीमून - "वास्तविक भारतीय वो नहीं है जिसनें भारत में जन्म लिया है, वास्तविक भारतीय वो है जिसके विचार भी भारतीय हैं, आलेख को समझने हेतु भारतीय विचार होना अनिवार्य है" - [विवाह मुहूर्त - Vivah Muhurt](https://karmkandvidhi.in/vivah-muhurt-2/): विवाह मुहूर्त 2024 - 2024 के विभिन्न महीनो में प्राप्त सभी शुद्ध विवाह मुहूर्त दिये गए हैं। यहां जो विवाह मुहूर्त या विवाह दिन दिया गया है वह गौणकाल का विचार करके ही दिया गया है। गौणकाल से तात्पर्य है न्यूनतम शुद्धाशुद्ध काल, मास, पक्ष, तिथि, नक्षत्र, वार का विचार। - [विवाह सामग्री लिस्ट - vivah samagri](https://karmkandvidhi.in/vivah-samagri/): विवाह सामग्री लिस्ट - vivah samagri : यहाँ वाग्दान विधि से लेकर चतुर्थी कर्म तक की सामग्री सूचियां विभागशः दिया गया है : वर का वस्त्र, कांस्य स्थाली (जाम), जलपात्र, स्थाली, चावल (धान), सुंदर वस्त्र, हरिद्रा गांठ, पुंगीफल, पान, यज्ञोपवीत, दूर्वा, फल, द्रव्य, चांदी का सिक्का-पान-मछली-सुपारी, दधि, हरिद्रा चूर्ण आदि। - [कैसे करते हैं चतुर्थी का विवाह - chaturthi vidhi](https://karmkandvidhi.in/chaturthi-vidhi/): चतुर्थी का विवाह - सम्प्रदाने भवेत्कन्या घृतहोमे सुमङ्गली । वामभागे मवद्भार्या पत्नी चतुर्थीकर्मणि ॥ दान करने मात्र से कन्या, घृतहोम करने के पश्चात् सुमङ्गली, वाम भाग में स्थित होने से भार्या और चतुर्थी कर्म के पश्चात् पत्नी संज्ञा होती है। - [विवाह पद्धति | विवाह विधि और मंत्र | जयमाला विधि सहित - वाजसनेयी - vivah vidhi](https://karmkandvidhi.in/vivah-vidhi/): विवाह पद्धति - vivah vidhi : धूआ-पानी, जयमाला विधि आदि कई महत्वपूर्ण विधियों को समाहित करने से उपरोक्त विवाह विधि विशेष उपयोगी सिद्ध होती है। ..... vivah vidhi - [लग्न पत्रिका कैसे लिखें | प्रारूप | lagn patrika](https://karmkandvidhi.in/lagn-patrika/): लग्न पत्रिका कैसे लिखें : लग्न पत्रिका (lagn patrika) लेखन में विवाह के लिये शुभ लग्न निश्चय करना आवश्यक होता है। शुभ लग्न निश्चय करने के बाद तदनुसार मासादि का उल्लेख किया जाता है। - [विनायक शांति पूजा विधि | vinayak shanti](https://karmkandvidhi.in/vinayak-shanti/): विनायक शांति पूजा विधि | vinayak shanti - उपनयन-विवाहादि-निर्विघ्नता हेतु संकल्प : ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः श्रीमद् भगवतो ............ विनायकशांति करिष्ये ॥ मुंडन, उपनयन, विवाह, गृहारम्भ, गृहप्रवेश आदि में भी निर्धारित काल में यदि विघ्न उपस्थित हो जाये अथवा - [वर वरण विधि | सगुन - sagun | हस्त ग्रहण वाग्दान कैसे करें](https://karmkandvidhi.in/sagun-vidhi/): वर वरण विधि | सगुन - sagun | हस्त ग्रहण वाग्दान कैसे करें ? वाग्दान विधि : अव्यंगेऽपतितेऽक्लीवे दशदोष विवर्जिते । इमां कन्यां प्रदास्यामि देवाग्नि द्विज सन्निधौ ॥ .......... शर्माणं (यथायोग्य) वरं कन्या प्रतिगृहीतृत्वेन त्वामहं वृणे॥ - [कैसे बनता है विवाह मुहूर्त ? विवाह संबंधी सभी महत्वपूर्ण जानकारी](https://karmkandvidhi.in/vivah-muhurt/): विवाह मुहूर्त - दिन की भांति रात्रि के 15 मुहूर्ताधिपति क्रमशः इस प्रकार होते हैं -  ईश्वर (शिव), अजैकपाद, अहिर्बुध्न्य, पूषा, अश्विनी कुमार, यमराज, अग्नि, ब्रह्मा (धाता), चन्द्रमा, अदिति, बृहस्पति, विष्णु, सूर्य, त्वष्टा, समीरण (वायु) - रात्रौ पंचदशेश्वराज .. - [विवाह क्या है, अर्थ, परिभाषा, प्रकार, उद्देश्य, बाल विवाह आदि की विस्तृत जानकारी - Vivah](https://karmkandvidhi.in/vivah/): विवाह गार्हस्थ जीवन का द्वार है और सृष्टि को अनवरत रखने में अपनी भूमिका निर्वहन करने के लिये अनिवार्य होता है। विवाह किये बिना किसी व्यक्ति के गृहस्थ आश्रम का प्रारम्भ नहीं होता। - [महामृत्युंजयष्टक](https://karmkandvidhi.in/mahamrityunjay-ashtakam/): किसी भी भगवान की आराधना में स्तोत्र का भी महत्वपूर्ण स्थान होता है। स्तोत्रों में अष्टक का विशेष महत्व होता है। सभी देवताओं के विभिन्न स्तोत्रों के साथ ही उनके अष्टक स्तोत्र भी होते है। इसी प्रकार महामृत्युंजय भगवान का भी अष्टक स्तोत्र है। इस आलेख में महमृत्युञ्जय अष्टक दिया गया है। - [महामृत्युंजय कवच हिन्दी अर्थ सहित](https://karmkandvidhi.in/mahamrityunjay-kavach/): महामृत्युंजय कवच रुद्रयामल तंत्र में वर्णित है।महामृत्युंजय कवच का पाठ, श्रवण और यंत्र में धारण करने का विधान है। महामृत्युंजय कवच pdf डाउनलोड - [महामृत्युंजय जाप कितने दिन का होता है](https://karmkandvidhi.in/mahamrityunjay-jap-kitane-din/): महामृत्युंजय जाप कितने दिन का होता है - महामृत्युंजय जप को पहले दो भागों में बांटेंगे तब यह सही-सही समझा जा सकता है। स्वयं करना और ब्राह्मणों द्वारा कराना; इन दोनों को विभक्त रूप से समझने पर ही दिन संख्या निर्धारित की जा सकती है। - [महामृत्युंजय जप करने की सम्पूर्ण विधि और जानकारी - mahamrityunjay jaap](https://karmkandvidhi.in/mahamrityunjay-jaap/): महामृत्युंजय जप - यदि स्वयं/सपरिवार के निमित्त जप करना हो तो त्रिकुशा, तिल, जल, पुष्प, चन्दन, द्रव्य आदि लेकर इस प्रकार संकल्प करे : ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः श्रीमद् भगवतो महापुरूषस्य,विष्णुराज्ञया ...... महामृत्युंजय जप विधि pdf डाउनलोड - [क्या आप तीर्थ यात्रा के महत्वपूर्ण तथ्यों को जानते हैं - tirth yatra](https://karmkandvidhi.in/tirth-yatra/): तीर्थ यात्रा : वह यात्रा जो पापनिवृत्ति और पुण्य प्राप्ति के उद्देश्य से विधि पूर्वक की जाती है जिसमें तीर्थदर्शन, मुण्डन, स्नान, पूजन, पितरों का पिण्डदान, दान, ब्राह्मण भोजन आदि किया जाता है, तीर्थ यात्रा कहलाती है। - [धर्म का त्याग कब कर सकते हैं ?](https://karmkandvidhi.in/lokviruddh/): लोकविरुद्ध होने पर धर्म के त्याग की छूट का तात्पर्य अधर्म या शास्त्रविरुद्ध करने की छूट नहीं है। "यद्यपि शुद्धं लोक विरुद्धम्। नाऽचरणीयं नाऽचरणीयं" का अर्थ यद्यपि शुद्ध हो अर्थात सही हो किन्तु लोक विरुद्ध हो अर्थात हानिकारक हो या हानि संभावित हो तो वह वैसा आचरण मत करो वह कर्म मत करो। - [महामृत्युंजय स्तोत्र pdf सहित - Maha mrityunjaya Stotra](https://karmkandvidhi.in/maha-mrityunjaya-stotra/): महामृत्युंजय स्तोत्र pdf सहित - Maha mrityunjaya Stotra - महामृत्युंजय स्तोत्र के दो प्रकार पाये जाते हैं एक मार्कण्डेयकृत और दूसरा लोमशकृत । यहाँ दोनों प्रकार के महामृत्युंजय स्तोत्र दिये गये हैं जिससे महामृत्युंजय उपासना में अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। - [महामृत्युंजय जाप सामग्री - maha mrityunjaya jaap samagri](https://karmkandvidhi.in/mahamrityunjay-jap-samagri/): महामृत्युंजय जाप सामग्री - maha mrityunjaya jaap samagri : कलश - 5, ढकनी - 7, ताम्र कलश - 1, कांस्य कलश - 1 (पुण्याहवाचन हेतु) नारियल (पानी वाला) - 5 - [मीडिया की भूमिका एवं समस्याएं और ग्रामीण संस्कृति पर घातक प्रभाव - impact of media](https://karmkandvidhi.in/impact-of-media/): 10 वर्षों से ऐसा लग रहा है जैसे देश में मात्र 1 मुख्यमंत्री केजरीवाल था और अब आगे भी संभावना यही है कि केजरीवाल की जगह लेने वाला ही देश का मुख्यमंत्री दिखाया जायेगा, जैसे दिल्ली का मुख्यमंत्री न हो भारत का मुख्यमंत्री हो। - [मातृ षोडशी विधि - matru shodashi](https://karmkandvidhi.in/matru-shodashi/): मातृ आवाहन : करबद्ध होकर आवाहन करे - आगर्भज्ञानपर्यन्तं पालितो यत्त्वया ह्यहम् । आवाह्यामि त्वां मातर्दर्भपृष्ठे तिलोदकैः ॥ - [तीर्थ श्राद्ध करने की विधि और मंत्र - tirth shradh](https://karmkandvidhi.in/tirth-shradh/): तीर्थ श्राद्ध करने की विधि - तीर्थ श्राद्ध संकल्प : तदुत्तर त्रिकुशा, तिल, जल, द्रव्य आदि संकल्प द्रव्य लेकर संकल्प करे : ॐ अद्य ........ मासे ........ पक्षे ........ तिथौ ........ वासरे ........ गोत्रस्य ........ शर्माऽहं/(वर्माऽहं/गुप्तोऽहं) - [भागवत सप्ताह विधि श्राद्ध में कैसे करें सम्पूर्ण जानकारी - bhagwat saptah](https://karmkandvidhi.in/bhagwat-saptah-shraddh-me/): भागवत सप्ताह विधि - संकल्प : ॐ अद्य .......... गोत्रस्य ........... प्रेतस्य सद्गतिपूर्वक वैकुण्ठपदप्राप्तये .......... bhagwat saptah - [नारायण बलि करने की विधि और मंत्र - narayan bali](https://karmkandvidhi.in/narayan-bali/): नारायण बलि करने की विधि और मंत्र - narayan bali : दुर्मरण होने पर दुर्मरण शांति हेतु नारायणबलि श्राद्ध करने का विधान मिलता है। इस आलेख में नारायण बलि श्राद्ध करने की विधि और मंत्र दिये गये हैं। - [श्राद्ध का भोजन करना चाहिए या नहीं शास्त्र क्या कहता है](https://karmkandvidhi.in/shraddh-bhojan-karen-ya-nahi/): श्राद्ध का भोजन करना चाहिए या नहीं - स्नानंसचैलं तिलमिश्रकर्म प्रेतानुयानं कलशप्रदानम् ॥ अपूर्वतीर्थामरदर्शनंच विवर्जयेन्मंगलतोब्दमेकम् ॥ - विवाहादि मङ्गल कार्य के वर्षमध्य में - [पंचक शांति पूजन सामग्री ](https://karmkandvidhi.in/panchak-shanti-puja-samagri/): पञ्चक शांति पूजन का तात्पर्य है पञ्चक में हुई मृत्यु दोष के शांति हेतु की जाने वाली पूजा-हवन विधि। यहां दी गयी सामग्री सूचि पञ्चक में हुयी मृत्यु के लिए की जाने वाली शांति विधि के लिये ही है। - [पंचक शांति पूजन विधि pdf सहित - panchak shanti puja](https://karmkandvidhi.in/panchak-shanti-puja/): अद्यैतस्य ………. मासे ……… पक्षे ……… तिथौ ……… वासरे ……… गोत्रोत्पन्नः ……… शर्माऽहं/(वर्माऽहं/गुप्तोऽहं) धनिष्ठादिपञ्चकनक्षत्रान्तर्गत ........... नक्षत्राधिकरणक दुर्मरणजन्य दोष शान्त्यर्थं सर्वारिष्ट निरसन पूर्वक मम गृहे सर्वेषां बालादीनां दीर्घायुरारोग्यसुख प्राप्त्यर्थं पञ्चकमरणशान्तिमहं करिष्ये॥ - [त्रिपिंडी श्राद्ध पद्धति - छन्दोगी प्रेतश्राद्ध बहुवचन प्रयोग पूर्वक - प्रेत बाधा निवारण के उपाय](https://karmkandvidhi.in/tripindi-shraddh-chandog/): जिन घरों में श्राद्ध सही विधि से नहीं किया जाता उनके पितर अतृप्त होकर कुपित हो जाते हैं। किसी भी प्रकार से यदि पितृ दोष ज्ञात हो तो त्रिपिंडी श्राद्ध करना चाहिये। जब प्रेत बाधा हो और किसी प्रकार से शांत न हो रही हो तो उस स्थिति में त्रिपिण्डी श्राद्ध करना चाहिये। - [त्रिपिंडी श्राद्ध विधि - वाजसनेयी प्रेतश्राद्ध बहुवचन प्रयोग पूर्वक - प्रेत बाधा से मुक्ति के उपाय](https://karmkandvidhi.in/tripindi-shraddh-ptret-wajasaneyi/): प्रेत बाधा से मुक्ति के उपाय में त्रिपिण्डी श्राद्ध का प्रमुख स्थान आता है। अज्ञात नामगोत्र वाले प्रेत के लिये अज्ञात नामगोत्र से सात्विक, राजसिक और तामसिक प्रेत कहकर बहुवचन में श्राद्ध किया जाता है। - [विष्णु तर्पण विधि - त्रिपिंडी श्राद्धोपयोगी - vishnu tarpan](https://karmkandvidhi.in/vishnu-tarpan/): विष्णुतर्पण करने के लिए ताम्बे/मिट्टी के पात्र में जल, दूध, तिल, जौ, तुलसी, सर्वोषधि, चन्दन, फूल, फल रखकर तर्पण जल बना ले। एक अन्य पात्र में शालिग्राम को रखे। सव्य-पूर्वाभिमुख दाहिने हाथ में शंख लेकर उसी जल से शालिग्राम पर जल गिराते हुये विष्णु-तर्पण करे। पहले पुरुषसूक्त की 16 ऋचाओं को पढ़कर प्रत्येक मन्त्र के अन्त में "विष्णुं तर्पयामि" कहकर जल दे । - [यहां पढ़ें छिन्नमस्ता सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - chinnamasta sahasranama](https://karmkandvidhi.in/chinnamasta-sahasranama/): यहां पढ़ें छिन्नमस्ता सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - chinnamasta sahasranama : यहां श्रीविश्वसारतन्त्रोक्त छिन्नमस्ता सहस्रनाम स्तोत्र (chinnamasta sahasranama stotram) संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़ें छिन्नमस्ता अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - chinnamasta ashtottara shatanama stotram](https://karmkandvidhi.in/chinnamasta-ashtottara-shatanama-stotram/): यहां पढ़ें छिन्नमस्ता अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - chinnamasta ashtottara shatanama stotram : यहां छिन्नमस्ता अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र (chinnamasta ashtottara shatanama stotram) संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़ें छिन्नमस्ता हृदय स्तोत्र संस्कृत में - chinnamasta hridaya stotra](https://karmkandvidhi.in/chinnamasta-hridaya-stotra/): यहां पढ़ें छिन्नमस्ता हृदय स्तोत्र संस्कृत में - chinnamasta hridaya stotra : माता छिन्नमस्ता जो कि दशमहाविद्या में से एक हैं,सकल चिंताओं का अंत करती है और मन में चिन्तित हर कामना को पूर्ण करती हैं; इसलिए उन्हें चिंतपुरणी या चिंतापुरणी भी कहा जाता है। हिमाचल प्रदेश में देवी छिन्नमस्ता का एक प्रसिद्ध मंदिर भी जो चिंतपुरणी मंदिर नाम से जाना जाता है। यहां छिन्नमस्ता हृदय स्तोत्र (chinnamasta hridaya stotra) संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़ें छिन्नमस्ता कवच स्तोत्र संस्कृत में - maa chinnamasta kavach](https://karmkandvidhi.in/maa-chinnamasta-kavach/): यहां पढ़ें छिन्नमस्ता कवच स्तोत्र संस्कृत में - maa chinnamasta kavach : यहां छिन्नमस्ता कवच स्तोत्र (maa chinnamasta kavach) संस्कृत में दिया गया है। यह कवच भैरव-भैरवी संवाद रूप में भैरवतंत्र में वर्णित है जिसे त्रैलोक्यविजय नामक कवच भी कहा जाता है। - [यहां पढ़ें छिन्नमस्ता स्तोत्र संस्कृत में - maa chinnamasta stotra](https://karmkandvidhi.in/maa-chinnamasta-stotra/): यहां पढ़ें छिन्नमस्ता स्तोत्र संस्कृत में - maa chinnamasta stotra : यहां सर्वप्रथम माता छिन्नमस्ता के अनेकानेक ध्यान मंत्र दिये गये हैं तत्पश्चात अत्यंत प्रभावशाली ब्रह्मकृतं छिन्नमस्तास्तोत्रम् जिसे छिन्नमस्ता स्तवराज के नाम से भी जाना जाता है दिया गया है तत्पश्चात शंकराचार्य विरचित स्तोत्र जिसे प्रचण्डचण्डिका स्तवराज भी कहा जाता है दिया गया है और अंत में छिन्नमस्ता द्वादशनाम स्तोत्र जो कि बहुत ही महत्वपूर्ण स्तोत्र है दिया गया है। - [यहां पढ़ें त्रिपुर भैरवी सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - Tripura Bhairavi sahasranam stotra](https://karmkandvidhi.in/tripura-bhairavi-sahasranam-stotra/): यहां पढ़ें त्रिपुर भैरवी सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - Tripura Bhairavi sahasranam stotra : त्रिपुर शब्द का अर्थ है, तीनो लोक अर्थात "स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल" और भैरवी विनाश के एक सिद्धांत के रूप में अवस्थित हें, तात्पर्य है तीन लोको में सर्वनाशक या विध्वंस कि जो शक्ति है, वह भैरवी है। देवी त्रिपुर भैरवी का घनिष्ठ सम्बन्ध 'काल भैरव' से है, जो जीवित तथा मृत जीवों को उनके दुष्कर्मो के अनुसार दंड देते है तथा अत्यंत भयानक स्वरूप वाले तथा उग्र स्वाभाव वाले हैं। यहां त्रिपुर भैरवी सहस्रनाम स्तोत्र (Tripura Bhairavi sahasranam stotra) संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़ें त्रिपुर भैरवी हृदय स्तोत्र संस्कृत में - Tripura Bhairavi Hriday stotra](https://karmkandvidhi.in/bhairavi-hriday-stotra/): यहां पढ़ें त्रिपुर भैरवी हृदय स्तोत्र संस्कृत में - Tripura Bhairavi Hriday stotra : ब्रह्मांडपुराण में माता त्रिपुर भैरवी को गुप्त योगिनियों की अधिष्ठात्री देवी के रूप में चित्रित किया गया है। मत्स्यपुराण में इनके त्रिपुरभैरवी, रुद्रभैरवी, चैतन्यभैरवी तथा नित्या भैरवी आदि नाम-रूपों का वर्णन प्राप्त होता है। इंद्रियों पर विजय और सर्वत्र उत्कर्ष की प्राप्ति हेतु त्रिपुरभैरवी की उपासना का वर्णन शास्त्रों में मिलता है। यहां त्रिपुर भैरवी हृदय स्तोत्र (Tripura Bhairavi Hriday stotra) संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़ें त्रिपुर भैरवी कवच स्तोत्र संस्कृत में - Tripura Bhairavi Kavach stotra](https://karmkandvidhi.in/bhairavi-kavach/): यहां पढ़ें त्रिपुर भैरवी कवच स्तोत्र संस्कृत में - Tripura Bhairavi Kavach stotra : दश महाविद्या में से त्रिपुर भैरवी माता को पांचवी महाविधा के रूप में जाना जाता है। यहां दिया गए कवच त्रिपुर भैरवी महाविद्या की साधना को समर्पित एक स्तोत्र है। - [यहां पढ़ें त्रिपुर भैरवी स्तोत्र संस्कृत में - bhairavi stotra](https://karmkandvidhi.in/bhairavi-stotra/): यहां पढ़ें त्रिपुर भैरवी स्तोत्र संस्कृत में - bhairavi stotra : यह भैरवी स्तोत्र रुद्रयामल तंत्र में मिलता है, इस त्रिपुर भैरवी स्तोत्र के पाठ करने पर माता भैरवी की कृपा से साधक को धन-संपत्ति आदि की कभी कमी नहीं होती, उनकी सभी कामनायें सिद्ध होती और अंत में मोक्ष की भी प्राप्ति होती है । - [यहां पढ़ें भुवनेश्वरीसहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में ~ bhuvaneshwari sahasranama stotram](https://karmkandvidhi.in/bhuvaneshwari-sahasranama-stotram/): यहां पढ़ें भुवनेश्वरीसहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में ~ bhuvaneshwari sahasranama stotram : सर्वप्रथम माता भुवनेश्वरी के रुद्रयामलोक्त सहस्रनाम स्तोत्र दिया गया है तत्पश्चात श्रीमहातन्त्रार्णव में वर्णित भकारादि सहस्रनाम स्तोत्र दिया गया है। दोनों सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में हैं। - [यहां पढ़ें भुवनेश्वरी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में ~ bhuvaneshwari ashtottara shatanama stotram](https://karmkandvidhi.in/bhuvaneshwari-ashtottara-shatanama-stotram/): यहां पढ़ें भुवनेश्वरी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में ~ bhuvaneshwari ashtottara shatanama stotram : माता भुवनेश्वरी जो कि दशमहाविद्या में एक हैं; के अनेकों शतनाम स्तोत्र मिलते हैं; दो अष्टोत्तरशतनाम तो रुद्रयामल तंत्र में ही प्राप्त होता है। यहां तीन भुवनेश्वरी अष्टोत्तरशतनाम संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़ें भुवनेश्वरी हृदय स्तोत्र संस्कृत में ~ bhuvaneshwari hridaya stotra](https://karmkandvidhi.in/bhuvaneshwari-hridaya-stotra/): यहां पढ़ें भुवनेश्वरी हृदय स्तोत्र संस्कृत में ~ bhuvaneshwari hridaya stotra : श्री नीलसरस्वतीतन्त्र में माता भुवनेश्वरी का हृदय स्तोत्र दिया गया है। यहां नीलसरस्वतीतन्त्रोक्त भुवनेश्वरी हृदय स्तोत्र (bhuvaneshwari hridaya stotra) दिया गया है। - [यहां पढ़ें भुवनेश्वरी कवच स्तोत्र संस्कृत में ~ bhuvaneshwari kavach](https://karmkandvidhi.in/bhuvaneshwari-kavach/): यहां पढ़ें भुवनेश्वरी कवच स्तोत्र संस्कृत में ~ bhuvaneshwari kavach : सर्वप्रथम श्रीमायातन्त्रोक्त भुवनेश्वरीकवच दिया गया है तदुपरांत रुद्रयामलोक्त त्रैलोक्यमङ्गलं नामक भुवनेश्वरी कवच है और पुनः एक महत्वपूर्ण भुवनेश्वरी कवच जिसे त्रैलोक्यमोहन कवच के नाम से भी जाना जाता है दिया गया है। सभी कवच स्तोत्र संस्कृत में हैं। - [यहां पढ़ें भुवनेश्वरी स्तोत्र संस्कृत में - bhuvaneswari stotram](https://karmkandvidhi.in/bhuvaneswari-stotram/): यहां पढ़ें भुवनेश्वरी स्तोत्र संस्कृत में - bhuvaneswari stotram : दशमहाविद्याओं में से एक माता भुवनेश्वरी हैं। यहां भुवनेश्वरी महाविद्या के अनेकों स्तोत्र (bhuvaneswari stotram) संस्कृत में दिये गये हैं। - [यहां पढ़ें त्रिपुरसुन्दरी सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - tripura sundari sahasranam](https://karmkandvidhi.in/tripura-sundari-sahasranam/): यहां पढ़ें त्रिपुरसुन्दरी सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - tripura sundari sahasranam : यहां वामकेश्वरतन्त्रोक्त षोडशी सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़ें त्रिपुरसुन्दरी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - tripura sundari ashtottarshatnam](https://karmkandvidhi.in/tripura-sundari-ashtottarshatnam/): यहां पढ़ें त्रिपुरसुन्दरी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - tripura sundari ashtottarshatnam : यहां ब्रह्मयामलोक्त षोडशी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र और श्रीकालीविलासतन्त्रोक्त त्रिपुरसुन्दरी शतनामस्तोत्र अथवा महात्रिपुरसुन्दरी शतनामस्तोत्र दोनों संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़ें त्रिपुरसुन्दरी हृदय स्तोत्र संस्कृत में - tripura sundari hriday stotram](https://karmkandvidhi.in/tripura-sundari-hriday-stotra/): यहां पढ़ें त्रिपुरसुन्दरी हृदय स्तोत्र संस्कृत में - tripura sundari hriday stotram : यहां विनियोग न्यास और ध्यान सहित षोडशी महाविद्या अर्थात त्रिपुर सुंदरी हृदय स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़ें त्रिपुरसुन्दरी कवच स्तोत्र संस्कृत में - tripura sundari kavach](https://karmkandvidhi.in/tripura-sundari-kavach/): यहां पढ़ें त्रिपुरसुन्दरी कवच स्तोत्र संस्कृत में - tripura sundari kavach : माता त्रिपुरसुन्दरी अर्थात षोडशी महाविद्या कवच रुद्रयामल तंत्र से लिया गया है। विनियोग और ध्यान सही यहां संस्कृत में षोडशी महाविद्या कवच स्तोत्र दिया गया है। - [षोडशी महाविद्या : पढ़िये त्रिपुरसुंदरी स्तोत्र संस्कृत में - shodashi stotram](https://karmkandvidhi.in/shodashi-stotram/): षोडशी महाविद्या : पढ़िये त्रिपुरसुंदरी स्तोत्र संस्कृत में - shodashi stotram : दशमहाविद्या में से एक षोडशी जिनका एक अन्य नाम श्री त्रिपुर सुंदरी भी है के अनेक स्तोत्र हैं जो यहां संस्कृत में दिया गया है। त्रिपुरसुंदरी स्तोत्र (shodashi stotram), त्रिपुरसुन्दर्याद्वादशश्लोकीस्तुतिः, त्रिपुरसुन्दरीवेदसारस्तवः, त्रिपुरसुन्दरीचक्रराज स्तोत्रं, त्रिपुरसुन्दरी पञ्चरत्न स्तोत्रं और त्रिपुरसुन्दरी अपराध क्षमापण स्तोत्रं यहां दिया गया है। - [यहां पढ़िये तारा हृदय स्तोत्र - Tara Hriday stotram](https://karmkandvidhi.in/tara-hriday-stotram/): यहां पढ़िये तारा हृदय स्तोत्र - Tara Hriday stotram : भैरवीतन्त्र में तारा हृदय स्तोत्र मिलता है जिसे उग्रतारा हृदय स्तोत्र भी कहा जाता है। यहां भैरवी तंत्रोक्त उग्रतारा हृदय स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है। दशमहाविद्या में से किसी भी महाविद्या की उपासना करनी हो योग्य गुरु का मार्गदर्शन अनिवार्य होता है। - [यहां पढ़िये तारा कवच स्तोत्र - Tara Kavach stotram](https://karmkandvidhi.in/tara-kavach-stotram/): यहां पढ़िये उग्रतारा प्रत्यङ्गिरा कवच - Tara Kavach stotram : तारा कवच अथवा उग्रतारा कवच रुद्रयामल तंत्र में वर्णित है और इसके साथ ही एक अन्य तारा प्रत्यङ्गिरा कवच स्तोत्र भी है जिसे उग्रतारा प्रत्यङ्गिरा कवच, नीलसरस्वती कवच आदि नामों से भी जाना जाता है। यहां रुद्रयामोक्त तारा कवच और तारा प्रत्यंगिरा कवच दोनों दिया गया है। - [यहां पढ़िये तकारादि तारा सहस्रनाम स्तोत्र - Tara Sahasranam stotram 2](https://karmkandvidhi.in/tara-sahasranam-stotram-2/): यहां पढ़िये तकारादि तारा सहस्रनाम स्तोत्र - Tara Sahasranam stotram 2 : अक्षोभ्यसंहितायोक्त तारा सहस्रनाम पूर्व में प्रकाशित किया जा चुका है और यहां ब्रह्मयामलोक्त तकारादि तारा सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है जो विशेष महत्वपूर्ण है। - [यहां पढ़िये तारा सहस्रनाम स्तोत्र - Tara Sahasranam stotram](https://karmkandvidhi.in/tara-sahasranam-stotram/): यहां पढ़िये तारा सहस्रनाम स्तोत्र - Tara Sahasranam stotram : दशमहाविद्या में से एक माँ तारा विशेष महत्वपूर्ण हैं और यदि सहस्रनाम की बात करें तो अनेकों सहस्रनाम देखने को मिलता है जिसमे से एक विशेष महत्वपूर्ण सहस्रनाम श्रीबृहन्नीलतन्त्र में भैरवभैरवी के संवाद रूप में मिलता है। यहां श्रीबृहन्नीलतन्त्रोक्त तारा सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है जो विशेष महत्वपूर्ण है। - [यहां पढ़ें तारा स्तोत्र अष्टोत्तर शतनाम : tara stotra 108 Name](https://karmkandvidhi.in/tara-stotra-108-name/): यहां पढ़ें तारा स्तोत्र अष्टोत्तर शतनाम : tara stotra 108 Name : विभिन्न देवी देवताओं के स्तोत्रों में अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का अपना विशेष महत्व होता है। महाविद्या तारा के भी कई अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र हैं जिनमें से तीन तारा स्तोत्र यहां दिया गया है। प्रथम तारा अष्टोत्तर शतनाम स्वर्णमालातन्त्र और मुण्डमालातन्त्रोक्त है, द्वितीय बृहन्नीलतन्त्रोक्त और तृतीय श्रीकालीविलासतन्त्रोक्त है। तीनों तारा अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़िये ताराष्टक अथवा श्री नीलसरस्वती स्तोत्र - Nil saraswati stotram](https://karmkandvidhi.in/nil-saraswati-stotram/): यहां पढ़िये ताराष्टक अथवा श्री नीलसरस्वती स्तोत्र - Nil saraswati stotram : दशमहाविद्याओं में माता तारा भी एक प्रमुख महाविद्या हैं। सभी देवताओं की भांति इनका भी एक अष्टक स्तोत्र है जिसे ताराष्टक के साथ-साथ नीलसरस्वती स्तोत्र भी कहते हैं। यहां श्री नीलसरस्वती स्तोत्र (Nil saraswati stotram) अर्थात ताराष्टक स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है। - [पढिये माँ तारा स्तोत्र ताराकर्पूरस्तोत्रम् - maa tara stotra](https://karmkandvidhi.in/maa-tara-stotra/): पढिये माँ तारा स्तोत्र ताराकर्पूरस्तोत्रम् - maa tara stotra : माता तारा के स्तोत्रों में एक प्रमुख स्तोत्र है ताराकर्पूरस्तोत्र जो श्रीफेत्कारीतन्त्र से लिया गया है। यहां फेत्कारी तंत्रोक्त ताराकर्पूरस्तोत्र संस्कृत में दिया गया है जो माँ तारा की उपासना में विशेष लाभकारी है। - [माँ तारा ध्यान मंत्र संस्कृत में पढ़ें - Tara dhyan mantra](https://karmkandvidhi.in/tara-dhyan-mantra/): माँ तारा ध्यान मंत्र संस्कृत में पढ़ें - Tara dhyan mantra : दशमहाविद्या में से द्वितीय क्रम पर माता तारा आती हैं। माता काली की उपासना के लिये भी ध्यान मंत्रों की आवश्यकता होती है इसलिये यहां माता तारा के ध्यान का तीन मंत्र दिये गये हैं। इसके