श्री राम नवमी व्रत कथा – ram navami vrat vidhi
श्री रामनवमी व्रत से जितना पुण्य प्राप्त होता है उतना पुण्य कठिन तपस्या करने से भी प्राप्त नहीं होता। श्री रामनवमी व्रत से जितना पुण्य प्राप्त होता है उतना पुण्य पूरी पृथ्वी दान करने से भी नहीं होता।
श्री रामनवमी व्रत से जितना पुण्य प्राप्त होता है उतना पुण्य कठिन तपस्या करने से भी प्राप्त नहीं होता। श्री रामनवमी व्रत से जितना पुण्य प्राप्त होता है उतना पुण्य पूरी पृथ्वी दान करने से भी नहीं होता।
कुलकोटि समुद्धरण पूर्वक भूरिदक्षिणानेकयज्ञ जन्यफल समफल दुष्करानेकतपोजन्यफल समफल द्वारकाधिकरण कपिलगवी कोटि दानजन्यफल समफल धरादानजन्यफल समफल बहुजन्मार्जितैकाददश्युपवास जन्य फल समफल प्राप्तिपूर्वकाऽनन्तकालिक विष्णु लोकमहितत्व कामनया साङ्गसायुधसपरिवार श्रीरामचन्द्रपूजनमहं करिष्ये ॥
Ram navami : रामनवमी कब है 2025 में – रामनवमी कब मनाई जाती है, रामनवमी क्यों मनाई जाती है : रामनवमी 2025 : वर्ष 2025 में रविवार 6 अप्रैल को चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की औदयिक नवमी है जो 7:22 pm तक है अर्थात मध्याह्न व्यापिनी है अतः वर्ष 2025 में रामनवमी 6 अप्रैल रविवार को रामनवमी है। इस दिन पुनर्वसु नक्षत्र उपलब्ध नहीं है।
वर्ष में चार नवरात्रायें होती हैं जो आश्विन, माघ, चैत्र और आषाढ मासों के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी दिन तक का होता है। इस आलेख में नवरात्रा 2024 के विषय में पूरी जानकारी दी गयी है, इसके साथ ही नवरात्रा के महत्व, नवरात्रा व्रत के नियम, नवरात्रा की कथा आदि के बारे में भी चर्चा की गयी है।
इस आलेख में हम होली निर्णय को शास्त्रीय प्रमाणों के साथ समझते हुये होली 2024 में कब है इसे जानेंगे। साथ ही होली से सम्बंधित और भी महत्वपूर्ण तथ्यों को समझेंगे।
होलिका दहन मंत्र और विधि – holika dahan kab hai : होलिका दहन मात्र एक परम्परा नहीं है। होलिका दहन की विधि एवं मंत्रों का उल्लेख शास्त्रों में हैं। होलिका दहन मुहूर्त के लिये कई विशेष नियम भी है। इस आलेख में हम होलिका दहन विधि और मंत्रों को समझेंगे।
होलिका दहन कब है 2025 – Holika Dahan : होलिका पौर्णमासी तु सायाह्न व्यापिनी मता । भूतविद्धे न कर्तव्ये दर्शपूर्णे कदाचन ॥ ब्रह्मवैवर्त पुराण – सबसे पहला प्रमाण यह है कि होलिका दहन सायं काल में उपलब्ध पूर्णिमा को करना चाहिये अर्थात् सायं काल को कर्मकाल बताया जा रहा है यह प्रमाण ब्रह्मपुराण का है।
शत सृष्टि तांडव रचयिता, नटराज राज नमो नमः ।
हे आद्य गुरु शंकर पिता, नटराज राज नमो नमः ॥
शिव ताण्डव स्तोत्र रावण रचित एक प्रसिद्ध स्तोत्र है। नित्य शिव ताण्डव स्तोत्र का पाठ करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। इस आलेख में अर्थ सहित शिव ताण्डव स्तोत्र दिया गया है। शिव ताण्डव स्तोत्र के दो प्रकार पाये जाते हैं –
रुद्राष्टक स्तोत्र गोस्वामी तुलसीदास के रामचरितमानस के उत्तरकाण्ड में वर्णित है। इस स्तोत्र का भक्ति पूर्वक पाठ करने से भगवान शिव शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं। इस आलेख में रुद्राष्टक स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है साथ ही विशेष लाभ हेतु हिन्दी अर्थ भी दिया गया है।