ब्राह्मणों को किस प्रकार दोष से बचना चाहिये ?
अयाज्य-याजन जनित संसर्ग दोष से ब्राह्मणों की रक्षा का अचूक शास्त्रीय विधान। लघ्वाश्वलायन स्मृति के आलोक में षट्कर्म अनुष्ठान द्वारा मार्जनपरक गंभीर विमर्श।
कर्मकांड सीखना : इसमें कर्मकांड सीखने से संबंधित अनेकों आलेख दिये गये हैं। कर्मकांड सीखने के लिये प्रारंभिक आलेख से ही अवलोकन करना उचित होगा। यदि प्रारंभिक आलेख से क्रमशः अध्ययन नहीं करेंगे तो कर्मकांड सीखना संभव नहीं है। वैसे एक मुख्य तथ्य यह है कि पुस्तक हो अथवा अंतर्जाल के आलेख वो सहयोगी मात्र होते हैं, वास्तविक ज्ञान गुरु से ही प्राप्त होता है। बहुत सारे लोग चाहते हैं कि कर्मकाण्ड सीखें किन्तु अब कर्मकांड सिखाने के नाम पर अधिकांशतः दिग्भ्रमित ही किया जाता है। यदि आप कर्मकांड सीखना चाहते हैं तो यहां प्रामाणिक तथ्य आपको प्राप्त होते हैं, सभी विषयों के प्रामाणिक सिद्धि का प्रयास यहां किया जाता है। प्रामाणिक सिद्धि का तात्पर्य होता है कि कुतर्कादि के बिना शास्त्रीय प्रमाणों-सिद्धांतों के आधार पर उचित है ऐसा सिद्ध करना।
अयाज्य-याजन जनित संसर्ग दोष से ब्राह्मणों की रक्षा का अचूक शास्त्रीय विधान। लघ्वाश्वलायन स्मृति के आलोक में षट्कर्म अनुष्ठान द्वारा मार्जनपरक गंभीर विमर्श।
यह आलेख कर्मकांड के क्षेत्र में ‘प्रमाण’ की महत्ता, परिभाषा और उसके व्यावहारिक स्वरूप पर विस्तृत प्रकाश डालता है। इसमें सांख्य, योग, न्याय और मीमांसा जैसे षड्दर्शनों में वर्णित प्रमाणों की तुलना करते हुए यह सिद्ध किया गया है कि कर्मकांड विशुद्ध रूप से ‘शब्द (आप्त) प्रमाण’ पर आधारित है।
कर्मकाण्ड कैसे और कहाँ सीखें? व्यावसायिक कलंकियों के पाखण्ड का खण्डन, योग्य गुरु की पहचान के विशिष्ट शास्त्रीय लक्षण और युगानुकूल मार्गदर्शक विमर्श।
कर्मकाण्ड सीखना सबके लिए अनिवार्य क्यों? यजमान के कर्माधिकार, स्वेच्छाचारी पुरोहितों के भ्रम निवारण और कलश स्थापन की शुद्ध शास्त्रीय विधि पर महत्पूर्ण प्रामाणिक विमर्श।