साथ ही सात्विक, राजसी और तामसी तारा ध्यान मंत्र (Tara dhyan mantra) भी दिये गये हैं। - [काली पूजा पद्धति: जानिये काली पूजा (Kali Puja) की संपूर्ण विधि](https://karmkandvidhi.in/kali-puja/): काली पूजा पद्धति: जानिये काली पूजा (Kali Puja) की संपूर्ण विधि : माता काली की तांत्रिक पूजा भिन्न-भिन्न रूपों के अनुसार भी भिन्न-भिन्न प्रकार और मंत्रों से होती है जो गुरु के माध्यम से प्राप्त होता है। पुनः एक विशेष पूजा उन लोगों के लिये होती है जो किसी विशेष रूप में पूजा न करके अर्थात दीक्षित नहीं होते किन्तु सामान्य रूप से काली पूजा करते हैं, कदाचित कार्तिक कृष्ण अमावास्या व अन्य विशेष अवसरों पर भी उन लोगों के लिये यहां दी गयी काली पूजा विधि विशेष महत्वपूर्ण है। - [यहां पढ़ें काली खड्गमाला स्तोत्र संस्कृत में - kali khadgamala stotram](https://karmkandvidhi.in/kali-khadgamala-stotram/): यहां पढ़ें काली खड्गमाला स्तोत्र संस्कृत में - kali khadgamala stotram : माता काली के उपासकों हेतु खड्गमाला स्तोत्र का अतिविशेष महत्व है। देवताभेद से खड्गमाला स्तोत्र भी अनेक प्रकार के होते हैं और काली खड्गमाला स्तोत्र की बात करें तो यह भी दक्षिण काली, भद्रकाली आदि भेद से भिन्न-भिन्न प्रकार के होते हैं। यहां श्रीरुद्रयामलोक्त दक्षिणकालिका खड्गमाला स्तोत्र (kali khadgamala stotram) दिया गया है। - [यहां पढ़ें कालिका अष्टक स्तोत्र संस्कृत में - kalika ashtak](https://karmkandvidhi.in/kalika-ashtak/): यहां पढ़ें कालिका अष्टक स्तोत्र संस्कृत में - kalika ashtak : सभी देवी देवताओं का एक महत्वपूर्ण स्तोत्र होता है अष्टकं। अष्टक स्तोत्र का तात्पर्य आठ स्तुति करना है, अष्टप्रणाम करना है। यहां शंकराचार्य कृत कालिकाष्टक दिया गया है। - [यहां पढ़ें श्री काली प्रत्यंगिरा स्तोत्र संस्कृत में - kali pratyangira stotra](https://karmkandvidhi.in/kali-pratyangira-stotra/): यहां पढ़ें श्री काली प्रत्यंगिरा स्तोत्र संस्कृत में - kali pratyangira stotra : अंगिरा ऋषि कृत काली का विशेष स्तोत्र जो प्रत्येक अंगों की रक्षा करती है, श्री काली प्रत्यङ्गिरा स्तोत्र कहलाती है। काली प्रत्यंगिरा को ही काली प्रत्यंगिरा कवच भी कहा जाता है। श्री काली प्रत्यंगिरा विशेष सुरक्षा प्रदान करती है, सभी प्रकार के शत्रु बाधाओं का निवारण करती है। आगे श्री काली प्रत्यंगिरा स्तोत्र (kali pratyangira stotra) दिया गया है। - [यहां पढ़ें काली कीलक स्तोत्र संस्कृत में - kali keelak stotra](https://karmkandvidhi.in/kali-keelak-stotra/): यहां पढ़ें काली कीलक स्तोत्र संस्कृत में - kali keelak stotra : मंत्र की तुलना में कवच शतगुणित अधिक फलकारक कहा गया है और कवच से भी शतगुणित कीलक में बताया गया है। उत्कीलन प्रयोग में कीलक का विशेष प्रयोग भी कहा गया है किन्तु गुरु का निर्देश प्राप्त होना आवश्यक होता है। - [यहां पढ़ें काली अर्गला स्तोत्र संस्कृत में - kali argala stotram](https://karmkandvidhi.in/kali-argala-stotram/): यहां पढ़ें काली अर्गला स्तोत्र संस्कृत में - kali argala stotram : यहां कालिका अर्गला स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है। इसमें दक्षिणकालिका का भी उल्लेख है अतः इसे दक्षिण कालिका अर्गला स्तोत्र भी कहा जाता है। यह अर्गला स्तोत्र बहुत ही महत्वपूर्ण है और इस स्तोत्र में रूप-सौंदर्य, सौभाग्य, सिद्धि, शत्रुवश, विद्या-वाणी आदि अनेकों कामनायें भी की गयी है। - [पढ़ें काली हृदय स्तोत्र संस्कृत में - kali hriday stotra](https://karmkandvidhi.in/kali-hriday-stotra/): पढ़ें काली हृदय स्तोत्र संस्कृत में - kali hriday stotra : यहां कालीरहस्योक्त महाकौतूहल दक्षिणाकाली हृदय स्तोत्र दिया गया है। इसी को काली हृदय स्तोत्र अथवा कालिका हृदय स्तोत्र भी कहा जाता है। पहले कालीतन्त्रोक्त कालिका हृदय स्तोत्र दिया गया है तत्पश्चात कालीरहस्योक्त महाकौतूहल दक्षिणाकाली हृदय स्तोत्र दिया गया है। - [काली कवच संस्कृत में - kali kavach](https://karmkandvidhi.in/kali-kavach/): काली कवच संस्कृत में - kali kavach : सर्वप्रथम महानिर्वाणतन्त्रोक्त श्रीकालिकाकवच / श्रीत्रैलोक्य विजय कवच, तत्पश्चात काली कवच / श्री जगन्मङ्गलकवच / श्यामा कवच, पुनः श्रीवज्रपञ्जरकाख्य श्रीकालिकाकवच, पुनः वैरिनाशन कालिका कवच - रुद्रयामलोक्त, वैरिनाशनं कालीकवचम् - शत्रु नाशक काली कवच, पुनः कालीकुलसर्वस्वोक्त कालीकवच - दक्षिण कालिका कवच, पुनः विश्वमङ्गल गुह्यकाली कवच, पुनः त्रैलोक्यमोहन कालीकवच - दक्षिणा कालिका कवच दिया गया है। - [कामकला काली सहस्रनाम स्तोत्र - kamkala kali sahasranam](https://karmkandvidhi.in/kamkala-kali-sahasranam/): कामकला काली सहस्रनाम स्तोत्र - kamkala kali sahasranam : कामकला नाम से एक भ्रम उत्पन्न होता है कि काम-वासनाओं संबंधी कामना से संबंध हो सकता है और यदि तांत्रिक व जटिल पद्धति न होती तो वर्त्तमान के ज्योतिषी, मीडिया आदि युवाओं को कामकला के मंत्र, स्तोत्र आदि के लिये ही प्रेरित कर रहे होते किन्तु ऐसा है नहीं। कामकला काली भी माता काली का ही एक रूप है जो सभी प्रकार की कामनाओं, पुरुषार्थों को सिद्ध करती हैं। - [गुह्य काली सहस्रनाम संस्कृत में - Guhya kali sahasranam](https://karmkandvidhi.in/guhya-kali-sahasranam/): गुह्य काली सहस्रनाम संस्कृत में - Guhya kali sahasranam : देव्याः सहस्रनामाख्यं स्तोत्रं पापौघमर्दनम् । मह्यं पुरा भुवः कल्पे त्रिपुरघ्नेन कीर्तितम् ॥ - [ककारादि काली सहस्रनाम संस्कृत में - kakaradi kali sahasranam](https://karmkandvidhi.in/kakaradi-kali-sahasranam/): ककारादि काली सहस्रनाम संस्कृत में - kakaradi kali sahasranam : यहां महाकालसंहितोक्त श्रीमदादिनाथमहाकालविरचित कालकालीसंवाद के रूप में वर्णित ककारादि काली सहस्रनाम स्तोत्र दिया गया है। स्तोत्र संस्कृत में है एवं विनियोग मंत्र, ध्यान मंत्र, न्यास विधि सहित है। - [काली सहस्रनाम संस्कृत में - kali sahasranam](https://karmkandvidhi.in/kali-sahasranam/): काली सहस्रनाम संस्कृत में - kali sahasranam : श्रीकालिकाकुलसर्वस्व में हरपरशुरामसंवाद (शिव-परशुराम संवाद) के रूप में वर्णित कालिका सहस्रनाम यहां दिया जा रहा है। इसे भद्रकाली सहस्रनाम स्तोत्र भी कहा जाता है। .. ॐ श्मशानकालिका काली भद्रकाली कपालिनी । गुह्यकाली महाकाली कुरुकुल्ला विरोधिनी ॥ .... - [काली शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - 4 kali shatnam stotram](https://karmkandvidhi.in/kali-shatnam-stotram/): काली शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - kali shatnam stotram : सर्वप्रथम बृहन्नीलतन्त्रोक्त काली शतनाम स्तोत्र दिया गया है तत्पश्चात महानिर्वाणतन्त्रोक्त करारकूटघटितं कालिका शतनाम स्तोत्र, फिर मुण्डमालातन्त्रोक्त ककारादि काली शतनाम स्तोत्र, पुनः दक्षिण कालिका शतनाम स्तोत्र दिया गया है। सभी स्तोत्र संस्कृत में दिये गये हैं। - [यहां पढ़ें काली स्तोत्र संस्कृत में - kali stotra](https://karmkandvidhi.in/kali-stotra/): काली स्तोत्र संस्कृत में - kali stotra : यहां सभी काली स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है। यहां क्रमशः काली शांति स्तोत्र, कालिका स्तोत्र, मेना कृत काली स्तोत्र, काली ताण्डवस्तोत्र, आद्या स्तोत्र, काली स्तोत्र - रुद्रयामलोक्त, दक्षकृत काली स्तोत्र - कालिकापुराणोक्त, परशुराम कृत काली स्तोत्र - ब्रह्मवैवर्तपुराणोक्त और कामकला काली स्तोत्र दिये गये हैं। - [माँ काली ध्यान मंत्र संस्कृत में - 3 kali dhyan mantra](https://karmkandvidhi.in/kali-dhyan-mantra/): माँ काली ध्यान मंत्र संस्कृत में - kali dhyan mantra : किसी भी देवी-देवता की पूजा-उपासना में ध्यान का विशेष महत्व होता है। पूजा करने से पहले ध्यान करना चाहिये। माता काली की पूजा दशमहाविद्या के अंतर्गत भी होती है और पृथक भी। यहां माँ काली का ध्यान मंत्र संस्कृत में दिया गया है। - [महाविद्या कवच - Mahavidya Kavach](https://karmkandvidhi.in/mahavidya-kavach/): महाविद्या कवच - Mahavidya Kavach : सर्वप्रथम दशमहाविद्या कवच दिया गया है तत्पश्चात रुद्रयामलोक्त महाविद्या कवच और पुनः मुण्डमालातन्त्रोक्त महाविद्या कवच दिया गया है। सभी कवच स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है। - [सूर्य देव को अर्घ्य देने के नियम और विधि : 70 सूर्य अर्घ्य मंत्र संस्कृत में](https://karmkandvidhi.in/surya-arghya/): सूर्य देव को अर्घ्य देने के नियम और विधि : 70 सूर्य अर्घ्य मंत्र संस्कृत में सूर्य अर्घ्य एक सरल लेकिन प्रभावशाली अनुष्ठान है। इसे नियमित रूप से करने से व्यक्ति को कई लाभ मिलते हैं। सूर्य अर्घ्य देने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। सूर्य अर्घ्य देना न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है बल्कि यह एक वैज्ञानिक तथ्य भी है। सूर्य की किरणों में विटामिन डी होता है जो हमारे शरीर के लिए बहुत आवश्यक है। इसलिए, सूर्य अर्घ्य देना हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है। - [जानिये भगवान सूर्य पूजा की विधि और मंत्र - surya puja vidhi](https://karmkandvidhi.in/surya-puja-vidhi/): जानिये भगवान सूर्य पूजा की विधि और मंत्र - surya puja vidhi : प्रायः देखा जाता है कि रविवार अथवा अन्य सूर्य व्रत तो लोग करते हैं किन्तु पूजा नहीं करते। जब कि किसी भी व्रत में पूजा की विशेष महत्ता होती है और हवन भले न करे किन्तु पूजा अनिवार्य रूप से कर्तव्य होता है। यहां दी गयी पूजा विधि सूर्य व्रत करने वालों के लिये लाभकारी सिद्ध होगा। - [यहां है एक नहीं चार-चार सूर्याष्टक स्तोत्र - 4 suryashtak stotra](https://karmkandvidhi.in/suryashtak-stotra/): यहां है एक नहीं चार-चार सूर्याष्टक स्तोत्र - 4 suryashtak stotra : सर्वप्रथम साम्ब कृत सूर्याष्टक स्तोत्र (आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर) दिया गया है जो सर्वाधिक प्रसिद्ध है और प्रयोग भी किया जाता है। तत्पश्चात पण्डितरघुनाथशर्मा विरचित श्रीसूर्याष्टक दूसरे क्रम पर है और तीसरे क्रम पर अनन्तानन्दसरस्वतीविरचित श्रीसूर्याष्टक दिया गया है। पुनः चतुर्थ क्रम पर गायत्रीस्वरूप ब्रह्मचारीविरचित श्रीसूर्याष्टक दिया गया है। इसके साथ ही अंत में भास्कराष्टक नामक स्तोत्र भी दिया गया है। - [सूर्य स्तोत्र संस्कृत - 7 Surya Stotra](https://karmkandvidhi.in/surya-stotra/): सूर्य स्तोत्र संस्कृत - 7 Surya Stotra : यहां क्रमशः सूर्यप्रातःस्मरण स्तोत्र, सूर्य द्वादशनाम स्तोत्र, सूर्यमण्डल स्तोत्र - सूर्य मण्डलाष्टक, विश्वकर्मकृत सूर्य स्तवन - मार्कण्डेयपुराणोक्त, सूर्य द्वादशकं - साम्बकृत, कश्यपकृत सूर्य स्तुति - मुद्गल पुराणोक्त और महाभारतोक्त युधिष्ठिरविरचित सूर्यस्तोत्र संस्कृत में दिये गये हैं। भगवान सूर्य की उपासना में इन सातों स्तोत्रों को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। - [आदित्य हृदय स्तोत्र संस्कृत - 3 aditya hriday stotra](https://karmkandvidhi.in/aditya-hriday-stotra/): आदित्य हृदय स्तोत्र संस्कृत - 2 aditya hriday stotra : सर्वप्रथम निरोगकारी आदित्यहृदय स्तोत्र पद्मपुराणोक्त दिया गया है तत्पश्चात भविष्योत्तरपुराणोक्त आदित्यहृदय स्तोत्र दिया गया है और लंका पर विजय प्राप्त करने के लिये भगवान श्रीराम ने जिस आदित्य हृदय स्तोत्र से भगवान सूर्य की उपासना किया था वह वाल्मीकि रामायण में वर्णित है और वह भी दिया गया है। सभी स्तोत्र संस्कृत में दिये गये हैं - [सूर्य कवच स्तोत्र - surya kavach stotra](https://karmkandvidhi.in/surya-kavach-stotra/): सूर्य कवच स्तोत्र - surya kavach stotra : भगवान सूर्य की अराधना-उपासना करनी हो, पूजा-यज्ञादि हो अथवा सूर्य ग्रह शांति, अशुभ फल निवारण, शुभ फल प्राप्ति आदि का विषय हो, सदा सूर्य कवच स्तोत्र के पाठ की भी आवश्यकता होती है। यहां भगवान सूर्य के 1 नहीं 4 कवच स्तोत्र दिये गये हैं जिनमें से आपको जिस कवच का पाठ करना हो उसका चयन कर सकते हैं। - [सूर्य सहस्रनाम स्तोत्र - surya sahasranam stotra](https://karmkandvidhi.in/surya-sahasranam/): सूर्य सहस्रनाम स्तोत्र - surya sahasranam stotra : भगवान सूर्य प्रत्यक्ष देवता है और पंचदेवताओं में से एक हैं, इसके साथ ही नवग्रहों में प्रमुख हैं और ग्रहराज के नाम से जाने जाते हैं। आरोग्य, आत्मा आदि के कारक हैं। भगवान सूर्य की अराधना में सहस्रनाम पाठ करना भी विशेष महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही हवन के लिये भी सहस्रनाम का महत्व होता है। - [गणेश हृदय स्तोत्र - Ganesh Hriday Stotaram](https://karmkandvidhi.in/ganesh-hriday-stotaram/): गणेश हृदय स्तोत्र - Ganesh Hriday Stotaram : हृदय स्तोत्र के बिना साधना पथ पर आगे बढ़ाना संभव नहीं होता है। जो प्रथम पूज्य गणेश की साधना करना चाहते हैं उनके लिये गणेश हृदय स्तोत्र का विशेष महत्व हो जाता है और यहां दिया गया है। - [गणेश कवच संस्कृत में - Ganesha Kavacham](https://karmkandvidhi.in/ganesha-kavacham/): गणेश कवच संस्कृत में - Ganesha Kavacham : जब भावनात्मक पूजा की बात आती है, तो भाव की प्राथमिकता होती है, जबकि मंत्र-स्तोत्र के लिए भाषा का महत्व भी बढ़ जाता है। देववाणी, संस्कृत में मंत्रों का पाठ विशेष लाभकारी है, जैसे गणेश कवच। भगवान गणेश, जिन्हें प्रथम पूज्य माना जाता है, के कवचों में सुरक्षा के लिए प्रार्थना की जाती है। विभिन्न रूपों में तीन प्रमुख कवच हैं: मुद्गलकृत, महागणपति, और उच्छिष्ट। इन कवचों में नियमित जप कर मानसिक शांति और सुरक्षा प्राप्त की जा सकती है। संस्कृत में ये मंत्र चारों ओर से रक्षा प्रदान करते हैं और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता दायक होते हैं। - [गणेश स्तुति मंत्र - ganesh stuti](https://karmkandvidhi.in/ganesh-stuti/): गणेश स्तुति मंत्र - ganesh stuti : यहां एकदन्त स्तोत्र, गणपतिस्तव, संकटनाशन गणेश स्तोत्र, गणाधिपाष्टक, श्री सिद्धिविनायक स्तोत्र, सन्तानगणपति स्तोत्र, श्रीगणपतिषोडशनामावलि स्तोत्र, रुद्रयामलोक्त श्री विनायक स्तवराज, गणेशाष्टक, गणेश मङ्गलाष्टक इत्यादि अनेकों महत्वपूर्ण स्तोत्र दिये गये हैं जो आपके लिये उपयोगी हो सकते हैं। - [गणेश सहस्रनाम स्तोत्र - ganesh sahasranama stotram](https://karmkandvidhi.in/ganesh-sahasranama-stotram/): गणेश सहस्रनाम स्तोत्र - ganesh sahasranama stotram : इस आलेख में भगवान गणेश का सहस्रनाम दिया गया है। इसके साथ है महागणपति सहस्रनाम स्तोत्र भी दिया गया है। - [गणेश अष्टोत्तर शतनामावली | गणेश पूजा मंत्र | ganesha ashtottara shatanamavali](https://karmkandvidhi.in/ganesha-ashtottara-shatanamavali/): गणेश अष्टोत्तर शतनामावली | गणेश पूजा मंत्र | ganesha ashtottara shatanamavali : भगवान गणपति की पूजा में 21 नामों से पूजा करने का महत्व तो है ही इसके साथ विशेष पूजन में गणेश अष्टोत्तर शतनामावली से भी दूर्वा, मोदक, विविध फल आदि द्रव्यों द्वारा पूजन किया जाता है। सिद्धिविनायक पूजा विधि और संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि पूर्व से प्रकाशित है और उन पुजनों में 21 नामों से अतिरिक्त यदि अष्टोत्तर शतनाम से भी पूजा करनी हो तो यहां दिया गया है। - [संकष्टहर या संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत विधि - sankashti ganesh chaturthi](https://karmkandvidhi.in/sankashti-ganesh-chaturthi/): संकष्टहर या संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत विधि - sankashti ganesh chaturthi : यहां संकष्टहर गणेश चतुर्थी व्रत की पूजा विधि व कथा दी गयी है। संकष्टी गणेश चतुर्थी का विशेष महत्व है और विशेष पूजा विधि भी है जिसके मंत्रों का भी ऊपर वर्णन किया गया है। व्रत कथा में चमत्कारिक प्रभाव भी देखने को मिलता है विशेष रूप से पुत्र प्राप्ति व पुत्र रक्षा हेतु यह व्रत अधिक महत्वपूर्ण है। - [तुलसी स्तोत्र अर्थ सहित | मंगलाष्टक 8 | tulsi stotram](https://karmkandvidhi.in/tulsi-stotram/): तुलसी स्तोत्र अर्थ सहित | तुलसी माहात्म्य - tulsi stotram : यहां भगवती तुलसी की प्रसन्नता प्रदान करने वाला स्तोत्र दिया गया है एवं तुलसी स्तोत्र का अर्थ भी दिया गया है। साथ ही तुलसी का माहात्म्य भी दिया गया है। एवं तुलसी विवाह में मंगलाष्टक पाठ का विधान होने से मंगलाष्टक भी दिया गया है। - [तुलसी विवाह विधि : Tulsi vivah vidhi](https://karmkandvidhi.in/tulsi-vivah-vidhi/): तुलसी विवाह विधि : Tulsi vivah vidhi - व्याघ्रपदगोत्रोत्पन्नाय वैयाघ्रपदगार्ग्यवशिष्ठेति त्रिप्रवराय, देवमीढ़वर्मणः प्रपौत्राय, सूरसेनवर्मणः पौत्राय, वसुदेववर्मणः पुत्राय, अनेककोटिब्रह्माण्डनायकाय श्रीकृष्णाय (गोपालाय, श्रीधराय) वराय, आलंबायनदेवलगौतमेति त्रिप्रवरां, विश्वकर्मणः प्रपौत्रीं, प्रजापतेः पौत्रीं, ईश्वरस्यपुत्रीं तुलसींकन्यां ज्योतिर्विदादिष्टे सुमहूर्ते दास्ये॥ - [Tulsi vivah : जानिये तुलसी विवाह कैसे किया जाता है](https://karmkandvidhi.in/tulsi-vivah/): Tulsi vivah kab hai : जानिये तुलसी विवाह कैसे किया जाता है - तुलसी विवाह भी एक विस्तृत कर्मकांड है जिसकी विधि का शास्त्र में वर्णन मिलता है और ऊपर शास्त्रोक्त प्रमाण सहित तुलसी विवाह की विधियों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है जिससे यह भी सिद्ध होता है कि मूर्ख-मंडली द्वारा अंतर्जाल पर जो ढेरों सामग्रियां प्रचारित-प्रसारित की गयी है वो शास्त्र-सम्मत नहीं है और भ्रामक है। क्योंकि शास्त्रसम्मत का तात्पर्य होता है जो शास्त्र में बताया गया हो। श्रद्धालु जनों को शास्त्रोक्त विधि से ही किसी भी धर्म-कृत्य को संपन्न करना चाहिये। - [करोड़ों सूर्य ग्रहण तुल्य फलदायक अर्धोदय योग क्या है ?](https://karmkandvidhi.in/ardhoday-yog/): करोड़ों सूर्य ग्रहण तुल्य फलदायक अर्धोदय योग क्या है - अर्धोदय के शब्दार्थ पर यदि विचार करें तो अर्ध-उदित ज्ञात होता है। किन्तु यदि अर्ध-उदित अर्थ ग्रहण किया जाय तो उसमें रविवार के संयोग का क्या तात्पर्य है ? यदि अर्धोदय के शब्दार्थ को ग्रहण करेंगे तो; रविवार का संयोग हो अथवा न हो; कोई अंतर नहीं हो सकता। अर्थात अर्धोदय में बिम्ब (सूर्य-चंद्र) के अर्द्ध-उदित का कोई भाव सिद्ध नहीं होता। - [अग्नि वास चार्ट - agnivasa chart 2025](https://karmkandvidhi.in/agnivasa-chart-2025/): अग्नि वास चार्ट - agnivasa chart 2025 : विभिन्न अनुष्ठानों - यज्ञों में हवन हेतु अग्निस्थापन करने के लिये अग्निवास का विचार किया जाता है, जिसे अग्निवास विचार कहते हैं। अग्निवास की आवश्यकता मुख्यतः पौष्टिक कर्मों में होती है। अग्निवास ज्ञात करने की विधि, आवश्यकता, अग्निवास परिहार आदि के बारे में विस्तृत चर्चा पूर्व में की जा चुकी है, अतः यहां पुनरावृत्ति अनपेक्षित है। - [महाकुंभ कब लगता है - mahakumbh kab lagta hai](https://karmkandvidhi.in/mahakumbha/): महाकुंभ कब लगता है - mahakumbh kab lagta hai : भारत साधना भूमि है और भारतीय सदैव देवताओं की आराधना, पूजा, साधना आदि में संलिप्त रहते हैं। वर्ष पर्यन्त कोई न कोई व्रत-पर्व आदि करते ही रहते हैं और इसका कारण है आत्मकल्याण की चाह। सामान्य व्रत-पर्वों के अतिरिक्त विशेष स्थितियों में कुछ विशेष व्रत-पर्व भी होते हैं जैसे मलमास, कुम्भ, अर्द्धकुम्भ। इस आलेख में कुम्भ अर्थात महाकुम्भ विषयक चर्चा की गयी है जो महाकुम्भ कब लगता है, कहां लगता है, कब है आदि जानकारी प्रदान करता है। - [माघ मास में क्या करें - नियम और विधि-विधान | Magh maas ke niyam](https://karmkandvidhi.in/magh-maas-ke-niyam/): माघ मास में क्या करें - नियम और विधि-विधान | magh maas ke niyam : माघ मास का बड़ा ही महत्व है और विशेष नियमों के साथ इसका पालन किया जाता है। जब सूर्य मकर में होता है, तब माघ मास आरंभ होता है। माघ मास में स्नान करना आवश्यक है, विशेषरूप से प्रातः काल। माघ मास की शीत के कारण लोग स्नान को लेकर चिंतित रहते हैं, लेकिन प्रयाग में सहस्रों श्रद्धालु इसे श्रद्धा से मनाते हैं। - [मूल शांति पूजन सामग्री - Mool Shanti Puja Samagri](https://karmkandvidhi.in/mool-shanti-puja-samagri/): मूल शांति पूजन सामग्री - Mool Shanti Puja Samagri : मूल में जन्म सर्वाधिक दोषद है। मूल शांति विधि पूर्व आलेख में प्रकाशित की जा चुकी है और मूल शांति हेतु जिन सामग्रियों की आवश्यकता होती है उसकी जानकारी नीचे दी गयी है। - [धन्वंतरि पूजन विधि - Dhanvantari Puja Vidhi (13)](https://karmkandvidhi.in/dhanvantari-puja-vidhi/): धन्वंतरि पूजन विधि - Dhanvantari Puja Vidhi : सबसे बड़ा धन कहें अथवा पहला सुख कहें आरोग्य को ही कहा गया है। यदि उत्तम स्वास्थ्य हो तभी कोई कर्म किया जा सकता है चाहे वह उद्यम हो अथवा धर्म। इसलिये आरोग्य के देवता धन्वन्तरि की पूजा विशेष श्रद्धा-भक्ति से करनी चाहिये। धन्वंतरि भगवान विष्णु के 24 अवतारों में से ही एक अवतार हैं। - [मूल शांति पूजन विधि - mool shanti puja vidhi](https://karmkandvidhi.in/mool-shanti-puja-vidhi/): मूल शांति पूजन विधि - mool shanti puja vidhi : मूल सत्ताईस नक्षत्रों में से एक नक्षत्र का नाम है और सम्पूर्ण मूल को ही दोषद कहा गया है। गण्डान्त नक्षत्रों में से सर्वाधिक दोषद होने के कारण मूल में जन्म होने पर दोष की विधि पूर्वक शांति की जाती है जिसे मूल शांति कहा जाता है। किन्तु मूल शांति का तात्पर्य मात्र मूल नक्षत्र की शांति नहीं होती है, क्योंकि अन्य दोषद नक्षत्रों में जन्म होने पर भी एक ही विधि से शांति होती है मात्र नक्षत्र जप-पूजा-हवन-मंत्र में परिवर्तन होता है। - [कार्तिक मास की विशेषता और मास के नियम - Kartik Mas](https://karmkandvidhi.in/kartik-mas/): कार्तिक मास माहात्म्य और मास के नियम - Kartik Mahatmya : इस महीने लोग प्रातः स्नान, पूजा और जप करते हैं। इसका माहात्म्य पद्मपुराण में मिलता है। अनेकों विशेष व्रत-पर्व जैसे दीपावली, छठ, अक्षयनवमी भी इसी महीने में होते हैं। कार्तिक का समय सूर्य के नीच होने से जुड़ा है, जो हमारी ऊर्जा, जीवन, आत्मबल आदि को प्रभावित करता है। मथुरा में कार्तिक मास करने का विशेष महत्व है, जहां भगवान विष्णु की विशेष कृपाप्राप्त होती है। - [एकादशी उद्यापन की दान विधि - Dan ki vidhi aur mantra](https://karmkandvidhi.in/ekadashi-udyapan-dan-vidhi/): एकादशी उद्यापन की दान विधि - एकादशी व्रत की भी पूर्णता हेतु उद्यापन करने की एक विस्तृत विधि है और पूर्व आलेख में एकादशी उद्यापन की शास्त्र-सम्मत विधि दी गयी है एवं उसे सरल रूप से समझाया भी गया है। उद्यापन में पूजा-कथा-हवन आदि के साथ मुख्य विषय दान होता है। इस आलेख में एकादशी उद्यापन में दान करने की विधि और मंत्र दिया गया है। - [एकादशी उद्यापन विधि - Ekadashi Udyapan Vidhi](https://karmkandvidhi.in/ekadashi-udyapan-vidhi/): यद्यपि पद्धतियों में नवग्रह-दिक्पाल आदि का पूजन करके प्रधानपूजन देखने को मिलता है तथापि कर्मकांड अनुक्रमणिका के अनुसार प्रथम प्रधानवेदी पूजन व प्रधान पूजा करने के एकादशी उद्यापन विधि - Ekadashi Udyapan Vidhi : पश्चात् नवग्रह मंडल पूजन की सिद्धि होती है। यदि क्रम का विशेष निर्वहन करना हो तो प्रथम अग्निस्थापन करके तब प्रधानपूजन व नवग्रह मंडल पूजन करे। - [हरिवासर 2024](https://karmkandvidhi.in/harivasar-2024/): हरिवासर योग क्या है : हरिवासर के विषय में कल्पद्रुम का जो प्रमाण है उससे ज्ञात होता है कि द्वादशी का प्रथम चरण हरिवासर होता है। यहां प्रथम चरण कहने का तात्पर्य प्रथम चतुर्थांश है। यह हरिवासर सभी द्वादशी में होता है और यदि एकादशी रात्र्यंत तक हो तो भी अगले दिन का पारण द्वादशी के प्रथम चतुर्थांश व्यतीत होने के पश्चात् ही करना चाहिये। और यह नियम सभी एकादशी व्रत के संबंध में है। - [नमक चमक रुद्राभिषेक - आगमोक्त (अनुपनीत-प्रयोग) namak chamak mantra](https://karmkandvidhi.in/namak-chamak-rudrabhishek/): नमक चमक रुद्राभिषेक - आगमोक्त (अनुपनीत-प्रयोग) namak chamak mantra : अनुपनीतों के लिये आगमोक्त "नमक चमक रुद्राभिषेक" की विधि है। इस आलेख में आगमोक्त नमक चमक स्तोत्र दिया गया है जो विशेष लाभकारी है। - [दीपावली का त्यौहार - Deepawali 2024](https://karmkandvidhi.in/deepawali-2024/): दीपावली का त्यौहार - Deepawali 2024 : दीपावली का दिन एक ऐसा त्यौहार है जिसमें कई पुजायें सम्मिलित होती है और आगे-पीछे के कई व्रत-त्यौहार भी इससे संबंधित होते हैं, जैसे : पितृ विसर्जन, कोजागरा, धनतेरस, यमचतुर्दशी, श्यामा पूजा, लघुदीपावली, देवदीपावली आदि। - [कोजागरा व्रत : कोजागरा कब है - Kojagara kab hai 2024](https://karmkandvidhi.in/kojagara-kab-hai-2024/): कोजागरा व्रत : कोजागरा कब है - kojagara kab hai 2024 : माता लक्ष्मी वर्ष में दो बार भ्रमण करती है और कहां वास करना चाहिये घरों का चयन करती है। एक बार दो दीपावली की रात्रि में भ्रमण करती है यह सभी जानते हैं किन्तु उससे पहले भी शरद पूर्णिमा की रात्रि को भ्रमण करती है और कौन जाग रहा है "कोजागर्ति" यह देखती है। "कोजागर्ति" के कारण ही इसका एक नाम कोजागरा भी है। - [केतु के 108 नाम (केतु अष्टोत्तर शतनामावली) - Ketu Ashtottara Shatanamavali](https://karmkandvidhi.in/ketu-ashtottara-shatanamavali/): केतु के 108 नाम (केतु अष्टोत्तर शतनामावली) - Ketu Ashtottara Shatanamavali : राहु की तरह ही केतु भी छाया ग्रह ही है, अर्थात सूर्य और चंद्र पथ का दूसरा संक्रमण बिंदु है और इसकी भी पिण्डात्मक उपस्थिति नहीं है। जिस दैत्य का सिर कटा हुआ धर राहु है वही सिर केतु है। अष्टोत्तरशतनाम का एक विशेष लाभ ज्योतिषियों के लिये भी होता है कि इसके द्वारा फलादेश संबंधी ज्ञान भी मिलता है। - [राहु के 108 नाम (राहु अष्टोत्तर शतनामावली) - Rahu Ashtottara Shatanamavali](https://karmkandvidhi.in/rahu-ashtottara-shatanamavali/): राहु अष्टोत्तर शतनामावली - Rahu Ashtottara Shatanamavali : राहु वास्तव में सूर्य और चंद्र पथ का एक संक्रमण स्थल है जो सदा वक्रमार्ग पर बढ़ता रहता है, इसलिये इसे छाया ग्रह भी कहा जाता