क्या गीता का ज्ञान भी भ्रमित करने वाला है ?
क्या गीता का ज्ञान भ्रमित करने वाला है? भृतकाध्यापकों की अनर्हता, मन्त्राक्षमता, ‘कर्मणा वर्णव्यवस्था’ के कुतर्क का खण्डन आदि तथ्यों का गंभीर और तीक्ष्ण शास्त्रीय सम्मार्जन।
क्या गीता का ज्ञान भ्रमित करने वाला है? भृतकाध्यापकों की अनर्हता, मन्त्राक्षमता, ‘कर्मणा वर्णव्यवस्था’ के कुतर्क का खण्डन आदि तथ्यों का गंभीर और तीक्ष्ण शास्त्रीय सम्मार्जन।
धार्मिक विसंगतियों में “सब ठीक है” कहने की आत्मघाती भूल, वर्तमान में व्रात्य दोष के शास्त्रीय परिहार और मनमुखी पुरोहिती के भयंकर दुष्परिणामों पर पण्डित दिगम्बर झा का तीक्ष्ण विमर्श।
मानव सभ्यता पर आसन्न संकट का शास्त्रीय समाधान और ‘दीक्षा तत्व’ का वास्तविक मर्म। जानें क्यों सावित्री दीक्षा (उपनयन) ही सर्वश्रेष्ठ है और ‘कान फुंकवाने’ का सम्प्रदायवादी भ्रम क्यों पतनोन्मुखी है।
क्या धार्मिक प्रदर्शन और आडंबर से आत्मकल्याण संभव है? जानें क्यों कलियुग में केवल ‘चरणसेवा’ ही आध्यात्मिक उन्नति का एकमात्र आधार है। शास्त्र सम्मत प्रमाणों के साथ गुरु, विप्र और माता-पिता की सेवा का वास्तविक महत्व।
जानें केवल गुरुजनों की सेवा मात्र से शास्त्रीय दृष्टि और ईश्वर की कृपा कैसे प्राप्त होती है। कर्मकांड की शुद्धता और गुरु भक्ति पर विशेष लेख।
क्या आप भी धर्म और कर्मकांड के नाम पर ठगी का शिकार महसूस करते हैं? यह आलेख स्पष्ट करता है कि कैसे हमारी अपनी अज्ञानता और शास्त्र-विरुद्ध आचरण हमें ठगी की ओर धकेलते हैं। जानें, क्यों योग्य गुरु और शुद्ध पूजन सामग्री न मिलना हमारे अपने पापों का परिणाम है।
संस्कृत साहित्य की अद्भुत चित्रात्मकता और नाद-सौंदर्य का अन्वेषण करें। शिव ताण्डव से लेकर नृसिंह स्तुति और भगवान दिगम्बर के दुर्लभ ध्वन्यात्मक पदों का अनूठा संग्रह। जानें कैसे ये ‘शब्दचित्र’ मानसिक एकाग्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करते हैं।
क्या भारत में गृहयुद्ध आरम्भ हो चुका है? UGC रेगुलेशन, सवर्णों का संवैधानिक उत्पीड़न और ‘लोकतांत्रिक गृहयुद्ध’ के अदृश्य स्वरूप का गहन विश्लेषण। जानिए कैसे स्वाधीनता की शताब्दी से पूर्व ही भारत एक बड़े हिंसक संघर्ष की ओर बढ़ रहा है।
“क्या संविधान प्रदत्त स्वतंत्रता असीमित है? जानें— स्वतंत्रता और स्वेच्छाचारिता के बीच का सूक्ष्म अंतर, और कैसे व्यापार जगत व राजनीति मिलकर भारतीय परिवार तंत्र को नष्ट कर रहे हैं। ‘माय बॉडी माय च्वाइस’ के नारों के पीछे छिपे उपभोक्तावाद और वर्णसंकरता के षड्यंत्र पर एक तीक्ष्ण विश्लेषण।”
“क्या ‘देश-काल-परिस्थिति’ के नाम पर आप भी शास्त्र विरुद्ध कर्म कर रहे हैं? जानें— लोकाचार, कुलाचार और देशाचार का वास्तविक शास्त्रीय अर्थ क्या है और कैसे अज्ञानी लोग इनका दुरुपयोग कर रहे हैं। मनुस्मृति, भविष्य पुराण और याज्ञवल्क्य स्मृति के प्रमाणों के साथ एक तीक्ष्ण विश्लेषण।”