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संपूर्ण कर्मकांड विधि

संपूर्ण कर्मकांड विधि

शौच विधान स्मृति वचन - प्रमाण संकलन

शौच विधान स्मृति वचन – प्रमाण संकलन

शास्त्रों में शौच विधान और शुचिता का क्या महत्त्व है? जानिए मनुस्मृति, दक्षस्मृति और वशिष्ठस्मृति के प्रामाणिक श्लोकों के आधार पर बाह्य व आंतरिक शुद्धि के वैज्ञानिक नियम, आचमन विधि, और मल-मूत्र त्याग की शास्त्रीय दिशाएं। “मन चंगा कठौती में गंगा” के कुतर्कों का सनातनी समाधान।

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दूषित संभोग, व्यभिचार, बलात्कारादि दोष और परिहार - प्रमाण संकलन

दूषित संभोग, व्यभिचार, बलात्कारादि दोष और परिहार – प्रमाण संकलन

शास्त्रों में व्यभिचार, बलात्कार, और अगम्यागमन के दोष तथा परिहार क्या हैं? जानिए मनुस्मृति, पाराशर स्मृति, पद्म पुराण आदि के प्रामाणिक श्लोकों के आधार पर दूषित संभोग के भयंकर आध्यात्मिक दुष्परिणाम। पाश्चात्य विचारधारा बनाम सनातनी विवाह संस्कार और सामाजिक व्यवस्था पर एक अत्यंत तीखा, प्रामाणिक और विस्तृत शास्त्रीय विश्लेषण।

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कालचक्रं : जनसामान्य और कर्मकांडियों के लिये उपयोगी मोबाइल ऐप

कालचक्रं : जनसामान्य और कर्मकांडियों के लिये उपयोगी मोबाइल ऐप

सम्पूर्ण कर्मकांड विधि’ द्वारा निर्मित ‘कालचक्रं’ (Panchang_Sankalp .apk) मोबाइल ऐप की विस्तृत जानकारी. जनसामान्य और कर्मकांडियों के लिए उपयोगी इस ऐप में आज और कल का शुद्ध पंचांग, संक्षिप्त संकल्प, गण्डान्त, शिववास, अग्निवास और श्राद्ध कर्म के लिए विशेष उपयोगी दैनिक ‘पंचधा दिवाभाग’ की सटीक गणना समाहित है. अभी प्रामाणिक रूप से डाउनलोड करें

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मुहूर्त विचार और पंचाङ्ग: मुहूर्त निर्धारण में योग और करण की उपेक्षा का कड़वा सच

मुहूर्त विचार और पंचाङ्ग: मुहूर्त निर्धारण में योग और करण की उपेक्षा का कड़वा सच

पंचाङ्ग के पाँच अंगों में से मुहूर्त निर्धारण हेतु योग और करण का विचार क्यों नहीं किया जाता? जानें मुहूर्त चिंतामणि और बृहज्ज्योतिषसार के प्रमाणों के साथ वर्जित योग (व्यतिपात, वैधृति) और भद्रा (विष्टि करण) के त्याग का शास्त्रीय नियम।

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संशोधित वृषोत्सर्ग पद्धति - वाजसनेयी

संशोधित वृषोत्सर्ग पद्धति – वाजसनेयी

वाजसनेयी संशोधित ‘वैकल्पिक वृषोत्सर्ग पद्धति’। लोकविरुद्ध विसंगति का परिहार करते हुए एकादशाह को पिष्ट, दर्भ या मृत्तिका निर्मित वृष से प्रेतत्व विमुक्ति की प्रामाणिक समन्त्रक विधि।

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अस्थिविसर्जन प्रयोग

अस्थिविसर्जन प्रयोग

अस्थिसंचय के पश्चात् अस्थिविसर्जन में एक महत्वपूर्ण कर्त्यव्य होता है क्योंकि गंगा में अस्थि विसर्जन करने से प्रेतत्व का निवारण होता है। यदि दशरात्र के मध्य में हो तो उत्तम पक्ष अन्यथा वर्ष के पश्चात्।

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अस्थिसंचय प्रयोग

अस्थिसंचय प्रयोग

मैथिल परम्परागत परिष्कृत ‘अस्थिसञ्चय एवं एकोद्दिष्ट पद्धति’। पद्धतिकारों की विसंगतियों का निवारण, पूर्ण अपात्रक दक्षिणा विधि और श्मशान-बलि का प्रामाणिक समन्त्रक प्रयोग।

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ब्राह्मणों को किस प्रकार दोष से बचना चाहिये ?

ब्राह्मणों को किस प्रकार दोष से बचना चाहिये ?

अयाज्य-याजन जनित संसर्ग दोष से ब्राह्मणों की रक्षा का अचूक शास्त्रीय विधान। लघ्वाश्वलायन स्मृति के आलोक में षट्कर्म अनुष्ठान द्वारा मार्जनपरक गंभीर विमर्श।

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महर्षि-ब्रह्मर्षि (स्वघोषित) या रंगा सियार

महर्षि-ब्रह्मर्षि (स्वघोषित) या रंगा सियार

स्वघोषित महर्षि-ब्रह्मर्षियों के पाखण्ड का तीव्र शास्त्रीय खण्डन। स्कन्दपुराण, वायुपुराण और निरुक्त के आलोक में ऋषित्व के अनिवार्य मापदण्डों पर अभेद्य शास्त्रीय विमर्श।

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संस्कार विसंगति विमर्श: मुण्डन-मण्डन, प्रवेश-निर्गम के शास्त्रीय नियम और निषेध

संस्कार विसंगति विमर्श: मुण्डन-मण्डन, प्रवेश-निर्गम के शास्त्रीय नियम और निषेध

एक ही कुल या वर्ष में मुण्डन, उपनयन और विवाह जैसे कई संस्कार एक साथ करना क्यों वर्जित है? जानें कात्यायन, वसिष्ठ और नारदपुराण के अनुसार मुण्डन-मण्डन, प्रवेश-निर्गम के नियम, सहोदर निषेध और उनके शास्त्रसम्मत परिहार।

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