है। राहु को अशुभ और पाप ग्रह कहा जाता है। चंद्र या गुरु से साथ राहु की युति हो तो विशेष अशुभफल प्रदायक योग का निर्माण करता है। - [शनि अष्टोत्तर शतनामावली - Shani 108 names](https://karmkandvidhi.in/shani-108-names/): शनि अष्टोत्तर शतनामावली - Shani 108 names : शनि स्वभावतः एक क्रूर व अशुभ ग्रह बताया गया है किन्तु जिस प्रकार गुरु शुभ व सौम्य ग्रह होने पर भी दृष्टि व युति में शुभद होते हैं, जिस भाव में उपस्थिति हो उस भाव के फल का ह्रास ही करते हैं उसी प्रकार शनि की दृष्टि में ही अशुभवत्व होता है, उपस्थिति में भाव के लिये शुभद ही होता है। - [शुक्र अष्टोत्तर शतनामावली (शुक्र ग्रह के 108 नाम) - Shukra ashtottara shatanamavali](https://karmkandvidhi.in/shukra-ashtottara-shatanamavali/): शुक्र अष्टोत्तर शतनामावली (शुक्र ग्रह के 108 नाम) - Shukra ashtottara shatanamavali : शुक्र ग्रह के 108 नाम वाले स्तोत्र को शुक्र अष्टोत्तरशत नामावली कहा जाता है। स्तोत्रों में देवताओं के 108 नाम अर्थात अष्टोत्तरशत नामों का भी विशेष होता है। - [बृहस्पति अष्टोत्तर शतनामावली - Guru ashtottara shatanamavali guru ke 108 Naam](https://karmkandvidhi.in/guru-ashtottara-shatanamavali/): बृहस्पति अष्टोत्तर शतनामावली - Guru ashtottara shatanamavali : गुरु स्वाभाविक रूप से शुभ और सौम्य ग्रह हैं, गुरु और बृहस्पति दो मुख्य नामों से प्रसिद्ध हैं। गुरु की शुभता दृष्टि-युति में बताई गयी है, किन्तु स्थिति में नहीं। अर्थात जिन-जिन ग्रहों-भावों को देखें तत्तत संबंधी फलों में शुभता की वृद्धि व अशुभता का निवारण करते हैं, किन्तु जिस भाव में उपस्थित हों उस भाव संबंधी फलों की हानि करते हैं। - [बुध अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र | बुध ग्रह के 108 नाम - Budh ashtottara shatanamavali](https://karmkandvidhi.in/budh-ashtottara-shatanamavali/): बुध अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र - Budh ashtottara shatanamavali : बुध कि एक विशेषता है कि संग के रंग में रंग जाता है अर्थात यदि किसी प्रकार के संसर्ग से रहित हो तो सौम्य, यदि शुभग्रह का संसर्ग हो तो शुभ और यदि अशुभ ग्रह का संसर्ग हो तो अशुभ भी हो जाता है। बुध ग्रह के 108 नाम वाले स्तोत्र को बुध अष्टोत्तरशत नामावली कहा जाता है। - [मंगल अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र - Mangal 108 names](https://karmkandvidhi.in/mangal-108-names/): मंगल अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र - Mangal 108 names : मंगल शब्द का अर्थ तो शुभ होता है किन्तु ज्योतिष में जिस ग्रह का नाम मंगल है उसे अशुभ अर्थात पाप या क्रूर ग्रह कहा गया है। मंगल से संबंधित एक और विशेष दोष है जिसका विवाह और दाम्पत्य जीवन पर प्रभाव होता है उसका नाम है मंगली दोष। स्वभावतः मंगल क्रूर ग्रह ही कहा गया है किन्तु कुंडली में परिस्थितिवश शुभ भी हो सकता है। - [चन्द्र अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र - चन्द्र देव के 108 नाम : Chandra 108 names](https://karmkandvidhi.in/chandra-108-names/): चन्द्र अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र - चन्द्र देव के 108 नाम | Chandra 108 names : पृथ्वी व पृथ्वीवासियों पर चन्द्रमा का प्रत्यक्ष प्रभाव देखा जाता है। यद्यपि ज्योतिष में चन्द्रमा को रानी भी कहा जाता है किन्तु अन्य शास्त्रों में चन्द्रमा पुरुष वर्ग से देव ही बताये गये हैं देवी नहीं। स्तोत्रों में देवताओं के 108 नाम अर्थात अष्टोत्तरशत नामों का भी विशेष होता है। - [सूर्य अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र | surya 108 naam stotra](https://karmkandvidhi.in/surya-108-naam/): सूर्य अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र | surya 108 naam stotra : किसी को भी प्रसन्न करने के लिये स्तोत्र का विशेष महत्व बताया गया है। स्तोत्रों में देवताओं के 108 नाम अर्थात अष्टोत्तरशत नामों का भी विशेष होता है। यहां सूर्य का अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र (surya 108 naam stotra) दिया गया है। - [केतु शांति के उपाय | केतु शांति पूजा : ketu shanti ke upay 11th](https://karmkandvidhi.in/ketu-shanti/): केतु शांति के उपाय | केतु शांति पूजा : ketu shanti ke upay : केतु को क्रूर, पाप ग्रह कहा जाता है और जिससे संपर्क या दृष्टि आदि युति करे उसे भी अशुभ कर देता है। केतु को छायाग्रह भी कहा जाता है क्योंकि इसका कोई पिंड नहीं है यह वास्तव में एक बिंदु है, जिस प्रकार सूर्य और चंद्र मार्ग का एक संक्रमण बिंदु राहु है उसी प्रकार दूसरा संक्रमण बिंदु केतु है। इस आलेख में केतु शांति विधि दी गयी है। - [राहु शांति के उपाय | राहु शांति पूजा : Rahu shanti ke upay 10th](https://karmkandvidhi.in/rahu-shanti/): राहु शांति के उपाय | राहु शांति पूजा : Rahu shanti ke upay : राहु को क्रूर, पाप ग्रह कहा जाता है और जिससे संपर्क या दृष्टि आदि युति करे उसे भी अशुभ कर देता है। राहु को छायाग्रह भी कहा जाता है क्योंकि इसका कोई पिंड नहीं है यह वास्तव में एक बिंदु है जो सूर्य और चंद्र मार्ग का संक्रमण स्थल है। - [शनि शांति के उपाय | शनि शांति मंत्र : Shani shanti ke upay - 9th](https://karmkandvidhi.in/shani-shanti/): शनि शांति के उपाय | शनि शांति मंत्र : Shani shanti ke upay : शनि को क्रूर, पाप ग्रह कहा जाता है और जिससे संपर्क या दृष्टि आदि युति करे उसे भी अशुभ कर देता है। तथापि शनि की जिस भाव में स्थिति होती है उस भाव संबंधी फल के लिये शुभद माना जाता है। शनि की दृष्टि में ही वास्तविक अशुभ फल का प्रभाव बताया गया है। - [शुक्र शांति के उपाय | शुक्र शांति मंत्र : Shukra shanti ke upay 8th](https://karmkandvidhi.in/shukra-shanti/): शुक्र शांति के उपाय | शुक्र शांति मंत्र : Shukra shanti ke upay - शुक्र को सौम्य, शुभ ग्रह कहा जाता है और जिससे संपर्क या दृष्टि आदि युति करे उसे भी शुभद कर देता है। तथापि असुर गुरु होने के कारण शुक्र विलासिता के कारक होते है, सर्वाधिक पाप विलासिता हेतु ही किये जाते हैं। इस आलेख में शुक्र शांति विधि दी गयी है। शुक्र शांति विधि का तात्पर्य शास्त्रोक्त विधान से शुक्र के अशुभ फलों की शांति करना है। - [गुरु शांति के उपाय | गुरु शांति मंत्र : Guru Shanti Mantra - 7th](https://karmkandvidhi.in/guru-shanti/): गुरु शांति के उपाय (Guru Shanti) : गुरु को सौम्य, शुभ ग्रह कहा जाता और जिससे संपर्क या दृष्टि आदि युति करे उसे भी शुभद कर देता है। गुरु की दृष्टि शुभद है किन्तु उपस्थिति अशुभ है, जिस भाव में गुरु स्थित होता है उस भाव संबंधी फलों का ह्रास करता है। इस आलेख में गुरु शांति विधि दी गयी है। - [बुध शांति के उपाय | बुध शांति मंत्र - Budh shanti 6th](https://karmkandvidhi.in/budh-shanti/): बुध शांति के उपाय | बुध शांति मंत्र - Budh shanti : नवग्रहों में बुध का चौथा क्रम आता है। जैसे सूर्य, चंद्र और बुध की शांति विधि मिलती है उसी प्रकार बुध के लिये भी शांति विधि प्राप्त होती है। बुध को सौम्य, सम ग्रह कहा जाता और जिससे संपर्क या दृष्टि आदि युति करे उसके अनुसार फलदायी होता है। इस आलेख में मंगल शांति विधि दी गयी है। बुध शांति विधि का तात्पर्य शास्त्रोक्त विधान से बुध के अशुभ फलों की शांति करना है। - [विजयादशमी : दुर्गा विसर्जन, अपराजिता पूजा](https://karmkandvidhi.in/vijayadashami/): विजयादशमी : दुर्गा विसर्जन, अपराजिता पूजा : आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ होने वाली शारदीय नवरात्रि आश्विन शुक्ल दशमी को संपन्न होती है। आश्विन शुक्ल दशमी को विजयादशमी भी कहा जाता है, दशहरा भी कहा जाता है और यात्रा भी। विजयादशमी के दिन भगवती दुर्गा, कलश आदि का विसर्जन किया जाता है, अपराजिता पूजा की जाती है, जयंती धारण किया जाता है। - [व्रत पर्व विवेक : पंचांग की जानकारी व शुद्धता को जांचना - Part 1](https://karmkandvidhi.in/vrat-parv-and-panchang/): व्रत पर्व विवेक : इस प्रकार दूध का दूध व पानी का पानी होने के पश्चात् भी यदि कोई यह गांठ बांध ले कि हम उसी पंचांग के आधार पर निर्णय करेंगे जिसके साक्षी चन्द्रमा नहीं हैं तो इस दुराग्रह का कोई हल नहीं हो सकता। ये ठीक उसी प्रकार है जैसे को क्रेता बाजार से जान-बूझकर उचित मूल्य पर सड़ी-गली सब्जी, फल इत्यादि क्रय करने का हठी/बुद्धू हो। - [रामार्चा कथा : 6 Chapter](https://karmkandvidhi.in/ramarcha-katha/): रामार्चा कथा : श्री शिव संहिता के भव्योत्तर खण्ड में रामार्चा पूजाविधि, माहात्म्य मिलता है। यह कथा भगवान शंकर और पार्वती के संवाद रूप में दिया गया है। प्रथम दो अध्याय में रामार्चा पूजा की विधि एवं मंत्रों को बताया गया है तथा अध्याय ३ से अध्याय ६ तक ४ अध्यायों में रामार्चा माहात्म्य अर्थात रामार्चा कथा है। यहां संपूर्ण कथा संस्कृत में प्रस्तुत प्रस्तुत किया गया है। - [श्री सत्यनारायण कथा – सुंदर कविता हिंदी में](https://karmkandvidhi.in/satynarayan-katha-kavita/): श्री सत्यनारायण कथा – सुंदर कविता हिंदी में : सत्यनारायण पूजा के बाद कथा श्रवण और नृत्य-गीत पूर्वक रात्रि जागरण करने का भी विधान बताया गया है, इस कारण सत्यनारायण पूजा में लोग भजन-कीर्तन का भी अनिवार्य रूप से आयोजन करते हैं। यहां काव्यात्मक सत्यनारायण कथा, भजन, आरती आदि दी गयी है जो सोने में सुहागे के समान है। - [कुमारी कन्या पूजन विधि - Kumari kanya pujan vidhi](https://karmkandvidhi.in/kumari-pujan/): कुमारी कन्या पूजन विधि : शारदीय नवरात्रि जो कि आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से दशमी पर्यन्त होती है कुमारी कन्या का पूजन विशेष रूप से किया जाता है। इसके अतिरिक्त शतचंडी आदि यज्ञों में भी कुमारी कन्या को भगवती का ही स्वरूप मानकर पूजा की जाती है। - [कुष्मांड बलि विधि - bali 2](https://karmkandvidhi.in/kushmand-bali/): कुष्मांड बलि विधि : पशुबलि का विधान सबके लिये नहीं है, जैसे वैष्णव व ब्राह्मणों के लिये पशुबलि का निषेध है किन्तु चण्डी की अर्चना में बलि अनिवार्य है इस कारण वैष्णव व ब्राह्मण जब चण्डी की अराधना करें तो उनके लिये पशुबलि के स्थान पर कूष्मांडबलि का विधान शास्त्रों में बताया गया है। - [नवरात्रि पूजा : छाग बलि विधि और मंत्र - Bali 1](https://karmkandvidhi.in/chagbali/): छाग बलि विधि : शाक्तों के लिये बलि शास्त्रसम्मत है, यदि निषिद्ध है तो वैष्णवों के लिये। वैष्णवों को अपना ज्ञान वैष्णवों में ही बांटना चाहिये शाक्तों के धर्म में बाधा नहीं करनी चाहिये। - [नवरात्रि हवन विधि मंत्र PDF सहित : तिथि 9वीं हवन](https://karmkandvidhi.in/navratra-havan/): नवरात्रि हवन विधि मंत्र PDF : हवन कर्मकांड का वो भाग है जिसमें देवता को आहुति रूपी भोजन प्रदान किया जाता है। हवन करने वाले को यह अनिवार्य रूप से ध्यान रखना चाहिये कि जो आहुति दी जा रही है उसे देवता अस्वीकार न करें। शारदीय नवरात्रि हो अथवा चैत्र नवरात्रि अथवा गुप्त नवरात्रि सबमें हवन की समान विधि ही होती है - [महानवमी त्रिशूलिनी पूजा - Puja No. 9](https://karmkandvidhi.in/trishulini-puja/): महानवमी त्रिशूलिनी पूजा : महानवमी के दिन सामान्य पूजा के अतिरिक्त तीन कर्म पाये जाते हैं : प्रथम त्रिशूलिनी पूजा, द्वितीय हवन, तृतीय सायंकृत्य। इसके साथ ही एक और मुख्यकर्म बलिदान भी पाया जाता है। महासप्तमी और महाष्टमी के दिन सामान्य बलि विधान कृताकृत है किन्तु महानवमी के दिन कृत्य है। महानवमी के दिन ब्राह्मण वर्ण के अतिरिक्त अन्य वर्णों के लिये बलिकर्म कृत्य कर्म है कृताकृत सिद्ध नहीं होता है। - [महाष्टमी निशापूजा, देवी जागरण - Navratri 8](https://karmkandvidhi.in/nisha-puja-vidhi/): नवरात्र में निशीथव्यापिनी अष्टमी को महानिशापूजा होती है। इसी को जगरना या देवी जागरण आदि भी कहा जाता है। यह प्रायः उदयव्यापिनी सप्तमी के दिन ही प्राप्त होता है तथापि यह आवश्यक नहीं है। उदयव्यापिनी अष्टमी भी निशीथव्यापिनी हो सकती है। जब उदयव्यापिनी अष्टमी ही निशीथव्यापिनी भी होती है तब अगले दिन निशापूजा किया जाता है। - [पत्रिकाप्रवेश : नवपत्रिका पूजा, महासप्तमी पूजा - 9 patrika puja](https://karmkandvidhi.in/patrika-pravesh-vidhi/): सप्तमी के दिन किये जाने वाले पूजा को पत्रिकाप्रवेश : नवपत्रिका पूजा, महासप्तमी पूजा - पत्रिका प्रवेश और महासप्तमी पूजा कहा जाता है। यहां बिल्वानयन, पत्रिकाप्रवेश, नवपत्रिका पूजन और महासप्तमी पूजन विधि एवं मंत्र दिये गये हैं। - [दुर्गा पूजा : बिल्वाभिमन्त्रण विधि](https://karmkandvidhi.in/bilwabhimantrn/): दुर्गा पूजा : बिल्वाभिमन्त्रण विधि - नवरात्र की पिछली तीनों तिथियां विशेष हैं - महासप्तमी, महाष्टमी और महानवमी । इन तीनों दिनों विशेष पूजा की जाती और उसका प्रारंभ षष्ठी को सायंकाल से ही हो जाता है। षष्ठी को सायंकाल में बिल्वाभिमंत्रण किया जाता है जिसे अगली प्रातः में भगवती का आवाहन-पूजन करने हेतु शिविका में स्थापित करके लाया जाता है। - [सीता शतनाम स्तोत्र - sita ashtottara shatanama stotram](https://karmkandvidhi.in/sita-ashtottara-shatanama-stotram/): सीता शतनाम स्तोत्र - sita ashtottara shatanama stotram : यहां माता सीता के दो प्रमुख अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र आनन्द रामायणोक्त और ब्रह्मयामलोक्त दिया गया है। आनन्द रामायणोक्त सीता शतनाम स्तोत्र अगस्त्य जी द्वारा कहा गया है जिसमें कुल २२ श्लोक हैं एवं ब्रह्मयामलोक्त सीता शतनाम स्तोत्र में कुल १८ श्लोक हैं। - [सीता कवच स्तोत्र - sita kavacham](https://karmkandvidhi.in/sita-kavacham/): सीता कवच स्तोत्र - sita kavacham : ऐसा प्रायः होता है कि हम भगवान राम के अनेकानेक स्तोत्रों का पाठ तो करते हैं किन्तु सीता के किसी स्तोत्र को जानते तक नहीं और सीता कवच स्तोत्र में ऐसा भी कहा गया है कि बिना सीता कवच पाठ किये राम कवच का पाठ करना वृथा है। इसमें कवच चतुष्टय का पाठ करने का निर्देश प्राप्त होता है। - [सीताराम स्तोत्र - sita ram stotra](https://karmkandvidhi.in/sita-ram-stotra/): सीताराम स्तोत्र - sita ram stotra : सीताराम स्तोत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह अनन्य रामभक्त हनुमानकृत है और इस कारण यह स्तोत्र विशेष महत्वपूर्ण हो जाता है। इस स्तोत्र में अनन्य रामभक्त हनुमान ने राम और सीता के युगल जोड़ी की स्तुति किया है। - [श्री राघवेन्द्र अष्टकम् - shri raghavendra ashtakam](https://karmkandvidhi.in/shri-raghavendra-ashtakam/): श्री राघवेन्द्र अष्टकम् - shri raghavendra ashtakam : रघुवंशी होने के कारण भगवान श्री राम का एक नाम राघव है और इसी नाम से पुनः राघवेन्द्र भी कहा गया क्योंकि रघुवंशी होने के कारण यदि श्रीराम राघव हैं तो अन्य सभी रघुवंशी भी राघव हैं। किन्तु यदि राघवेन्द्र कहा जाता है तो अन्य सभी रघुवंशी नहीं हो सकते वो श्री राम ही हो सकते हैं। - [श्री राघवयादवीयम् - shri raghav yadaviyam](https://karmkandvidhi.in/shri-raghav-yadaviyam/): श्री राघवयादवीयम् - shri raghav yadaviyam : सतरहवीं सदी में कांचीपुरम के वेंकटाध्वरि द्वारा रचित श्री राघवयादवीयम् एक अनुपम काव्य है जिसे अनुलोम विलोम काव्य नाम से भी जाना जाता है। जैसे कवि सूर्य कृत "श्रीरामकृष्ण विलोम काव्यं" स्वयं में अद्वितीय है उसी प्रकार से और उसी कड़ी में ही श्री राघवयादवीयम् भी है जिसमें ३० श्लोक उपलब्ध हैं और यथावत पढ़ने पर रामचरित है तो विलोम करके पढ़ने पर कृष्ण चरित हो जाता है। - [राम हृदय स्तोत्र - ram hridaya stotra](https://karmkandvidhi.in/ram-hridaya-stotra/): राम हृदय स्तोत्र - ram hridaya stotra : अध्यात्म रामायण के बालकाण्ड में महादेव द्वारा श्री राम हृदय स्तोत्र (ram hridaya stotra) कहा गया है। यहां संस्कृत में श्री राम हृदय स्तोत्र दिया गया है। - [श्रीरघुनाथमङ्गलस्तोत्रम् - Shri Raghunatha Mangala Stotram](https://karmkandvidhi.in/shri-raghunatha-mangala-stotram/): श्रीरघुनाथमङ्गलस्तोत्रम् - Shri Raghunatha Mangala Stotram : श्रीरघुनाथमङ्गलस्तोत्रम् में भगवान राम के अनेकानेक नामों के साथ मंगलकामना की गयी है और इस स्तोत्र का विशेष महत्व बताते हुये अंत में बताया गया है कि इस स्तोत्र का जो पाठ करते हैं उनके सामने मंगलायतन हरि रहते हैं अर्थात मंगल ही मंगल होता है। - [रामकृष्ण विलोम काव्य - ramakrishna viloma kavyam](https://karmkandvidhi.in/ramakrishna-viloma-kavyam/): रामकृष्ण विलोम काव्य - ramakrishna viloma kavyam : दैवज्ञ सूर्य पंडित द्वारा रचित चौदहवीं शताब्दी का संस्कृत साहित्य की अप्रतिम रचना “रामकृष्ण विलोम काव्यम्” (रामकृष्णविलोमकाव्यं) एक बहुत ही रोचक व दुर्लभ काव्य रचना है। - [श्रीराम आपदुद्धारकस्तोत्रम् - Shri Rama ApaduddhAraka stotram](https://karmkandvidhi.in/shri-rama-apaduddharaka-stotram/): श्रीराम आपदुद्धारकस्तोत्रम् - Shri Rama ApaduddhAraka stotram : संसार का एक नाम दुःखालय भी है अर्थात यहां दुःख-ही-दुःख मिलता है। जीव जन्म से मरणोपरांत आपदाओं से ही ग्रस्त रहता है और सबसे बड़ा दुःख या आपदा स्वयं संसारचक्र में पड़ा रहना ही है। सभी इस आपदा से मुक्ति चाहते हैं और भगवान श्रीराम के एक स्तोत्र आपदा से उद्धार करने वाला है जिसे श्रीराम आपदुद्धारकस्तोत्रम् (Shri Rama ApaduddhAraka stotram) नाम से जाना जाता है। - [श्रीराघवस्तोत्रम् - Shri Raghava Stotram](https://karmkandvidhi.in/shri-raghava-stotram/): श्रीराघवस्तोत्रम् - Shri Raghava Stotram : रघु के वंशज होने के कारण भगवान श्रीराम को ही राघव भी कहा जाता है अर्थात भगवान राम का ही एक नाम राघव भी है। इनके लिये एक विशेष स्तोत्र भी है जिसका नाम राघव स्तोत्र "श्रीराघवस्तोत्रम्" (Shri Raghava Stotram) है जिसका भी विशेष महत्व बताया गया है और कहा गया है कि जो इस स्तोत्र का पाठ उनके लिये मोक्ष का द्वार खुल जाता है। - [श्रीराम दुर्ग स्तोत्रम् - shri ram durga stotram](https://karmkandvidhi.in/shri-ram-durga-stotram/): श्रीराम दुर्ग स्तोत्रम् - shri ram durga stotram : श्रीराम दुर्ग स्तोत्र नाना प्रकार के दुर्गम दुःखों का नाश करने वाला है, शत्रु बाधाओं का निवारण करने वाला है। श्रीराम दुर्ग स्तोत्र भी दो मिलते हैं और यहां दोनों ही श्रीराम दुर्ग स्तोत्र संस्कृत में दिये गये हैं। - [राम कवच स्तोत्र - ram kavach stotra](https://karmkandvidhi.in/ram-kavach-stotra/): राम कवच स्तोत्र - ram kavach stotra : भगवान श्रीराम का एक कवच आनन्द रामायण में अगस्त्यकृत"आजानुबाहुमरविन्ददलायताक्षमाजन्म" है और एक कवच स्तोत्र ब्रह्माण्डपुराण में है जो श्रीराम त्रैलोक्यमोहन वज्रपञ्जर स्तोत्र नाम से भी जाना जाता है। - [पढ़िये श्री राम सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - ram sahasranam](https://karmkandvidhi.in/ram-sahasranam/): पढ़िये श्री राम सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - ram sahasranam : आनन्द रामायण में पार्वती द्वारा पूछने पर भगवान श्री शिव ने जो श्री राम सहस्रनाम का उपदेश किया वह बहुत ही महत्वपूर्ण है। यहां विनियोग, न्यास और ध्यान सहित आनन्द रामायणोक्त श्री राम सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है जिसमें कुल 171 श्लोक हैं। - [यहां पढ़ें राम अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - ram ashtottara shatanamavali](https://karmkandvidhi.in/ram-ashtottara-shatanamavali/): यहां पढ़ें राम अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - ram ashtottara shatanamavali : यदि हम भगवान श्री राम के अष्टोत्तर शतनाम की चर्चा करें तो अनेकानेक अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र हैं जिनमें से दो प्रमुख श्रीराम अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र यहां दिये गये हैं प्रथम पद्मपुराणोक्त रामाष्टोत्तर शतनाम और द्वितीय आनन्दरामायणोक्त रामाष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र। - [पढ़िये श्री रामाष्टकं स्तोत्र संस्कृत में - ramashtakam stotram](https://karmkandvidhi.in/ramashtakam-stotram/): पढ़िये श्री रामाष्टकं स्तोत्र संस्कृत में - ramashtakam stotram : जिस प्रकार से सभी देवी-देवताओं के लिये अष्टक स्तोत्र होते हैं भगवान श्री राम के भी अष्टक स्तोत्र हैं अर्थात 8 श्लोक में की गयी स्तुति जिसे रामाष्टकं स्तोत्र (ramashtakam stotram) कहा जाता है। यहां भगवान श्री राम के दो अष्टक स्तोत्र दिये गये हैं प्रथम आनन्द रामायणोक्त शिवकृत रामाष्टकं स्तोत्र और द्वितीय व्यास कृत रामाष्टकं स्तोत्र। - [पढ़िये श्री राम रक्षा स्तोत्र संस्कृत में - ram raksha stotra](https://karmkandvidhi.in/ram-raksha-stotra/): पढ़िये श्री राम रक्षा स्तोत्र संस्कृत में - ram raksha stotra : यदि श्री राम रक्षा स्तोत्र को राम कवच भी कहना चाहें तो कह सकते हैं। एक प्रचलित श्री राम रक्षा स्तोत्र जो बुधकौशिक कृत है वह आनन्द रामायणोक्त है और इसका एक अन्य नाम वज्रपञ्जर स्तोत्र भी है। इसके साथ ही एक अन्य श्री राम रक्षा स्तोत्र पद्म पुराण में भी मिलता है। यहां दोनों राम रक्षा स्तोत्र (ram raksha stotra) संस्कृत में दिया गया है। - [पढ़िये श्री राम स्तोत्र संस्कृत में - ram stotra](https://karmkandvidhi.in/ram-stotra/): पढ़िये श्री राम स्तोत्र संस्कृत में - ram stotra : यहां भगवान श्री राम की अनेकों स्तोत्र संस्कृत में दी गयी है जो इस प्रकार है : अध्यात्म रामायणोक्त अहल्याकृत श्री राम स्तोत्र, इन्द्रकृत श्री राम स्तोत्र, जटायुकृत श्री राम स्तोत्र, महादेवकृत श्री राम स्तोत्र और श्रीमद्भागवत महापुराणोक्त हनुमत्कृत श्री राम स्तोत्र। - [पढ़िये श्री राम स्तुति संस्कृत में - ram stuti](https://karmkandvidhi.in/ram-stuti/): पढ़िये श्री राम स्तुति संस्कृत में - ram stuti : हम भगवान राम की आराधना विष्णु अवतार रूप में करते हैं। भगवान श्री राम की उपासना में हमें उनके स्तुतियों की भी आवश्यकता होती है जिसके द्वारा उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास कर सकें। - [पढ़िये श्री राम द्वादश नाम स्तोत्र संस्कृत में - ram dwadash naam stotram](https://karmkandvidhi.in/ram-dwadash-naam-stotram/): पढ़िये श्री राम द्वादश नाम स्तोत्र संस्कृत में - ram dwadash naam stotram : भगवान श्री राम के बारह नामों का स्तोत्र महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहां प्रथम स्कन्दपुराणोक्त श्रीराम द्वादशनाम स्तोत्र दिया गया है और तदनन्तर ब्रह्माण्डपुराणोक्त श्रीराम द्वादशनाम स्तोत्र भी दिया गया है। - [यहां पढ़ें सनत्कुमार संहितोक्त रामस्तवराज संस्कृत में - ram stavraj](https://karmkandvidhi.in/ram-stavraj/): यहां पढ़ें सनत्कुमार संहितोक्त रामस्तवराज संस्कृत में - ram stavraj : सनत्कुमार संहिता में नारद मुनिकृत राम स्तोत्र है जिसे रामस्तवराज नाम से जाना जाता है। यह धर्मराज युधिष्ठिर और व्यास संवाद के रूप में वर्णित है जिसका वर्णन सूत जी द्वारा किया गया है। यहां भगवान श्री राम एक प्रमुख स्तोत्रों में से एक अध्यात्म रामयणोक्त रामस्तवराज (ram stavraj) संस्कृत में दिया गया है। - [अध्यात्म रामयणोक्त राम गीता संस्कृत में - ram geeta](https://karmkandvidhi.in/ram-geeta/): अध्यात्म रामयणोक्त राम गीता संस्कृत में - ram geeta : मूल गीता भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया उपदेश ही है किन्तु इसके साथ ही अन्य देवों द्वारा किये विशेष उपदेश भी उनकी गीता के नाम से जानी जाती है जिसमें से एक राम गीता भी है। - [पढ़िये शालिग्राम स्तोत्र संस्कृत में - shaligram stotra](https://karmkandvidhi.in/shaligram-stotra/): पढ़िये शालिग्राम स्तोत्र संस्कृत में - shaligram stotra : - [माङ्गल्यस्तव : मंगलकारी विष्णु स्तोत्र - shubhad vishnu stotra](https://karmkandvidhi.in/shubhad-vishnu-stotra/): माङ्गल्यस्तव : मंगलकारी विष्णु स्तोत्र - shubhad vishnu stotra : दाल्भ्य ऋषि ने पुलस्त्य ऋषि से प्रश्न सभी प्रकार से मंगलकारी और दुःस्वप्नन नाशक, अरिष्टनिवारक स्तोत्र के बारे में पूछा तो पुलस्त्य ऋषि ने माङ्गल्यस्तव का वर्णन किया और फलश्रुति में सभी प्रकार से मंगलकारी और दुःस्वप्नन नाशक आदि भी बताया। - [कल्याणकारी मंगल स्तोत्र अथवा मनोरथाष्टकम् - kalyankari mangal stotra](https://karmkandvidhi.in/kalyankari-mangal-stotra/): कल्याणकारी मंगल स्तोत्र अथवा मनोरथाष्टकम् - kalyankari mangal stotra : प्रातः स्मरणीय मंगल श्लोकों के बारे में तो लोग जानते ही हैं किन्तु इसके अतिरिक्त भी अनेकों कल्याणकारी मंगल स्तोत्र हैं जिनमें से एक प्रमुख स्तोत्र है व्यासकृत मंगल स्तोत्र (mangal stotra) जिसे मनोरथाष्टक भी कहा जाता है अर्थात यह स्तोत्र मनोरथ सिद्ध करने वाला है। - [पढ़ें अश्वत्थ स्तोत्र संस्कृत में - ashwattha stotram](https://karmkandvidhi.in/ashwattha-stotram/): पढ़ें अश्वत्थ स्तोत्र संस्कृत में - ashwattha stotram : गीता में भगवान कृष्ण ने अश्वत्थ वृक्ष के महत्व को बताते हुये कहा है कि वृक्षों में अश्वत्थ वृक्ष हूँ। सोमवती अमावास्या, शनिवार, विष्णु प्रतिमा विवाह आदि विशेष अवसरों पर अश्वत्थ वृक्ष की भी पूजा अर्चना का विशेष विधान है। पीपल को ही अश्वत्थ भी कहा जाता है। - [पढ़ें अग्नि सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - agni sahasranama stotram](https://karmkandvidhi.in/agni-sahasranama-stotram/): पढ़ें अग्नि सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - agni sahasranama stotram : मैथिलों की एक विशेषता है कि वो पंचदेवता के नहीं षड्देवता के उपासक होते हैं किन्तु बहुत लोगों को यह भ्रम रहता है कि मिथिला भी पंचदेवोपासक है। - [पढ़ें अग्नि अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - agni ashtottara shatanamavali](https://karmkandvidhi.in/agni-ashtottara-shatanamavali/): पढ़ें अग्नि अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - agni