होली कब है 2024 में 25 या 26 मार्च को, होली कैसे मनाया जाता है ?
इस आलेख में हम होली निर्णय को शास्त्रीय प्रमाणों के साथ समझते हुये होली 2024 में कब है इसे जानेंगे। साथ ही होली से सम्बंधित और भी महत्वपूर्ण तथ्यों को समझेंगे।
इस आलेख में हम होली निर्णय को शास्त्रीय प्रमाणों के साथ समझते हुये होली 2024 में कब है इसे जानेंगे। साथ ही होली से सम्बंधित और भी महत्वपूर्ण तथ्यों को समझेंगे।
स्वस्तिवाचन – चारों वेदों का – swastiwachan mantra : इस प्रकार यहां सम्पूर्ण स्वस्तिवाचन मंत्र (यजुर्वेदीय) के साथ-साथ ऋग्वेद स्वस्तिवाचन, सामवेद का स्वस्तिवाचन और अथर्ववेद का स्वस्तिवाचन भी संकलित किया गया जो बहुत सारे लोगों के लिये उपयोगी सिद्ध होगा।
सत्तालोलुप समूह, षड्यंत्रकारी आदि अपने ही कुतर्कों के जाल में किस प्रकार फंसते हैं इसे इस प्रकार से समझा जा सकता है : आज के समय में वर्णव्यवस्था का महत्व नहीं है ।
सम्पूर्ण कर्मकांड में पवित्रीकरण अर्थात शुद्धिकरण की सर्वप्रथम आवश्यकता होती है। चाहे पूजा स्थल की बात हो, पूजा सामग्री की बात हो अथवा शारीरिक या मानसिक शुद्धि का विषय हो, प्रत्येक कर्म का आरम्भ पवित्रीकरण से ही होता है। इस आलेख में पवित्रीकरण की संपूर्ण विधि बताई गयी है जो अत्यंत उपयोगी विषय है।
दाह संस्कार के अतिरिक्त सभी संस्कारों में नान्दीमुख श्राद्ध किया जाता है। इसके साथ ही यज्ञ, प्राण-प्रतिष्ठा आदि कर्मों में नान्दीश्राद्ध आवश्यक होता है। लेकिन जिस प्रकार पवित्रीकरण, संकल्प, सम्पूर्ण कर्मकाण्ड का अनिवार्य प्रारंभिक अंग होता है उस प्रकार से सभी कर्मों में अनिवार्य नहीं होता। जिस प्रकार कलश स्थापन सभी पूजा पाठ में आवश्यक होता है उस प्रकार से नान्दी श्राद्ध सभी शुभ कर्मों में अनिवार्य नहीं है। जैसे सत्यनारायण पूजा करनी हो तो नान्दी श्राद्ध आवश्यक नहीं है।
दुर्गा मानस पूजा अर्थ सहित – durga manas puja : मानस पूजा उत्तम प्रकार है। अपने इष्ट का मन में ध्यान करके उनके मानस पूजा स्तोत्र का पाठ करते हुये मन में ही पूजा के विभिन्न दिव्य उपचारों (आसन, पाद्य, अर्घ्य आदि) की कल्पना करके अर्पित की जाती है। मानस पूजा में किसी वस्तु की नहीं केवल भाव की आवश्यकता होती है।
जिनके जीवन में असफलता, विवादादि में पराजय, अपयश की प्राप्ति, शत्रुओं से परेशानी, विवाह में विलम्ब इत्यादि अनेक प्रकार की समस्यायें होती हैं उनके लिये नित्य अर्गला स्तोत्र का पाठ करना विशेष लाभकारी होता है। अर्गला स्तोत्र के पाठ से पहले यदि कवच का पाठ भी किया जाय तो विशेष फल की प्राप्ति होती है।
सब मम प्रिय सब मम उपजाये – ये भगवान राम का कथन है और इसे किसी प्रकार से नकारा नहीं जा सकता कि सारी सृष्टि ईश्वर की ही कृति है। इस अध्याय में हम बलि जिसे प्रथा कहा जाने लगा है और एक अभिशाप सिद्ध किया जा रहा है इसकी उपादेयता, प्रमाणिकता आदि की चर्चा करेंगे।
सबसे बड़े भगवान के बारे में निर्णय करना अत्यंत कठिन है और अपराध भी है, किन्तु स्वयं के लिये सबसे बड़े भगवान के बारे में जानना अत्यंत सरल है। इस विषय को गंभीरतापूर्वक चिंतन करने, बार-बार विचार करने पर ही समझा जा सकता है केवल एक बार इस अध्याय को पढ़ लेने से नहीं समझा जा सकता।
वर्षों से चल रहे ज्ञानवापी प्रकरण का सर्वे रिपोर्ट न्यायालय के आदेश से 25 जनवरी 2024 को सार्वजनिक की जा चुकी है। सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद कई महत्वपूर्ण बातें सामने आयी है। सनातनियों का दृढ विश्वास की ज्ञानवापी ही भगवान विश्वनाथ का वास्तविक मंदिर है यह और पुष्ट हो गया है।