देश में सामाजिक प्राणी कहां से आयेगा ?
आधुनिक स्वछंदता, पारिवारिक मूल्यों के विनाश और भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यों पर शासन-व्यवस्था (विधायिका-न्यायपालिका) के कुत्सित हस्तक्षेप।
आधुनिक स्वछंदता, पारिवारिक मूल्यों के विनाश और भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यों पर शासन-व्यवस्था (विधायिका-न्यायपालिका) के कुत्सित हस्तक्षेप।
सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश और अम्बुवाची (पृथ्वी का रजस्वला होना) योग। जानें २०२६ की सही तिथियां, निषेध कर्म, आर्द्रा में दूध पीने का महत्व और शिववास परिहार के शास्त्रीय प्रमाण।
पितृ दिवस (फादर्स डे) और मातृ दिवस (मदर्स डे) के नाम पर फैली वैचारिक दासता का खण्डन। सांवत्सरिक श्राद्ध और महालय पितृपक्ष के शास्त्रोक्त दायित्वों पर को उजागर करने वाला महत्वपूर्ण आलेख।
बलि व्यवस्था पर शास्त्रों का अकाट्य समन्वय और अनधिकारियों के कुतर्कों का खण्डन। श्रीदुर्गासप्तशती और लिङ्गपुराण के आलोक में गंभीर शास्त्रीय विमर्श।
यह आलेख कर्मकांड के क्षेत्र में ‘प्रमाण’ की महत्ता, परिभाषा और उसके व्यावहारिक स्वरूप पर विस्तृत प्रकाश डालता है। इसमें सांख्य, योग, न्याय और मीमांसा जैसे षड्दर्शनों में वर्णित प्रमाणों की तुलना करते हुए यह सिद्ध किया गया है कि कर्मकांड विशुद्ध रूप से ‘शब्द (आप्त) प्रमाण’ पर आधारित है।
कर्मकाण्ड कैसे और कहाँ सीखें? व्यावसायिक कलंकियों के पाखण्ड का खण्डन, योग्य गुरु की पहचान के विशिष्ट शास्त्रीय लक्षण और युगानुकूल मार्गदर्शक विमर्श।
कर्मकाण्ड सीखना सबके लिए अनिवार्य क्यों? यजमान के कर्माधिकार, स्वेच्छाचारी पुरोहितों के भ्रम निवारण और कलश स्थापन की शुद्ध शास्त्रीय विधि पर महत्पूर्ण प्रामाणिक विमर्श।
क्या कर्मकांड में “महाजनो येन गतः स पन्थाः” सूक्त का प्रयोग सही है? जानें इस सुप्रसिद्ध पौराणिक वचन का वास्तविक अर्थ, स्वेच्छाचार पर प्रहार, और मैथिल-मैथिलेत्तर पद्धतियों के उत्कृष्ट उदाहरणों के साथ शास्त्रज्ञ आचार्यों की वास्तविक पहचान।
आत्मज्ञान और आध्यात्मिक दम्भ का प्रामाणिक शास्त्रीय भेद। माहेश्वरतन्त्र, गीता और श्रीमद्भागवत के साक्ष्यों के आधार पर जडभरत प्रसंग और प्रारब्ध-क्षय की कुशल विवेचना।
घर, छत या दीवार पर उगे पीपल वृक्ष को हटाने की समन्त्रक शास्त्रोक्त विधि। पण्डित दिगम्बर झा और विद्यागौरव गिरधारी जी महाराज का ‘आपद्धर्म’ के अंतर्गत प्रामाणिक विमर्श और शास्त्रसम्मत विश्लेषण।