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  • मुहूर्त विचार और पंचाङ्ग: मुहूर्त निर्धारण में योग और करण की उपेक्षा का कड़वा सच
    पंचाङ्ग के पाँच अंगों में से मुहूर्त निर्धारण हेतु योग और करण का विचार क्यों नहीं किया जाता? जानें मुहूर्त चिंतामणि और बृहज्ज्योतिषसार के प्रमाणों के साथ वर्जित योग (व्यतिपात, वैधृति) और भद्रा (विष्टि करण) के त्याग का शास्त्रीय नियम।
  • संशोधित वृषोत्सर्ग पद्धति – वाजसनेयी
    वाजसनेयी संशोधित ‘वैकल्पिक वृषोत्सर्ग पद्धति’। लोकविरुद्ध विसंगति का परिहार करते हुए एकादशाह को पिष्ट, दर्भ या मृत्तिका निर्मित वृष से प्रेतत्व विमुक्ति की प्रामाणिक समन्त्रक विधि।
  • अस्थिविसर्जन प्रयोग
    अस्थिसंचय के पश्चात् अस्थिविसर्जन में एक महत्वपूर्ण कर्त्यव्य होता है क्योंकि गंगा में अस्थि विसर्जन करने से प्रेतत्व का निवारण होता है। यदि दशरात्र के मध्य में हो तो उत्तम पक्ष अन्यथा वर्ष के पश्चात्।
  • अस्थिसंचय प्रयोग
    मैथिल परम्परागत परिष्कृत ‘अस्थिसञ्चय एवं एकोद्दिष्ट पद्धति’। पद्धतिकारों की विसंगतियों का निवारण, पूर्ण अपात्रक दक्षिणा विधि और श्मशान-बलि का प्रामाणिक समन्त्रक प्रयोग।
  • ब्राह्मणों को किस प्रकार दोष से बचना चाहिये ?
    अयाज्य-याजन जनित संसर्ग दोष से ब्राह्मणों की रक्षा का अचूक शास्त्रीय विधान। लघ्वाश्वलायन स्मृति के आलोक में षट्कर्म अनुष्ठान द्वारा मार्जनपरक गंभीर विमर्श।