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वर्ण व्यवस्था - स्मृति प्रमाण संकलन

वर्ण व्यवस्था – स्मृति प्रमाण संकलन

यह आलेख सनातन धर्म की आधारशिला ‘वर्णाश्रम व्यवस्था’ पर आधारित एक विस्तृत प्रमाण-संग्रह है। इसमें मनुस्मृति, पाराशर स्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति और अत्रि संहिता जैसे प्रामाणिक धर्मग्रंथों के श्लोकों के माध्यम से यह प्रमाणित किया गया है कि वर्ण व्यवस्था जन्मना है। आलेख में उन कुतर्कों का भी खंडन किया गया है जो आधुनिकता के नाम पर शास्त्रीय मर्यादाओं को दूषित कर रहे हैं। यह संकलन जिज्ञासुओं के लिए मार्गदर्शक और अधर्मियों के कुतर्कों के लिए एक अकाट्य वाग्दंड है।

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शास्त्रसम्मत कन्यादान : भ्रांतियां और सत्य - Kanyadan

शास्त्रसम्मत कन्यादान : भ्रांतियां और सत्य – Kanyadan

कन्यादान की शास्त्रीय विधि और अधिकारी का पूर्ण विश्लेषण। क्या माता या मामा कन्यादान कर सकते हैं? रजस्वला कन्या (वृषली) दान का दोष और निवारण। विवाह संस्कार में होने वाली आधुनिक विसंगतियों पर शास्त्रों का प्रामाणिक उत्तर।

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कर्मकांड के महत्वपूर्ण प्रश्न जो कर्मकांडी से पूछें

कर्मकांड के महत्वपूर्ण प्रश्न जो कर्मकांडी से पूछें

“क्या कर्मकांड में बढ़ती अशुद्धता से आप चिंतित हैं? जानें कैसे ‘जिज्ञासा’ और ‘शास्त्रीय प्रश्नों’ के माध्यम से आप अपने पुरोहित को शास्त्रोन्मुख कर सकते हैं। कर्मकांड में सुधार, सामग्री की शुद्धि और योग्य कर्मकांडी की पहचान पर एक विस्तृत मार्गदर्शिका।

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रजस्वला धर्म विमर्श: शास्त्रीय मर्यादा, संसर्ग दोष और कुतर्कों का प्रतिवाद

रजस्वला धर्म विमर्श: शास्त्रीय मर्यादा, संसर्ग दोष और कुतर्कों का प्रतिवाद

रजस्वला धर्म की शास्त्रीय मर्यादा और कड़े नियमों का संपूर्ण प्रमाण संग्रह। जानें मनु, पराशर और अंगिरा स्मृतियों के अनुसार चार दिनों की संज्ञाएँ, संसर्ग दोष और तथाकथित वैज्ञानिक कुतर्कों का प्रामाणिक खंडन।

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अन्न दोष और आध्यात्मिक पतन: स्मृतियों और पुराणों के आलोक में आहार-शुद्धि के सूक्ष्म नियम

अन्न दोष और आध्यात्मिक पतन: स्मृतियों और पुराणों के आलोक में आहार-शुद्धि के सूक्ष्म नियम

“मनु, अंगिरा, पराशर और याज्ञवल्क्य स्मृतियों के प्रमाणों के साथ भक्ष्याभक्ष्य विचार। शूद्रान्न निषेध, वृथा-मांस दोष, लहसुन-प्याज वर्जना और अभक्ष्य भक्षण से मुक्ति हेतु शास्त्रोक्त प्रायश्चित्त विधान का प्रामाणिक संग्रह।

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शास्त्रों में स्पृश्यास्पृश्यता विचार: शुद्धि-मर्यादा, स्पर्श-निषेध और प्रायश्चित्त का संपूर्ण शास्त्रीय प्रमाण संग्रह

शास्त्रों में स्पृश्यास्पृश्यता विचार: शुद्धि-मर्यादा, स्पर्श-निषेध और प्रायश्चित्त का संपूर्ण शास्त्रीय प्रमाण संग्रह

मनु, अत्रि, पराशर, आपस्तम्ब और देवल स्मृतियों के प्रमाणों के साथ स्पृश्यास्पृश्यता (स्पर्श-अस्पर्श) विचार। उच्छिष्ट संस्पर्श, म्लेच्छ संपर्क, रजस्वला स्पर्श दोष, और सार्वभौमिक अपवादों (उत्सव, देवयात्रा) पर एक प्रामाणिक शोध संग्रह।

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संसर्गान्नश्यति तेजः - स्मृतियों और पुराणों के आलोक में संसर्ग दोष एवं कलिकाल के नियम

संसर्गान्नश्यति तेजः – स्मृतियों और पुराणों के आलोक में संसर्ग दोष एवं कलिकाल के नियम

संसर्ग दोष क्या है? जानें मनु, पराशर और देवल स्मृतियों के प्रमाणों के साथ कि कैसे बातचीत, स्पर्श और सह-भोजन से पाप संक्रमित होता है। कलियुग के विशेष नियम ‘कलौ पतति कर्मणा’ पर विस्तृत शास्त्रीय आलेख।

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देश, काल, परिस्थिति, मिथिला व्यवहार, देशाचार, लोकाचार, कुलाचार आदि के दुरुपयोग

देश, काल, परिस्थिति, मिथिला व्यवहार, देशाचार, लोकाचार, कुलाचार आदि के दुरुपयोग

“क्या ‘देश-काल-परिस्थिति’ के नाम पर आप भी शास्त्र विरुद्ध कर्म कर रहे हैं? जानें— लोकाचार, कुलाचार और देशाचार का वास्तविक शास्त्रीय अर्थ क्या है और कैसे अज्ञानी लोग इनका दुरुपयोग कर रहे हैं। मनुस्मृति, भविष्य पुराण और याज्ञवल्क्य स्मृति के प्रमाणों के साथ एक तीक्ष्ण विश्लेषण।”

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कर्मकाण्ड में ग्राह्यग्राह्य ब्राह्मण अर्थात पात्रापात्र विचार - प्रमाण संकलन

कर्मकाण्ड में ग्राह्याग्राह्य ब्राह्मण अर्थात पात्रापात्र विचार – प्रमाण संकलन

धर्म/कर्मकांड में किस ब्राह्मण को ‘पात्र’ माना गया है और किसे ‘अपात्र’? मनुस्मृति, स्कंदपुराण और अत्रि स्मृति के प्रमाणों के साथ ‘योग्यायोग्य ब्राह्मण’ विचार। जानिए वर्तमान युग में शास्त्रोक्त ब्राह्मण के अभाव में क्या है परिहार की विधि।

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शुद्धिकरण अर्थात पवित्रीकरण के प्रमाण

शुद्धिकरण अर्थात पवित्रीकरण के प्रमाण

कर्मकाण्ड के आरम्भ में शुद्धिकरण का महत्व और शास्त्रोक्त क्रम क्या है? आचमन, पवित्री धारण, और शिखा बंधन के प्रामाणिक श्लोकों का संकलन। जानिए क्यों शुद्धिकरण के बिना कोई भी धार्मिक कृत्य निष्फल है।

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