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कुलटूट (पीढ़ी कटाना) : शास्त्रीय पक्ष क्या है ?

कुलटूट (पीढ़ी कटाना) : शास्त्रीय पक्ष क्या है ?

यह आलेख ‘कुलटूट’ (पीढ़ी अलग करना) की शास्त्रीय प्रक्रिया और अशौच के सूक्ष्म नियमों का विस्तृत विश्लेषण करता है। इसमें मनुस्मृति, मत्स्यपुराण, कूर्मपुराण और मिताक्षरा जैसे प्रामाणिक ग्रंथों के आधार पर यह सिद्ध किया गया है कि सापिण्ड्य ७ पीढ़ियों तक अक्षुण्ण रहता है। आलेख में ‘शास्त्रदस्युओं’ (अल्पज्ञ पंडितों) द्वारा फैलाई गई भ्रांतियों का खंडन करते हुए सपिण्ड (१-७ पीढ़ी), सोदक/सकुल्य (८-१४ पीढ़ी) और सगोत्र (१५-२१ पीढ़ी) के बीच के अंतर और उनके लिए निर्धारित अशौच काल की स्पष्ट व्याख्या की गई है।

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अधिकमास में श्राद्ध का सप्रमाण विचार

अधिकमास में श्राद्ध का सप्रमाण विचार

यह शोधपरक आलेख अधिकमास (मलमास/पुरुषोत्तम मास) के दौरान होने वाले श्राद्ध विधानों पर विस्तृत प्रकाश डालता है। इसमें विशेष रूप से ‘षोडश बनाम सप्तदश’ श्राद्ध के विवाद, एकादशमासाभ्यन्तरे की व्याकरणिक मीमांसा और संवत्सर २०८२-२०८३ के पंचांगीय गणित के माध्यम से यह समझाया गया है कि किस माह के मृतक का श्राद्ध अधिकमास में होगा और किसका नहीं।

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धर्म निर्णय और पर्षद - प्रमाण संकलन

धर्म निर्णय और पर्षद – प्रमाण संकलन

धर्म निर्णय और पर्षद विधान का प्रामाणिक विश्लेषण। जानें क्यों न्यायाधीश, नेता और कथावाचक धर्म-निर्णय के अधिकारी नहीं हैं? स्मृतियों के अनुसार ‘पर्षद’ का गठन, योग्य ब्राह्मण की पहचान और शास्त्र-विरुद्ध ‘लोकाचार’ का खंडन। धर्म संशय निवारण हेतु एक विस्तृत शोधपत्र।

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धर्म निर्णय

धर्म निर्णय

धर्म का निर्णय कौन करे और कैसे? जानें शास्त्रसम्मत धर्म-निर्णय की प्रक्रिया, विद्वान ब्राह्मण के वचन का महत्व और अदृष्ट निर्णय से उत्पन्न होने वाले ब्रह्मघात दोष का समाधान। क्या वर्तमान कथावाचक धर्म निर्णय के अधिकारी हैं? एक विस्तृत शास्त्रीय विश्लेषण।

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जाति व्यवस्था कहां से आई - स्मृति प्रमाण संकलन

जाति व्यवस्था कहां से आई – स्मृति प्रमाण संकलन

यह आलेख जाति व्यवस्था की शास्त्रीय और ऐतिहासिक जड़ों पर एक गंभीर शोधपूर्ण संकलन है। इसमें मनुस्मृति, औशनस स्मृति, वशिष्ठ स्मृति और याज्ञवल्क्य स्मृति जैसे ग्रंथों के माध्यम से यह प्रमाणित किया गया है कि विभिन्न जातियों की उत्पत्ति वर्णों के मिश्रण और विशिष्ट संस्कारों से हुई है। यह आलेख उन भ्रामक दावों का खंडन करता है जो जाति व्यवस्था को अंग्रेजों की देन बताते हैं। यह संकलन उन पाठकों के लिए है जो भारतीय समाज के वास्तविक सांस्कृतिक और सामाजिक ढांचे को मूल शास्त्रों के चश्मे से देखना चाहते हैं।

