ब्राह्मणों को किस प्रकार दोष से बचना चाहिये ?
अयाज्य-याजन जनित संसर्ग दोष से ब्राह्मणों की रक्षा का अचूक शास्त्रीय विधान। लघ्वाश्वलायन स्मृति के आलोक में षट्कर्म अनुष्ठान द्वारा मार्जनपरक गंभीर विमर्श।
अयाज्य-याजन जनित संसर्ग दोष से ब्राह्मणों की रक्षा का अचूक शास्त्रीय विधान। लघ्वाश्वलायन स्मृति के आलोक में षट्कर्म अनुष्ठान द्वारा मार्जनपरक गंभीर विमर्श।
स्वघोषित महर्षि-ब्रह्मर्षियों के पाखण्ड का तीव्र शास्त्रीय खण्डन। स्कन्दपुराण, वायुपुराण और निरुक्त के आलोक में ऋषित्व के अनिवार्य मापदण्डों पर अभेद्य शास्त्रीय विमर्श।
एक ही कुल या वर्ष में मुण्डन, उपनयन और विवाह जैसे कई संस्कार एक साथ करना क्यों वर्जित है? जानें कात्यायन, वसिष्ठ और नारदपुराण के अनुसार मुण्डन-मण्डन, प्रवेश-निर्गम के नियम, सहोदर निषेध और उनके शास्त्रसम्मत परिहार।
आधुनिक स्वछंदता, पारिवारिक मूल्यों के विनाश और भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यों पर शासन-व्यवस्था (विधायिका-न्यायपालिका) के कुत्सित हस्तक्षेप।
सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश और अम्बुवाची (पृथ्वी का रजस्वला होना) योग। जानें २०२६ की सही तिथियां, निषेध कर्म, आर्द्रा में दूध पीने का महत्व और शिववास परिहार के शास्त्रीय प्रमाण।
पितृ दिवस (फादर्स डे) और मातृ दिवस (मदर्स डे) के नाम पर फैली वैचारिक दासता का खण्डन। सांवत्सरिक श्राद्ध और महालय पितृपक्ष के शास्त्रोक्त दायित्वों पर को उजागर करने वाला महत्वपूर्ण आलेख।
बलि व्यवस्था पर शास्त्रों का अकाट्य समन्वय और अनधिकारियों के कुतर्कों का खण्डन। श्रीदुर्गासप्तशती और लिङ्गपुराण के आलोक में गंभीर शास्त्रीय विमर्श।
यह आलेख कर्मकांड के क्षेत्र में ‘प्रमाण’ की महत्ता, परिभाषा और उसके व्यावहारिक स्वरूप पर विस्तृत प्रकाश डालता है। इसमें सांख्य, योग, न्याय और मीमांसा जैसे षड्दर्शनों में वर्णित प्रमाणों की तुलना करते हुए यह सिद्ध किया गया है कि कर्मकांड विशुद्ध रूप से ‘शब्द (आप्त) प्रमाण’ पर आधारित है।
कर्मकाण्ड कैसे और कहाँ सीखें? व्यावसायिक कलंकियों के पाखण्ड का खण्डन, योग्य गुरु की पहचान के विशिष्ट शास्त्रीय लक्षण और युगानुकूल मार्गदर्शक विमर्श।
कर्मकाण्ड सीखना सबके लिए अनिवार्य क्यों? यजमान के कर्माधिकार, स्वेच्छाचारी पुरोहितों के भ्रम निवारण और कलश स्थापन की शुद्ध शास्त्रीय विधि पर महत्पूर्ण प्रामाणिक विमर्श।