ashtottara shatanamavali : षड्देवता में अग्नि भी आते हैं और अग्नि की उपासना अन्य देवोपासकों को भी करनी ही होती है। किसी भी देवता के उपासक हो हवन में अग्नि की उपासना करनी ही होती है। वैसे अग्नि उपासकों का एक विशेष वर्ग भी होते हैं जो अग्निहोत्री कहलाते हैं और साग्निक नाम से जाने जाते हैं एवं शास्त्रों में अग्निहोत्रियों का विशेष महत्व बताया गया है। सामान्य लोगों की तुलना में अग्निहोत्रियों के लिये भिन्न विधान भी होता है। - [पढ़ें अग्नि अष्टक अर्थात वह्न्यष्टक स्तोत्र संस्कृत में - agni ashtak stotra](https://karmkandvidhi.in/agni-ashtak-stotra/): पढ़ें अग्नि अष्टक अर्थात वह्न्यष्टक स्तोत्र संस्कृत में - agni ashtak stotra : हम क्रमशः अग्नि स्तोत्रों का अवलोकन कर रहे हैं जो कि बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं और अब हमें अग्नि के अष्टक स्तोत्र का भी अवलोकन करना चाहिये। सभी देवताओं के अष्टक स्तोत्र होते हैं और अग्नि के भी अष्टक स्तोत्र हैं जो सीताकृत है और कूर्मपुराण में वर्णित है। - [पढ़ें अग्नि स्तोत्र संस्कृत में - agni stotra](https://karmkandvidhi.in/agni-stotra/): पढ़ें अग्नि स्तोत्र संस्कृत में - agni stotra : जल ही जीवन कहा जाता है किन्तु अग्नि भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं यह सरलता से समझ में नहीं आता है। ऐसा लगता है जैसे यज्ञादि करने में अथवा भोजन निर्माण आदि में ही अग्नि की आवश्यकता होती है। किन्तु सच यह है कि हम जो भोजन करते हैं उसका पाचन भी भी अग्नि ही करते हैं जिन्हें जठराग्नि नाम से जाना जाता है। कुपित अथवा क्षुधित अग्नि प्रलयंकर भी हो सकते हैं और इसलिये यह आवश्यक है कि अग्नि को प्रसन्न रखा जाय और क्षुधित न होने दिया जाय। - [पढ़ें अग्नि स्तुति संस्कृत में - agni stuti](https://karmkandvidhi.in/agni-stuti/): पढ़ें अग्नि स्तुति संस्कृत में - agni stuti : यज्ञ-हवन व अनेक अवसरों पर आपको जब अग्नि स्तुति की आवश्यकता होती है तो सामान्य रूप से ढूंढने पर नहीं मिलती, किन्तु अनेकानेक ऐसे अवसर होते हैं जब यदि उपलब्ध होती तो अग्नि की स्तुति करते। अब आपके लिये अग्नि स्तुति उपलब्ध है और जब आवश्यकता हो कर सकते हैं। - [पढ़ें बृहस्पतिकृत अग्नि स्तवन संस्कृत में - agni stotram](https://karmkandvidhi.in/agni-stotram/): पढ़ें बृहस्पतिकृत अग्नि स्तवन संस्कृत में - agni stotram : अग्नि देव को हव्यवाहन कहा जाता है अर्थात यज्ञ में जो हवि प्रदान की जाती है वह अग्नि में ही दी जाती है एवं देवताओं तक अग्निदेव ही पहुंचाते हैं। - [मृत्युञ्जय महादेव स्तवः - Mrityunjaya Stotra](https://karmkandvidhi.in/mrityunjaya-stotra/): मृत्युञ्जय महादेव स्तवः - Mrityunjaya Stotra : शिवरहस्य में मेधावी मुनि कृत मृत्युञ्जयमहादेवस्तवः मिलता है जो मृत्युंजय की उपासना में विशेष महत्वपूर्ण है। मेधावी मुनि भी मृत्युंजय के कृपापात्र थे इस कारण उनके द्वारा की गयी मृत्युंजय स्तवन अपना विशेष महत्व रखता है। - [पढ़ें चंद्रशेखर अष्टक स्तोत्र संस्कृत में - chandrashekhar ashtakam](https://karmkandvidhi.in/chandrashekhar-ashtakam/): पढ़ें चन्द्रशेखर अष्टकम संस्कृत में - chandrashekhar ashtakam : - [पढ़ें महारक्षक पाशुपतास्त्र स्तोत्र संस्कृत में - pashupatastra stotra](https://karmkandvidhi.in/pashupatastra-stotra/): पढ़ें महारक्षक पाशुपतास्त्र स्तोत्र संस्कृत में - pashupatastra stotra : सभी प्रकार के शान्त्यादि कर्मों के आरम्भ में इसका प्रयोग करने से विघ्नादि का निवारण होता है। विजय की कामना होने पर शतवृत्ति प्रयोग बताया गया है। इसी प्रकार से असाध्य साधन में घृत मिश्रित गुग्गुल होम करने का विधान कहा गया है। - [पशुपत्यष्टकम् स्तोत्र संस्कृत में - pashupati ashtak](https://karmkandvidhi.in/pashupati-ashtak/): पशुपत्यष्टकम् स्तोत्र संस्कृत में - pashupati ashtak : स्तोत्र स्वयं में तो महत्वपूर्ण होता ही है यदि वह अष्टक हो तो महत्ता में और भी वृद्धि हो जाती है। भगवान शिव को पशुपति भी कहा जाता है। पशुपति का तात्पर्य समस्त प्राणियों के स्वामी हैं। यहां श्री पशुपत्यष्टकम् स्तोत्रं (pashupati ashtak) संस्कृत में दिया गया है। - [कल्याणकारी पशुपति स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित - pashupati stotra](https://karmkandvidhi.in/pashupati-stotra/): कल्याणकारी पशुपति स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित - pashupati stotra : पशुपति अर्थात पशुओं के पति या स्वामी। अब प्रश्न है पशु कौन तो इसका उत्तर है समस्त जीव पशु है। इस कारण सभी जीवों के जो स्वामी हैं वो पशुपति हैं। - [अघोर मूर्ति सहस्रनाम - aghora murti sahasranaam](https://karmkandvidhi.in/aghora-murti-sahasranaam/): अघोर मूर्ति सहस्रनाम - aghora murti sahasranaam : श्रीरुद्रयामलतंत्र में अघोर मूर्ति सहस्रनाम स्तोत्र मिलता है जो अतिमहत्वपूर्ण है। यहां अघोर मूर्ति सहस्रनाम स्तोत्र (aghora murti sahasranaam) संस्कृत में दिया गया है। - [अघोराष्टक - aghora ashtakam](https://karmkandvidhi.in/aghora-ashtakam/): अघोराष्टक - aghora ashtakam : - [अघोर कवच स्तोत्र - aghor kavach](https://karmkandvidhi.in/aghor-kavach/): अघोर कवच स्तोत्र - aghor kavach : शिव कल्याणकारी हैं, अघोर हैं, अभयंकर हैं। शिव के अघोर स्वरूप में उनका नाम ही अघोर है। अघोर के उपासक ही अघोरी कहलाते हैं। शिव के अघोर रूप की उपासना में अघोर कवच की भी आवश्यकता होती है। यहां अघोर कवच (aghor kavach) संस्कृत में दिया गया है। - [पढ़िये अघोर स्तव संस्कृत में ~ aghor stotra](https://karmkandvidhi.in/aghor-stotra/): पढ़िये अघोर स्तव संस्कृत में ~ aghor stotra : अघोर का तात्पर्य है जो घोर न हो अर्थात भयंकर न हो। भगवान शिव का ही एक नाम अघोर भी है और इनके अघोर रूप की उपासना के लिये मंत्र, स्तोत्र आदि भी मिलते हैं। यहां अघोर स्तव संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़ें अर्द्धनारीश्वर सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - ardhnarishwar sahasranam](https://karmkandvidhi.in/ardhnarishwar-sahasranam/): यहां पढ़ें अर्द्धनारीश्वर सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - ardhnarishwar sahasranam : वर्त्तमान काल में भिन्नमना, स्वतंत्रता आदि का कुतर्क करते हुये सामान्य लोगों के दामपत्य जीवन को नारकीय बनाया जा रहा है। परिवार में सुख-शांति हेतु यह आवश्यक है कि पति-पत्नी के विचार समान हों। दामपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना हो तो अर्द्धनारीश्वर की उपासना करते हुये एकमना होना चाहिये। - [स्कन्द पुराणोक्त अर्द्धनारीश्वर अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र ~ ardhnarishwar ashtottarshatnam stotra](https://karmkandvidhi.in/ardhnarishwar-ashtottarshatnam-stotra/): स्कन्द पुराणोक्त अर्द्धनारीश्वर अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र ~ ardhnarishwar ashtottarshatnam stotra : एक दिव्यवस्त्र धारण करती हैं तो दूसरे दिगम्बर हैं, एक सिंहवाहिनी हैं तो दूसरे वृषारूढ़ हैं फिर भी दोनों एकाकार हो गये। दाम्पत्य जीवन को सुख-शांतिमय करने का सन्देश देता है भगवान शिव-पार्वती का एकाकार स्वरूप जिसे अर्द्धनारीश्वर नाम से जाना जाता है। - [उपमन्युकृत अर्द्धनारीश्वर अष्टक स्तोत्र - ardhnarishwar ashtak](https://karmkandvidhi.in/ardhnarishwar-ashtak/): उपमन्युकृत अर्द्धनारीश्वर अष्टक स्तोत्र - ardhnarishwar ashtak : शास्त्रों में भी शिव और शक्ति को भिन्न नहीं माना गया है। शिव और शक्ति एक-दूसरे से उसी प्रकार अभिन्न हैं, जिस प्रकार सूर्य और उसका प्रकाश, अग्नि और उसका ताप तथा दूध और उसकी धवलता, चन्द्रमा और उसकी शीतलता । - [पढ़िये शिवपार्वती का प्रिय अर्द्धनारीश्वर स्तोत्र - ardhnarishwar stotra](https://karmkandvidhi.in/ardhnarishwar-stotra/): पढ़िये शिवपार्वती का प्रिय अर्द्धनारीश्वर स्तोत्र - ardhnarishwar stotra : भगवान शिव और पार्वती का एकत्व होने पर जो स्वरूप बनता है उसे अर्द्धनारीश्वर कहते हैं। भगवान शिव को माता पार्वती इतनी प्रिय हैं कि उन्हें भिन्न समझना ही नहीं चाहिये क्योंकि इसी कारण से भगवान शिव ने पार्वती को पृथक रहने ही नहीं दिया एक हो गये। - [लिङ्गोत्पत्तिस्तवः - ब्रह्मा और विष्णु द्वारा किया गया लिंग स्तोत्र | ling stotra](https://karmkandvidhi.in/ling-stotra/): लिङ्गोत्पत्तिस्तवः - ब्रह्मा और विष्णु द्वारा किया गया लिंग स्तोत्र | ling stotra : शिवरहस्य में ब्रह्मा और विष्णु द्वारा किया गया एक लिङ्गोत्पत्तिस्तव अर्थात लिंग स्तवन मिलता है जिसके महत्वपूर्ण होने का सबसे बड़ा कारण तो यही है कि यह ब्रह्मा और विष्णु द्वारा किया गया है। इस स्तोत्र का पाठ करने वाला पापरहित हो जाता है ऐसा स्तोत्र में ही कहा गया है। - [यहां पढें रुद्र विभूति स्तोत्र संस्कृत में - rudra vibhuti stotra](https://karmkandvidhi.in/rudra-vibhuti-stotra/): यहां पढें रुद्र विभूति स्तोत्र संस्कृत में - rudra vibhuti stotra : भगवान शिव का एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है जिसे रुद्र विभूति स्तोत्र कहा जाता है। यहां रुद्र विभूति स्तोत्र (rudra vibhuti stotra) संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढें महत्वपूर्ण रुद्र सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - rudra sahasranama stotram](https://karmkandvidhi.in/rudra-sahasranama-stotram/): यहां पढें महत्वपूर्ण रुद्र सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - rudra sahasranama stotram : लिंग पुराण में रुद्र सहस्रनाम मिलता है जो बहुत ही महत्वपूर्ण है। यहां रुद्र सहस्रनाम स्तोत्र (rudra sahasranama stotram) संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढें दुर्वासाकृत रुद्र कवच स्तोत्र संस्कृत में - rudra kavacham](https://karmkandvidhi.in/rudra-kavacham/): यहां पढें दुर्वासाकृत रुद्र कवच स्तोत्र संस्कृत में - rudra kavacham : स्कंदपुराण में दुर्वासाकृत रुद्र कवच का वर्णन है जो कि विशेष महत्वपूर्ण है। यह कवच स्तोत्र सभी प्रकार के ज्वरों और भय का शमन करने वाला है। इसी प्रकार अन्य कामनायें यथा पुत्रलाभ, धन प्राप्ति, विद्या, आयु, आरोग्य आदि भी प्रदान करने वाला है रुद्र कवच। यहां दुर्वासाकृत रुद्र कवच स्तोत्र (rudra kavacham) संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढें रुद्र मृत्युंजय स्तोत्र संस्कृत में - rudra mrityunjay stotra](https://karmkandvidhi.in/rudra-mrityunjay-stotra/): यहां पढें रुद्र मृत्युंजय स्तोत्र संस्कृत में - rudra mrityunjay stotra : आवश्यकतानुसार अन्य सांसारिक सिद्धियां तो स्वतः सिद्ध हो जाती हैं, अर्थात यह नहीं समझना चाहिये कि सांसारिक सुख की प्राप्ति नहीं होगी। किन्तु सांसारिक कामनाओं की पूर्ति के लिये इस स्तोत्र का प्रयोग नहीं करना चाहिये। - [यहां पढें महत्वपूर्ण रुद्र स्तोत्र संस्कृत में - rudra stotra](https://karmkandvidhi.in/rudra-stotra-2/): यहां पढें महत्वपूर्ण रुद्र स्तोत्र संस्कृत में - rudra stotra : - [यहां पढें रुद्र गीता संस्कृत में - rudra gita](https://karmkandvidhi.in/rudra-gita/): यहां पढें रुद्र गीता संस्कृत में - rudra gita : श्रीमद्भगवगीता के बारे में तो सभी जानते हैं किन्तु रुद्रगीता के बारे में नहीं जानते। वराहपुराण में १९ अध्याय के रूप में रुद्रगीता पायी जाती है। यहां रुद्र गीता (rudra gita) संस्कृत में दी गयी है। - [यहां पढ़ें महत्वपूर्ण शिव स्तवन संस्कृत में - shiv stavan](https://karmkandvidhi.in/shiv-stavan/): यहां पढ़ें महत्वपूर्ण शिव स्तवन संस्कृत में - shiv stavan : भगवान शिव के स्तोत्रों में शिव स्तवराज स्तोत्र का बहुत ही उत्तम स्थान है और इसमें अनेकों प्रकार के फल भी बताये गए हैं। यह स्तोत्र पापों का क्षय करता है, सायुज्य मुक्ति प्रदायक है, सभी प्रकार के रोगों का हरण करने वाला है। शिव स्तवराज स्तोत्र पाठ पूर्वक शिव की उपासना करने वालों के करोड़ों जन्मों के पापों का नाश हो जाता है। - [यहां पढ़ें शिव सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - shiv sahasranam stotra](https://karmkandvidhi.in/shiv-sahasranam-stotra/): यहां पढ़ें शिव सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - shiv sahasranam stotra : भगवान शिव के सहस्रनाम स्तोत्र की बात करें तो अनेकों पुराणों में वर्णित है। शिव उपासना में सहयोगार्थ यहां प्रमुख शिव सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - (shiv sahasranam stotra) शिव पुराणोक्त शिव सहस्रनाम स्तोत्र, वायु पुराणोक्त शिव सहस्रनाम स्तोत्र, महाभारतोक्त शिव सहस्रनाम स्तोत्र, स्कन्द पुराणोक्त शिव सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में दिये गये हैं। - [यहां पढ़ें शिव अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - shiv ashtottar shatnam stotra](https://karmkandvidhi.in/shiv-ashtottar-shatnam-stotra/): यहां पढ़ें शिव अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - shiv ashtottar shatnam stotra : शिवरहस्योक्त शिव अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र, स्कन्द पुराणोक्त शिव अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र, मयूरकृत शिव अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र संस्कृत में दिये गये हैं। - [यहां पढ़ें 3 शिव कवच स्तोत्र संस्कृत में - shiv kavach stotra](https://karmkandvidhi.in/shiv-kavach-stotra/): यहां पढ़ें 3 शिव कवच स्तोत्र संस्कृत में - shiv kavach stotra : विभिन्न पुराणों में भगवान शिव के अनेकों कवच मिलते हैं यथा अमोघ शिव कवच, ब्रह्माण्डविजयी शिव कवच। शिव उपासना में सहयोगार्थ यहां ३ प्रमुख शिव कवच स्तोत्र (shiv kavach stotra) स्कन्द पुराणोक्त अमोघ शिव कवच, शिवरहस्योक्त दधीचिकृत शिव कवच, ब्रह्मवैवर्त पुराणोक्त ब्रह्माण्डविजयी नामक शिव कवच संस्कृत में दिये गये हैं। - [यहां पढ़ें 11 महत्वपूर्ण शिव स्तोत्र संस्कृत में - shiv stotra](https://karmkandvidhi.in/shiv-stotra/): यहां पढ़ें 11 महत्वपूर्ण शिव स्तोत्र संस्कृत में - shiv stotra : यहां प्रमुख ग्यारह शिव स्तोत्र जो दिये गए हैं वो हैं : स्कन्दपुराणोक्त विष्णु कृत शिव स्तोत्र, ब्रह्मपुराणोक्त कश्यप कृत शिव स्तोत्र, शिवरहस्योक्त दधीचि कृत शिव स्तोत्र, ब्रह्मपुराणोक्त गौतम कृत शिव स्तोत्र, कूर्मपुराणोक्त श्रीकृष्ण कृत शिव स्तोत्र, "जय जय शम्भो गिरिजाबन्धो" शिव स्तोत्र, ब्रह्मपुराणोक्त दक्ष कृत शिव स्तोत्र, मत्स्यपुराणोक्त देवदानव कृत शिव स्तोत्र, वामनपुराणोक्त देवादि कृत शिव स्तोत्र, लिङ्गपुराणोक्त देवादि कृत शिव स्तोत्र, ब्रह्मपुराणोक्त कश्यप कृत शिव स्तोत्र । सभी स्तोत्र संस्कृत में हैं। - [यहां पढ़ें 11 महत्वपूर्ण शिव स्तुति संस्कृत में - shiv stuti](https://karmkandvidhi.in/shiv-stuti/): यहां पढ़ें 11 महत्वपूर्ण शिव स्तुति संस्कृत में - shiv stuti : यहां प्रमुख ग्यारह शिव स्तुति जो दिये गए हैं वो हैं : सौरपुराणोक्त कुबेर कृत शिव स्तुति, बृहद्धर्मपुराणोक्त प्रसूति (दक्षपत्नी) कृत शिव स्तुति, वराहपुराणोक्त देव कृत शिव स्तुति, नटराजाष्टकं, ब्रह्माण्डपुराणोक्त परशुराम कृत शिव स्तुति, शिवरहस्योक्त पार्वती कृत शिव स्तुति, कालिकापुराणोक्त ब्रह्मा कृत शिव स्तुति, शिवरहस्योक्त भगीरथ कृत शिव स्तुति, शिवरहस्योक्त मृकुण्डु कृत शिव स्तुति, शिवरहस्योक्त विष्णु कृत शिव स्तुति और शिवरहस्योक्त शिलाद कृत शिव स्तुति। सभी स्तुति संस्कृत में हैं। - [यहां पढ़ें महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र संस्कृत में - mahishasura mardini stotram](https://karmkandvidhi.in/mahishasura-mardini-stotram/): यहां पढ़ें महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र संस्कृत में - mahishasura mardini stotram : महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र : "जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते"; एक बहुत ही प्रसिद्ध स्तोत्र है जो माता दुर्गा अथवा भगवती के किसी भी रूप की पूजा-अराधना करते समय गाया जाता है। यह शंकराचार्य विरचित बताया जाता है और इसमें २१ पद हैं एवं बाईसवां पद फलश्रुति है। - [यहां पढ़ें चामुण्डा स्तोत्र संस्कृत में - chamunda devi stotra](https://karmkandvidhi.in/chamunda-devi-stotra/): यहां पढ़ें चामुण्डा स्तोत्र संस्कृत में - chamunda devi stotra : यहां सर्वप्रथम पद्मपुराणोक्त चामुण्डा स्तुतिः दिया गया है जो रुद्रकृत है। तदनंतर द्वितीय चामुंडा स्तोत्र स्कन्द पुराण से दिया गया है जो गरुड द्वारा किया गया है एवं तृतीत चामुंडा स्तोत्र भी स्कन्द पुराण से ही है जो राजा नल द्वारा किया गया है। सभी स्तोत्र संस्कृत में हैं। - [यहां पढ़ें चंडिका स्तोत्र संस्कृत में - chandika stotram](https://karmkandvidhi.in/chandika-stotram/): यहां पढ़ें चण्डिका स्तोत्र संस्कृत में - chandika stotram : चण्डिका माता दुर्गा का ही एक विशेष रूप है किन्तु सामान्य जन एक स्वरूप दुर्गा में ही सभी को देखते हैं और यह शास्त्र-सम्मत ही है। श्री दुर्गा सप्तशती में भगवती की ही उक्ति है "एकैवाहं जगत्सर्वं" और यह भगवती का यह एकत्व सामान्य जनों में रहता है। - [यहां पढ़ें कात्यायनी स्तोत्र संस्कृत में - katyayani stotra](https://karmkandvidhi.in/katyayani-stotra/): यहां पढ़ें कात्यायनी स्तोत्र संस्कृत में - katyayani stotra : माता कात्यायनी को ही दशभुजा देवी महिषासुर मर्दिनी कहा गया है । कात्यायनी मुनि के द्वारा स्तुति करने पर बिल्व वृक्ष के पास आश्विन कृष्णा १४ को कात्यायनी देवी प्रकट हुई थी । - [यहां पढ़ें कुमारी सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - kumari sahasranama stotram](https://karmkandvidhi.in/kumari-sahasranama-stotram/): यहां पढ़ें कुमारी सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - kumari sahasranama stotram : रुद्रयामल तंत्र में कुमारी सहस्रनाम स्तोत्र दिया गया है जो बहुत ही प्रभावशाली है। इसमें बताया गया है कि "धनधान्यसुतप्रदम्" अर्थात यह स्तोत्र धन-धान्य-सुत प्रदायक है। इसी प्रकार यश, विजय, लाभ, शांति आदि कामनाओं को पूर्ण करने वाला है। सहस्रनामों से होमपूर्वक यजन करने से सिद्धि की प्राप्ति होती है। - [यहां पढ़ें कुमारी स्तोत्र संस्कृत में - kumari stotra](https://karmkandvidhi.in/kumari-stotra/): यहां पढ़ें कुमारी स्तोत्र संस्कृत में - kumari stotra : कुमारी पूजा की भी विशेष विधि और मंत्र शास्त्रों में मिलता है। कुमारी उपासना में कुमारी कवच, अष्टोत्तर शतनाम आदि भी मिलते हैं। kumari stotra : यहां कुमारी कवच स्तोत्र और कुमारी अष्टोत्तरशत नामावली दिया गया है जो कुमारी पूजन में विशेष लाभकारी है। - [यहां पढ़ें दुर्गा पञ्जर स्तोत्र संस्कृत में - durga panjar stotram](https://karmkandvidhi.in/durga-panjar-stotram/): यहां पढ़ें दुर्गा पञ्जर स्तोत्र संस्कृत में - durga panjar stotram : माता दुर्गा का पंजर स्तोत्र मार्कण्डेय पुराण में वर्णित है। यहां विनियोग और ध्यान सहित संस्कृत में दुर्गा पंजर स्तोत्र है। - [यहां पढ़ें अनेकों दुर्गा कवच स्तोत्र संस्कृत में - durga kavach sanskrit](https://karmkandvidhi.in/durga-kavach-sanskrit/): यहां पढ़ें अनेकों दुर्गा कवच स्तोत्र संस्कृत में - durga kavach sanskrit : यहां सर्वप्रथम कुब्जिकातन्त्रोक्त दुर्गा कवच (श्लोक संख्या 10) दिया गया है तदनंतर मुण्डमालातन्त्रोक्त प्रथम और द्वितीय दुर्गा कवच (श्लोक संख्या 18 और 19) पुनः ब्रह्मवैवर्त पुराणोक्त दुर्गा कवच (श्लोक संख्या 19) दिया गया है। सभी दुर्गा कवच संस्कृत में हैं। - [यहां पढ़ें माँ दुर्गा ध्यान मंत्र संस्कृत में - durga dhyan mantra](https://karmkandvidhi.in/durga-dhyan-mantra/): यहां पढ़ें माँ दुर्गा ध्यान मंत्र संस्कृत में - durga dhyan mantra : "जटाजूटसमायुक्तामर्द्धेन्दुकृतशेखराम्" में कुल १३ श्लोक हैं जो विशेष पूजा आदि करते समय पाठ किया जाता है। पहले माता दुर्गा के ध्यान का "जटाजूटसमायुक्ताम्" 13 श्लोकों वाला ध्यान मंत्र दिया गया है और तदनंतर अन्य अनेकानेक ध्यान मंत्र दिये गये हैं। सभी ध्यान मंत्र संस्कृत में हैं क्योंकि मंत्र संस्कृत में होते हैं और मंत्रों के संस्कृत में होने का कारण है संस्कृत ही देववाणी है। - [यहां पढ़ें दुर्गा अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - durga ashtottar shatnam stotram](https://karmkandvidhi.in/durga-ashtottar-shatnam-stotram/): यहां पढ़ें दुर्गा अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - durga ashtottar shatnam stotram : यहां दो दुर्गा अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र दिया गया है जिनमें से एक "दुर्गा शिवा महालक्ष्मी" है और दूसरा जो दुर्गा सप्तशती में भी देखा जाता है "सती साध्वी भवप्रीता" जो श्रीविश्वसारतन्त्र से लिया गया है। इसके साथ ही अष्टोत्तर शतनामावली भी दिया गया है। - [यहां पढ़ें दुर्गा सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - durga sahasranama stotram](https://karmkandvidhi.in/durga-sahasranama-stotram/): यहां पढ़ें दुर्गा सहस्रनाम स्तोत्रम संस्कृत में - durga sahasranama stotram : तन्त्रराजतन्त्र में माता दुर्गा का महत्वपूर्ण "दुर्गा दुर्गतिहरा" सहस्रनाम स्तोत्र दिया गया है। यहां विनियोग, न्यास और ध्यान सहित दुर्गा सहस्रनाम स्तोत्र (durga sahasranama stotram) संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़ें दकारादि दुर्गा सहस्रनाम स्तोत्रम संस्कृत में - dakaradi durga sahasranama](https://karmkandvidhi.in/dakaradi-durga-sahasranama/): यहां पढ़ें दकारादि दुर्गा सहस्रनाम स्तोत्रम संस्कृत में - dakaradi durga sahasranama : कुलार्णव तन्त्र में दुर्गा का दकारादि सहस्रनाम स्तोत्र दिया गया है जिसका विशेष महत्व है। इसमें 232 श्लोक हैं और माता दुर्गा के सहस्रनाम हैं, सभी नामओं का प्रथम अक्षर "द" है जिसके कारण इसे दकारादि दुर्गा सहस्रनाम (dakaradi durga sahasranamam) कहा जाता है। यहां माता दुर्गा का दकारादि सहस्रनाम स्तोत्र (dakaradi durga sahasranama) संस्कृत में दिया गया है। - [होली कब है 14 या 15 मार्च को - Holi 2025](https://karmkandvidhi.in/holi-2025/): होली कब है 14 या 15 मार्च को - Holi 2025 : इस आलेख में हम होली निर्णय को शास्त्रीय प्रमाणों के साथ समझते हुये होली 2025 में कब है इसे जानेंगे। साथ ही होली से सम्बंधित और भी महत्वपूर्ण तथ्यों को समझेंगे। - [यहां पढ़ें सरस्वती सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - saraswati sahasranama stotram](https://karmkandvidhi.in/saraswati-sahasranama-stotram/): यहां पढ़ें सरस्वती सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - saraswati sahasranama stotram : माता सरस्वती के कई सहस्रनाम स्तोत्रों में से यहां दो प्रमुख सहस्रनाम स्तोत्र दिये गये हैं जिनमें से प्रथम स्कन्दपुराणोक्त सरस्वती सहस्रनाम स्तोत्र है और द्वितीय रुद्रयामलोक्त सरस्वती सहस्रनाम स्तोत्र (saraswati sahasranama stotram) है। - [यहां पढ़ें सरस्वती अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - saraswati ashtottara shatanama stotram](https://karmkandvidhi.in/saraswati-ashtottara-shatanama-stotram/): यहां पढ़ें सरस्वती अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - saraswati ashtottara shatanama stotram : अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र से सभी देवी-देवताओं का एक विशेष स्तोत्र होता है जो विशेष महत्वपूर्ण होता है। अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र में देवता के 108 महत्वपूर्ण नामों का उल्लेख होता है। इन 108 नामों वाले स्तोत्र का पाठ करके भी कृपा प्राप्त की जाती है और 108 नामों द्वारा देवी-देवताओं की पूजा भी की जाती है। - [यहां पढ़ें सरस्वती हृदय स्तोत्र संस्कृत में - saraswati hridaya stotra](https://karmkandvidhi.in/saraswati-hridaya-stotra/): यहां पढ़ें सरस्वती हृदय स्तोत्र संस्कृत में - saraswati hridaya stotra : श्रीब्रह्माण्डपुराण में विद्यादानवाक्सरस्वती हृदय स्तोत्रम् मिलता है जो रुद्रयामल तंत्र में भी सरस्वती स्तोत्र नाम से है। यहां माता सरस्वती को प्रसन्न करने में विशेष महत्वपूर्ण सरस्वती हृदय स्तोत्र (saraswati hridaya stotra) दिये गये हैं। - [यहां पढ़ें सरस्वती कवच स्तोत्र संस्कृत में - saraswati kavach](https://karmkandvidhi.in/saraswati-kavach/): यहां पढ़ें सरस्वती कवच स्तोत्र संस्कृत में - saraswati kavach : यहां सर्वप्रथम ब्रह्मवैवर्त्त महापुराणोक्त सरस्वती कवच दिया गया है और तदनंतर रुद्रयामलोक्त सरस्वती कवच और तदनंतर श्रीमद्देवीभागवतोक्त सरस्वती कवच दिया गया है जो संस्कृत में हैं। - [यहां पढ़ें शारदा गीत अर्थात सरस्वती गीत संस्कृत में - saraswati geet](https://karmkandvidhi.in/saraswati-geet/): यहां पढ़ें शारदा गीत अर्थात सरस्वती गीत संस्कृत में - saraswati geet : यहां सर्वप्रथम रुद्रयामलोक्त वाणीगीत दिया गया है और तदनंतर सरस्वतीगीतिः और तदनंतर शारदापीठाधिपति शङ्कराचार्य श्री चन्द्रशेखर भारती विरचित शारदा गीत दिया गया है जो संस्कृत में हैं। - [यहां पढ़ें सरस्वती अष्टक स्तोत्र संस्कृत में - saraswati ashtaakam](https://karmkandvidhi.in/saraswati-ashtaakam/): यहां पढ़ें सरस्वती अष्टक स्तोत्र संस्कृत में - saraswati ashtaakam : प्रथम पद्मपुराणोक्त दिव्यज्ञान प्रदायक सरस्वती अष्टक स्तोत्र दिया गया है और उसके पश्चात् एक अन्य सरस्वत्यष्टक भी दिया गया है। दोनों ही अष्टक स्तोत्र संस्कृत में हैं। - [पढ़ें 7 प्रमुख सरस्वती स्तोत्र संस्कृत में - saraswati stotra](https://karmkandvidhi.in/saraswati-stotra/): पढ़ें 7 प्रमुख