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अपात्रक श्राद्ध का आरंभ कब हुआ?

अपात्रक श्राद्ध का आरंभ कब हुआ?

अपात्रक श्राद्ध और मासिक श्राद्ध के अपकर्षण का ऐतिहासिक प्रारंभ कब हुआ? महामहोपाध्याय रुद्रधर झा और वाचस्पति मिश्र के प्रमाणों के साथ पंडित दिगम्बर झा का शास्त्रीय विमर्श और अधिकार सिद्धि।

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सिद्धं सुसिद्धं श्राद्धं - siddham susiddham shraddham

सिद्धं सुसिद्धं श्राद्धं – siddham susiddham shraddham

संशोधित श्राद्ध पद्धति “सिद्धं सुसिद्धं श्राद्धं” ग्रंथ की प्रामाणिक प्रस्तावना एवं भूमिका। जानें क्यों कर्मकांड में शास्त्रीय संशोधन अनिवार्य है और ‘मूर्खाचार्यों’ के दुराग्रहों का शास्त्रसम्मत समाधान क्या है।

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गांठ बांध लो आध्यात्मिक उन्नति का मूल चरणसेवा है

गांठ बांध लो आध्यात्मिक उन्नति का मूल चरणसेवा है

क्या धार्मिक प्रदर्शन और आडंबर से आत्मकल्याण संभव है? जानें क्यों कलियुग में केवल ‘चरणसेवा’ ही आध्यात्मिक उन्नति का एकमात्र आधार है। शास्त्र सम्मत प्रमाणों के साथ गुरु, विप्र और माता-पिता की सेवा का वास्तविक महत्व।

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आत्मपरिचय और ब्रह्मसूत्रम्

आत्मकथा और ब्रह्मसूत्रम्

जानें केवल गुरुजनों की सेवा मात्र से शास्त्रीय दृष्टि और ईश्वर की कृपा कैसे प्राप्त होती है। कर्मकांड की शुद्धता और गुरु भक्ति पर विशेष लेख।

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धर्म के नाम पर हम ठगी का शिकार क्यों बन जाते हैं ?

धर्म के नाम पर हम ठग के शिकार क्यों बन जाते हैं ?

क्या आप भी धर्म और कर्मकांड के नाम पर ठगी का शिकार महसूस करते हैं? यह आलेख स्पष्ट करता है कि कैसे हमारी अपनी अज्ञानता और शास्त्र-विरुद्ध आचरण हमें ठगी की ओर धकेलते हैं। जानें, क्यों योग्य गुरु और शुद्ध पूजन सामग्री न मिलना हमारे अपने पापों का परिणाम है।

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कुलटूट (पीढ़ी कटाना) : शास्त्रीय पक्ष क्या है ?

कुलटूट (पीढ़ी कटाना) : शास्त्रीय पक्ष क्या है ?

यह आलेख ‘कुलटूट’ (पीढ़ी अलग करना) की शास्त्रीय प्रक्रिया और अशौच के सूक्ष्म नियमों का विस्तृत विश्लेषण करता है। इसमें मनुस्मृति, मत्स्यपुराण, कूर्मपुराण और मिताक्षरा जैसे प्रामाणिक ग्रंथों के आधार पर यह सिद्ध किया गया है कि सापिण्ड्य ७ पीढ़ियों तक अक्षुण्ण रहता है। आलेख में ‘शास्त्रदस्युओं’ (अल्पज्ञ पंडितों) द्वारा फैलाई गई भ्रांतियों का खंडन करते हुए सपिण्ड (१-७ पीढ़ी), सोदक/सकुल्य (८-१४ पीढ़ी) और सगोत्र (१५-२१ पीढ़ी) के बीच के अंतर और उनके लिए निर्धारित अशौच काल की स्पष्ट व्याख्या की गई है।

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अधिकमास में श्राद्ध का सप्रमाण विचार

अधिकमास में श्राद्ध का सप्रमाण विचार

यह शोधपरक आलेख अधिकमास (मलमास/पुरुषोत्तम मास) के दौरान होने वाले श्राद्ध विधानों पर विस्तृत प्रकाश डालता है। इसमें विशेष रूप से ‘षोडश बनाम सप्तदश’ श्राद्ध के विवाद, एकादशमासाभ्यन्तरे की व्याकरणिक मीमांसा और संवत्सर २०८२-२०८३ के पंचांगीय गणित के माध्यम से यह समझाया गया है कि किस माह के मृतक का श्राद्ध अधिकमास में होगा और किसका नहीं।

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धर्म निर्णय और पर्षद - प्रमाण संकलन

धर्म निर्णय और पर्षद – प्रमाण संकलन

धर्म निर्णय और पर्षद विधान का प्रामाणिक विश्लेषण। जानें क्यों न्यायाधीश, नेता और कथावाचक धर्म-निर्णय के अधिकारी नहीं हैं? स्मृतियों के अनुसार ‘पर्षद’ का गठन, योग्य ब्राह्मण की पहचान और शास्त्र-विरुद्ध ‘लोकाचार’ का खंडन। धर्म संशय निवारण हेतु एक विस्तृत शोधपत्र।

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धर्म निर्णय

धर्म निर्णय

धर्म का निर्णय कौन करे और कैसे? जानें शास्त्रसम्मत धर्म-निर्णय की प्रक्रिया, विद्वान ब्राह्मण के वचन का महत्व और अदृष्ट निर्णय से उत्पन्न होने वाले ब्रह्मघात दोष का समाधान। क्या वर्तमान कथावाचक धर्म निर्णय के अधिकारी हैं? एक विस्तृत शास्त्रीय विश्लेषण।

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जाति व्यवस्था कहां से आई - स्मृति प्रमाण संकलन

जाति व्यवस्था कहां से आई – स्मृति प्रमाण संकलन

यह आलेख जाति व्यवस्था की शास्त्रीय और ऐतिहासिक जड़ों पर एक गंभीर शोधपूर्ण संकलन है। इसमें मनुस्मृति, औशनस स्मृति, वशिष्ठ स्मृति और याज्ञवल्क्य स्मृति जैसे ग्रंथों के माध्यम से यह प्रमाणित किया गया है कि विभिन्न जातियों की उत्पत्ति वर्णों के मिश्रण और विशिष्ट संस्कारों से हुई है। यह आलेख उन भ्रामक दावों का खंडन करता है जो जाति व्यवस्था को अंग्रेजों की देन बताते हैं। यह संकलन उन पाठकों के लिए है जो भारतीय समाज के वास्तविक सांस्कृतिक और सामाजिक ढांचे को मूल शास्त्रों के चश्मे से देखना चाहते हैं।

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