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वर वरण विधि | सगुन – sagun | हस्त ग्रहण वाग्दान कैसे करें

वर वरण विधि | सगुन – sagun | हस्त ग्रहण वाग्दान कैसे करें

वर वरण विधि | सगुन – sagun | हस्त ग्रहण वाग्दान कैसे करें ? वाग्दान विधि : अव्यंगेऽपतितेऽक्लीवे दशदोष विवर्जिते । इमां कन्यां प्रदास्यामि देवाग्नि द्विज सन्निधौ ॥ ………. शर्माणं (यथायोग्य) वरं कन्या प्रतिगृहीतृत्वेन त्वामहं वृणे॥

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कैसे बनता है विवाह मुहूर्त ? विवाह संबंधी सभी महत्वपूर्ण जानकारी

कैसे बनता है विवाह मुहूर्त ? विवाह संबंधी सभी महत्वपूर्ण जानकारी

विवाह मुहूर्त – दिन की भांति रात्रि के 15 मुहूर्ताधिपति क्रमशः इस प्रकार होते हैं –  ईश्वर (शिव), अजैकपाद, अहिर्बुध्न्य, पूषा, अश्विनी कुमार, यमराज, अग्नि, ब्रह्मा (धाता), चन्द्रमा, अदिति, बृहस्पति, विष्णु, सूर्य, त्वष्टा, समीरण (वायु) – रात्रौ पंचदशेश्वराज ..

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विवाह क्या है, अर्थ, परिभाषा, प्रकार, उद्देश्य, बाल विवाह आदि की विस्तृत जानकारी – Vivah

विवाह क्या है, अर्थ, परिभाषा, प्रकार, उद्देश्य, बाल विवाह आदि की विस्तृत जानकारी – Vivah

विवाह गार्हस्थ जीवन का द्वार है और सृष्टि को अनवरत रखने में अपनी भूमिका निर्वहन करने के लिये अनिवार्य होता है। विवाह किये बिना किसी व्यक्ति के गृहस्थ आश्रम का प्रारम्भ नहीं होता।

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अर्क विवाह विधि । जानिये अर्क विवाह क्या होता है ? अर्क विवाह पद्धति pdf के साथ

अर्क विवाह विधि । जानिये अर्क विवाह क्या होता है ? अर्क विवाह पद्धति pdf के साथ

ॐ तत्सदद्येति श्रुतिस्मृतिपुराणोक्त फलप्राप्ति पूर्वक करिष्यमाण तृतीय मानुषी विवाह तज्जन्य-वैधव्यादि दोषापनुत्यनन्तर वृद्धि हेतवेऽर्कविवाहमहं करिष्ये । तन्निविघ्नतार्थं च गणपत्यादि देवानहं पूजयिष्ये ॥

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कुम्भ विवाह की विधि – कुम्भ विवाह पद्धति pdf सहित

कुम्भ विवाह की विधि – कुम्भ विवाह पद्धति pdf सहित

कुम्भ विवाह की विधि – कुम्भ विवाह पद्धति pdf सहित : किसी कन्या की कुण्डली में यदि मंगली, वैधव्य आदि दुर्योग हों तो उसके परिहार हेतु कुम्भ विवाह व विष्णु प्रतिमा विवाह का उपाय बताया गया है। इस आलेख में हम कुम्भ विवाह के बारे में जानेंगे साथ ही कुम्भ विवाह की विधि भी जानेंगे ।

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