सरस्वती स्तोत्र संस्कृत में - saraswati stotra : यहां क्रमशः सरस्वती दशश्लोकी स्तोत्र, सरस्वती द्वादशनाम स्तोत्र, याज्ञवल्क्यकृत सरस्वती स्तोत्र, रुद्रयामलोक्त श्रीबृहस्पति विरचित सरस्वती स्तोत्र, वामनपुराणोक्त मार्कण्डेयमुनिप्रोक्त सरस्वती स्तोत्र, वामनपुराणोक्त वसिष्ठप्रोक्त सरस्वती स्तोत्र, मार्कण्डेयपुराणोक्त महासरस्वती स्तव संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़ें मां कमला अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - kamala ashtottara shatanamavali](https://karmkandvidhi.in/kamala-ashtottara-shatanamavali/): यहां पढ़ें मां कमला अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - kamala ashtottara shatanamavali : यहां दशमहाविद्या में से दसवीं महाविद्या कमला के सौ नामों वाला स्तोत्र अर्थात कमला अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र (Kamla ashtottara shatanamavali) संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़ें मां कमला कवच स्तोत्र संस्कृत में - kamala kavach](https://karmkandvidhi.in/kamala-kavach/): यहां पढ़ें मां कमला कवच स्तोत्र संस्कृत में - kamala kavach : महाविद्या साधना प्रकरण में दसवीं महाविद्या कमला हैं। माता कमला की उपासना करते हैं उनके लिये कमला कवच स्तोत्र का भी विशेष महत्व होता है। यहां कमला कवच स्तोत्र (Kamla Kavach Stotra) संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़ें मां कमला स्तोत्र संस्कृत में - Kamla Stotra](https://karmkandvidhi.in/kamla-stotra/): यहां पढ़ें मां कमला स्तोत्र संस्कृत में - Kamla Stotra : यहां कमला स्तोत्र (Kamla Stotra) संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़ें मां कमला सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - kamala sahasranamam](https://karmkandvidhi.in/kamala-sahasranamam/): यहां पढ़ें मां कमला सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - kamala sahasranamam : यहां दशमहाविद्या में से दसवीं महाविद्या कमला के सहस्र नामों वाला स्तोत्र अर्थात कमला सहस्र नाम स्तोत्र (Kamla sahasranamam) संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़ें मां मातंगी सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - matangi sahasranam](https://karmkandvidhi.in/matangi-sahasranam/): यहां पढ़ें मां मातंगी सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - matangi sahasranam : यहां नन्द्यावर्त्ततन्त्रोक्त श्रीमातङ्गी सहस्रनाम स्तोत्र (matangi sahasranam stotram) संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़ें मां मातंगी शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - matangi shatanama stotram](https://karmkandvidhi.in/matangi-shatanama-stotram/): यहां पढ़ें मां मातंगी शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - matangi shatanama stotram : यहां रुद्रयामलोक्त श्रीमातङ्गी शतनाम स्तोत्र एवं कालीविलासतन्त्रोक्त श्रीमातङ्गी शतनाम स्तोत्र दोनों मातंगी शतनाम स्तोत्र (matangi shatanama stotram) संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़ें मां मातंगी हृदय स्तोत्र संस्कृत में - matangi hridaya stotra](https://karmkandvidhi.in/matangi-hridaya-stotra/): यहां पढ़ें मां मातंगी हृदय स्तोत्र संस्कृत में - matangi hridaya stotra : यहां दक्षिणामूर्तिसंहितोक्त मातंगी हृदय स्तोत्र (matangi hridaya stotra) संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़ें मां मातंगी कवच स्तोत्र संस्कृत में - matangi kavach](https://karmkandvidhi.in/matangi-kavach/): यहां पढ़ें मां मातंगी कवच स्तोत्र संस्कृत में - matangi kavach : यहां रुद्रयामलोक्त मातंगी कवच सहित दो अन्य मातंगी कवच (matangi kavach) भी संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़ें मां मातंगी स्तोत्र संस्कृत में - matangi stotra](https://karmkandvidhi.in/matangi-stotra/): यहां पढ़ें मां मातंगी स्तोत्र संस्कृत में - matangi stotra : दशमहाविद्या में नौवीं महाविद्या मातंगी नाम से जानी जाती हैं। शिव की यह शक्ति असुरों को मोहित करने वाली और साधकों को अभिष्ट फल देने वाली है। गृहस्थ जीवन को श्रेष्ठ-सुख-शांति युक्त बनाने के लिए लोग इनकी पूजा करते हैं। इनकी जयंती अक्षय तृतीया को मनायी जाती है। - [यहां पढ़ें मां बगलामुखी ब्रह्मास्त्र संस्कृत में - Baglamukhi Brahmastra](https://karmkandvidhi.in/baglamukhi-brahmastra/): यहां पढ़ें मां बगलामुखी ब्रह्मास्त्र संस्कृत में - Baglamukhi Brahmastra : माता बगलामुखी ब्रह्मास्त्र माला मन्त्र का विशेष महत्त्व होता है। यहां बगलामुखी ब्रह्मास्त्र (Baglamukhi Brahmastra) संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़ें शत्रु नाशक बगलामुखी कवच स्तोत्र संस्कृत में - baglamukhi shatru nashak kavach](https://karmkandvidhi.in/baglamukhi-shatru-nashak-kavach/): यहां पढ़ें शत्रु नाशक बगलामुखी कवच स्तोत्र संस्कृत में - baglamukhi shatru nashak kavach : मां बगलामुखी के अनेकों कवच स्तोत्र हैं जिनमें से तीन कवच स्तोत्र पूर्व प्रकाशित है। मां बगलामुखी की उपासना मुख्य रूप से शत्रु पर विजय प्राप्ति की कामना से की जाती है और इसमें शत्रु विनाशक कवच स्तोत्र का पाठ बहुत ही लाभकारक होता है। - [यहां पढ़ें मां बगलामुखी हृदय स्तोत्र संस्कृत में - baglamukhi hridaya stotra](https://karmkandvidhi.in/baglamukhi-hridaya-stotra/): यहां पढ़ें मां बगलामुखी हृदय स्तोत्र संस्कृत में - baglamukhi hridaya stotra : पीताम्बराविद्या के नाम विख्यात बगलामुखी महाविद्या की साधना प्रायः शत्रुभय से मुक्ति और वाकसिद्धि के लिये की जाती है। इनकी उपासना में हल्दी की माला, पीले फूल और पीले वस्त्रों का विधान बताया गया है। मां बगलामुखी भक्तों जिसके लिए जो उनकी पूजा-अराधना आदि करता है, उनके शरण में जाता है उसे निर्भयता प्रदान करती हैं। विजय कामना से अनेकों देवी-देवताओं की उपासना की जा सकती हैं किन्तु बगलामुखी की उपासना विशेष फलकारक होती है। - [यहां पढ़ें त्रिपुर भैरवी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - Tripura Bhairavi Ashtottar shatnam stotra](https://karmkandvidhi.in/bhairavi-ashtottar-shatnam-stotra/): यहां पढ़ें त्रिपुर भैरवी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - Tripura Bhairavi Ashtottar shatnam stotra : दस महाविद्या में पांचवां क्रम माँ भैरवी का आता है जिन्हें त्रिपुर भैरवी के नाम से भी जाना जाता है। इस आलेख में त्रिपुर भैरवी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र ~ Tripura Bhairavi Ashtottar shatnam stotra संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़ें मां बगलामुखी कवच स्तोत्र संस्कृत में - maa baglamukhi kavach](https://karmkandvidhi.in/baglamukhi-kavach/): यहां पढ़ें मां बगलामुखी कवच स्तोत्र संस्कृत में - maa baglamukhi kavach : यहां सर्वप्रथम रुद्रयामलतन्त्रोक्त बगलामुखी कवच स्तोत्र तदनंतर विश्वसारोद्धारतन्त्रोक्त बगलामुखी कवच स्तोत्र पुनः रुद्रयामलोक्त महाविद्यापीताम्बरा बगलामुखी कवच स्तोत्र दिया गया है। सभी स्तोत्र संस्कृत में हैं। - [यहां पढ़ें मां बगलामुखी सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - Baglamukhi Sahasranam Stotra](https://karmkandvidhi.in/baglamukhi-sahasranam-stotra/): यहां पढ़ें मां बगलामुखी सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - Baglamukhi Sahasranam Stotra : दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या माता बगलामुखी अपने भक्तों को समस्त भय से मुक्ति देती हैं। यहां बगलामुखी सहस्रनाम स्तोत्र (Baglamukhi Sahasranam Stotra) संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़ें बगलामुखी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - baglamukhi ashtottar shatnam stotram](https://karmkandvidhi.in/baglamukhi-ashtottar-shatnam-stotram/): यहां पढ़ें बगलामुखी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - baglamukhi ashtottar shatnam stotram : यहां सर्वप्रथम रुद्रयामलोक्त सर्वसिद्धिप्रद बगलाष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र तदनंतर विष्णुयामलोक्त बगलाष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र, श्रीकालीविलासतन्त्रोक्त बगलामुखी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र दिया गया है। सभी स्तोत्र संस्कृत में हैं। - [नवरात्रि कब है - navratri kab hai 2025](https://karmkandvidhi.in/navratri-kab-hai-2025/): नवरात्रि कब है - navratri kab hai 2025 : वर्ष में चार नवरात्रायें होती हैं जो आश्विन, माघ, चैत्र और आषाढ मासों के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी दिन तक का होता है। इस आलेख में नवरात्रा 2025 के विषय में पूरी जानकारी दी गयी है, इसके साथ ही नवरात्रा के महत्व, नवरात्रा व्रत के नियम, नवरात्रा की कथा आदि के बारे में भी चर्चा की गयी है। - [यहां पढ़ें मां बगलामुखी को प्रसन्न करने वाले स्तोत्र संस्कृत में - Baglamukhi Stotra](https://karmkandvidhi.in/baglamukhi-stotra/): यहां पढ़ें मां बगलामुखी को प्रसन्न करने वाले स्तोत्र संस्कृत में - Baglamukhi Stotra : यहां सर्वप्रथम मां बगलामुखी के ध्यान मंत्र तदनंतर रुद्रयामलतन्त्रोक्त बगलामुखी स्तोत्र, श्रीबगलापञ्जर स्तोत्र दिया गया है। सभी स्तोत्र संस्कृत में हैं। - [यहां पढ़ें धूमावती माता का सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - dhumavati sahasranam stotra](https://karmkandvidhi.in/dhumavati-sahasranam/): यहां पढ़ें धूमावती माता का सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - dhumavati sahasranam stotra : माता धूमावती की पूजा-अराधना में सहस्रनाम स्तोत्र का विशेष महत्व है। यहां धूमावती सहस्रनाम स्तोत्र (dhumavati sahasranam stotra) संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़ें धूमावती माता का अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - dhumavati ashatottar shatnam stotra](https://karmkandvidhi.in/dhumavati-ashatottar-shatnam/): यहां पढ़ें धूमावती माता का अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - dhumavati ashatottar shatnam stotra : माता धूमावती की पूजा-अराधना में अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र का विशेष महत्व है। यहां धूमावती अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र (dhumavati ashatottar shatnam stotra) संस्कृत में दिया गया है। - [यहां पढ़ें धूमावती माता का हृदय स्तोत्र संस्कृत में - dhumavati hriday stotra](https://karmkandvidhi.in/dhumavati-hriday-stotra/): यहां पढ़ें धूमावती माता का हृदय स्तोत्र संस्कृत में - dhumavati hriday stotra : हमारे लिए सब कुछ अच्छा हो एक मायालोक रचता है, जो हमें काम, क्रोध, मद, लोभ और ईर्ष्या के पाश में बाँध देता है। धूमावती माता (dhumavati devi) बड़े उन पाशों को विदीर्ण कर देती हैं जो माया बंधन के कारण दुःखदायी प्रतीत होता है। - [यहां पढ़ें धूमावती माता का कवच स्तोत्र संस्कृत में - dhumavati kavach](https://karmkandvidhi.in/dhumavati-kavach/): यहां पढ़ें धूमावती माता का कवच स्तोत्र संस्कृत में - dhumavati kavach : एक साथ तीनों कालों या काल के परे भी देख लेने की जो विधा है, समय को अपने अनुरूप जानने और उसको बदलने का सामर्थ्य माता धूमावती के साधकों को प्राप्त होता है। परंतु ये सरलता से पहचाने नहीं जाते। सामान्य जनों-जनसमूहों से दूरी बनाकर पहाड़ों-जंगलों में रखते हैं। उन्हें अशुभ माना जाता है क्योंकि बहुधा सच वह नही होता, जैसा कि हम चाहते हैं। - [यहां पढ़ें धूमावती माता को प्रसन्न करने वाले स्तोत्र संस्कृत में - dhumavati stotram](https://karmkandvidhi.in/dhumavati-stotram/): यहां पढ़ें धूमावती माता को प्रसन्न करने वाले स्तोत्र संस्कृत में - dhumavati stotram : धूमावती की पूजा-अराधना करने से आयु, यश, शक्ति, आरोग्य आदि की वृद्धि होती है। माँ धूमावती के स्तोत्रादि का पाठ करने से नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं। माता धूमावती ऊर्ध्वाम्नाय की देवी हैं। माता धूमावती की साधना में पवित्रता की विशेष आवश्यकता होती है। यहां धूमावती स्तोत्र (dhumavati stotram) संस्कृत में दिया गया है। - [श्री हरि मंगलाष्टक स्तोत्र संस्कृत में - shri hari mangalashtak stotra](https://karmkandvidhi.in/shri-hari-mangalashtak-stotra/): "जय जयाजय मङ्गलमङ्गल" से प्रत्येक श्लोक का आरम्भ होता है जिसे श्री हरि मंगलाष्टक स्तोत्र नाम से जाना जाता है। भगवान विष्णु का एक नाम मंगलायतन है और "मंगलायतनो हरिः" कहा जाता है। मंगलायतन हरि के लिये श्री शांडिल्य मुनि कृत एक मंगलाष्टक स्तोत्र भी है जिसे श्री हरि मंगलाष्टक स्तोत्र (shri hari mangalashtak stotra) नाम से जाना जाता है और यह शांडिल्य संहिता में वर्णित है। - [अनेकानेक विष्णु नाम स्तोत्र - vishnu naam stotra](https://karmkandvidhi.in/vishnu-naam-stotra/): यदि हम भगवान विष्णु के नाम स्तोत्र की बात करें तो अनेकानेक नाम स्तोत्र मिलते हैं और इस आलेख की विशेषता यह है कि यहां भगवान विष्णु के अनेकों नाम स्तोत्र संकलित किये गये हैं यथा : विष्णोरष्टनामस्तोत्रम्, विष्णोरेकादशनामस्तोत्रं, विष्णु षोडश नाम स्तोत्र, श्रीविष्णुनामाष्टकं और विष्णोरष्टाविंशतिनामस्तोत्रम्। इसके अतिरिक्त नरसिंह पुराण में एक महादेवोक्त श्रीविष्णोर्नामस्तोत्रम् भी मिलता है और यहां विष्णु नाम स्तोत्र (vishnu naam stotra) भी संस्कृत में दिया गया है। - [पद्म पुराणोक्त विष्णु विजय स्तोत्र - vishnu vijaya stotram](https://karmkandvidhi.in/vishnu-vijaya-stotram/): पद्म पुराण में देवताओं द्वारा किया गया भगवान विष्णु का एक विशेष महत्वपूर्ण स्तोत्र है जिसे विष्णु विजय स्तोत्र (vishnu vijaya stotram) कहा गया है। इस स्तोत्र में देवताओं ने भगवान विष्णु के दशावतारों का वर्णन करते हुये स्तवन किया है, जिसके पश्चात् भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर देवताओं को वरदान दिया। व्यास जी फलश्रुति बताते हुये कहते हैं भक्ति व आदर पूर्वक इस स्तोत्र का जो पाठ करता है उसके लिये तीनों लोकों में कुछ भी दुर्लभ नहीं होता। इसके पाठ-श्रवण से शत गोदान जन्य पुण्य की प्राप्ति होती है। - [नारद पुराणोक्त श्री विष्णु रक्षा स्तोत्र - vishnu raksha stotram](https://karmkandvidhi.in/vishnu-raksha-stotram/): भगवान विष्णु भक्तों की रक्षा किस प्रकार करते हैं यह प्रह्लाद, ध्रुव, अम्बरीष, अर्जुन आदि की कथाओं से ज्ञात होता है। भगवान विष्णु जिसकी रक्षा करते हैं उसका कोई भी बाल बांका नहीं कर सकता है। हम सभी जानते हैं कि भगवान विष्णु का विशेष मंत्र द्वादशाक्षर है और यदि श्री विष्णु रक्षा स्तोत्र (vishnu raksha stotram) की बात करें तो इसमें द्वादश नामों से रक्षा कामना की गयी है। यह विष्णु रक्षा स्तोत्र नारद पुराण में वर्णित है जो यहां संस्कृत में दिया गया है। - [विष्ण्वष्टकम् : विष्णु अष्टक स्तोत्र संस्कृत में - vishnu ashtakam stotram](https://karmkandvidhi.in/vishnu-ashtakam-stotram/): विष्णु अष्टक स्तोत्र (vishnu ashtakam stotram) भगवान विष्णु के प्रति अपनी भक्ति और श्रद्धा व्यक्त करने का एक सरल और प्रभावी माध्यम है। यह आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और सांसारिक कल्याण की प्राप्ति में सहायक होता है। स्तोत्र का पाठ मन को शांति और पवित्रता से भर देता है। भगवान विष्णु को जगत के पालनहार के रूप में स्मरण करने से भक्तों में सुरक्षा और स्थिरता की भावना आती है। यहां भगवान विष्णु के 3 अष्टक स्तोत्र दिये गये हैं। - [भगवान विष्णु स्तुति संस्कृत में - bhagwan vishnu stuti](https://karmkandvidhi.in/bhagwan-vishnu-stuti/): विष्णु स्तुति : भगवान विष्णु की स्तुति करने का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह भक्त और भगवान के बीच एक सीधा और भावनात्मक संबंध स्थापित करता है। स्तुति के माध्यम से भक्त अपनी श्रद्धा, प्रेम और भक्ति को व्यक्त करते हैं। यह हृदय को शुद्ध करता है और मन को शांति प्रदान करता है। विभिन्न पुराणों में भगवान विष्णु के अनेकानेक स्तुतियां (bhagwan vishnu stuti) मिलते हैं और उनमें से कुछ विशेष महत्वपूर्ण स्तुतियों का यहां संकलन किया गया है। - [विष्णु स्तवन संस्कृत में - vishnu stavan](https://karmkandvidhi.in/vishnu-stavan/): देवताओं के कुछ स्तोत्र ऐसे होते हैं जिनका नाम स्तवन होता है। भगवान विष्णु को प्रमुख देवता माना गया है और इनके अनेकों स्तवन पुराणों में मिलते हैं। यदि आप भगवान विष्णु के भक्त हैं और उनकी अराधना करते हैं तो आपको भगवान विष्णु के स्तवन की भी आवश्यकता होती है। यहां ३ प्रमुख विष्णु स्तवन (vishnu stavan) संस्कृत में दिया गया है जो इस प्रकार हैं : अदितिकृत बृहद्धर्मपुराणोक्त विष्णु स्तवन, गौरमुखकृत वराहपुराणोक्त विष्णु स्तवन और नरसिंह पुराणोक्त विष्णु स्तवन। - [विष्णु स्तवराज स्तोत्र संस्कृत में : Vishnu stavaraja stotram](https://karmkandvidhi.in/vishnu-stavaraja-stotram/): किसी भी देवता के अनेकानेक स्तवनों में जो विशेष महत्वपूर्ण स्तोत्र होता है उसे स्तवराज स्तोत्र कहा जाता है। भगवान विष्णु के स्तवराज की भी चर्चा करें तो अनेकों मिलते हैं। यहां दो प्रमुख विष्णु स्तवराज स्तोत्र (Vishnu stavaraja stotram) संस्कृत में दिये गये हैं प्रथम नरसिंह पुराणोक्त है जो नारद जी के प्रश्न करने पर महेश्वर द्वारा बताया गया और दूसरा कल्किपुराणोक्त है जो पद्मा कृत है। - [विष्णु दिव्य सहस्रनाम स्तोत्रम् - vishnu divya sahasranama stotram](https://karmkandvidhi.in/vishnu-divya-sahasranama-stotram/): भगवान विष्णु के अनेकानेक सहस्रनाम स्तोत्रों में से एक महाभारत में भी है जो भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को उपदेश किया था। इसे विष्णु दिव्य सहस्रनाम (vishnu divya sahasranama stotram) से जाना जाता है। युधिष्ठिर ने भीष्म पितामह से पूछा था किस एक देवता की अराधना करनी चाहिये जो परम फलदायी हो, सभी धर्मों में परम धर्म क्या है, क्या जप करने से जीव जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है ? तो भीष्म पितामह ने उन्हें विष्णु दिव्य सहस्रनाम स्तोत्र का उपदेश दिया। - [विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - vishnu sahasranamam stotra](https://karmkandvidhi.in/vishnu-sahasranamam-stotra/): यदि हम भगवान विष्णु के सहस्रनाम की बात करें तो इसका मुख्य तात्पर्य होगा विष्णु नाम से वर्णित सहस्रनाम, क्योंकि भगवान विष्णु के अनेकों नाम से भी सहस्रनाम स्तोत्र (vishnu sahasranamam stotra) मिलते हैं। विभिन्न पुराणों में भगवान विष्णु के भी अनेकों सहस्रनाम स्तोत्र मिलते हैं जिनमें से दो प्रमुख विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र यहां दिया गया है। प्रथम गरुड़पुराणोक्त है और द्वितीय स्कन्द पुराणोक्त। - [विष्णु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - vishnu ashtottara shatanama stotram](https://karmkandvidhi.in/vishnu-ashtottara-shatanama-stotram/): क्या आप भगवान विष्णु का अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र (vishnu ashtottara shatanama stotram) ढूंढ रहे हैं ? यदि हां तो यहां आपको एक नहीं दो विष्णु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र मिलेगा। प्रथम स्तोत्र को श्रीविष्णोरष्टोत्तरशत दिव्यस्थानीयनाम स्तोत्र नाम से जाना जाता है और द्वितीय स्तोत्र शाक्तप्रमोद में वर्णित है। - [ब्रह्माण्डपावन विष्णु कवच स्तोत्र संस्कृत में - Brahmandapavan vishnu kavach](https://karmkandvidhi.in/brahmandapavan-vishnu-kavach/): ब्रह्मवैवर्त पुराण में शौनक - सौति संवाद रूप में भगवान विष्णु का एक अद्भुत कवच वर्णित है जिसे ब्रह्माण्डपावन कवच (Brahmandapavan vishnu kavach) नाम से जाना जाता है। इस कवच पाठ का फल सहस्र अश्वमेध यज्ञ और शत वाजपेय यज्ञतुल्य बताया गया है। यह भी कहा गया है कि इस कवच को धारण करने वाला जीवन्मुक्त हो जाता है, विष्णुतुल्य हो जाता है। - [त्रैलोक्यमङ्गल विष्णु कवच स्तोत्र संस्कृत में - Trailokyamangal vishnu kavach](https://karmkandvidhi.in/trailokyamangal-vishnu-kavach/): भगवान विष्णु का एक कवच नारद पंचरात्र में भी है जिसे त्रैलोक्यमङ्गल विष्णु कवच (Trailokyamangal vishnu kavach) नाम से भी जाना जाता है। अष्टोत्तर शतावृत्ति करना इसका पुरश्चरण प्रयोग कहा गया है। इस कवच का जो नित्य पाठ करता है उसका त्रैलोक्य में मंगल ही मंगल होता है और वह त्रैलोक्य विजयी भी होता है। - [विष्णु कवच स्तोत्र संस्कृत में - vishnu kavach](https://karmkandvidhi.in/vishnu-kavach/): जब दुःख के सागर में शोकसंतप्त राजा हरिश्चंद्र में ऋषि अगस्त्य से मुक्ति का उपाय पूछा तो उन्होंने विष्णु कवच (vishnu kavach) बताया। यह विष्णु कवच सभी प्रकार का मंगल करने वाला है, सभी रोगों का प्रशमन करने वाला है, सभी शत्रुओं का विनाश करने वाला है ऐसा फलश्रुति कहा गया है। - [विष्णु पंजर स्तोत्र संस्कृत में - vishnu panjar stotram](https://karmkandvidhi.in/vishnu-panjar-stotram/): पंजर स्तोत्र का महत्व बहुत ही कम लोग जानते हैं जबकि कवच स्तोत्र से भी अधिक रक्षक होता है पंजर स्तोत्र। पंजर स्तोत्र में भी कवच की ही भांति अपने इष्ट से सर्वतोभावेन सुरक्षा की कामना की जाती है। भगवान विष्णु की बात करें तो इनके विभिन्न पुराणों में अनेकानेक पंजर स्तोत्र (vishnu panjar stotram) मिलते हैं - [देवी भगवतोक्त महाविष्णु स्तोत्र संस्कृत में - mahavishnu stotram](https://karmkandvidhi.in/mahavishnu-stotram/): श्रीमद्देवी भगवत में भगवान विष्णु का देवताओं द्वारा किया गया एक विशेष स्तोत्र है जिसे महाविष्णु स्तोत्र (mahavishnu stotram) कहा गया है। इसमें देवताओं ने भगवान विष्णु के दशावतार का भी वर्णन किया है और तदनंतर भगवान विष्णु ने जो वरदान दिया उसमें फलश्रुति भी है। इस स्तोत्र के पाठ करने वाले का रोग, उत्पात आदि तो नष्ट होता ही है इसके साथ ही विशेष फल यह भी है कि अकालमृत्यु का भी नाश होता है। - [विविध पुराणोक्त विष्णु स्तोत्र संस्कृत में - vishnu stotram](https://karmkandvidhi.in/vishnu-stotram/): यदि हम भगवान विष्णु के स्तोत्रों के संकलन की बात करें तो ऐसा संकलन स्वयं में एक महापुराण के सम होगा। किन्तु कुछ महत्वपूर्ण स्तोत्रों का संकलन तो अवश्य ही करना आवश्यक रहता है। यहां भगवान विष्णु के विविध पुराणोक्त जिन स्तोत्रों (vishnu stotram) का संकलन किया गया है वो इस प्रकार हैं - [श्रीलक्ष्मीनारायणाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् - lakshmi narayana ashtottara shatanama stotram](https://karmkandvidhi.in/lakshmi-narayana-ashtottara-shatanama-stotram/): क्या आप सर्वदा विजय की इच्छा रखते हैं? क्या आप माता लक्ष्मी और भगवान नारायण दोनों की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं ? लक्ष्मी नारायण अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र (lakshmi narayana ashtottara shatanama stotram) बहुत ही महत्वपूर्ण स्तोत्र है जिसमें लक्ष्मी और नारायण दोनों का संयुक्त रूप से अष्टोत्तर शतनाम दिया गया है और श्लोकों की कुल संख्या मात्र १४ ही है। - [लक्ष्मी नारायण कवच - lakshmi narayana kavach](https://karmkandvidhi.in/lakshmi-narayana-kavach/): रुद्रयामल तंत्र में भैरव द्वारा देवी को लक्ष्मी नारायण कवच (lakshmi narayana kavach) बताया गया है जिसे श्रीवज्रपञ्जर नामक अद्भुत कवच भी कहा गया है। विजयदायक, बन्ध्यत्व निवारक आदि अनेकों फल भी बताये गये हैं और इसके प्रयोग में गुरुमुखी होना अनिवार्य कहा गया है। यहां रुद्रयामल तंत्रोक्त लक्ष्मी नारायण कवच संस्कृत में दिया गया है। - [श्रीलक्ष्मीनारायणाष्टकम् - laxmi narayan ashtakam](https://karmkandvidhi.in/laxmi-narayan-ashtakam/): "अशेषदुःखशान्त्यर्थं लक्ष्मीनारायणं भजे" यह ध्रुव पंक्ति है जिस स्तोत्र का उसे श्रीलक्ष्मीनारायणाष्टकम् (laxmi narayan ashtakam) स्तोत्र नाम से जाना जाता है। इस ध्रुव पंक्ति में ही देखा जा रहा है कि अशेष दुःख शान्त्यर्थं अर्थात संपूर्ण दुःखों की शांति के लिये लक्ष्मीनारायणं भजे अर्थात लक्ष्मी नारायण को भजता हूँ। इस प्रकार सभी दुःखों का निवारण करने में इस लक्ष्मी नारायण अष्टक स्तोत्र का पाठ विशेष लाभकारी हो सकता है। यहां श्रीलक्ष्मीनारायणाष्टकम् संस्कृत में दिया गया है। - [लक्ष्मी नारायण स्तोत्र संस्कृत में - laxmi narayan stotram](https://karmkandvidhi.in/laxmi-narayan-stotram/): भगवान नारायण की पूजा करनी हो तो लक्ष्मी के साथ और लक्ष्मी की पूजा करनी हो तो नारायण के करना विशेष लाभकारी होता है। इस स्थिति में ऐसा स्तोत्र जो दोनों का संयुक्त हो उसकी भी आवश्यकता होती है क्योंकि पूजा में स्तोत्र पाठ भी किया जाता है। यहां श्रीकृष्ण कृत लक्ष्मी नारायण स्तोत्र संस्कृत में (laxmi narayan stotram) संस्कृत में दिया गया है। - [स्कन्दपुराणोक्त शंकर नारायण सहस्रनाम स्तोत्र - shankar narayan sahasranama](https://karmkandvidhi.in/shankar-narayan-sahasranama/): अनेकानेक अवसरों पर भगवान विष्णु का भी वचन है कि उनमें और भगवान शंकर में भेद न रखे, उसी प्रकार भगवान शिव का भी वचन है कि उन दोनों में भेदबुद्धि का आश्रय न ले। संयुक्त रूप में दोनों को हरि हर, शंकर नारायण आदि भी कहा जाता है। इनके संयुक्त यज्ञ भी होते हैं जिसे हम हरिहर यज्ञ नाम से जानते हैं। ऐसे में आवश्यकता इनके संयुक्त सहस्रनाम की भी होती है और हमें स्कन्द पुराण में शंकर नारायण सहस्रनाम स्तोत्र (shankar narayan sahasranama) मिलता है जो यहां संस्कृत में दिया गया है। - [विष्णुधर्मोक्त नर नारायण स्तोत्र संस्कृत में - narnarayan stotra](https://karmkandvidhi.in/narnarayan-stotra/): भगवान विष्णु के चौबीस अवतारों में से चौथे अवतार नर-नारायण थे। इस अवतार में श्री विष्णु ने नर और नारायण रूपी युगलावतार ग्रहण किया था। विष्णुधर्म में अप्सरा द्वारा इनका स्तवन किया गया था जिससे उसे दिव्यज्ञान की प्राप्ति हुई। इसके साथ ही एक अन्य स्तोत्र भी है जिसमें "नरनारायणदेव पाहि माम्" कहकर रक्षा की प्रार्थना की गयी है। इसमें ८ श्लोक हैं इस कारण इसे नर नारायण अष्टक भी कहा जा सकता है। - [यहां पढ़ें भगवान सत्यनाराण का अष्टक स्तोत्र सत्यनारायणाष्टक - satyanarayan ashtakam](https://karmkandvidhi.in/satyanarayan-ashtakam/): "आदि देवं जगत कारणम्" से आरंभ होने वाले स्तोत्र में, जो कि भगवान सत्यनारायण का स्तोत्र है जिसमें ८ श्लोक हैं जिस कारण इसका नाम सत्यनारायणाष्टकं है जिसे सत्यनारायण अष्टकं (satyanarayan ashtakam) स्तोत्र के नाम से जाना जाता है। नवां श्लोक फलश्रुति है। यहां भगवान सत्यनारायण की पूजा में उपयोगी सिद्ध होने वाली सत्यनारायण अष्टकम स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है। - [महानारायणास्त्र अर्थात महा नारायण अस्त्र - maha narayan astra](https://karmkandvidhi.in/maha-narayan-astra/): भैरव द्वारा पूछे जाने पर देवी ने उन्हें महानारायणास्त्र (महा नारायण अस्त्र - maha narayan astra) का उपदेश दिया था। देवी ने उपदेश देने से पूर्व कहा कि महाभय उपस्थित हो, महाविघ्न हो, संकट हो इसके प्रयोग से सबका निवारण हो जाता है क्योंकि पुराकाल में सृष्टि विघ्न निवारणार्थ स्वयं ब्रह्मा ने इसका आश्रय लिया था। यह प्रयोग शुद्ध सात्विक विद्वान ब्राह्मणों द्वारा ही कराया जाना चाहिये। यहां महानारायणास्त्र संस्कृत में दिया गया है। - [लक्ष्मीनारायणीय संहितोक्त नारायण सहस्रनाम - narayan sahasranama](https://karmkandvidhi.in/narayan-sahasranama/): लक्ष्मीनारायण संहिता में नारायण सहस्रनाम स्तोत्र (narayan sahasranama) मिलता है जिसमें कुल १०० श्लोक हैं। यह स्तोत्र भगवान श्री कृष्ण और राधा संवाद रूप में है और भगवान श्री कृष्ण ने राधिका को स्तोत्र का उपदेश किया है। आर्द्र हो अथवा शुष्क हो, परपीडा पहुंचाने से संचित पाप हो सभी पापों का यह स्तोत्र नाश करता है। - [नारायण अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - narayana ashtottara shatanama stotram](https://karmkandvidhi.in/narayana-ashtottara-shatanama-stotram/): अनेकानेक बार आप नारायण अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र को ढूंढने का प्रयास करते होंगे किन्तु यह भी सरलता से उपलब्ध नहीं होता होगा। अब आपको नारायण अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र ढूंढने में समस्या नहीं होगी क्योंकि यहां नारायण अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र (narayana ashtottara shatanama stotram) संस्कृत में दिया गया है। इसके फलश्रुति में कहा गया है कि इसका जो पाठ करते हैं उनके अनेकों जन्मों के पापों का शमन हो जाता है। - [नारायण हृदय स्तोत्र संस्कृत में - narayan hridaya stotra](https://karmkandvidhi.in/narayan-hridaya-stotra/): नारायण हृदय स्तोत्र संस्कृत में - narayan hridaya stotra : हम सब एक मंत्र जानते हैं "त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव ।त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव त्वमेव सर्वं मम देव देव ॥" किन्तु यह किस स्तोत्र में है यह नहीं जानते हैं। अथर्वण रहस्य में भगवान विष्णु का हृदय स्तोत्र है जो नारायण हृदय स्तोत्र नाम से जाना जाता है और यह "त्वमेव माता च पिता त्वमेव" मंत्र इसी स्तोत्र के प्रार्थना में मिलता है। - [श्रीमद्भागवतोक्त नारायण कवच संस्कृत में - narayana kavacham](https://karmkandvidhi.in/narayana-kavacham/): श्रीमद्भागवतोक्त नारायण कवच संस्कृत में - narayana kavacham : श्रीमद्भागवत महापुराण को पंचम वेद भी कहा गया है। भगवान विष्णु का वास क्षीरसागर में है, जल का ही नाम नार होता है और नार जिसका अयन है उसका नाम नारायण है। भगवान नारायण का कवच श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णित है। - [नारायण स्तुति संस्कृत में - narayan stuti](https://karmkandvidhi.in/narayan-stuti/): नारायण स्तुति संस्कृत में - narayan stuti : भगवान विष्णु की अनेकानेक स्तुतियां नारायण नाम से भी पुराणों में वर्णित है क्योंकि भगवान विष्णु का ही एक प्रमुख नाम नारायण भी है। यहां तीन प्रमुख नारायण स्तुति (narayan stuti) संस्कृत में दिया गया है जो इस प्रकार हैं नरसिंहपुराणोक्त ब्रह्मा कृत, मुद्गल पुराणोक्त प्रचेता कृत और वराह पुराणोक्त राजा अश्वशिरसा कृत। - [शाण्डिल्य संहितोक्त नारायण स्तोत्र संस्कृत में - narayan stotra](https://karmkandvidhi.in/narayan-stotra/): शाण्डिल्य संहितोक्त नारायण स्तोत्र संस्कृत में - narayan stotra : भगवान नारायण का एक महत्वपूर्ण स्तोत्र शांडिल्य संहिता में वर्णित है जिसमें कुल ९ श्लोक हैं और जिसमें ८ के चतुर्थ पाद "तमादिनारायणदेवमीडे" है। इस स्तोत्र में भगवान नारायण को गुरुओं का भी गुरु कहा गया है, ऋषियों के लिये भी ऋषि बताया गया है, देवताओं का भी देव बताया गया है, ईश्वर का भी ईश्वर अर्थात परमेश्वर कहा गया है। - [नारायण मंत्र स्तोत्र संस्कृत में - narayana mantram](https://karmkandvidhi.in/narayana-mantram/): नारायण मंत्र स्तोत्र संस्कृत में - narayana mantram : द्वादशाक्षर मंत्र की भांति ही भगवान विष्णु का एक विशेष मंत्र "ॐ नमो नारायणाय" जिसे अष्टाक्षर मंत्र कहा जाता है। इस अष्टाक्षर मंत्र के लिये भगवान नारायण का एक स्तोत्र भी है जिसे नारायण मंत्र स्तोत्र कहा जाता है और यह नारद पुराण में वर्णित है। इस स्तोत्र में भगवान नारायण की महिमा का वर्णन करते हुये उन्हें ही सर्वव्यापी बताया गया है। - [अष्टाक्षर माहात्म्य : ॐ नमो नारायणाय मंत्र की महिमा - ashtakshara mantra mahatmya](https://karmkandvidhi.in/ashtakshara-mantra-mahatmya/): ॐ नमो नारायणाय मंत्र जो कि अष्टाक्षर मंत्र है इसके ऋषि स्वयं नारायण हैं, छंद गायत्री है, देवता परमात्मा हैं, ॐकार का वर्ण शुक्ल, नकार का रक्त, मोकार का कृष्ण, नाकार का पुनः रक्त, राकार का कुंकुमाभ, यकार पीत, णाकार का अञ्जन और यकार का बहुवर्ण है। सर्वार्थ सिद्धिप्रद अष्टाक्षर मंत्र का माहात्म्य श्री नरसिंह पुराण में वर्णित है जिसके प्रश्नकर्त्ता श्री शुकदेव हैं और उपदेशक व्यास हैं। यहां अष्टाक्षर माहात्म्य अर्थात ॐ नमो नारायणाय मंत्र की महिमा (ashtakshara mantra mahatmya) संस्कृत में दिया गया है। - [पद्म पुराणोक्त दामोदर स्तोत्र संस्कृत में - damodar stotra](https://karmkandvidhi.in/damodar-stotra/): पद्म पुराणोक्त दामोदर स्तोत्र संस्कृत में - damodar stotra : भगवान विष्णु का ही एक नाम दामोदर है। कृष्णावतार में माता यशोदा ने रजभक्षण पर उन्हें रस्सी से बांधने का उपक्रम किया था और इसी से भगवान कृष्ण का नाम दामोदर हो गया। पद्म पुराण में सत्यव्रत के एक स्तोत्र है जो दामोदर स्तोत्र नाम से जाना जाता है। इस स्तोत्र की एक विशेषता कार्तिक मास से संबद्ध होना भी है। - [ब्रह्म पुराणोक्त जगन्नाथ स्तोत्र - jagannath stotram](https://karmkandvidhi.in/jagannath-stotram/): जगन्नाथ स्तोत्र - jagannath stotram : भगवान जगन्नाथ अर्थात जगत के नाथ। भगवान विष्णु का ही नाम जगन्नाथ है और इनका प्रसिद्ध मंदिर पुरी में है। पुरी का नाम ही भगवान जगन्नाथ के नाम पर जगन्नाथ पुरी है। ब्रह्म पुराण में स्वयं ब्रह्मा ने भगवान जगन्नाथ की स्तुति किया है जिसमें पांच श्लोक हैं। - [गोपाल कवच संस्कृत में - gopal kavach](https://karmkandvidhi.in/gopal-kavach/): गोपाल कवच संस्कृत में - gopal kavach : नारद पंचरात्र में गोपाल कवच वर्णित है जिसे बाल गोपाल कवच भी कहा जा सकता है। इसी के साथ एक और महत्वपूर्ण गोपाल कवच ब्रह्मसंहिता में वर्णित है जिसे श्रीगोपालाक्षयकवचं नाम से जाना जाता है। प्रथम गोपाल कवच का मुख्य फल नित्य पाठ से शत्रुरहित होना बताया गया है तो द्वितीय श्रीगोपालाक्षयकवचं के अन्य अनेकानेक फल भी बताये गये हैं। - [वराह पुराणोक्त गदाधर स्तोत्रं - gadadhara stotram](https://karmkandvidhi.in/gadadhara-stotram/): वराह पुराणोक्त गदाधर स्तोत्रं - gadadhara stotram : वराह पुराण में रैभ्य के द्वारा भगवान विष्णु का जो स्तवन किया गया है उस स्तोत्र का नाम गदाधर स्तोत्र (gadadhara stotram) है। इस स्तोत्र में कुल ९ बार गदाधर नाम लिया गया है और इसी कारण इसे गदाधर स्तोत्र कहा गया है। - [वासुदेव स्तुति - vasudev stuti](https://karmkandvidhi.in/vasudev-stuti/): वासुदेव स्तुति - vasudev stuti : भगवान श्रीकृष्ण वसुदेव पुत्र होने के कारण वासुदेव नाम से जाने जाते हैं। वासुदेव नाम कितना महत्वपूर्ण है इसे इस तथ्य से सरलतापूर्वक समझा जा सकता है कि विष्णु भगवान का जो सबसे प्रसिद्ध और प्रशस्त मंत्र है वह द्वादशाक्षर मंत्र है जिसमें वासुदेव नाम को ही ग्रहण किया गया है। यहां वासुदेव स्तुति संस्कृत में दिया गया है। - [गोपी गीत संस्कृत में - gopi geet in sanskrit](https://karmkandvidhi.in/gopi-geet-in-sanskrit/): गोपी गीत संस्कृत में - gopi geet in sanskrit : श्रीमद्भागवत महापुराण में तीन गीत हैं जिनमें से एक है गोपी गीत। यह उस प्रसंग से सम्बंधित है जब रासक्रीड़ा में एक गोपी को किंचित अहंकार होने से भगवान श्रीकृष्ण चले गये और ढूंढने से भी मात्र उनके चरण-चिह्न ही दिखे किन्तु वो नहीं दिखे। तब व्याकुल गोपियों ने गायन करते हुये भगवान की जो करुण पुकार की वही गोपी गीत नाम से जानी जाती है। - [बाल कृष्ण सहस्रनाम - bal krishna sahasranam](https://karmkandvidhi.in/bal-krishna-sahasranam/): बाल कृष्ण सहस्रनाम - bal krishna sahasranam : भगवान कृष्ण की पूजा में उनके बालरूप का विशेष महत्व है जिन्हें बालकृष्ण, बालगोपाल कहा जाता है। यदि हाथ में लड्डू हो तो लड्डू गोपाल भी कहा जाता है। यदि आप बालकृष्ण के सहस्रनाम का अवलोकन करना चाहते हैं तो वह नारद पंचरात्र में शिव-पार्वती संवादात्मक है। - [राधा कृष्ण स्तुति - radha krishna stuti](https://karmkandvidhi.in/radha-krishna-stuti/): राधा कृष्ण स्तुति - radha krishna stuti : भगवान श्री कृष्ण का नाम राधा के साथ ही लिया जाता है जैसे राधे कृष्ण, राधे श्याम आदि। इसी प्रकार भगवान श्री कृष्ण की स्तुति में भी युगल स्तुति का विशेष महत्व होता है और इसके लिये पुराणों में राधा कृष्ण स्तुति भी मिलती है। यहां राधा कृष्ण स्तुति (radha krishna stuti) संस्कृत में दी गयी है। - [राधाकृष्ण युगल सहस्रनाम - radha krishna yugala sahasranama](https://karmkandvidhi.in/radha-krishna-yugala-sahasranama/): राधाकृष्ण युगल सहस्रनाम - radha krishna yugala sahasranama : जब युगल छवि, युगल सरकार आदि बोलते हैं तो राधाकृष्ण का ही बोध होता है। पुराणादि में दोनों के संयुक्त स्तोत्र भी प्राप्त होते हैं। नारद पुराण में सनत्कुमार व सूत संवाद से राधाकृष्ण युगल सहस्रनाम मिलता है जिसमें ५०० श्री कृष्ण के नाम हैं और तदनन्तर ५०० श्री राधाजी के नाम हैं। - [गोपाल दिव्य सहस्रनाम स्तोत्रम् - Gopala Divya Sahasranama Stotram](https://karmkandvidhi.in/gopala-divya-sahasranama-stotram/): गोपाल दिव्य सहस्रनाम स्तोत्रम् - Gopala Divya Sahasranama Stotram : भगवान श्री कृष्ण का ही एक नाम है गोपाल जिनके नाम से सहस्रनाम स्तोत्र तो हैं ही और एक विशेष सहस्रनाम स्तोत्र भी है जिसका नाम गोपाल दिव्य सहस्रनाम स्तोत्र है। इस स्तोत्र की फलश्रुति में रोग, बंधन, आपदा आदि का निवारण तो बताया ही गया है इसके साथ एक अन्य विशेषता जो बताई गयी है वो है पाषंडियों के संसर्गजन दोष का शमन। - [सम्मोहन तन्त्रोक्त गोपाल सहस्रनाम स्तोत्र - gopala sahasranama stotram](https://karmkandvidhi.in/gopala-sahasranama-stotram/): सम्मोहन तन्त्रोक्त गोपाल सहस्रनाम स्तोत्र - gopala sahasranama stotram : भगवान श्री कृष्ण गोपालन भी करते थे और उनका एक नाम गोपाल भी है। भगवान श्री कृष्ण के गोपाल नाम से भी अनेकानेक स्तोत्र हैं जिनमें से एक है गोपाल सहस्रनाम स्तोत्र जो सम्मोहन तंत्र में शिव-पार्वती संवाद रूप में मिलता है। अनेकानेक विशेष पुण्यप्रद अवसरों पर तो इसके पाठ का विधान है ही साथ ही श्राद्ध में भी इसके पाठ का विशेष महत्व बताया गया है और ये इसकी अतिरिक्त विशेषता है। - [गोपाल हृदय स्तोत्र - gopal hriday stotra](https://karmkandvidhi.in/gopal-hriday-stotra/): गोपाल हृदय स्तोत्र - gopal hriday stotra : भगवान गोपाल का जो हृदय स्तोत्र है उसे गोपाल हृदय स्तोत्र नाम से तो जानते ही हैं, इसके साथ ही इसे विष्णु हृदय स्तोत्र नाम से भी जाना जाता है। यहां गोपाल हृदय स्तोत्र (gopal hriday stotra) संस्कृत में दिया गया है। - [श्री गोपाल स्तवराज - Shri Gopala Stavaraja](https://karmkandvidhi.in/shri-gopala-stavaraja/): श्री गोपाल स्तवराज - Shri Gopala Stavaraja : भगवान श्रीकृष्ण गोपालन करते थे और इसी कारण उनका एक नाम है गोपाल। भगवान के विषय में कहा गया है "गो द्विज धेनु देव हितकारी", कर्मकांड में बिना गव्य प्रयोग के कुछ भी संभव नहीं है। यज्ञ का मूल गो है और गो के पालक भगवान स्वयं ही हैं एवं इसी कारण भगवान का एक नाम गोपाल है। स्तोत्रों में जो बहुत ही महत्वपूर्ण होता है उसे स्तवराज कहा जाता है। - [मधुराष्टकं - madhurashtakam](https://karmkandvidhi.in/madhurashtakam/): मधुराष्टकं - madhurashtakam : भगवान श्री कृष्ण की स्तुति करें और उसमें मधुराष्टकं न करें ऐसा कैसे हो सकता है। मधुराष्टकं भगवान श्री कृष्ण का ऐसा स्तोत्र है जो अधिकांश लोगों कंठाग्र भी रहता है। इस स्तोत्र में भगवान को सर्वविध मधुर और मधुर बताया गया है और इस स्तोत्र का पाठ-गायन-श्रवण सब विशेष मधुर लगता है। - [ककारादि कृष्ण सहस्रनाम - kakaradi krishna sahasranama](https://karmkandvidhi.in/kakaradi-krishna-sahasranama/): ककारादि कृष्ण सहस्रनाम - kakaradi krishna sahasranama : जिस देवता का सहस्रनाम हो उस देवता के नामाद्याक्षर से संबंधित सहस्रनाम विशेष महत्वपूर्ण होता है। भगवान श्री कृष्ण का नामाद्याक्षर "क" है अतः "क" अक्षर से संबंधित सहस्रनाम विशेष महत्वपूर्ण हो जाता है और इसे ककारादि कृष्ण सहस्रनाम (kakaradi krishna sahasranama) कहा जाता है। यदि ककारादि कृष्ण सहस्रनाम की बात करें तो यह श्री ब्रह्माण्ड पुराण में मिलता है और इसमें कुल ३६० श्लोक हैं। - [श्री कृष्ण सहस्रनाम - krishna sahasranam](https://karmkandvidhi.in/krishna-sahasranam/): श्री कृष्ण सहस्रनाम - krishna sahasranam : यदि भगवान श्री कृष्ण सहस्रनाम की बात करें तो यह अनेकों पुराणों में मिलता ही है और साथ ही साथ अनेकों नामों से भी सहस्रनाम मिलता है। इनमें से गर्ग संहिता में वर्णित श्री कृष्ण सहस्रनाम का अपना विशेष महत्व है - [कृष्ण अष्टोत्तर शतनाम - krishna ashtottara satanam](https://karmkandvidhi.in/krishna-ashtottara-satanam/): कृष्ण अष्टोत्तर शतनाम - krishna ashtottara satanam : नारद पञ्चरात्र में भगवान श्री कृष्ण का अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र मिलता है श्री शेष कृत है। इस अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का बहुत ही विशेष फल बताया गया है। अन्य सभी प्रकार के पुण्यप्रद कर्मों से कड़ोरों गुणित फल इसका कहा गया है। इसकी एक बड़ी विशेषता जो बताई गयी है वो है बालक और गोवंश के लिये पुष्टिकारक होना। - [श्री कृष्ण त्रैलोक्य विजय कवच | श्री कृष्ण कवच - krishna kavach](https://karmkandvidhi.in/krishna-kavach/): श्री कृष्ण त्रैलोक्य विजय कवच | श्री कृष्ण कवच - krishna kavach : भगवान श्री कृष्ण के भी कई कवच स्तोत्र हैं जो पुराणों में मिलते हैं और इनमें से एक विशेष महत्वपूर्ण कवच है महादेव द्वारा परशुराम जी को दिया गया श्री कृष्ण कवच (krishna kavach) जो ब्रह्मवैवर्त्त पुराण में वर्णित है। इस कवच स्तोत्र का एक नाम श्री कृष्ण त्रैलोक्य विजय कवच भी है। - [यहां पढ़ें श्री कृष्ण स्तोत्र - shri krishna stotra](https://karmkandvidhi.in/shri-krishna-stotra/): यहां पढ़ें श्री कृष्ण स्तोत्र - shri krishna stotra : विष्णुधर्मोक्त अर्जुन कृत कृष्ण स्तोत्र, कूर्म पुराणोक्त अदिति कृत कृष्ण स्तोत्र, ब्रह्मवैवर्त पुराणोक्त धर्म कृत कृष्ण स्तोत्र, ब्रह्म पुराणोक्त अक्रूर कृत कृष्ण स्तोत्र, विष्णु पुराणोक्त कालिय कृत कृष्ण स्तोत्र, हरिवंश पुराणोक्त नारद कृत कृष्ण स्तोत्र, भविष्य पुराणोक्त मदालस कृत कृष्ण स्तोत्र। - [यहां पढ़ें अनेकों कृष्ण स्तुति - krishna stuti](https://karmkandvidhi.in/krishna-stuti/): यहां पढ़ें अनेकों कृष्ण स्तुति - krishna stuti : यहां भागवत पुराणोक्त ब्रह्मा कृत श्रीकृष्ण स्तुति, पद्म पुराणोक्त अक्रूर कृत श्रीकृष्ण स्तुति, पद्म पुराणोक्त इन्द्र कृत श्रीकृष्ण स्तुति, गर्गसंहितोक्त दुर्वासा कृत श्रीकृष्ण स्तुति, गर्गसंहितोक्त देव कृत श्रीकृष्ण स्तुति दी गयी है। - [श्रीकृष्णमङ्गलं : कृष्ण मंगलाचरण श्लोक - krishna mangalam](https://karmkandvidhi.in/krishna-mangalam/): श्रीकृष्णमङ्गलं : कृष्ण मंगलाचरण श्लोक - krishna mangalam : भगवान के अनेकानेक स्तोत्रों में से एक प्रकार मंगल स्तोत्र भी होता है जिसमें भगवान के अनेकानेक नामों द्वारा उनसे मंगल प्रार्थना की जाती है, मंगल की कामना की जाती है। भगवान श्रीकृष्ण के अनेकों मंगल स्तोत्र हैं जो श्रीकृष्ण मङ्गलं (krishna mangalam), कृष्ण मंगलाचरण श्लोक, श्रीकृष्ण मङ्गल स्तोत्र आदि नामों से जाने जाते हैं। - [देवकीकृत श्री कृष्ण स्तोत्र - Devakikrita Shri krishna stotra](https://karmkandvidhi.in/devakikrita-shri-krishna-stotra/): देवकीकृत श्री कृष्ण स्तोत्र - Devakikrita Shri krishna stotra : श्रीमद्भागवतमहापुराण में भगवान श्री कृष्ण का चरित विशेष रूप से वर्णित है और श्रीकृष्ण चरित्र दशम स्कंध में वर्णित है। कृष्णावतार में भगवान श्रीकृष्ण की एक स्तुति स्वयं देवकी ने किया है जो दशम स्कंध के तृतीय अध्याय में मिलता है। देवकी कृत श्री कृष्ण स्तुति में कुल ७ श्लोक हैं। - [श्री कृष्ण चतुर्विंशति स्तोत्रं - Shri Krishna chaturvimshati Stotram](https://karmkandvidhi.in/shri-krishna-chaturvimshati-stotram/): श्री कृष्ण चतुर्विंशति स्तोत्रं - Shri Krishna chaturvimshati Stotram : भगवान श्री कृष्ण के अनेकानेक स्तोत्रों में एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है श्री कृष्ण चतुर्विंशति स्तोत्रं (Shri Krishnachaturvimshati Stotram) जिसमें 24 श्लोक है और इसी कारण इसका नाम श्री कृष्ण चतुर्विंशति स्तोत्र है। दो श्लोक फलश्रुति के हैं और इन दोनों श्लोकों को मिलाकर कुल 26 श्लोक हो जाते हैं। - [सुभद्राकृत अनन्तस्तव (अनंत स्तोत्र) - Anantastava](https://karmkandvidhi.in/anantastava/): सुभद्राकृत अनन्तस्तव (अनंत स्तोत्र) - Anantastava : अनन्त भगवान विष्णु का ही नाम है, जब अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण से पूछा था कि अनंत कौन हैं तो भगवान श्रीकृष्ण ने कहा था मैं ही अनंत हूँ। भगवान अनंत की पूजा अनंत चतुर्दशी को की जाती है और अनंत धारण भी किया जाता है। अनंत भगवान की पूजा में स्तोत्रादि की जब आवश्यकता होती है तो सरलता से मिलना कठिन होता है। - [श्रीशङ्कराचार्यविरचित अच्युताष्टकम् - achyutashtakam](https://karmkandvidhi.in/achyutashtakam/): श्रीशङ्कराचार्यविरचित अच्युताष्टकम् - achyutashtakam : श्री शङ्कराचार्यविरचित अच्युताष्टक जिसकी प्रथम पंक्ति है "अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम्" और सभी श्रद्धालु बड़े भक्ति-भाव से इसका पाठ-गायन करते हैं। भगवान विष्णु-राम-कृष्ण की पूजा हो और स्तोत्र पाठ करना हो तो सर्वप्रथम अच्युताष्टकम् ही ध्यान में आता है। - [गरुडपुराणोक्त अच्युत स्तोत्र - achyut stotra](https://karmkandvidhi.in/achyut-stotra/): गरुडपुराणोक्त अच्युत स्तोत्र - achyut stotra : भगवान विष्णु का ही एक नाम है अच्युत, वह जो कभी च्युत न हो अच्युत कहलाता है। भगवान विष्णु के अच्युत नाम से स्तोत्र भी मिलते हैं और अच्युत स्तोत्र गरुड़पुराण में वर्णित है। यह स्तोत्र नारद जी के प्रश्न करने पर ब्रह्मा द्वारा वर्णित है। - [वामन विश्वरूप वर्णन - vamana vishwarup](https://karmkandvidhi.in/vamana-vishwarup/): वामन विश्वरूप वर्णन - vamana vishwarup : जब राजा बलि ने भगवान वामन को तीन पग भूमि दान करने का संकल्प करके उन्हें मापने के लिये कहा तो उन्होंने अपनी देह का विस्तार करना आरम्भ कर दिया और इतना विस्तार किया कि दूसरे ही पग में सभी लोकों को नाप लिया। उस समय उनका स्वरूप कैसा था इसका वर्णन स्वयं वामन भगवान ने ही विष्णुधर्म में किया है जिसे वामन विश्वरूप वर्णन नाम से जाना जाता है। - [वामन स्तोत्र संस्कृत में - vaman stotra](https://karmkandvidhi.in/vaman-stotra/): वामन स्तोत्र संस्कृत में - vaman stotra : विभिन्न पुराणादि में भगवान वामन के अनेकानेक स्तोत्र मिलते हैं जिनमें से कुछ महत्वपूर्ण स्तोत्रों का यहाँ संग्रह किया गया है; यथा : नारद पुराणोक्त, पद्मपुराणोक्त, भागवत महापुराणोक्त और वामन पुराणोक्त। इस प्रकार चार वामन स्तोत्र (vaman stotra) का संग्रह होने से यह विशेष महत्वपूर्ण हो जाता है और वामन उपासना काल में एक साथ चारों स्तोत्रों का अवलोकन संभव होता है। - [वामन स्तुति संस्कृत में - vamana stuti](https://karmkandvidhi.in/vamana-stuti/): वामन स्तुति संस्कृत में - vamana stuti : भक्तप्रह्लाद के पुत्र विरोचन थे और उनका पुत्र राजा बलि था अर्थात भक्त प्रह्लाद के पौत्र थे राजा बलि। और इस प्रकार यदि विचार करें तो राजा बलि के पितामह हेतु भी भगवान विष्णु ने नृसिंहावतार लिया था और पुनः उसी कुल में राजा बलि के लिये भी वामन अवतार धारण किया था। - [अग्निपुराणोक्त परशुराम सहस्रनाम स्तोत्र - parshuram sahasranama](https://karmkandvidhi.in/parshuram-sahasranama/): अग्निपुराणोक्त परशुराम सहस्रनाम स्तोत्र - parshuram sahasranama : कलश पर परशुराम का स्थापन करके घृतादि द्रव्यों से स्नान-पूजन करके परशुराम सहस्रनाम स्तोत्र पाठ करने पर सहस्र यज्ञ का फल प्राप्त होता है। अयन-विषुव आदि अवसरों पर पाठ करके स्तोत्र लिखे और वैष्णव को पुस्तक प्रदान करे तो शत्रुरहित हो जाता है। - [पकारादि श्री परशुराम अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र - Pakaradi shri Parashuram ashtottarashatanama stotra](https://karmkandvidhi.in/pakaradi-shri-parashuram-ashtottarashatanama-stotra/): पकारादि श्री परशुराम अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र - Pakaradi shri Parashuram ashtottarashatanama stotra : भगवान श्री परशुराम का पकारादि अष्टोत्तर शतनाम हरियाणा प्रदेश के जयन्तपुरी मण्डलान्तर्गत नगूराङ्ग्राम वासी श्री कृष्णचन्द्र शास्त्री द्वारा रचित है। भगवान श्री परशुराम की अराधना में यदि आपको उनके अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र की आवश्यकता हो तो इस स्तोत्र का प्रयोग किया जा सकता है। - [परशुराम अष्टकं - parashuram ashtakam](https://karmkandvidhi.in/parashuram-ashtakam/): परशुराम अष्टकं - parashuram ashtakam : अष्टक स्तोत्र विशेष महत्वपूर्ण होता है यह तो हम जानते हैं किन्तु भगवान परशुराम के अष्टक स्तोत्रों को ढूंढना चाहें तो बड़ी कठिनता होती है और इसमें यहां आपको सहयोग मिलता है। यहां श्रीपरशुरामाष्टक और श्रीमद्दिव्यपरशुरामाष्टकं दोनों परशुराम अष्टकं (parashuram ashtakam) संस्कृत में दिया गया है। - [परशुराम स्तोत्र - parashuram stotra](https://karmkandvidhi.in/parashuram-stotra/): परशुराम स्तोत्र - parashuram stotra : क्या आपको भगवान परशुराम के स्तोत्र ढूंढ रहे हैं यदि हां तो यहां आपको दो परशुराम स्तोत्र मिलेगा। हमें भगवान परशुराम की अराधना में इनके स्तोत्र की भी आवश्यकता होती है और यहां दो परशुराम स्तोत्र (parashuram stotra) दिया गया है। - [परशुराम स्तुति - parashuram stuti](https://karmkandvidhi.in/parashuram-stuti/): परशुराम स्तुति - parashuram stuti : भगवान राम के दशावतारों में से एक अवतार हैं परशुराम। इनका भी वास्तविक नाम राम ही था किन्तु परशु धारण करते थे और ब्राह्मण वर्ण होने से परशु धारण करना एक विशेषता सिद्ध हुई और इस कारण इनका नाम परशुराम है। - [नरसिंह सहस्रनाम स्तोत्र - narasimha sahasranama stotram](https://karmkandvidhi.in/narasimha-sahasranama-stotram/): नरसिंह सहस्रनाम स्तोत्र - narasimha sahasranama stotram : नृसिंह पुराण में नरसिंह भगवान का सहस्रनाम स्तोत्र मिलता है जिसमें २२८ श्लोक हैं और यदि पूर्व पीठिका का भी योग कर दें तो १४ श्लोक और बढ़ जायेंगे। इस प्रकार नृसिंह सहस्रनाम स्तोत्र में श्लोकों की संख्या सर्वाधिक है। नरसिंह सहस्रनाम स्तोत्र ब्रह्मा जी द्वारा बताया गया है। - [नरसिंह अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र - narasimha ashtottara shatanama stotram](https://karmkandvidhi.in/narasimha-ashtottara-shatanama-stotram/): नरसिंह अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र - narasimha ashtottara shatanama stotram : भगवान नरसिंह अवतार का मुख्य प्रयोजन भक्त प्रह्लाद की रक्षा करना ही नहीं था अपितु भक्त की महिमा को भी सिद्ध करना था। यहां दो महत्वपूर्ण नरसिंह शतनाम स्तोत्र (narsingh shatnam stotra) दिया गया है। - [नरसिंह कवच स्तोत्र - narsingh kavach stotra](https://karmkandvidhi.in/narsingh-kavach/): नरसिंह कवच स्तोत्र - narsingh kavach stotra : दशावतारों में नरसिंह अवतार का विशेष महत्व इसलिये है क्योंकि इसमें नरसिंह भगवान भक्त प्रह्लाद की रक्षा करते हैं और इसके लिये हिरण्यकशिपु को मिले सभी वरदानों की तोड़ निकालकर एक ऐसा स्वरूप धारण करते हैं जो अद्वितीय है और वो है नर व सिंह का संयुक्त स्वरूप। इस प्रकार रक्षा की भावना