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वर्ण व्यवस्था - स्मृति प्रमाण संकलन

वर्ण व्यवस्था – स्मृति प्रमाण संकलन

यह आलेख सनातन धर्म की आधारशिला ‘वर्णाश्रम व्यवस्था’ पर आधारित एक विस्तृत प्रमाण-संग्रह है। इसमें मनुस्मृति, पाराशर स्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति और अत्रि संहिता जैसे प्रामाणिक धर्मग्रंथों के श्लोकों के माध्यम से यह प्रमाणित किया गया है कि वर्ण व्यवस्था जन्मना है। आलेख में उन कुतर्कों का भी खंडन किया गया है जो आधुनिकता के नाम पर शास्त्रीय मर्यादाओं को दूषित कर रहे हैं। यह संकलन जिज्ञासुओं के लिए मार्गदर्शक और अधर्मियों के कुतर्कों के लिए एक अकाट्य वाग्दंड है।

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शास्त्रसम्मत कन्यादान : भ्रांतियां और सत्य - Kanyadan

शास्त्रसम्मत कन्यादान : भ्रांतियां और सत्य – Kanyadan

कन्यादान की शास्त्रीय विधि और अधिकारी का पूर्ण विश्लेषण। क्या माता या मामा कन्यादान कर सकते हैं? रजस्वला कन्या (वृषली) दान का दोष और निवारण। विवाह संस्कार में होने वाली आधुनिक विसंगतियों पर शास्त्रों का प्रामाणिक उत्तर।

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कर्मकांड के महत्वपूर्ण प्रश्न जो कर्मकांडी से पूछें

कर्मकांड के महत्वपूर्ण प्रश्न जो कर्मकांडी से पूछें

“क्या कर्मकांड में बढ़ती अशुद्धता से आप चिंतित हैं? जानें कैसे ‘जिज्ञासा’ और ‘शास्त्रीय प्रश्नों’ के माध्यम से आप अपने पुरोहित को शास्त्रोन्मुख कर सकते हैं। कर्मकांड में सुधार, सामग्री की शुद्धि और योग्य कर्मकांडी की पहचान पर एक विस्तृत मार्गदर्शिका।

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देश, काल, परिस्थिति, मिथिला व्यवहार, देशाचार, लोकाचार, कुलाचार आदि के दुरुपयोग

देश, काल, परिस्थिति, मिथिला व्यवहार, देशाचार, लोकाचार, कुलाचार आदि के दुरुपयोग

“क्या ‘देश-काल-परिस्थिति’ के नाम पर आप भी शास्त्र विरुद्ध कर्म कर रहे हैं? जानें— लोकाचार, कुलाचार और देशाचार का वास्तविक शास्त्रीय अर्थ क्या है और कैसे अज्ञानी लोग इनका दुरुपयोग कर रहे हैं। मनुस्मृति, भविष्य पुराण और याज्ञवल्क्य स्मृति के प्रमाणों के साथ एक तीक्ष्ण विश्लेषण।”

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कर्मकाण्ड में ग्राह्यग्राह्य ब्राह्मण अर्थात पात्रापात्र विचार - प्रमाण संकलन

कर्मकाण्ड में ग्राह्याग्राह्य ब्राह्मण अर्थात पात्रापात्र विचार – प्रमाण संकलन

धर्म/कर्मकांड में किस ब्राह्मण को ‘पात्र’ माना गया है और किसे ‘अपात्र’? मनुस्मृति, स्कंदपुराण और अत्रि स्मृति के प्रमाणों के साथ ‘योग्यायोग्य ब्राह्मण’ विचार। जानिए वर्तमान युग में शास्त्रोक्त ब्राह्मण के अभाव में क्या है परिहार की विधि।

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