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संपूर्ण कर्मकांड विधि

संपूर्ण कर्मकांड विधि

शिव पूजा के माध्यम से समृद्धि आकर्षित करें - Attract Prosperity Through Shiv Puja

शिव पूजा के माध्यम से समृद्धि आकर्षित करें – Attract Prosperity Through Shiv Puja

शिव पूजा के माध्यम से समृद्धि आकर्षित करें – Attract Prosperity Through Shiv Puja : शिव पूजा से कल्याण की प्राप्ति कैसे करें और अपने जीवन में अप्रत्याशित लाभ का भाजन कैसे बने ? यह आलेख प्रचुरता और समृद्धि के लिए शिवपूजा में विशेष प्रयोगों को समझाने का सकारात्मक प्रयास करता है।

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शिव पूजा चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका - Shiva Puja Rituals: A Step-by-Step Guide

शिव पूजा चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका – Shiva Puja Rituals: A Step-by-Step Guide

शिव पूजा चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका – Shiva Puja Rituals: A Step-by-Step Guide : भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है और मुख्य रूप से घर में मिट्टी का शिवलिंग निर्माण करके पार्थिव पूजन किया जाता है। यहां शिव पूजा अनुष्ठान करने के लिए एक विस्तृत और व्यापक मार्गदर्शिका प्रस्तुत की गई है। प्रत्येक चरण को स्पष्ट और विस्तार से समझाया गया है, जो पार्थिव पूजा विधि को समझने और सीखने के लिये विशेष महत्वपूर्ण है।

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दैनिक पूजा के लिए सही देवता का चयन कैसे करें - How to Choose the Right Deity for Daily Puja

दैनिक पूजा के लिए सही देवता का चयन कैसे करें – How to Choose the Right Deity for Daily Puja

दैनिक पूजा के लिए सही देवता का चयन कैसे करें – How to Choose the Right Deity for Daily Puja : क्या आप अपनी आध्यात्मिक यात्रा में भटके हुए हैं? निश्चित नहीं हैं कि कौन सा देवता आपकी आत्मा के साथ प्रतिध्वनित होता है? आपके और ईश्वर के बीच एक गहरा संबंध है। अपनी दैनिक पूजा के लिए सही देवता चुनने के पीछे छिपे ज्ञान को उजागर करें और आत्मज्ञान के लिए एक व्यक्तिगत मार्ग खोजें।

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घर में दैनिक पूजा में होने वाली सामान्य गलतियाँ - Common mistakes in daily pooja at home

घर में दैनिक पूजा में होने वाली सामान्य गलतियाँ – Common mistakes in daily pooja at home

घर में दैनिक पूजा में होने वाली सामान्य गलतियाँ – Common mistakes in daily pooja at home : यह आलेख घर पर की जाने वाली दैनिक पूजा में होने वाली कुछ आम त्रुटियों पर प्रकाश डालता है और यह सुनिश्चित करने के लिए व्यावहारिक सुझाव देता है कि आपकी पूजा सार्थक और प्रभावी दोनों हो।

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रुद्राभिषेक के विभिन्न प्रकार - The Different Types of Rudrabhishek

रुद्राभिषेक के विभिन्न प्रकार – The Different Types of Rudrabhishek

रुद्राभिषेक के विभिन्न प्रकार – The Different Types of Rudrabhishek : क्या आपने कभी रुद्राभिषेक करने के विभिन्न तरीकों के बारे में सोचा है? यह आलेख विभिन्न प्रकार के रुद्राभिषेक की पड़ताल करता है, और प्रत्येक के अनूठे लाभों और विधियों को उजागर करता है।

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दैनिक पूजा संकल्प: क्या यह आवश्यक है? - Is Daily Sankalp Really Necessary?

दैनिक पूजा संकल्प: क्या यह आवश्यक है? – Is Daily Sankalp Really Necessary?

दैनिक पूजा संकल्प: क्या यह आवश्यक है? – Is Daily Sankalp Really Necessary – “क्या संकल्प और दैनिक संकल्प मात्र एक औपचारिकता है अथवा आपकी पूजा-उपासना-साधना के सफल होने का आधार ? यह आलेख इस अभ्यास के पीछे छिपे प्राचीन ज्ञान पर प्रकाश डालता है और आपकी आध्यात्मिक यात्रा के लिए इसके आश्चर्यजनक लाभों की पड़ताल करता है।”

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पापशमनं नामक हरिशङ्कर स्तोत्र - Harishankara stotra

पापशमनं नामक हरिशङ्कर स्तोत्र – Harishankara stotra

वामन पुराण में भगवान विष्णु और भगवान शंकर का एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है जिसका नाम पाप शमन स्तोत्र या हरिशंकर स्तोत्र (Harishankara stotra) है। यह स्तोत्र जब दोनों का संयुक्त स्तवन करना हो तो महत्वपूर्ण हो जाता है। हम जानते हैं कि एक यज्ञ हरिहर यज्ञ भी होता है और ऐसी अर्चना में यह स्तोत्र महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

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हरिहराष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् - hariharashtottara shatanama stotram

हरिहराष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् – hariharashtottara shatanama stotram

क्या आपको कभी हरिहर अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र की आवश्यकता हुई है। हरिहर यज्ञ में तो विशेष रूप से इसकी आवश्यकता होगी ही। स्कन्दपुराण में धर्मराज के द्वारा हरिहर के अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का वर्णन मिलता है। यहां स्कन्दपुराणोक्त हरिहराष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् (hariharashtottara shatanama stotram) संस्कृत में दिया गया है।

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मार्कण्डेयप्रोक्तं हरिहराभिन्नतावर्णन स्तोत्रम् - Hariharabhinnatavarnana Stotram

मार्कण्डेयप्रोक्तं हरिहराभिन्नतावर्णन स्तोत्रम् – Hariharabhinnatavarnana Stotram

हम सभी जानते हैं कि भगवान शिव और भगवान विष्णु में भेदबुद्धि नहीं रखनी चाहिये और यदि ऐसा करते हैं तो यह एक अपराध है ऐसा शास्त्रों में कहा गया है। शास्त्रों में भगवान विष्णु और शिव दोनों ने ही परस्पर अभेदता का उपदेश दिया है। हरि हर की अभेदता का विशेष वर्णन हरिवंश पुराण में मार्कण्डेय मुनि ने एक स्तोत्र करके किया है जिसे हरिहराभिन्नतावर्णन स्तोत्रम् (Hariharabhinnatavarnana Stotram) कहते हैं।

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हरि स्तोत्र संस्कृत में - Hari stotra

हरि स्तोत्र संस्कृत में – Hari stotra

भगवान विष्णु का ही एक महत्वपूर्ण नाम हरि है और भगवान विष्णु के हरि नाम से भी पुराणों में अनेकानेक स्तोत्र हैं। क्या आप भगवान हरि के अनेकों स्तोत्रों का अवलोकन करना चाहते हैं यदि हां तो यहां आपको अनेकों हरि स्तोत्र (Hari stotra) मिलेंगे यथा : कालिका पुराणोक्त पृथ्वी कृत हरि स्तोत्र, ब्रह्मवैवर्त पुराणोक्त ब्रह्मा कृत हरि स्तोत्र, कालिका पुराणोक्त मनु कृत हरि स्तोत्र, ब्रह्मवैवर्त पुराणोक्त महालक्ष्मी कृत हरि स्तोत्र।

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