हो तो भगवान नृसिंह से रक्षा कामना विशेष महत्वपूर्ण हो जाता है। - [नरसिंह स्तवराज - narsingh stawraj](https://karmkandvidhi.in/narsingh-stawraj/): नरसिंह स्तवराज - narsingh stawraj : नरसिंह स्तवराज का शत्रुनाशक प्रयोग में विशेष महत्वपूर्ण स्थान है। भगवान नरसिंह ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा किया था इसलिये संकट हो, शत्रु बाधा हो उस स्थिति में इसका पाठ बताई गयी विधि के अनुसार करना लाभकारी होता है ऐसा इसके फलश्रुति में वर्णित है। किन्तु यह विशेष प्रयोग है और बिना गुरु का दिशा-निर्देश प्राप्त किये यह प्रयोग नहीं करना चाहिये। - [नरसिंह ऋण मोचन स्तोत्र - narsingh rin mochan stotra](https://karmkandvidhi.in/narsingh-rin-mochan-stotra/): नरसिंह ऋण मोचन स्तोत्र - narsingh rin mochan stotra : भगवान विष्णु ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा हेतु नरसिंह अवतार लिया था। नरसिंह भगवान की कथा पुराणों में वर्णित है। ऋण बहुत कष्टकारक होता है और भक्त जब ऋण से पीड़ित हो तो उसके लिये श्रीनृसिंह पुराण में ऋणमोचन स्तोत्र है जिसमें ८ मंत्र हैं जिसकी ध्रुव पंक्ति "श्रीनृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये" है एवं नवां श्लोक फलश्रुति है। - [नरसिंह अष्टक - narsingh ashtakam](https://karmkandvidhi.in/narsingh-ashtakam/): नरसिंह अष्टक - narsingh ashtakam : अष्टक में ८ स्तुति श्लोक होने से वह स्वतः विशेष महत्वपूर्ण हो जाता है। भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिये भगवान विष्णु ने नरसिंह रूप धारण किया था और उनकी प्रसन्नता के लिये अष्टक स्तोत्रों का पाठ करना विशेष लाभकारी हो सकता है। - [नरसिंह स्तोत्र - narsingh stotra](https://karmkandvidhi.in/narsingh-stotra/): नरसिंह स्तोत्र - narsingh stotra : क्रमशः गरुड़पुराणोक्त नृसिंह स्तोत्र, लिंग पुराणोक्त नृसिंह स्तोत्र, वीरभद्रकृत शिवपुराणोक्त नृसिंह स्तोत्र, ब्रह्मपुराणोक्त श्रीलक्ष्मीनृसिंह द्वादश नाम स्तोत्र दिये गये हैं जो कि भगवान नृसिंह की उपासना में बहुत उपयोगी सिद्ध होते हैं। - [नरसिंह स्तुति संस्कृत में - narsingh stuti](https://karmkandvidhi.in/narsingh-stuti/): नरसिंह स्तुति संस्कृत में - narsingh stuti : भगवान नरसिंह की कृपा प्राप्ति हो जाये तो क्या कहना ? भगवान नरसिंह की कृपा प्राप्ति हेतु उनकी प्रसन्नता अपेक्षित होगी और इसके लिये उनके स्तुतियों की। - [एकादश मुखी हनुमान कवच - ekadash mukhi hanuman kavach](https://karmkandvidhi.in/ekadash-mukhi-hanuman-kavach/): एकादश मुखी हनुमान कवच - ekadash mukhi hanuman kavach : जिस प्रकार हनुमान जी का एक स्वरूप पंचमुखी है और वो इसलिये कि भगवान शिव के पांच मुख हैं और हनुमान रुद्रावतार ही हैं। उसी प्रकार से रुद्रों की संख्या ११ है और इसलिये हनुमान का एक स्वरूप एकादश मुखी हनुमान वाला भी है। - [पंचमुखी हनुमान हृदय स्तोत्र - panchmukhi hanuman hridaya stotra](https://karmkandvidhi.in/panchmukhi-hanuman-hridaya-stotra/): पंचमुखी हनुमान हृदय स्तोत्र - panchmukhi hanuman hridaya stotra : पंचमुखी हनुमान कवच का प्रयोग अधिकतर देखा जाता है और इनका हृदय स्तोत्र भी है जिसे पंचमुखी हनुमान हृदय स्तोत्र या श्रीपञ्चवक्त्रहनुमत् हृदयस्तोत्रम् (panchmukhi hanuman hridaya stotra) नाम से जाना जाता है। - [सुदर्शनसंहितोक्त पंचमुखी हनुमान कवच - panchmukhi hanuman kavach](https://karmkandvidhi.in/panchmukhi-hanuman-kavach/): सुदर्शनसंहितोक्त पंचमुखी हनुमान कवच - panchmukhi hanuman kavach : हनुमान जी के पंचमुखी स्वरूप को अराधना में विशेष महत्व प्राप्त है और इनकी अराधना में सबसे मुख्य कवच है जिसे पंचमुखी हनुमान कवच (panchmukhi hanuman kavach) कहते हैं। यदि हम पंचमुखी हनुमान कवच की बात करें तो यह विशेष महत्वर्पूण है जो श्रीसुदर्शन संहिता में शिव-पार्वती संवाद रूप में मिलता है। - [एकमुखी हनुमान कवच - ekmukhi hanuman kavach](https://karmkandvidhi.in/ekmukhi-hanuman-kavach/): एकमुखी हनुमान कवच - ekmukhi hanuman kavach : यदि एकमुखी हनुमान कवच कहें तो इसका कोई विशेष अर्थ नहीं होता, जो सामान्य स्वरूप है वही एकमुखी क्योंकि सामान्य स्वरूप में तो एक मुख ही है। तथापि जैसे पंचमुखी हनुमान कवच मिलता है उसी प्रकार से ब्रह्माण्डपुराण में नारद अगस्त्य संवाद रूप में एकमुखी हनुमान कवच मिलता है। - [घटिका चल हनुमान स्तोत्र - ghatikachala hanuman stotra](https://karmkandvidhi.in/ghatikachala-hanuman-stotra/): घटिका चल हनुमान स्तोत्र - ghatikachala hanuman stotra : हनुमान जी की उपासना में एक विशेष महत्वपूर्ण स्तोत्र ब्रह्माण्ड पुराण में ब्रह्मा-नारद संवाद रूप में मिलता है जिसका नाम घटिका चल हनुमान स्तोत्र (ghatikachala hanuman stotra) है। घटिकाचल स्तोत्र से धन-पुत्र-अभीष्टसिद्धि आदि फल तो प्राप्त होता ही है इसके साथ ही इस स्तोत्र का सबसे बड़ा महत्व विजय प्राप्ति का है। - [मार्कण्डेय पुराणोक्त हनुमान ध्यान मंत्र - hanuman dhyan mantra](https://karmkandvidhi.in/hanuman-dhyan-mantra/): मार्कण्डेय पुराणोक्त हनुमान ध्यान मंत्र - hanuman dhyan mantra : हनुमान जी के कुछ विशेष ध्यान मंत्र अथवा ध्यान श्लोक मार्कण्डेय पुराण में मिलता है और जिन्हें हनुमान जी के ध्यान मंत्र की आवश्यकता हो उनके लिये यह विशेष महत्वपूर्ण आलेख है क्योंकि इसमें मार्कण्डेयपुराणोक्त हनुमान ध्यान मंत्र (hanuman dhyan mantra) दिया गया है। - [श्री पवनजाष्टकं - shri pavanajastakam](https://karmkandvidhi.in/shri-pavanajastakam/): श्री पवनजाष्टकं - shri pavanajastakam : हनुमान जी को पवनपुत्र भी कहा गया है और इस कारण पवनात्मज नाम से भी जाने जाते हैं और यदि पवनज कहें तो वह भी पवनपुत्र हनुमान का ही नाम है। हनुमान जी का एक अष्टक स्तोत्र पवनज नाम से भी है जिसे पवनजाष्टकं नाम से जाना जाता है। - [हनुमान सहस्रनाम स्तोत्र - hanuman sahasranam stotra](https://karmkandvidhi.in/hanuman-sahasranam-stotra/): हनुमान सहस्रनाम स्तोत्र - hanuman sahasranam stotra : माता ने भगवान शिव से ग्यारहवें रुद्रावतार हनुमान को प्रसन्न करने का उपाय पूछा तो भगवान शिव ने हनुमान सहस्रनाम स्तोत्र बताया। इस स्तोत्र में हनुमान जी का एक अतिप्रभावशाली मंत्र भी उल्लिखित है जो इस प्रकार है "ॐ क्लीं नमो भगवते हनुमते स्वाहा"। - [हनुमान अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र - hanuman ashtottara shatanama stotram](https://karmkandvidhi.in/hanuman-ashtottara-shatanama-stotram/): हनुमान अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र - hanuman ashtottara shatanama stotram : पद्मपुराणोक्त अष्टोत्तर शतनाम, ब्रह्मवैवर्त पुराणोक्त हनुमदष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्, पराशर संहितोक्त श्रीहनुमदष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् और श्रीरामरहस्योक्त श्रीहनुमदष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्। - [हनुमान कवच - hanuman kavach](https://karmkandvidhi.in/hanuman-kavach/): हनुमान कवच - hanuman kavach : यदि हम हनुमान कवच की बात करें तो हनुमान जी के भी विभिन्न पुराणों में अनेकानेक कवच स्तोत्र हैं जिनमें से दो प्रमुख स्तोत्र श्रीबृहन्नारदीय पुराणोक्त और सुदर्शन संहितोक्त हनुमान कवच (hanuman kavach) अर्थात श्रीहनुमत्कवचम् यहां संस्कृत में दिया गया है। - [हनुमान पंजर स्तोत्र - hanuman panjar stotra](https://karmkandvidhi.in/hanuman-panjar-stotra/): हनुमान पंजर स्तोत्र - hanuman panjar stotra : पराशर संहिता में श्रीपराशर मैत्रेय संवाद के रूप में हनुमान जी का एक प्रमुख स्तोत्र है जिसका नाम है हनुमान पंजर स्तोत्र। अपने इष्ट देवता के कृपा प्रसाद से पूर्ण सुरक्षा प्राप्त कराने वाले स्तोत्र को पंजर स्तोत्र कहा जाता है। यहां हनुमान पंजर स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है। - [हनुमान स्तवराज, हनुमान स्तवन - hanuman stavan](https://karmkandvidhi.in/hanuman-stavan/): हनुमान स्तवराज, हनुमान स्तवन - hanuman stavan : पराशर संहिता में श्रीपराशर मैत्रेय संवाद के रूप में हनुमान जी स्तवराज वर्णित है जो विशेष महत्वपूर्ण स्तोत्र है। यहां हनुमान स्तवराज संस्कृत में दिया गया है और इसके साथ ही एक अन्य हनुमान स्तवन (hanuman stavan) "कन्दर्पकोटिलावण्यं सर्वविद्याविशारदम्" संस्कृत में दिया गया है। - [श्रीहनुमत्स्तोत्रं (हनुमान स्तोत्र) - hanuman stotra](https://karmkandvidhi.in/hanuman-stotra/): श्रीहनुमत्स्तोत्रं (हनुमान स्तोत्र) - hanuman stotra : किसी भी देवता को शीघ्र प्रसन्न करने के महत्वपूर्ण उपाय में सबसे ऊपर स्तोत्र का स्थान आता है। हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिये भी उनके स्तोत्रों की आवश्यकता होती है और इस कारण हमें हनुमान जी के अनेकों स्तोत्र की आवश्यकता होती है। - [लांगूलास्त्र शत्रुंजय स्तोत्र - langulastra shatrunjay stotra](https://karmkandvidhi.in/langulastra-shatrunjay-stotra/): लांगूलास्त्र शत्रुंजय स्तोत्र - langulastra shatrunjay stotra : हनुमान जी का एक महत्वपूर्ण प्रयोग है "लांगूलास्त्र शत्रुंजय प्रयोग" जिसके लिये लांगूलास्त्र शत्रुंजय स्तोत्र (langulastra shatrunjay stotra) मिलता है। यह स्तोत्र मुख्य रूप से शत्रुबाधा निवारण हेतु बताया गया है और इसके प्रयोग की विधि में यह भी कहा गया है कि अश्वत्थवृक्षतल में करे अर्थात पीपल वृक्ष के मूल में करे। - [आञ्जनेय सहस्रनाम स्तोत्र - anjaneya sahasranamam](https://karmkandvidhi.in/anjaneya-sahasranamam/): आञ्जनेय सहस्रनाम स्तोत्र - anjaneya sahasranamam : हनुमान जी के भी अनेकों सहस्रनाम हैं जिनमें से एक आंजनेय सहस्रनाम से मिलता है। यहां आञ्जनेय सहस्रनाम स्तोत्र (anjaneya sahasranamam) संस्कृत में दिया गया है। - [आञ्जनेय अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र - anjaneya ashtottara shatanama stotram](https://karmkandvidhi.in/anjaneya-ashtottara-shatanama-stotram/): आञ्जनेय अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र - anjaneya ashtottara shatanama stotram : कालिका रहस्य में हनुमान जी का जो अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र मिलता है उसका नाम आञ्जनेय अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र (anjaneya ashtottara shatanama stotram) है। यहां संस्कृत में आञ्जनेय अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र और पुनः आञ्जनेय अष्टोत्तर शतनामावली दिया गया है। - [आंजनेय स्तोत्र - anjaneya stotra](https://karmkandvidhi.in/anjaneya-stotra/): आंजनेय स्तोत्र - anjaneya stotra : सर्वप्रथम आंजनेय द्वादश नाम स्तोत्रम्, तदनंदर नीलकृत आञ्जनेय स्तोत्रम्, पुनः एक अन्य आंजनेय स्तोत्र और अंत में श्री आञ्जनेयमङ्गलाष्टकम् दिया गया है। सभी स्तोत्र संस्कृत में हैं। - [जानकी सहस्रनाम स्तोत्र - Janaki Sahasra Nama Stotram](https://karmkandvidhi.in/janaki-sahasra-nama-stotram/): जानकी सहस्रनाम स्तोत्र - Janaki Sahasra Nama Stotram : योगेश्वर कविकृत श्रीजानकी चरितामृत में जानकी सहस्रनाम स्तोत्र (Janaki Sahasra Nama Stotram) मिलता है। देवी-देवताओं के सहस्रनाम स्तोत्र का आध्यात्मिक महत्व तो होता ही है अर्थात पूजा-पाठ-हवन आदि में आवश्यकता होती है, इसके साथ ही व्यावहारिक महत्व भी अत्यधिक होता है। - [श्रीजानकी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र - janaki ashtottara shatanama stotram](https://karmkandvidhi.in/janaki-ashtottara-shatanama-stotram/): श्रीजानकी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र - janaki ashtottara shatanama stotram : जब आप माता जानकी की उपासना करेंगे तो आपको जानकी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र व अष्टोत्तर शतनामावली की भी आवश्यकता होगी। स्तोत्र करने के अतिरिक्त पूजन-हवन में अष्टोत्तर शतनामावली की आवश्यकता होती ही रहती है। - [श्री जानकी स्तुति - janaki stuti](https://karmkandvidhi.in/janaki-stuti/): श्री जानकी स्तुति - janaki stuti : स्कन्द पुराणोक्त जानकी स्तुति महावीर हनुमान द्वारा किया गया है जिसमें श्लोकों की संख्या ८ है। द्वितीय जानकी स्तुति भुशुण्डिरामयणोक्त है जो धर्मराज कृत और यदि इसमें श्लोकों की संख्या का विचार करें तो २२ हैं किन्तु इसमें गद्य भी सम्मिलित है। - [जानकी स्तोत्र - janaki stotra](https://karmkandvidhi.in/janaki-stotra/): जानकी स्तोत्र - janaki stotra : माता सीता के जनक की पुत्री होने के कारण वैदेही, जनकनन्दिनी, जनकात्मजा आदि अनेकों नाम हैं और इनमें से एक नाम जानकी भी है। माता सीता के अनेकों स्तोत्र जानकी नाम से भी हैं जिनमें से कुछ मुख्य हैं जानकी स्तोत्र, जानकी द्वादशनाम स्तोत्र, जानकी जीवनाष्टक आदि। - [श्री जानकी स्तवराज - Shri Janaki Stavaraja](https://karmkandvidhi.in/shri-janaki-stavaraja/): श्री जानकी स्तवराज - Shri Janaki Stavaraja : अगस्त्यसंहिता में माता सीता का एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है जिसका नाम है श्री जानकी स्तवराज (Shri Janaki Stavaraja)। यह स्तुति भगवान शिव के द्वारा की गयी है जो श्रुतियों के प्रश्न करने पर भगवान श्री संकर्षण जी द्वारा वर्णन किया गया है। - [श्री सीता स्तुति - shri sita stuti](https://karmkandvidhi.in/shri-sita-stuti/): श्री सीता स्तुति - shri sita stuti : भुशुण्डि रामायण में माता सीता की अनेकानेक स्तुतियां हैं जिसमें से अग्निकृत, इन्द्रकृत, कुबेरकृत, शिवकृत आदि मुख्य स्तुति है। माता सीता की आराधना में इन स्तुतियों का व्यापक लाभ मिलता है। यहां ये सभी श्री सीता स्तुति (shri sita stuti) संस्कृत में दिये गये हैं। - [सकारादि सीता सहस्रनाम स्तोत्र – sakaradi sita sahasranama stotram](https://karmkandvidhi.in/sakaradi-sita-sahasranama-stotram/): सकारादि सीता सहस्रनाम स्तोत्र – sakaradi sita sahasranama stotram : श्री रुद्रयामल तन्त्र में माता सीता का सकारादि सहस्रनाम मिलता है जो देवी और महादेव संवाद रूप में वर्णित है । यहां श्रीरुद्रयामलतन्त्रोक्तम् सकारादि सीता सहस्रनाम स्तोत्र (sakaradi sita sahasranama stotram) संस्कृत में दिया गया है। - [श्रीरामकृत सीता सहस्रनाम स्तोत्र - sita sahasranama stotram](https://karmkandvidhi.in/sita-sahasranama-stotram/): श्रीरामकृत सीता सहस्रनाम स्तोत्र - sita sahasranama stotram : अद्भुतरामायण में माता सीता का सहस्रनाम मिलता है जो रामकृत है और ये इसकी विशेषता है। यहां श्रीरामकृत सीता सहस्रनाम स्तोत्र (sita sahasranama stotram) संस्कृत में दिया गया है। - [हमारे अनुप्रयोग - Mobile app](https://karmkandvidhi.in/mobile-app/): 卐 यतो धर्मस्ततो जयः 卐 ॥ हमारे धार्मिक एवं कर्मकाण्ड अनुप्रयोग ॥ सम्पूर्ण कर्मकाण्ड विधि द्वारा प्रकाशित अनुप्रयोग – Mobile app 🚩 परिचय वर्त्तमान युग में सब कुछ डिजिटल होता जा रहा है और इस क्रम में ग्रंथों का डिजिटल प्रारूप तैयार किया जाता है जिससे आज ढेरों ग्रन्थ डिजिटल रूप में सर्वसुलभ हो गये हैं, किन्तु मूल कलेवर (प्रकाशित पुस्तक) चाहें तो न मिले। एक प्रवृत्ति सी बन गई है जो भी जानना है मोबाइल में देखो, ग्रन्थावलोकन से निवृत्ति हो गई है। तथापि जो जिज्ञासु जन मोबाइल में ही ढूंढते हैं उनके लिये प्रामाणिक और शास्त्र-सम्मत तथ्य उपलब्ध होना... - [पञ्चाङ्ग, संकल्प एवं पंचधा काल](https://karmkandvidhi.in/panchang-sankalp-kal/): 卐 यतो धर्मस्ततो जयः 卐 ॥ प्रज्ञा पञ्चाङ्गम् ॥ दैनिक पञ्चाङ्ग, संकल्प, पंचधा काल एवं अनुप्रयोग ☀️ पञ्चाङ्ग 📜 संकल्प ⏱️ दिवाभाग 📱 अनुप्रयोग ☀️ पञ्चाङ्ग लोड हो रहा है… 📜 संकल्प लोड हो रहा है… ⏱️ दिवाभाग लोड हो रहा है… 📱 अनुप्रयोग लोड हो रहे हैं… ☀️ पञ्चाङ्ग 📜 संकल्प ⏱️ दिवाभाग 📱 अनुप्रयोग प्रस्तुति : संपूर्ण कर्मकांड विधि (www.karmkandvidhi.in) - [पार्थिव पूजनं अनुप्रयोग (मोबाइल ऐप)](https://karmkandvidhi.in/parthiv-pujanam-app/): पार्थिव पूजनं (Parthiv Pujanam) — सनातन धर्म की पावन परंपरा और आधुनिक एंड्रॉइड तकनीक का एक अत्यंत सुंदर और उपयोगी समन्वय। यह अनुप्रयोग जनसामान्य और कर्मकांडी अभ्यर्थियों दोनों के लिए पार्थिव लिंग पूजन की शास्त्रीय विधि को सुलभ बनाने हेतु विकसित किया गया है। बहुधा मोबाइल अनुप्रयोगों में अनावश्यक सामग्री तो होती है, किंतु वास्तविक आवश्यकता की प्रामाणिक सामग्री का अभाव रहता है। इसी समस्या के समाधान हेतु 'संपूर्ण कर्मकांड विधि' द्वारा इस उपयोगी अनुप्रयोग का विकास किया गया है। - [शौच विधान स्मृति वचन - प्रमाण संकलन](https://karmkandvidhi.in/shauch-vidhan/): शास्त्रों में शौच विधान और शुचिता का क्या महत्त्व है? जानिए मनुस्मृति, दक्षस्मृति और वशिष्ठस्मृति के प्रामाणिक श्लोकों के आधार पर बाह्य व आंतरिक शुद्धि के वैज्ञानिक नियम, आचमन विधि, और मल-मूत्र त्याग की शास्त्रीय दिशाएं। "मन चंगा कठौती में गंगा" के कुतर्कों का सनातनी समाधान। - [दूषित संभोग, व्यभिचार, बलात्कारादि दोष और परिहार - प्रमाण संकलन](https://karmkandvidhi.in/sambhog-dosh/): शास्त्रों में व्यभिचार, बलात्कार, और अगम्यागमन के दोष तथा परिहार क्या हैं? जानिए मनुस्मृति, पाराशर स्मृति, पद्म पुराण आदि के प्रामाणिक श्लोकों के आधार पर दूषित संभोग के भयंकर आध्यात्मिक दुष्परिणाम। पाश्चात्य विचारधारा बनाम सनातनी विवाह संस्कार और सामाजिक व्यवस्था पर एक अत्यंत तीखा, प्रामाणिक और विस्तृत शास्त्रीय विश्लेषण। - [कालचक्रं : जनसामान्य और कर्मकांडियों के लिये उपयोगी मोबाइल ऐप](https://karmkandvidhi.in/kalchakram/): सम्पूर्ण कर्मकांड विधि' द्वारा निर्मित 'कालचक्रं' (Panchang_Sankalp .apk) मोबाइल ऐप की विस्तृत जानकारी. जनसामान्य और कर्मकांडियों के लिए उपयोगी इस ऐप में आज और कल का शुद्ध पंचांग, संक्षिप्त संकल्प, गण्डान्त, शिववास, अग्निवास और श्राद्ध कर्म के लिए विशेष उपयोगी दैनिक 'पंचधा दिवाभाग' की सटीक गणना समाहित है. अभी प्रामाणिक रूप से डाउनलोड करें - [मुहूर्त विचार और पंचाङ्ग: मुहूर्त निर्धारण में योग और करण की उपेक्षा का कड़वा सच](https://karmkandvidhi.in/muhurt-me-yog-aur-karan-ka-vichar/): पंचाङ्ग के पाँच अंगों में से मुहूर्त निर्धारण हेतु योग और करण का विचार क्यों नहीं किया जाता? जानें मुहूर्त चिंतामणि और बृहज्ज्योतिषसार के प्रमाणों के साथ वर्जित योग (व्यतिपात, वैधृति) और भद्रा (विष्टि करण) के त्याग का शास्त्रीय नियम। - [संशोधित वृषोत्सर्ग पद्धति - वाजसनेयी](https://karmkandvidhi.in/vrishotsarg-paddhati/): वाजसनेयी संशोधित 'वैकल्पिक वृषोत्सर्ग पद्धति'। लोकविरुद्ध विसंगति का परिहार करते हुए एकादशाह को पिष्ट, दर्भ या मृत्तिका निर्मित वृष से प्रेतत्व विमुक्ति की प्रामाणिक समन्त्रक विधि। - [अस्थिविसर्जन प्रयोग](https://karmkandvidhi.in/asthi-visarajan/): अस्थिसंचय के पश्चात् अस्थिविसर्जन में एक महत्वपूर्ण कर्त्यव्य होता है क्योंकि गंगा में अस्थि विसर्जन करने से प्रेतत्व का निवारण होता है। यदि दशरात्र के मध्य में हो तो उत्तम पक्ष अन्यथा वर्ष के पश्चात्। - [अस्थिसंचय प्रयोग](https://karmkandvidhi.in/asthisanchay-vidhi/): मैथिल परम्परागत परिष्कृत 'अस्थिसञ्चय एवं एकोद्दिष्ट पद्धति'। पद्धतिकारों की विसंगतियों का निवारण, पूर्ण अपात्रक दक्षिणा विधि और श्मशान-बलि का प्रामाणिक समन्त्रक प्रयोग। - [ब्राह्मणों को किस प्रकार दोष से बचना चाहिये ?](https://karmkandvidhi.in/brahman-dosh-se-kaise-bachen/): अयाज्य-याजन जनित संसर्ग दोष से ब्राह्मणों की रक्षा का अचूक शास्त्रीय विधान। लघ्वाश्वलायन स्मृति के आलोक में षट्कर्म अनुष्ठान द्वारा मार्जनपरक गंभीर विमर्श। - [महर्षि-ब्रह्मर्षि (स्वघोषित) या रंगा सियार](https://karmkandvidhi.in/maharshi-brahmarshi-ya-ranga-siyar/): स्वघोषित महर्षि-ब्रह्मर्षियों के पाखण्ड का तीव्र शास्त्रीय खण्डन। स्कन्दपुराण, वायुपुराण और निरुक्त के आलोक में ऋषित्व के अनिवार्य मापदण्डों पर अभेद्य शास्त्रीय विमर्श। - [संस्कार विसंगति विमर्श: मुण्डन-मण्डन, प्रवेश-निर्गम के शास्त्रीय नियम और निषेध](https://karmkandvidhi.in/sanskar-nishedh-prakaran/): एक ही कुल या वर्ष में मुण्डन, उपनयन और विवाह जैसे कई संस्कार एक साथ करना क्यों वर्जित है? जानें कात्यायन, वसिष्ठ और नारदपुराण के अनुसार मुण्डन-मण्डन, प्रवेश-निर्गम के नियम, सहोदर निषेध और उनके शास्त्रसम्मत परिहार। - [देश में सामाजिक प्राणी कहां से आयेगा ?](https://karmkandvidhi.in/samajik-pranai-kahan-se-aayega/): आधुनिक स्वछंदता, पारिवारिक मूल्यों के विनाश और भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यों पर शासन-व्यवस्था (विधायिका-न्यायपालिका) के कुत्सित हस्तक्षेप। - [आर्द्रा नक्षत्र में सूर्य: शास्त्रीय मर्म एवं विशेष विहित-निषिद्ध विचार](https://karmkandvidhi.in/ardra-me-surya/): सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश और अम्बुवाची (पृथ्वी का रजस्वला होना) योग। जानें २०२६ की सही तिथियां, निषेध कर्म, आर्द्रा में दूध पीने का महत्व और शिववास परिहार के शास्त्रीय प्रमाण। - [फादर्स डे, मदर्स डे मातृ-पितृभक्ति या बौद्धिक दरिद्रता ?](https://karmkandvidhi.in/pitribhakti-kya-hai/): पितृ दिवस (फादर्स डे) और मातृ दिवस (मदर्स डे) के नाम पर फैली वैचारिक दासता का खण्डन। सांवत्सरिक श्राद्ध और महालय पितृपक्ष के शास्त्रोक्त दायित्वों पर को उजागर करने वाला महत्वपूर्ण आलेख। - 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[महाजनो येन गतः स पन्थाः कब-कैसे प्रयोग होगा और कहां नहीं](https://karmkandvidhi.in/mahajano-yen-gatah-sa-panthah/): क्या कर्मकांड में "महाजनो येन गतः स पन्थाः" सूक्त का प्रयोग सही है? जानें इस सुप्रसिद्ध पौराणिक वचन का वास्तविक अर्थ, स्वेच्छाचार पर प्रहार, और मैथिल-मैथिलेत्तर पद्धतियों के उत्कृष्ट उदाहरणों के साथ शास्त्रज्ञ आचार्यों की वास्तविक पहचान। - [आत्मज्ञान या दम्भ ?](https://karmkandvidhi.in/atmgyan-ya-dambh/): आत्मज्ञान और आध्यात्मिक दम्भ का प्रामाणिक शास्त्रीय भेद। माहेश्वरतन्त्र, गीता और श्रीमद्भागवत के साक्ष्यों के आधार पर जडभरत प्रसंग और प्रारब्ध-क्षय की कुशल विवेचना। - [घर में यदि पीपल का वृक्ष उग जाये तो क्या करें ?](https://karmkandvidhi.in/ghar-me-pipal-ka-ugana/): घर, छत या दीवार पर उगे पीपल वृक्ष को हटाने की समन्त्रक शास्त्रोक्त विधि। पण्डित दिगम्बर झा और विद्यागौरव गिरधारी जी महाराज का 'आपद्धर्म' के अंतर्गत प्रामाणिक विमर्श और शास्त्रसम्मत विश्लेषण। - [अधिकस्य अधिकं फलं : मूल प्रयोजन और प्रामाणिक शास्त्रीय विस्तार](https://karmkandvidhi.in/adhikasya-adhikam-falam-mul-prayojan/): कर्मकाण्ड में 'अधिकस्य अधिकं फलं' का वास्तविक क्षेत्र और 'अधिकानि फलाधिकात्' सूत्र की प्रामाणिक स्थापना। सक्षमों द्वारा विकल्प-चयन के कारण उत्पन्न होने वाले देवद्रोह दोष पर प्रामाणिक विमर्श। - [क्या गीता का ज्ञान भी भ्रमित करने वाला है ?](https://karmkandvidhi.in/gita-ka-gyan/): क्या गीता का ज्ञान भ्रमित करने वाला है? भृतकाध्यापकों की अनर्हता, मन्त्राक्षमता, 'कर्मणा वर्णव्यवस्था' के कुतर्क का खण्डन आदि तथ्यों का गंभीर और तीक्ष्ण शास्त्रीय सम्मार्जन। - [अधिकस्य अधिकं फलं और विस्तरो हि विघ्नकरः का द्वन्द](https://karmkandvidhi.in/adhikashy-adhikam-falam-aur-vistar-nishedh/): कर्मकाण्ड में 'अधिकस्य अधिकं फलं' के भ्रम का निवारण और 'विस्तरो हि विघ्नकरः' सूत्र की प्रामाणिक स्थापना। मनुस्मृति और कालोत्तरम् के साक्ष्यों पर महत्वपूर्ण विमर्श। - [ग्रहशान्ति हवन: मुख्य आहुति द्रव्य, शाकल्य विमर्श और स्वेच्छाचार का खण्डन](https://karmkandvidhi.in/grah-shanti-hawan-vichar/): ग्रहशान्ति हवन में घृत-मधु-दधि युक्त समिधा की प्रधानता, शाकल्य में व्याप्त अशास्त्रीय स्वेच्छाचार का खण्डन और नवग्रहों के विहित मन्त्रों का प्रामाणिक विमर्श। - [अस्थिसंचय : अशौच में वेदमंत्र का प्रयोग कैसे ?](https://karmkandvidhi.in/ashauch-me-asthisanchay-aur-ved-mantra/): अशौच (सूतक) काल में अस्थिसञ्चय के समय वेदमन्त्र प्रयोग की प्रामाणिक शास्त्रीय सिद्धि। "तदपि ग्राह्यं" और "त्यागेन लब्धं" सूत्रों के आलोक अन्वेषण और श्रीरामकृत श्राद्ध विमर्श। - ["सब ठीक है" में छुपी सबसे बड़ी त्रुटि और मनमुखी उत्तर का दुष्परिणाम](https://karmkandvidhi.in/sab-thik-hai/): धार्मिक विसंगतियों में "सब ठीक है" कहने की आत्मघाती भूल, वर्तमान में व्रात्य दोष के शास्त्रीय परिहार और मनमुखी पुरोहिती के भयंकर दुष्परिणामों पर पण्डित दिगम्बर झा का तीक्ष्ण विमर्श। - [आसन्न संकट और मार्ग; भाग - १](https://karmkandvidhi.in/asanna-sankat/): मानव सभ्यता पर आसन्न संकट का शास्त्रीय समाधान और 'दीक्षा तत्व' का वास्तविक मर्म। जानें क्यों सावित्री दीक्षा (उपनयन) ही सर्वश्रेष्ठ है और 'कान फुंकवाने' का सम्प्रदायवादी भ्रम क्यों पतनोन्मुखी है। - [प्रेतश्राद्ध (एकादशाह) में वृषोत्सर्ग की अपरिहार्यता व विकल्प](https://karmkandvidhi.in/pretshraddh-aur-vrishotsarg/): लोकविरुद्ध विसंगतियों के मध्य एकादशाह (प्रेतश्राद्ध) में वृषोत्सर्ग की अपरिहार्यता और उसके शास्त्रसम्मत विकल्प (मृत्तिका, दर्भ या पिष्ट वृष)। पण्डित दिगम्बर झा का प्रामाणिक ऐतिहासिक-शास्त्रीय विमर्श। - [संध्यावंदन प्रयोग](https://karmkandvidhi.in/sankshipt-sandhaya-prayog/): सदाचार और त्रिकाल सन्ध्यावन्दन के सूक्ष्म शास्त्रीय मर्म को उद्घाटित करता हुआ एक शोधपरक विमर्श वर्तमान युग की वैचारिक शिथिलता पर एक परम आवश्यक प्रहार है। - [संशोधित मिथिलादेशीय अपात्रक श्राद्ध पद्धति - "सिद्धं सुसिद्धं श्राद्धं"](https://karmkandvidhi.in/sanshodhit-apatrak-shraddh-vidhi/): पण्डित दिगम्बर झा कृत "सिद्धं सुसिद्धं श्राद्धं" (प्रथम संस्करण - गंगादशहरा २०८३)। वाजसनेयी परम्परा के अनुसार आद्यश्राद्ध, तन्त्र