शौच विधान स्मृति वचन - प्रमाण संकलन

शौच विधान स्मृति वचन – प्रमाण संकलन

शास्त्रों में शौच विधान और शुचिता का क्या महत्त्व है? जानिए मनुस्मृति, दक्षस्मृति और वशिष्ठस्मृति के प्रामाणिक श्लोकों के आधार पर बाह्य व आंतरिक शुद्धि के वैज्ञानिक नियम, आचमन विधि, और मल-मूत्र त्याग की शास्त्रीय दिशाएं। “मन चंगा कठौती में गंगा” के कुतर्कों का सनातनी समाधान।

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दूषित संभोग, व्यभिचार, बलात्कारादि दोष और परिहार - प्रमाण संकलन

दूषित संभोग, व्यभिचार, बलात्कारादि दोष और परिहार – प्रमाण संकलन

शास्त्रों में व्यभिचार, बलात्कार, और अगम्यागमन के दोष तथा परिहार क्या हैं? जानिए मनुस्मृति, पाराशर स्मृति, पद्म पुराण आदि के प्रामाणिक श्लोकों के आधार पर दूषित संभोग के भयंकर आध्यात्मिक दुष्परिणाम। पाश्चात्य विचारधारा बनाम सनातनी विवाह संस्कार और सामाजिक व्यवस्था पर एक अत्यंत तीखा, प्रामाणिक और विस्तृत शास्त्रीय विश्लेषण।

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ब्राह्मणों को किस प्रकार दोष से बचना चाहिये ?

ब्राह्मणों को किस प्रकार दोष से बचना चाहिये ?

अयाज्य-याजन जनित संसर्ग दोष से ब्राह्मणों की रक्षा का अचूक शास्त्रीय विधान। लघ्वाश्वलायन स्मृति के आलोक में षट्कर्म अनुष्ठान द्वारा मार्जनपरक गंभीर विमर्श।

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संस्कार विसंगति विमर्श: मुण्डन-मण्डन, प्रवेश-निर्गम के शास्त्रीय नियम और निषेध

संस्कार विसंगति विमर्श: मुण्डन-मण्डन, प्रवेश-निर्गम के शास्त्रीय नियम और निषेध

एक ही कुल या वर्ष में मुण्डन, उपनयन और विवाह जैसे कई संस्कार एक साथ करना क्यों वर्जित है? जानें कात्यायन, वसिष्ठ और नारदपुराण के अनुसार मुण्डन-मण्डन, प्रवेश-निर्गम के नियम, सहोदर निषेध और उनके शास्त्रसम्मत परिहार।

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प्रमाण संग्रहण : कर्मकांडी के लिये अनिवार्य अन्यथा अयोग्य

प्रमाण संग्रहण : कर्मकांडी के लिये अनिवार्य अन्यथा अयोग्य

यह आलेख कर्मकांड के क्षेत्र में ‘प्रमाण’ की महत्ता, परिभाषा और उसके व्यावहारिक स्वरूप पर विस्तृत प्रकाश डालता है। इसमें सांख्य, योग, न्याय और मीमांसा जैसे षड्दर्शनों में वर्णित प्रमाणों की तुलना करते हुए यह सिद्ध किया गया है कि कर्मकांड विशुद्ध रूप से ‘शब्द (आप्त) प्रमाण’ पर आधारित है।

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अस्थिसंचय : अशौच में वेदमंत्र का प्रयोग कैसे ?

अस्थिसंचय : अशौच में वेदमंत्र का प्रयोग कैसे ?

अशौच (सूतक) काल में अस्थिसञ्चय के समय वेदमन्त्र प्रयोग की प्रामाणिक शास्त्रीय सिद्धि। “तदपि ग्राह्यं” और “त्यागेन लब्धं” सूत्रों के आलोक अन्वेषण और श्रीरामकृत श्राद्ध विमर्श।

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प्रेतश्राद्ध (एकादशाह) में वृषोत्सर्ग की अपरिहार्यता व विकल्प

प्रेतश्राद्ध (एकादशाह) में वृषोत्सर्ग की अपरिहार्यता व विकल्प

लोकविरुद्ध विसंगतियों के मध्य एकादशाह (प्रेतश्राद्ध) में वृषोत्सर्ग की अपरिहार्यता और उसके शास्त्रसम्मत विकल्प (मृत्तिका, दर्भ या पिष्ट वृष)। पण्डित दिगम्बर झा का प्रामाणिक ऐतिहासिक-शास्त्रीय विमर्श।

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संशोधित मिथिलादेशीय अपात्रक श्राद्ध पद्धति - "सिद्धं सुसिद्धं श्राद्धं"

संशोधित मिथिलादेशीय अपात्रक श्राद्ध पद्धति – “सिद्धं सुसिद्धं श्राद्धं”

पण्डित दिगम्बर झा कृत “सिद्धं सुसिद्धं श्राद्धं” (प्रथम संस्करण – गंगादशहरा २०८३)। वाजसनेयी परम्परा के अनुसार आद्यश्राद्ध, तन्त्र मासिक, सपिण्डीकरण, सांवत्सरिक एकोद्दिष्ट, अस्थिसंचय एवं वृषोत्सर्ग विधि का प्रामाणिक ऐतिहासिक-शास्त्रीय विमर्श।

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अधिकमास में वृषोत्सर्ग करें या न करें प्रामाणिक सिद्धि

अधिकमास में वृषोत्सर्ग करें या न करें प्रामाणिक सिद्धि

क्या अधिकमास (मलमास) में एकादशाह को वृषोत्सर्ग करना चाहिए? जानें काम्य और नैमित्तिक वृषोत्सर्ग का शास्त्रीय भेद तथा पंडित दिगम्बर झा का प्रामाणिक व अकाट्य निर्णय।

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अनुपनीत कर्त्ता और पिण्ड द्रव्य का विचार

अनुपनीत कर्त्ता और पिण्ड द्रव्य का विचार

क्या अनुपनीत बालक भात (सिद्धान्न) से पिण्डदान कर सकता है? जानें द्विजाति असंस्कृत पुत्र के कर्माधिकार और पिण्ड द्रव्य का प्रामाणिक ऐतिहासिक एवं शास्त्रीय निर्णय।

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