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संशोधित वृषोत्सर्ग पद्धति - वाजसनेयी

संशोधित वृषोत्सर्ग पद्धति – वाजसनेयी

वाजसनेयी संशोधित ‘वैकल्पिक वृषोत्सर्ग पद्धति’। लोकविरुद्ध विसंगति का परिहार करते हुए एकादशाह को पिष्ट, दर्भ या मृत्तिका निर्मित वृष से प्रेतत्व विमुक्ति की प्रामाणिक समन्त्रक विधि।

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अस्थिविसर्जन प्रयोग

अस्थिविसर्जन प्रयोग

अस्थिसंचय के पश्चात् अस्थिविसर्जन में एक महत्वपूर्ण कर्त्यव्य होता है क्योंकि गंगा में अस्थि विसर्जन करने से प्रेतत्व का निवारण होता है। यदि दशरात्र के मध्य में हो तो उत्तम पक्ष अन्यथा वर्ष के पश्चात्।

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अस्थिसंचय प्रयोग

अस्थिसंचय प्रयोग

मैथिल परम्परागत परिष्कृत ‘अस्थिसञ्चय एवं एकोद्दिष्ट पद्धति’। पद्धतिकारों की विसंगतियों का निवारण, पूर्ण अपात्रक दक्षिणा विधि और श्मशान-बलि का प्रामाणिक समन्त्रक प्रयोग।

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फादर्स डे, मदर्स डे मातृ-पितृभक्ति या बौद्धिक दरिद्रता ?

फादर्स डे, मदर्स डे मातृ-पितृभक्ति या बौद्धिक दरिद्रता ?

पितृ दिवस (फादर्स डे) और मातृ दिवस (मदर्स डे) के नाम पर फैली वैचारिक दासता का खण्डन। सांवत्सरिक श्राद्ध और महालय पितृपक्ष के शास्त्रोक्त दायित्वों पर को उजागर करने वाला महत्वपूर्ण आलेख।

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अस्थिसंचय : अशौच में वेदमंत्र का प्रयोग कैसे ?

अस्थिसंचय : अशौच में वेदमंत्र का प्रयोग कैसे ?

अशौच (सूतक) काल में अस्थिसञ्चय के समय वेदमन्त्र प्रयोग की प्रामाणिक शास्त्रीय सिद्धि। “तदपि ग्राह्यं” और “त्यागेन लब्धं” सूत्रों के आलोक अन्वेषण और श्रीरामकृत श्राद्ध विमर्श।

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प्रेतश्राद्ध (एकादशाह) में वृषोत्सर्ग की अपरिहार्यता व विकल्प

प्रेतश्राद्ध (एकादशाह) में वृषोत्सर्ग की अपरिहार्यता व विकल्प

लोकविरुद्ध विसंगतियों के मध्य एकादशाह (प्रेतश्राद्ध) में वृषोत्सर्ग की अपरिहार्यता और उसके शास्त्रसम्मत विकल्प (मृत्तिका, दर्भ या पिष्ट वृष)। पण्डित दिगम्बर झा का प्रामाणिक ऐतिहासिक-शास्त्रीय विमर्श।

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संशोधित मिथिलादेशीय अपात्रक श्राद्ध पद्धति - "सिद्धं सुसिद्धं श्राद्धं"

संशोधित मिथिलादेशीय अपात्रक श्राद्ध पद्धति – “सिद्धं सुसिद्धं श्राद्धं”

पण्डित दिगम्बर झा कृत “सिद्धं सुसिद्धं श्राद्धं” (प्रथम संस्करण – गंगादशहरा २०८३)। वाजसनेयी परम्परा के अनुसार आद्यश्राद्ध, तन्त्र मासिक, सपिण्डीकरण, सांवत्सरिक एकोद्दिष्ट, अस्थिसंचय एवं वृषोत्सर्ग विधि का प्रामाणिक ऐतिहासिक-शास्त्रीय विमर्श।

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अधिकमास में वृषोत्सर्ग करें या न करें प्रामाणिक सिद्धि

अधिकमास में वृषोत्सर्ग करें या न करें प्रामाणिक सिद्धि

क्या अधिकमास (मलमास) में एकादशाह को वृषोत्सर्ग करना चाहिए? जानें काम्य और नैमित्तिक वृषोत्सर्ग का शास्त्रीय भेद तथा पंडित दिगम्बर झा का प्रामाणिक व अकाट्य निर्णय।

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अनुपनीत कर्त्ता और पिण्ड द्रव्य का विचार

अनुपनीत कर्त्ता और पिण्ड द्रव्य का विचार

क्या अनुपनीत बालक भात (सिद्धान्न) से पिण्डदान कर सकता है? जानें द्विजाति असंस्कृत पुत्र के कर्माधिकार और पिण्ड द्रव्य का प्रामाणिक ऐतिहासिक एवं शास्त्रीय निर्णय।

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अपात्रक श्राद्ध का आरंभ कब हुआ?

अपात्रक श्राद्ध का आरंभ कब हुआ?

अपात्रक श्राद्ध और मासिक श्राद्ध के अपकर्षण का ऐतिहासिक प्रारंभ कब हुआ? महामहोपाध्याय रुद्रधर झा और वाचस्पति मिश्र के प्रमाणों के साथ पंडित दिगम्बर झा का शास्त्रीय विमर्श और अधिकार सिद्धि।

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