मासिक, सपिण्डीकरण, सांवत्सरिक एकोद्दिष्ट, अस्थिसंचय एवं वृषोत्सर्ग विधि का प्रामाणिक ऐतिहासिक-शास्त्रीय विमर्श। - [अधिकमास में वृषोत्सर्ग करें या न करें प्रामाणिक सिद्धि](https://karmkandvidhi.in/adhikmas-me-vrishotsarg/): क्या अधिकमास (मलमास) में एकादशाह को वृषोत्सर्ग करना चाहिए? जानें काम्य और नैमित्तिक वृषोत्सर्ग का शास्त्रीय भेद तथा पंडित दिगम्बर झा का प्रामाणिक व अकाट्य निर्णय। - [अनुपनीत कर्त्ता और पिण्ड द्रव्य का विचार](https://karmkandvidhi.in/pind-ke-dravya/): क्या अनुपनीत बालक भात (सिद्धान्न) से पिण्डदान कर सकता है? जानें द्विजाति असंस्कृत पुत्र के कर्माधिकार और पिण्ड द्रव्य का प्रामाणिक ऐतिहासिक एवं शास्त्रीय निर्णय। - [अपात्रक श्राद्ध का आरंभ कब हुआ?](https://karmkandvidhi.in/apatrak-shraddh-ka-arambha/): अपात्रक श्राद्ध और मासिक श्राद्ध के अपकर्षण का ऐतिहासिक प्रारंभ कब हुआ? महामहोपाध्याय रुद्रधर झा और वाचस्पति मिश्र के प्रमाणों के साथ पंडित दिगम्बर झा का शास्त्रीय विमर्श और अधिकार सिद्धि। - [सिद्धं सुसिद्धं श्राद्धं - siddham susiddham shraddham](https://karmkandvidhi.in/siddham-susiddham-shraddham/): संशोधित श्राद्ध पद्धति "सिद्धं सुसिद्धं श्राद्धं" ग्रंथ की प्रामाणिक प्रस्तावना एवं भूमिका। जानें क्यों कर्मकांड में शास्त्रीय संशोधन अनिवार्य है और 'मूर्खाचार्यों' के दुराग्रहों का शास्त्रसम्मत समाधान क्या है। - [संशोधित सांवत्सरिक एकोद्दिष्ट अर्थात वार्षिक श्राद्ध - वाजसनेयी](https://karmkandvidhi.in/sanshodhit-samvatsarik-shraddh/): वाजसनेयी संशोधित 'सांवत्सरिक (वार्षिक) श्राद्ध विधि'। जानें क्यों वार्षिक श्राद्ध में महापात्र का प्रवेश वर्जित है और स्वभूमि में भूस्वामि भाग का निषेध क्यों है। प्रामाणिक मंत्रों सहित क्षयाह श्राद्ध विमर्श। - [संशोधित अपात्रक सपिंडीकरण श्राद्ध विधि - वाजसनेयी](https://karmkandvidhi.in/sanshodhit-apatrak-sapindikaran/): वाजसनेयी संशोधित 'अपात्रक सपिण्डीकरण श्राद्ध विधि': जानें प्रेतवेदी और पितृवेदी के पृथक्करण का शास्त्रीय महत्त्व। सपिण्डीकरण का उचित काल, आसनादि क्रम और 'तंत्र' निषेधों का प्रामाणिक विश्लेषण। - [संशोधित अपात्रक मासिक श्राद्ध विधि - वाजसनेयी](https://karmkandvidhi.in/apatrak-masik-shraddh/): वाजसनेयी संशोधित 'अपात्रक मासिक श्राद्ध विधि': जानें क्यों १४ मासिक श्राद्ध पृथक के बजाय 'तंत्र' विधि से करने चाहिए। अर्घ्य, पिण्डदान और अक्षय्योदक के सूक्ष्म नियमों का शास्त्रीय विश्लेषण। - [संशोधित आद्य श्राद्ध विधि - वाजसनेयी](https://karmkandvidhi.in/adya-shraddh-vajasaneyi/): मैथिल वाजसनेयी परम्परा के अनुसार संशोधित 'एकादशाह (आद्य) श्राद्ध विधि'। जानें पञ्चदान, अपात्रक श्राद्ध के नियम और शास्त्रीय संशोधन जो कर्मकांड की शुद्धता सुनिश्चित करते हैं। - [गांठ बांध लो आध्यात्मिक उन्नति का मूल चरणसेवा है](https://karmkandvidhi.in/charanseva/): क्या धार्मिक प्रदर्शन और आडंबर से आत्मकल्याण संभव है? जानें क्यों कलियुग में केवल 'चरणसेवा' ही आध्यात्मिक उन्नति का एकमात्र आधार है। शास्त्र सम्मत प्रमाणों के साथ गुरु, विप्र और माता-पिता की सेवा का वास्तविक महत्व। - [आत्मकथा और ब्रह्मसूत्रम्](https://karmkandvidhi.in/atmkatha-aur-brahmasutram/): जानें केवल गुरुजनों की सेवा मात्र से शास्त्रीय दृष्टि और ईश्वर की कृपा कैसे प्राप्त होती है। कर्मकांड की शुद्धता और गुरु भक्ति पर विशेष लेख। - [धर्म के नाम पर हम ठग के शिकार क्यों बन जाते हैं ?](https://karmkandvidhi.in/dharm-aur-thagi/): क्या आप भी धर्म और कर्मकांड के नाम पर ठगी का शिकार महसूस करते हैं? यह आलेख स्पष्ट करता है कि कैसे हमारी अपनी अज्ञानता और शास्त्र-विरुद्ध आचरण हमें ठगी की ओर धकेलते हैं। जानें, क्यों योग्य गुरु और शुद्ध पूजन सामग्री न मिलना हमारे अपने पापों का परिणाम है। - [कुलटूट (पीढ़ी कटाना) : शास्त्रीय पक्ष क्या है ?](https://karmkandvidhi.in/kultut/): यह आलेख 'कुलटूट' (पीढ़ी अलग करना) की शास्त्रीय प्रक्रिया और अशौच के सूक्ष्म नियमों का विस्तृत विश्लेषण करता है। इसमें मनुस्मृति, मत्स्यपुराण, कूर्मपुराण और मिताक्षरा जैसे प्रामाणिक ग्रंथों के आधार पर यह सिद्ध किया गया है कि सापिण्ड्य ७ पीढ़ियों तक अक्षुण्ण रहता है। आलेख में 'शास्त्रदस्युओं' (अल्पज्ञ पंडितों) द्वारा फैलाई गई भ्रांतियों का खंडन करते हुए सपिण्ड (१-७ पीढ़ी), सोदक/सकुल्य (८-१४ पीढ़ी) और सगोत्र (१५-२१ पीढ़ी) के बीच के अंतर और उनके लिए निर्धारित अशौच काल की स्पष्ट व्याख्या की गई है। - [अधिकमास में श्राद्ध का सप्रमाण विचार](https://karmkandvidhi.in/adhikamas-aur-shraddha/): यह शोधपरक आलेख अधिकमास (मलमास/पुरुषोत्तम मास) के दौरान होने वाले श्राद्ध विधानों पर विस्तृत प्रकाश डालता है। इसमें विशेष रूप से 'षोडश बनाम सप्तदश' श्राद्ध के विवाद, एकादशमासाभ्यन्तरे की व्याकरणिक मीमांसा और संवत्सर २०८२-२०८३ के पंचांगीय गणित के माध्यम से यह समझाया गया है कि किस माह के मृतक का श्राद्ध अधिकमास में होगा और किसका नहीं। - [धर्म निर्णय और पर्षद - प्रमाण संकलन](https://karmkandvidhi.in/dharm-nirnay-parshad/): धर्म निर्णय और पर्षद विधान का प्रामाणिक विश्लेषण। जानें क्यों न्यायाधीश, नेता और कथावाचक धर्म-निर्णय के अधिकारी नहीं हैं? स्मृतियों के अनुसार 'पर्षद' का गठन, योग्य ब्राह्मण की पहचान और शास्त्र-विरुद्ध 'लोकाचार' का खंडन। धर्म संशय निवारण हेतु एक विस्तृत शोधपत्र। - [धर्म निर्णय](https://karmkandvidhi.in/dharm-nirnay/): धर्म का निर्णय कौन करे और कैसे? जानें शास्त्रसम्मत धर्म-निर्णय की प्रक्रिया, विद्वान ब्राह्मण के वचन का महत्व और अदृष्ट निर्णय से उत्पन्न होने वाले ब्रह्मघात दोष का समाधान। क्या वर्तमान कथावाचक धर्म निर्णय के अधिकारी हैं? एक विस्तृत शास्त्रीय विश्लेषण। - [जाति व्यवस्था कहां से आई - स्मृति प्रमाण संकलन](https://karmkandvidhi.in/shastrom-me-jati-vyavastha/): यह आलेख जाति व्यवस्था की शास्त्रीय और ऐतिहासिक जड़ों पर एक गंभीर शोधपूर्ण संकलन है। इसमें मनुस्मृति, औशनस स्मृति, वशिष्ठ स्मृति और याज्ञवल्क्य स्मृति जैसे ग्रंथों के माध्यम से यह प्रमाणित किया गया है कि विभिन्न जातियों की उत्पत्ति वर्णों के मिश्रण और विशिष्ट संस्कारों से हुई है। यह आलेख उन भ्रामक दावों का खंडन करता है जो जाति व्यवस्था को अंग्रेजों की देन बताते हैं। यह संकलन उन पाठकों के लिए है जो भारतीय समाज के वास्तविक सांस्कृतिक और सामाजिक ढांचे को मूल शास्त्रों के चश्मे से देखना चाहते हैं। - [वर्ण व्यवस्था - स्मृति प्रमाण संकलन](https://karmkandvidhi.in/varn-vyavastha/): यह आलेख सनातन धर्म की आधारशिला 'वर्णाश्रम व्यवस्था' पर आधारित एक विस्तृत प्रमाण-संग्रह है। इसमें मनुस्मृति, पाराशर स्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति और अत्रि संहिता जैसे प्रामाणिक धर्मग्रंथों के श्लोकों के माध्यम से यह प्रमाणित किया गया है कि वर्ण व्यवस्था जन्मना है। आलेख में उन कुतर्कों का भी खंडन किया गया है जो आधुनिकता के नाम पर शास्त्रीय मर्यादाओं को दूषित कर रहे हैं। यह संकलन जिज्ञासुओं के लिए मार्गदर्शक और अधर्मियों के कुतर्कों के लिए एक अकाट्य वाग्दंड है। - [शास्त्रसम्मत कन्यादान : भ्रांतियां और सत्य - Kanyadan](https://karmkandvidhi.in/kanyadan/): कन्यादान की शास्त्रीय विधि और अधिकारी का पूर्ण विश्लेषण। क्या माता या मामा कन्यादान कर सकते हैं? रजस्वला कन्या (वृषली) दान का दोष और निवारण। विवाह संस्कार में होने वाली आधुनिक विसंगतियों पर शास्त्रों का प्रामाणिक उत्तर। - [कर्मकांड के महत्वपूर्ण प्रश्न जो कर्मकांडी से पूछें](https://karmkandvidhi.in/karmkand-ke-prashan/): "क्या कर्मकांड में बढ़ती अशुद्धता से आप चिंतित हैं? जानें कैसे 'जिज्ञासा' और 'शास्त्रीय प्रश्नों' के माध्यम से आप अपने पुरोहित को शास्त्रोन्मुख कर सकते हैं। कर्मकांड में सुधार, सामग्री की शुद्धि और योग्य कर्मकांडी की पहचान पर एक विस्तृत मार्गदर्शिका। - 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[नाद-ब्रह्म का चमत्कार: संस्कृत चित्रकाव्य और ध्वन्यात्मक श्लोक संग्रह](https://karmkandvidhi.in/dhwanyatmak-pad/): संस्कृत साहित्य की अद्भुत चित्रात्मकता और नाद-सौंदर्य का अन्वेषण करें। शिव ताण्डव से लेकर नृसिंह स्तुति और भगवान दिगम्बर के दुर्लभ ध्वन्यात्मक पदों का अनूठा संग्रह। जानें कैसे ये 'शब्दचित्र' मानसिक एकाग्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करते हैं। - [प्रायश्चित्त विधान और आत्मकल्याण का मार्ग - प्रमाण संकलन](https://karmkandvidhi.in/prayashchitta-vidhan/): "कलयुग में प्रायश्चित्त विधान का शास्त्रीय विश्लेषण। अंगिरा, पराशर, देवल और दक्ष स्मृतियों के प्रमाणों के साथ जानें अशुद्ध देह, अभक्ष्य भक्षण और कर्माधिकार लोप का समाधान। आत्मकल्याण का सरल मार्ग और नाम-महिमा के प्रमाणों का अनूठा संग्रह।" - [रजस्वला धर्म विमर्श: शास्त्रीय मर्यादा, संसर्ग दोष और कुतर्कों का प्रतिवाद](https://karmkandvidhi.in/rajaswala-vidhan/): रजस्वला धर्म की शास्त्रीय मर्यादा और कड़े नियमों का संपूर्ण प्रमाण संग्रह। जानें मनु, पराशर और अंगिरा स्मृतियों के अनुसार चार दिनों की संज्ञाएँ, संसर्ग दोष और तथाकथित वैज्ञानिक कुतर्कों का प्रामाणिक खंडन। - [अन्न दोष और आध्यात्मिक पतन: स्मृतियों और पुराणों के आलोक में आहार-शुद्धि के सूक्ष्म नियम](https://karmkandvidhi.in/bhakshyabhakshay-vichar/): "मनु, अंगिरा, पराशर और याज्ञवल्क्य स्मृतियों के प्रमाणों के साथ भक्ष्याभक्ष्य विचार। शूद्रान्न निषेध, वृथा-मांस दोष, लहसुन-प्याज वर्जना और अभक्ष्य भक्षण से मुक्ति हेतु शास्त्रोक्त प्रायश्चित्त विधान का प्रामाणिक संग्रह। - [शास्त्रों में स्पृश्यास्पृश्यता विचार: शुद्धि-मर्यादा, स्पर्श-निषेध और प्रायश्चित्त का संपूर्ण शास्त्रीय प्रमाण संग्रह](https://karmkandvidhi.in/asprishyta/): मनु, अत्रि, पराशर, आपस्तम्ब और देवल स्मृतियों के प्रमाणों के साथ स्पृश्यास्पृश्यता (स्पर्श-अस्पर्श) विचार। उच्छिष्ट संस्पर्श, म्लेच्छ संपर्क, रजस्वला स्पर्श दोष, और सार्वभौमिक अपवादों (उत्सव, देवयात्रा) पर एक प्रामाणिक शोध संग्रह। - [भविष्यपुराणोक्त श्री सत्यनारायण व्रत कथा संस्कृत में](https://karmkandvidhi.in/bhavishypuranokta-satyanarayan-vratkatha/): "भगवान श्रीसत्यनारायण की भविष्य पुराणोक्त षडध्यायी (६ अध्याय) कथा का संपूर्ण संस्कृत पाठ। जानें क्यों है कलियुग में संस्कृत भाषा में कथा श्रवण अनिवार्य और क्या हैं इसके अलौकिक लाभ। काशी के सदानन्द ब्राह्मण और राजा चन्द्रचूड के दिव्य प्रसंगों के माध्यम से दरिद्रता निवारण, पुत्र प्राप्ति और संकट मुक्ति का शास्त्रोक्त मार्ग। कर्मकाण्ड की मर्यादा और कथा श्रवण के गुप्त नियमों के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रस्तुति।" - [भविष्यपुराणोक्त सत्यनारायण व्रत पूजा कथा - Satyanarayan Vrat Puja Katha](https://karmkandvidhi.in/satyanarayan-vrat-puja-katha/): "भविष्यपुराण के अनुसार श्रीसत्यनारायण व्रत की प्रामाणिक विधि। जानें पंच-कलश स्थापन, स्वर्णयुक्त शालिग्राम पूजन, और कर्माधिकार के वे सूक्ष्म नियम जो सामान्यतः लुप्त हो चुके हैं। प्रातः संकल्प से लेकर प्रसाद वितरण तक का शास्त्रीय विश्लेषण।" - [स्वाधीनता शताब्दी पूर्व ही भारत में गृहयुद्ध कैसे आरम्भ हो गया ?](https://karmkandvidhi.in/grihyuddh-ka-arambha-kaise/): क्या भारत में गृहयुद्ध आरम्भ हो चुका है? UGC रेगुलेशन, सवर्णों का संवैधानिक उत्पीड़न और 'लोकतांत्रिक गृहयुद्ध' के अदृश्य स्वरूप का गहन विश्लेषण। जानिए कैसे स्वाधीनता की शताब्दी से पूर्व ही भारत एक बड़े हिंसक संघर्ष की ओर बढ़ रहा है। - [संसर्गान्नश्यति तेजः - स्मृतियों और पुराणों के आलोक में संसर्ग दोष एवं कलिकाल के नियम](https://karmkandvidhi.in/sansarg-dosh/): संसर्ग दोष क्या है? जानें मनु, पराशर और देवल स्मृतियों के प्रमाणों के साथ कि कैसे बातचीत, स्पर्श और सह-भोजन से पाप संक्रमित होता है। कलियुग के विशेष नियम 'कलौ पतति कर्मणा' पर विस्तृत शास्त्रीय आलेख। - [क्या स्वतंत्रता असीमित है ?](https://karmkandvidhi.in/samvidhanik-swatantra-ki-sima/): "क्या संविधान प्रदत्त स्वतंत्रता असीमित है? जानें— स्वतंत्रता और स्वेच्छाचारिता के बीच का सूक्ष्म अंतर, और कैसे व्यापार जगत व राजनीति मिलकर भारतीय परिवार तंत्र को नष्ट कर रहे हैं। 'माय बॉडी माय च्वाइस' के नारों के पीछे छिपे उपभोक्तावाद और वर्णसंकरता के षड्यंत्र पर एक तीक्ष्ण विश्लेषण।" - [देश, काल, परिस्थिति, मिथिला व्यवहार, देशाचार, लोकाचार, कुलाचार आदि के दुरुपयोग](https://karmkandvidhi.in/desh-kal-paristhiti/): "क्या 'देश-काल-परिस्थिति' के नाम पर आप भी शास्त्र विरुद्ध कर्म कर रहे हैं? 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मनुस्मृति, स्कंदपुराण और अत्रि स्मृति के प्रमाणों के साथ 'योग्यायोग्य ब्राह्मण' विचार। जानिए वर्तमान युग में शास्त्रोक्त ब्राह्मण के अभाव में क्या है परिहार की विधि। - [शुद्धिकरण अर्थात पवित्रीकरण के प्रमाण](https://karmkandvidhi.in/shuddhikaran-praman/): कर्मकाण्ड के आरम्भ में शुद्धिकरण का महत्व और शास्त्रोक्त क्रम क्या है? आचमन, पवित्री धारण, और शिखा बंधन के प्रामाणिक श्लोकों का संकलन। जानिए क्यों शुद्धिकरण के बिना कोई भी धार्मिक कृत्य निष्फल है। - [सवर्णों का अस्तित्व संकट में - क्यों ?](https://karmkandvidhi.in/savarno-ka-astitwa/): क्या सवर्णों का अस्तित्व वास्तव में संकट में है? आरक्षण, SC/ST एक्ट और UGC रेगुलेशन 2026 के वैधानिक उत्पीड़न के पीछे के वास्तविक शास्त्रीय कारणों का अन्वेषण। जानिए क्यों धर्म का त्याग ही सवर्णों की वर्तमान दुर्दशा का मूल कारण है और समाधान का वास्तविक मार्ग क्या है। - [कर्माधिकार का विकल्प - प्रत्याम्नाय](https://karmkandvidhi.in/pratyamnaya-vidhan/): "क्या आधुनिक जीवनशैली में कर्माधिकार की रक्षा संभव है? जानें 'प्रत्याम्नाय' और 'गो-निष्क्रय' का वह रहस्य जो व्रात्यता, अनाश्रमी दोष और अभक्ष्य भक्षण से उत्पन्न अनधिकार का निवारण करता है। कर्माधिकार विमर्श के तृतीय भाग में शास्त्रीय प्रमाणों के साथ कर्माधिकार प्राप्ति का अंतिम विकल्प।" - [एक बार सोचो - क्या, कब, कैसे और क्यों कर रहे हो?](https://karmkandvidhi.in/karmadhikara-mimansa/): "क्या आपका कर्मकाण्ड वास्तव में सफल है? कर्माधिकार विमर्श के इस शोधपरक आलेख में जानें— क्या, कब, कैसे और क्यों के वे शास्त्रीय आयाम जो आपके अनुष्ठानों को फलदायी बनाते हैं। संध्याहीनता, व्रात्यता दोष और विधि-विद्रूपता पर शास्त्रों के अकाट्य प्रमाणों के साथ एक मर्मस्पर्शी विश्लेषण।" - [कर्माधिकार विमर्श: शास्त्रीय मर्यादा और वर्तमान विद्रूपता](https://karmkandvidhi.in/karmadhikar/): "कर्माधिकार विमर्श: क्या कर्मकाण्ड में प्रवृत्त होने से पूर्व आप उसके अधिकारी हैं? यह आलेख शास्त्रों के आधार पर कर्माधिकार, संध्या की अनिवार्यता, अशुद्धि के प्रकार और वर्तमान कर्मकाण्ड की विद्रूपताओं का गहन विश्लेषण करता है।" - [मोदी की विदाई 2026 में आई: छद्म हिंदुत्व का अनावरण](https://karmkandvidhi.in/bjp-mask-off-analysis/): अनिल मिश्रा कांड से लेकर यूजीसी के काले कानूनों तक—कैसे सत्ता ने 'कालनेमि' बनकर सनातनियों के साथ छल किया है। भाजपा की नीतियों द्वारा सनातन वर्णाश्रम व्यवस्था पर प्रहार, 'यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन २०२६' का प्रभाव और ब्राह्मण-क्षत्रियों के विरुद्ध बढ़ते षड्यंत्रों का विस्तृत विश्लेषण। क्या विपक्ष शास्त्र सम्मत संकल्पों से २०२६ में सत्ता परिवर्तन कर सकता है? 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शोधपरक विश्लेषण: कैसे आधुनिकता ने छीना हमारा स्वास्थ्य और सुख-चैन - Modern vs. Traditional Lifestyle](https://karmkandvidhi.in/modern-vs-traditional-lifestyle/): प्रगति या पतन? शोधपरक विश्लेषण: कैसे आधुनिकता ने छीना हमारा स्वास्थ्य और सुख-चैन - Modern vs. Traditional Lifestyle : लेख में जानें कैसे आधुनिक जीवन शैली हमारे स्वास्थ्य और मानसिक शांति को प्रभावित कर रही है। प्राचीन जीवन शैली और वर्तमान जीवन के बीच शोधपरक तुलना के साथ खोजें स्वस्थ जीवन का रहस्य और प्रकृति की ओर वापसी के उपाय। - [त्रिक/त्रीतर (तेतर दोष) शांति विधि - trik shanti puja](https://karmkandvidhi.in/trik-shanti-puja/): तीन पुत्री के पश्चात् यदि पुत्र का जन्म हो अथवा तीन पुत्र के पश्चात् पुत्री का जन्म हो तो उसे त्रिक कहा जाता है जिसे बोलचाल में तेतर या तेतरी भी कहा जाता है। ऐसा जन्म होना (तेतर दोष) शास्त्रों में अनिष्टकारक बताया गया है और अनिष्ट निवारण के लिये त्रिक प्रसव की शांति (trik shanti puja) करनी पड़ती है जिसे त्रिक प्रसव शांति कहते हैं। यहां इस विषय की प्रामाणिक चर्चा की गयी है। - [सामान्य जन के लिये समंत्रक दुर्गा पूजा की विधि - durga pujan vidhi 02](https://karmkandvidhi.in/durga-pujan-vidhi-02/): सामान्य जन के लिये समंत्रक दुर्गा पूजा की विधि - durga pujan vidhi 02 : हम बिना मंत्र वाली चर्चा पीछे कर चुके हैं और अब समंत्र विधि को समझने का प्रयास करेंगे। समंत्र विधि का तात्पर्य भी इतना ही है कि न्यूनतम क्या-क्या करें, कैसे करें ? - [सामान्य जन के लिये दुर्गा पूजा की विधि - durga pujan vidhi 01](https://karmkandvidhi.in/durga-pujan-vidhi-01/): सामान्य जन के लिये दुर्गा पूजा की विधि - durga pujan vidhi 01 : यदि सभी विद्वान ब्राह्मण के द्वारा विधि-पूर्वक कराना चाहें भी तो उतनी संख्या में ब्राह्मण उपलब्ध हो ही नहीं सकते और इसीलिये यह आवश्यक हो जाता है कि जो स्वयं ही करना चाहें उनकी भी एक सामान्य विधि हो जिसमें बिना मंत्रों के भी पूजा आदि की जाय। यहां इसी विषय को समझने का प्रयास किया गया है। - [नवरात्रि में दुर्गा पूजा की महत्वपूर्ण जानकारी - durga upasana](https://karmkandvidhi.in/durga-upasana/): नवरात्रि में दुर्गा पूजा की महत्वपूर्ण जानकारी - durga upasana : नवरात्रि व्रत कहें, माता दुर्गा की पूजा कहें, श्री दुर्गा सप्तशती पाठ, नवार्ण मंत्र जप आदि की यदि बातें करें तो अनेकों महत्वपूर्ण तथ्य होते हैं जिसके बारे में शास्त्र-सम्मत ज्ञान का होना आवश्यक है और यहां हम इन विषयों को संक्षेप में समझने का प्रयास करेंगे। - [शास्त्रों के अनुसार फलित ज्योतिष के नियम - falit jyotish sutra](https://karmkandvidhi.in/falit-jyotish-sutra/): शास्त्रों के अनुसार फलित ज्योतिष के नियम - falit jyotish sutra : फलित ज्योतिष के लिये अर्थात फलादेश के लिये शास्त्रों के अनुसार फलित ज्योतिष के नियम (falit jyotish sutra) जानना भी आवश्यक होता है। - [ज्योतिष गणित कैसे सीखें - jyotish ganit kaise sikhe](https://karmkandvidhi.in/jyotish-ganit-kaise-sikhe/): ज्योतिष गणित कैसे सीखें - jyotish ganit kaise sikhe : यहां जातक ज्योतिष सीखने वालों के लिये गणित अर्थात सामान्य जन्म कुण्डली निर्माण से लेकर विस्तृत सप्तवर्गी जन्मपत्रिका तक निर्माण से संबंधित आलेखों का संग्रह दिया गया है जिनका अध्ययन करके आप जन्मकुण्डली बनाना सीख सकते हैं। - [शिव पूजा के माध्यम से समृद्धि आकर्षित करें - Attract Prosperity Through Shiv Puja](https://karmkandvidhi.in/attract-prosperity-through-shiv-puja/): शिव पूजा के माध्यम से समृद्धि आकर्षित करें - Attract Prosperity Through Shiv Puja : शिव पूजा से कल्याण की प्राप्ति कैसे करें और अपने जीवन में अप्रत्याशित लाभ का भाजन कैसे बने ? यह आलेख प्रचुरता और समृद्धि के लिए शिवपूजा में विशेष प्रयोगों को समझाने का सकारात्मक प्रयास करता है। - [शिव पूजा चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका - Shiva Puja Rituals: A Step-by-Step Guide](https://karmkandvidhi.in/shiva-puja-rituals-a-step-by-step-guide/): शिव पूजा चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका - Shiva Puja Rituals: A Step-by-Step Guide : भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है और मुख्य रूप से घर में मिट्टी का शिवलिंग निर्माण करके पार्थिव पूजन किया जाता है। यहां शिव पूजा अनुष्ठान करने के लिए एक विस्तृत और व्यापक मार्गदर्शिका प्रस्तुत की गई है। प्रत्येक चरण को स्पष्ट और विस्तार से समझाया गया है, जो पार्थिव पूजा विधि को समझने और सीखने के लिये विशेष महत्वपूर्ण है। - [दैनिक पूजा के लिए सही देवता का चयन कैसे करें - How to Choose the Right Deity for Daily Puja](https://karmkandvidhi.in/how-to-choose-the-right-deity-for-daily-puja/): दैनिक पूजा के लिए सही देवता का चयन कैसे करें - How to Choose the Right Deity for Daily Puja : क्या आप अपनी आध्यात्मिक यात्रा में भटके हुए हैं? निश्चित नहीं हैं कि कौन सा देवता आपकी आत्मा के साथ प्रतिध्वनित होता है? आपके और ईश्वर के बीच एक गहरा संबंध है। अपनी दैनिक पूजा के लिए सही देवता चुनने के पीछे छिपे ज्ञान को उजागर करें और आत्मज्ञान के लिए एक व्यक्तिगत मार्ग खोजें। - [घर में दैनिक पूजा में होने वाली सामान्य गलतियाँ - Common mistakes in daily pooja at home](https://karmkandvidhi.in/common-mistakes-in-daily-pooja-at-home/): घर में दैनिक पूजा में होने वाली सामान्य गलतियाँ - Common mistakes in daily pooja at home : यह आलेख घर पर की जाने वाली दैनिक पूजा में होने वाली कुछ आम त्रुटियों पर प्रकाश डालता है और यह सुनिश्चित करने के लिए व्यावहारिक सुझाव देता है कि आपकी पूजा सार्थक और प्रभावी दोनों हो। - [रुद्राभिषेक के विभिन्न प्रकार - The Different Types of Rudrabhishek](https://karmkandvidhi.in/the-different-types-of-rudrabhishek/): रुद्राभिषेक के विभिन्न प्रकार - The Different Types of Rudrabhishek : क्या आपने कभी रुद्राभिषेक करने के विभिन्न तरीकों के बारे में सोचा है? यह आलेख विभिन्न प्रकार के रुद्राभिषेक की पड़ताल करता है, और प्रत्येक के अनूठे लाभों और विधियों को उजागर करता है। - [दैनिक पूजा संकल्प: क्या यह आवश्यक है? - Is Daily Sankalp Really Necessary?](https://karmkandvidhi.in/is-daily-sankalp-really-necessary/): दैनिक पूजा संकल्प: क्या यह आवश्यक है? - Is Daily Sankalp Really Necessary - "क्या संकल्प और दैनिक संकल्प मात्र एक औपचारिकता है अथवा आपकी पूजा-उपासना-साधना के सफल होने का आधार ? यह आलेख इस अभ्यास के पीछे छिपे प्राचीन ज्ञान पर प्रकाश डालता है और आपकी आध्यात्मिक यात्रा के लिए इसके आश्चर्यजनक लाभों की पड़ताल करता है।" - [पापशमनं नामक हरिशङ्कर स्तोत्र - Harishankara stotra](https://karmkandvidhi.in/harishankara-stotra/): वामन पुराण में भगवान विष्णु और भगवान शंकर का एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है जिसका नाम पाप शमन स्तोत्र या हरिशंकर स्तोत्र (Harishankara stotra) है। यह स्तोत्र जब दोनों का संयुक्त स्तवन करना हो तो महत्वपूर्ण हो जाता है। हम जानते हैं कि एक यज्ञ हरिहर यज्ञ भी होता है और ऐसी अर्चना में यह स्तोत्र महत्वपूर्ण स्थान रखता है। - [हरिहराष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् - hariharashtottara shatanama stotram](https://karmkandvidhi.in/hariharashtottara-shatanama-stotram/): क्या आपको कभी हरिहर अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र की आवश्यकता हुई है। हरिहर यज्ञ में तो विशेष रूप से इसकी आवश्यकता होगी ही। स्कन्दपुराण में धर्मराज के द्वारा हरिहर के अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का वर्णन मिलता है। यहां स्कन्दपुराणोक्त हरिहराष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् (hariharashtottara shatanama stotram) संस्कृत में दिया गया है। - [मार्कण्डेयप्रोक्तं हरिहराभिन्नतावर्णन स्तोत्रम् - Hariharabhinnatavarnana Stotram](https://karmkandvidhi.in/hariharabhinnatavarnana-stotram/): हम सभी जानते हैं कि भगवान शिव और भगवान विष्णु में भेदबुद्धि नहीं रखनी चाहिये और यदि ऐसा करते हैं तो यह एक अपराध है ऐसा शास्त्रों में कहा गया है। शास्त्रों में भगवान विष्णु और शिव दोनों ने ही परस्पर अभेदता का उपदेश दिया है। हरि हर की अभेदता का विशेष वर्णन हरिवंश पुराण में मार्कण्डेय मुनि ने एक स्तोत्र करके किया है जिसे हरिहराभिन्नतावर्णन स्तोत्रम् (Hariharabhinnatavarnana Stotram) कहते हैं। - [हरि स्तोत्र संस्कृत में - Hari stotra](https://karmkandvidhi.in/hari-stotra/): भगवान विष्णु का ही एक महत्वपूर्ण नाम हरि है और भगवान विष्णु के हरि नाम से भी पुराणों में अनेकानेक स्तोत्र हैं। क्या आप भगवान हरि के अनेकों स्तोत्रों का अवलोकन करना चाहते हैं यदि हां तो यहां आपको अनेकों हरि स्तोत्र (Hari stotra) मिलेंगे यथा : कालिका पुराणोक्त पृथ्वी कृत हरि स्तोत्र, ब्रह्मवैवर्त पुराणोक्त ब्रह्मा कृत हरि स्तोत्र, कालिका पुराणोक्त मनु कृत हरि स्तोत्र, ब्रह्मवैवर्त पुराणोक्त महालक्ष्मी कृत हरि स्तोत्र। ## Pages - [Home](https://karmkandvidhi.in/): कर्मकांड विधि वेबसाइट पर कर्मकांड, पूजा-पाठ-स्तोत्र आदि के अनेकों PDF भी उपलब्ध किये गये हैं। वेबसाइट पर दिया गया कोई पीडीएफ (PDF) फाइल यदि तत्काल डाउनलोड न हो तो 24 घंटे बाद पुनः प्रयास करें। डाउनलोड करें कर्मकांड विधि पर क्या-क्या है ? कर्मकांड विधि पर नित्यकर्म, नैमित्तिक कर्म और शांति कर्म तीनों प्रकार की विधि और मंत्रों की जानकारी दी गयी है साथ ही अनेकों कर्मकांड की PDF फाइल भी दी गयी है जिसे डाउनलोड भी किया जा सकता है। यहां वर्ष भर के पर्व-त्यौहार, व्रत आदि की विधि – मंत्र और कथायें दी गयी है। हवन विधि, नामकरण विधि,... - [Privacy Policy](https://karmkandvidhi.in/privacypolicy/): नीति एवं शर्तें Privacy Policy अंतिम अद्यतन: 26 अगस्त, 2024 This Privacy Policy is an electronic record in the form of an Electronic Contract. 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