अस्थिविसर्जन प्रयोग
अस्थिसंचय के पश्चात् अस्थिविसर्जन में एक महत्वपूर्ण कर्त्यव्य होता है क्योंकि गंगा में अस्थि विसर्जन करने से प्रेतत्व का निवारण होता है। यदि दशरात्र के मध्य में हो तो उत्तम पक्ष अन्यथा वर्ष के पश्चात्।
अस्थिसंचय के पश्चात् अस्थिविसर्जन में एक महत्वपूर्ण कर्त्यव्य होता है क्योंकि गंगा में अस्थि विसर्जन करने से प्रेतत्व का निवारण होता है। यदि दशरात्र के मध्य में हो तो उत्तम पक्ष अन्यथा वर्ष के पश्चात्।
मैथिल परम्परागत परिष्कृत ‘अस्थिसञ्चय एवं एकोद्दिष्ट पद्धति’। पद्धतिकारों की विसंगतियों का निवारण, पूर्ण अपात्रक दक्षिणा विधि और श्मशान-बलि का प्रामाणिक समन्त्रक प्रयोग।
अशौच (सूतक) काल में अस्थिसञ्चय के समय वेदमन्त्र प्रयोग की प्रामाणिक शास्त्रीय सिद्धि। “तदपि ग्राह्यं” और “त्यागेन लब्धं” सूत्रों के आलोक अन्वेषण और श्रीरामकृत श्राद्ध विमर्श।