Headlines

अग्निवास विचार – Agnivas Vichar

अग्निवास विचार - Agnivas Vichar अग्निवास विचार - Agnivas Vichar
  • चरण (क) – जिस दिन अग्निवास देखना हो; सबसे पहले तिथि संख्या ज्ञात करें।
  • चरण (ख) – फिर दिन संख्या ज्ञात करें।
  • चरण (ग) – तिथि संख्या और वार संख्या को जोड़कर उसमें पुनः १ (एक) जोड़ें।
  • चरण (घ) – प्राप्तांक में ४ से भाग दें। जो शेष बचे उस संख्या के आधार पर अग्निवास निर्धारित करें।

शेष या तो कुछ भी नहीं अर्थात 0 होगा या १, २, ३ होगा।

  1. यदि 0 या ३ शेष बचे तो भूमि में अग्निवास होता है।
  2. यदि १ शेष बचे तो आकाश में अग्निवास होता है।
  3. यदि २ शेष बचे तो पाताल में अग्निवास होता है।

उदारहण :

  • तिथि संख्या : मकर संक्रांति 2024, 15 जनवरी को पौष शुक्ल पंचमी तिथि है तो उसकी संख्या ५ होगी (यदि कृष्णपक्ष की पंचमी होती तो संख्या ३० होती)।
  • वार संख्या : पुनः मकर संक्रांति 2024, 15 जनवरी को सोमवार है अतः वार संख्या (दिन संख्या) – २ हुयी।
  • अब तिथि संख्या और वार संख्या को जोड़ेंगे तो ५ + २ = ७।
  • इसमें पुनः १ और जोड़ेंगे तो ७ + १ = ८।
  • अब इसमें ४ से भाग देंगे तो ८ / ४ = 0 शेष
  • 0 शेष होने के अनुसार अग्निवास भूमि निर्धारित हुयी।

अग्निवास परिहार

हवन के लिये अग्निवास का विचार तो करना चाहिये लेकिन सभी हवन में अग्निवास का विचार अनिवार्य नहीं होता। अग्निवास के कुछ परिहार भी हैं जहाँ बिना अग्निवास का विचार किये हवन करना चाहिए।

अग्निवास कब नहीं देखना चाहिए

नित्ये नैमित्तिके चैव शान्त्याख्ये वास्तुकर्मणि।
काम्यहोमेषु सर्वेषु नाग्निचक्रं विलोकयेत् ॥

वास्तुशान्त्यां प्रतिष्ठायां शिलान्यासे तथैव च ।
प्रायश्चित्ते तुलादौ च वह्निचक्रं न चिन्तयेत् ॥

दुर्गा होमविधौ विवाहसमये सीमन्तपुत्रोत्सवे,
गर्भाधान विधौ च वास्तुसमये विष्णो: प्रतिष्ठादिषु।
मौञ्जीबन्धन वैश्वदेवकरणे संस्कार नैमित्तिके
होमे नित्यभवे न दोषकथनं चक्रस्य वह्नेरपि ॥

अग्निवास विचार
अग्निवास विचार

नित्य, नैमित्तिक, काम्य, शान्तिक, वास्तु, दुर्गा होम अर्थात नवरात्रा, विवाहादि संस्कार, श्राद्ध (वैश्वदेव होम और वृषोत्सर्ग होम), प्राण-प्रतिष्ठा आदि कर्मों में अग्निवास का विचार न करें।

इसके साथ ही व्रत-उद्यापन, ग्रहण, रुद्राभिषेक, रामार्चा, सत्यनारायण पूजा आदि के हवन हेतु भी अग्निवास विचार की आवश्यकता नहीं होती।

तो फिर अग्निवास का विचार करें कब जबकि अधिकतर सभी कर्मों में विचार करने की आवश्यकता ही नहीं होती।

अग्निवास का विचार मुख्य रूप से यज्ञ, अनुष्ठान आदि पौष्टिक कर्मों के हवन में करना चाहिये। जैसे कई दिनों तक चलने वाला महामृत्युंजय जप, विभिन्न प्रकार के नवाह पारायण, सप्ताह पारायण, मास पारायण आदि और विभिन्न यज्ञों के आरम्भ में अग्निवास का विचार करे।

अब एक प्रश्न पुनः उत्पन्न होता है की अनुष्ठान व पारायणों का तो आरम्भ एक विशेष मुहूर्त के आधार पर होता है और यह आवश्यक नहीं की अंतिम दिन (जिस दिन हवन करना हो) अग्निवास मिले। वैसी स्थिति में सिद्धांततः हवन से १-२ दिन पहले भी जब अग्निवास प्राप्त हो उसी दिन अग्निस्थापन कर ले और वाराहुति, मंडल देवताहुति, अष्टोतरशत प्रधान देवताहुति आदि करके यज्ञवत अग्नि को प्रज्वलित रखे एवं हवन के दिन दशांश होमादि क्रिया करे।

अग्निवास विचार प्राकारान्तर :

सूर्यभात् त्रित्रिभे चान्द्रे सूर्यविच्छुक्रपङ्गवः ।
चन्द्रारेज्यागुशिखिनो नेष्टा होमाहुतिः खले ॥

सूर्य के नक्षत्र से तीन-तीन नक्षत्र क्रम करके सूर्य, बुध, शुक्र, शनि, चन्द्र, मङ्गल, गुरु, राहु और केतु इन ग्रहों के होते हैं, पापग्रह के नक्षत्र में आहुति शुभ नहीं होती है ॥

अग्नि वास चार्ट या अग्निवास चक्र – agnivas chakra

  • यहाँ नीचे अग्नि वास चार्ट अर्थात अग्निवास चक्र दिया गया है जिसके द्वारा आप आसानी से बिना किसी जोड़-घटाव किये किसी भी दिन का अग्निवास निकाल सकते हैं।
  • अग्निवास चक्र से अग्निवास निकालने के लिये आपको तीन बातें ज्ञात रहनी चाहिये – १. पक्ष, २. तिथि और ३. दिन। इसके अतिरिक्त अन्य किसी जानकारी या गणितीय क्रिया की आवश्यकता नहीं होगी।
अग्निवास चक्र
शुक्लपक्ष१२३–
५६७४
९१०११८
१३१४१५१२
कृष्णपक्ष२३–१
६७४५
१०११८९
१४३०१२१३
रविभुविभुविदिविभूतले
सोमभुविदिविभूतलेभुवि
मंगलदिविभूतलेभुविभुवि
बुधभूतलेभुविभुविदिवि
गुरुभुविभुविदिविभूतले
शुक्रभुविदिविभूतलेभुवि
शनिदिविभूतलेभुविभुवि
       अग्नि वास चार्ट

अग्निवास चक्र देखने की विधि :

  • भूमि – धरती पर।
  • भूतले – पाताल में।
  • दिवि – आकाश में।
अग्निवास

कर्मकांड विधि में शास्त्रोक्त प्रमाणों के साथ प्रामाणिक चर्चा की जाती है एवं कई महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा पूर्व भी की जा चुकी है। तथापि सनातनद्रोही उचित तथ्य को जनसामान्य तक पहुंचने में अवरोध उत्पन्न करते हैं। एक बड़ा वैश्विक समूह है जो सनातन विरोध की बातों को प्रचारित करता है। गूगल भी उसी समूह का सहयोग करते पाया जा रहा है अतः जनसामान्य तक उचित बातों को जनसामान्य ही पहुंचा सकता है इसके लिये आपको भी अधिकतम लोगों से साझा करने की आवश्यकता है।

Leave a Reply