Headlines
धर्म का त्याग कब कर सकते हैं ?

धर्म का त्याग कब कर सकते हैं ?

लोकविरुद्ध होने पर धर्म के त्याग की छूट का तात्पर्य अधर्म या शास्त्रविरुद्ध करने की छूट नहीं है। “यद्यपि शुद्धं लोक विरुद्धम्। नाऽचरणीयं नाऽचरणीयं” का अर्थ यद्यपि शुद्ध हो अर्थात सही हो किन्तु लोक विरुद्ध हो अर्थात हानिकारक हो या हानि संभावित हो तो वह वैसा आचरण मत करो वह कर्म मत करो।

Read More