ब्राह्मणों को किस प्रकार दोष से बचना चाहिये ?
अयाज्य-याजन जनित संसर्ग दोष से ब्राह्मणों की रक्षा का अचूक शास्त्रीय विधान। लघ्वाश्वलायन स्मृति के आलोक में षट्कर्म अनुष्ठान द्वारा मार्जनपरक गंभीर विमर्श।
अयाज्य-याजन जनित संसर्ग दोष से ब्राह्मणों की रक्षा का अचूक शास्त्रीय विधान। लघ्वाश्वलायन स्मृति के आलोक में षट्कर्म अनुष्ठान द्वारा मार्जनपरक गंभीर विमर्श।
यह आलेख कर्मकांड के क्षेत्र में ‘प्रमाण’ की महत्ता, परिभाषा और उसके व्यावहारिक स्वरूप पर विस्तृत प्रकाश डालता है। इसमें सांख्य, योग, न्याय और मीमांसा जैसे षड्दर्शनों में वर्णित प्रमाणों की तुलना करते हुए यह सिद्ध किया गया है कि कर्मकांड विशुद्ध रूप से ‘शब्द (आप्त) प्रमाण’ पर आधारित है।
कर्मकाण्ड कैसे और कहाँ सीखें? व्यावसायिक कलंकियों के पाखण्ड का खण्डन, योग्य गुरु की पहचान के विशिष्ट शास्त्रीय लक्षण और युगानुकूल मार्गदर्शक विमर्श।
कर्मकाण्ड सीखना सबके लिए अनिवार्य क्यों? यजमान के कर्माधिकार, स्वेच्छाचारी पुरोहितों के भ्रम निवारण और कलश स्थापन की शुद्ध शास्त्रीय विधि पर महत्पूर्ण प्रामाणिक विमर्श।