Headlines
संस्कार विसंगति विमर्श: मुण्डन-मण्डन, प्रवेश-निर्गम के शास्त्रीय नियम और निषेध

संस्कार विसंगति विमर्श: मुण्डन-मण्डन, प्रवेश-निर्गम के शास्त्रीय नियम और निषेध

एक ही कुल या वर्ष में मुण्डन, उपनयन और विवाह जैसे कई संस्कार एक साथ करना क्यों वर्जित है? जानें कात्यायन, वसिष्ठ और नारदपुराण के अनुसार मुण्डन-मण्डन, प्रवेश-निर्गम के नियम, सहोदर निषेध और उनके शास्त्रसम्मत परिहार।

Read More
आर्द्रा नक्षत्र में सूर्य: शास्त्रीय मर्म एवं विशेष विहित-निषिद्ध विचार

आर्द्रा नक्षत्र में सूर्य: शास्त्रीय मर्म एवं विशेष विहित-निषिद्ध विचार

सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश और अम्बुवाची (पृथ्वी का रजस्वला होना) योग। जानें २०२६ की सही तिथियां, निषेध कर्म, आर्द्रा में दूध पीने का महत्व और शिववास परिहार के शास्त्रीय प्रमाण।

Read More
महाजनो येन गतः स पन्थाः कब-कैसे प्रयोग होगा और कहां नहीं

महाजनो येन गतः स पन्थाः कब-कैसे प्रयोग होगा और कहां नहीं

क्या कर्मकांड में “महाजनो येन गतः स पन्थाः” सूक्त का प्रयोग सही है? जानें इस सुप्रसिद्ध पौराणिक वचन का वास्तविक अर्थ, स्वेच्छाचार पर प्रहार, और मैथिल-मैथिलेत्तर पद्धतियों के उत्कृष्ट उदाहरणों के साथ शास्त्रज्ञ आचार्यों की वास्तविक पहचान।

Read More
आत्मज्ञान या दम्भ ?

आत्मज्ञान या दम्भ ?

आत्मज्ञान और आध्यात्मिक दम्भ का प्रामाणिक शास्त्रीय भेद। माहेश्वरतन्त्र, गीता और श्रीमद्भागवत के साक्ष्यों के आधार पर जडभरत प्रसंग और प्रारब्ध-क्षय की कुशल विवेचना।

Read More
घर में यदि पीपल का वृक्ष उग जाये तो क्या करें ?

घर में यदि पीपल का वृक्ष उग जाये तो क्या करें ?

घर, छत या दीवार पर उगे पीपल वृक्ष को हटाने की समन्त्रक शास्त्रोक्त विधि। पण्डित दिगम्बर झा और विद्यागौरव गिरधारी जी महाराज का ‘आपद्धर्म’ के अंतर्गत प्रामाणिक विमर्श और शास्त्रसम्मत विश्लेषण।

Read More
अधिकस्य अधिकं फलं : मूल प्रयोजन और प्रामाणिक शास्त्रीय विस्तार

अधिकस्य अधिकं फलं : मूल प्रयोजन और प्रामाणिक शास्त्रीय विस्तार

कर्मकाण्ड में ‘अधिकस्य अधिकं फलं’ का वास्तविक क्षेत्र और ‘अधिकानि फलाधिकात्’ सूत्र की प्रामाणिक स्थापना। सक्षमों द्वारा विकल्प-चयन के कारण उत्पन्न होने वाले देवद्रोह दोष पर प्रामाणिक विमर्श।

Read More
क्या गीता का ज्ञान भी भ्रमित करने वाला है ?

क्या गीता का ज्ञान भी भ्रमित करने वाला है ?

क्या गीता का ज्ञान भ्रमित करने वाला है? भृतकाध्यापकों की अनर्हता, मन्त्राक्षमता, ‘कर्मणा वर्णव्यवस्था’ के कुतर्क का खण्डन आदि तथ्यों का गंभीर और तीक्ष्ण शास्त्रीय सम्मार्जन।

Read More
अधिकस्य अधिकं फलं और विस्तरो हि विघ्नकरः का द्वन्द

अधिकस्य अधिकं फलं और विस्तरो हि विघ्नकरः का द्वन्द

कर्मकाण्ड में ‘अधिकस्य अधिकं फलं’ के भ्रम का निवारण और ‘विस्तरो हि विघ्नकरः’ सूत्र की प्रामाणिक स्थापना। मनुस्मृति और कालोत्तरम् के साक्ष्यों पर महत्वपूर्ण विमर्श।

Read More
ग्रहशान्ति हवन: मुख्य आहुति द्रव्य, शाकल्य विमर्श और स्वेच्छाचार का खण्डन

ग्रहशान्ति हवन: मुख्य आहुति द्रव्य, शाकल्य विमर्श और स्वेच्छाचार का खण्डन

ग्रहशान्ति हवन में घृत-मधु-दधि युक्त समिधा की प्रधानता, शाकल्य में व्याप्त अशास्त्रीय स्वेच्छाचार का खण्डन और नवग्रहों के विहित मन्त्रों का प्रामाणिक विमर्श।

Read More
"सब ठीक है" में छुपी सबसे बड़ी त्रुटि और मनमुखी उत्तर का दुष्परिणाम

“सब ठीक है” में छुपी सबसे बड़ी त्रुटि और मनमुखी उत्तर का दुष्परिणाम

धार्मिक विसंगतियों में “सब ठीक है” कहने की आत्मघाती भूल, वर्तमान में व्रात्य दोष के शास्त्रीय परिहार और मनमुखी पुरोहिती के भयंकर दुष्परिणामों पर पण्डित दिगम्बर झा का तीक्ष्ण विमर्श।

Read More