संपूर्ण कर्मकांड विधि

संपूर्ण कर्मकांड विधि

सिद्धं सुसिद्धं श्राद्धं - siddham susiddham shraddham

सिद्धं सुसिद्धं श्राद्धं – siddham susiddham shraddham

संशोधित श्राद्ध पद्धति “सिद्धं सुसिद्धं श्राद्धं” ग्रंथ की प्रामाणिक प्रस्तावना एवं भूमिका। जानें क्यों कर्मकांड में शास्त्रीय संशोधन अनिवार्य है और ‘मूर्खाचार्यों’ के दुराग्रहों का शास्त्रसम्मत समाधान क्या है।

Read More
संशोधित सांवत्सरिक एकोद्दिष्ट अर्थात वार्षिक श्राद्ध - वाजसनेयी

संशोधित सांवत्सरिक एकोद्दिष्ट अर्थात वार्षिक श्राद्ध – वाजसनेयी

वाजसनेयी संशोधित ‘सांवत्सरिक (वार्षिक) श्राद्ध विधि’। जानें क्यों वार्षिक श्राद्ध में महापात्र का प्रवेश वर्जित है और स्वभूमि में भूस्वामि भाग का निषेध क्यों है। प्रामाणिक मंत्रों सहित क्षयाह श्राद्ध विमर्श।

Read More
संशोधित अपात्रक सपिंडीकरण श्राद्ध विधि - वाजसनेयी

संशोधित अपात्रक सपिंडीकरण श्राद्ध विधि – वाजसनेयी

वाजसनेयी संशोधित ‘अपात्रक सपिण्डीकरण श्राद्ध विधि’: जानें प्रेतवेदी और पितृवेदी के पृथक्करण का शास्त्रीय महत्त्व। सपिण्डीकरण का उचित काल, आसनादि क्रम और ‘तंत्र’ निषेधों का प्रामाणिक विश्लेषण।

Read More
संशोधित मासिक श्राद्ध विधि - वाजसनेयी

संशोधित अपात्रक मासिक श्राद्ध विधि – वाजसनेयी

वाजसनेयी संशोधित ‘अपात्रक मासिक श्राद्ध विधि’: जानें क्यों १४ मासिक श्राद्ध पृथक के बजाय ‘तंत्र’ विधि से करने चाहिए। अर्घ्य, पिण्डदान और अक्षय्योदक के सूक्ष्म नियमों का शास्त्रीय विश्लेषण।

Read More
संशोधित आद्य श्राद्ध विधि - वाजसनेयी

संशोधित आद्य श्राद्ध विधि – वाजसनेयी

मैथिल वाजसनेयी परम्परा के अनुसार संशोधित ‘एकादशाह (आद्य) श्राद्ध विधि’। जानें पञ्चदान, अपात्रक श्राद्ध के नियम और शास्त्रीय संशोधन जो कर्मकांड की शुद्धता सुनिश्चित करते हैं।

Read More
गांठ बांध लो आध्यात्मिक उन्नति का मूल चरणसेवा है

गांठ बांध लो आध्यात्मिक उन्नति का मूल चरणसेवा है

क्या धार्मिक प्रदर्शन और आडंबर से आत्मकल्याण संभव है? जानें क्यों कलियुग में केवल ‘चरणसेवा’ ही आध्यात्मिक उन्नति का एकमात्र आधार है। शास्त्र सम्मत प्रमाणों के साथ गुरु, विप्र और माता-पिता की सेवा का वास्तविक महत्व।

Read More
आत्मपरिचय और ब्रह्मसूत्रम्

आत्मकथा और ब्रह्मसूत्रम्

जानें केवल गुरुजनों की सेवा मात्र से शास्त्रीय दृष्टि और ईश्वर की कृपा कैसे प्राप्त होती है। कर्मकांड की शुद्धता और गुरु भक्ति पर विशेष लेख।

Read More
धर्म के नाम पर हम ठगी का शिकार क्यों बन जाते हैं ?

धर्म के नाम पर हम ठग के शिकार क्यों बन जाते हैं ?

क्या आप भी धर्म और कर्मकांड के नाम पर ठगी का शिकार महसूस करते हैं? यह आलेख स्पष्ट करता है कि कैसे हमारी अपनी अज्ञानता और शास्त्र-विरुद्ध आचरण हमें ठगी की ओर धकेलते हैं। जानें, क्यों योग्य गुरु और शुद्ध पूजन सामग्री न मिलना हमारे अपने पापों का परिणाम है।

Read More
कुलटूट (पीढ़ी कटाना) : शास्त्रीय पक्ष क्या है ?

कुलटूट (पीढ़ी कटाना) : शास्त्रीय पक्ष क्या है ?

यह आलेख ‘कुलटूट’ (पीढ़ी अलग करना) की शास्त्रीय प्रक्रिया और अशौच के सूक्ष्म नियमों का विस्तृत विश्लेषण करता है। इसमें मनुस्मृति, मत्स्यपुराण, कूर्मपुराण और मिताक्षरा जैसे प्रामाणिक ग्रंथों के आधार पर यह सिद्ध किया गया है कि सापिण्ड्य ७ पीढ़ियों तक अक्षुण्ण रहता है। आलेख में ‘शास्त्रदस्युओं’ (अल्पज्ञ पंडितों) द्वारा फैलाई गई भ्रांतियों का खंडन करते हुए सपिण्ड (१-७ पीढ़ी), सोदक/सकुल्य (८-१४ पीढ़ी) और सगोत्र (१५-२१ पीढ़ी) के बीच के अंतर और उनके लिए निर्धारित अशौच काल की स्पष्ट व्याख्या की गई है।

Read More
अधिकमास में श्राद्ध का सप्रमाण विचार

अधिकमास में श्राद्ध का सप्रमाण विचार

यह शोधपरक आलेख अधिकमास (मलमास/पुरुषोत्तम मास) के दौरान होने वाले श्राद्ध विधानों पर विस्तृत प्रकाश डालता है। इसमें विशेष रूप से ‘षोडश बनाम सप्तदश’ श्राद्ध के विवाद, एकादशमासाभ्यन्तरे की व्याकरणिक मीमांसा और संवत्सर २०८२-२०८३ के पंचांगीय गणित के माध्यम से यह समझाया गया है कि किस माह के मृतक का श्राद्ध अधिकमास में होगा और किसका नहीं।

Read More