अनुपनीत कर्त्ता और पिण्ड द्रव्य का विचार
क्या अनुपनीत बालक भात (सिद्धान्न) से पिण्डदान कर सकता है? जानें द्विजाति असंस्कृत पुत्र के कर्माधिकार और पिण्ड द्रव्य का प्रामाणिक ऐतिहासिक एवं शास्त्रीय निर्णय।
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अपात्रक श्राद्ध और मासिक श्राद्ध के अपकर्षण का ऐतिहासिक प्रारंभ कब हुआ? महामहोपाध्याय रुद्रधर झा और वाचस्पति मिश्र के प्रमाणों के साथ पंडित दिगम्बर झा का शास्त्रीय विमर्श और अधिकार सिद्धि।
संशोधित श्राद्ध पद्धति “सिद्धं सुसिद्धं श्राद्धं” ग्रंथ की प्रामाणिक प्रस्तावना एवं भूमिका। जानें क्यों कर्मकांड में शास्त्रीय संशोधन अनिवार्य है और ‘मूर्खाचार्यों’ के दुराग्रहों का शास्त्रसम्मत समाधान क्या है।
वाजसनेयी संशोधित ‘सांवत्सरिक (वार्षिक) श्राद्ध विधि’। जानें क्यों वार्षिक श्राद्ध में महापात्र का प्रवेश वर्जित है और स्वभूमि में भूस्वामि भाग का निषेध क्यों है। प्रामाणिक मंत्रों सहित क्षयाह श्राद्ध विमर्श।
वाजसनेयी संशोधित ‘अपात्रक सपिण्डीकरण श्राद्ध विधि’: जानें प्रेतवेदी और पितृवेदी के पृथक्करण का शास्त्रीय महत्त्व। सपिण्डीकरण का उचित काल, आसनादि क्रम और ‘तंत्र’ निषेधों का प्रामाणिक विश्लेषण।
वाजसनेयी संशोधित ‘अपात्रक मासिक श्राद्ध विधि’: जानें क्यों १४ मासिक श्राद्ध पृथक के बजाय ‘तंत्र’ विधि से करने चाहिए। अर्घ्य, पिण्डदान और अक्षय्योदक के सूक्ष्म नियमों का शास्त्रीय विश्लेषण।
मैथिल वाजसनेयी परम्परा के अनुसार संशोधित ‘एकादशाह (आद्य) श्राद्ध विधि’। जानें पञ्चदान, अपात्रक श्राद्ध के नियम और शास्त्रीय संशोधन जो कर्मकांड की शुद्धता सुनिश्चित करते हैं।
क्या धार्मिक प्रदर्शन और आडंबर से आत्मकल्याण संभव है? जानें क्यों कलियुग में केवल ‘चरणसेवा’ ही आध्यात्मिक उन्नति का एकमात्र आधार है। शास्त्र सम्मत प्रमाणों के साथ गुरु, विप्र और माता-पिता की सेवा का वास्तविक महत्व।
जानें केवल गुरुजनों की सेवा मात्र से शास्त्रीय दृष्टि और ईश्वर की कृपा कैसे प्राप्त होती है। कर्मकांड की शुद्धता और गुरु भक्ति पर विशेष लेख।
क्या आप भी धर्म और कर्मकांड के नाम पर ठगी का शिकार महसूस करते हैं? यह आलेख स्पष्ट करता है कि कैसे हमारी अपनी अज्ञानता और शास्त्र-विरुद्ध आचरण हमें ठगी की ओर धकेलते हैं। जानें, क्यों योग्य गुरु और शुद्ध पूजन सामग्री न मिलना हमारे अपने पापों का परिणाम है।