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संशोधित सांवत्सरिक एकोद्दिष्ट अर्थात वार्षिक श्राद्ध - वाजसनेयी

संशोधित सांवत्सरिक एकोद्दिष्ट अर्थात वार्षिक श्राद्ध – वाजसनेयी

वाजसनेयी संशोधित ‘सांवत्सरिक (वार्षिक) श्राद्ध विधि’। जानें क्यों वार्षिक श्राद्ध में महापात्र का प्रवेश वर्जित है और स्वभूमि में भूस्वामि भाग का निषेध क्यों है। प्रामाणिक मंत्रों सहित क्षयाह श्राद्ध विमर्श।

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संशोधित मासिक श्राद्ध विधि - वाजसनेयी

संशोधित अपात्रक मासिक श्राद्ध विधि – वाजसनेयी

वाजसनेयी संशोधित ‘अपात्रक मासिक श्राद्ध विधि’: जानें क्यों १४ मासिक श्राद्ध पृथक के बजाय ‘तंत्र’ विधि से करने चाहिए। अर्घ्य, पिण्डदान और अक्षय्योदक के सूक्ष्म नियमों का शास्त्रीय विश्लेषण।

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संशोधित आद्य श्राद्ध विधि - वाजसनेयी

संशोधित आद्य श्राद्ध विधि – वाजसनेयी

मैथिल वाजसनेयी परम्परा के अनुसार संशोधित ‘एकादशाह (आद्य) श्राद्ध विधि’। जानें पञ्चदान, अपात्रक श्राद्ध के नियम और शास्त्रीय संशोधन जो कर्मकांड की शुद्धता सुनिश्चित करते हैं।

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छन्दोगी त्रिपिंडी श्राद्ध विधि – पितृदोष शांति के उपाय

त्रिपिंडी श्राद्ध पद्धति – छन्दोगी प्रेतश्राद्ध बहुवचन प्रयोग पूर्वक – प्रेत बाधा निवारण के उपाय

जिन घरों में श्राद्ध सही विधि से नहीं किया जाता उनके पितर अतृप्त होकर कुपित हो जाते हैं। किसी भी प्रकार से यदि पितृ दोष ज्ञात हो तो त्रिपिंडी श्राद्ध करना चाहिये। जब प्रेत बाधा हो और किसी प्रकार से शांत न हो रही हो तो उस स्थिति में त्रिपिण्डी श्राद्ध करना चाहिये।

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त्रिपिंडी श्राद्ध pdf सहित – विधि और मंत्र, पितृदोष शांति के उपाय

त्रिपिंडी श्राद्ध विधि – वाजसनेयी प्रेतश्राद्ध बहुवचन प्रयोग पूर्वक – प्रेत बाधा से मुक्ति के उपाय

प्रेत बाधा से मुक्ति के उपाय में त्रिपिण्डी श्राद्ध का प्रमुख स्थान आता है। अज्ञात नामगोत्र वाले प्रेत के लिये अज्ञात नामगोत्र से सात्विक, राजसिक और तामसिक प्रेत कहकर बहुवचन में श्राद्ध किया जाता है।

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त्रिपिंडी श्राद्ध pdf सहित – विधि और मंत्र, पितृदोष शांति के उपाय

त्रिपिंडी श्राद्ध pdf सहित – विधि और मंत्र, पितृदोष शांति के उपाय

जिन घरों में श्राद्ध सही विधि से नहीं किया जाता उनके पितर अतृप्त होकर कुपित हो जाते हैं। किसी भी प्रकार से यदि पितृ दोष ज्ञात हो तो त्रिपिंडी श्राद्ध करना चाहिये। जब प्रेत बाधा हो और किसी प्रकार से शांत न हो रही हो तो उस स्थिति में त्रिपिण्डी श्राद्ध करना चाहिये।

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एकादशाह श्राद्ध विधि pdf – सहित | shraddh vidhi | वाजसनेयी

एकादशाह श्राद्ध विधि pdf – सहित | shraddh vidhi | वाजसनेयी – 11 Shraddh

एकादशाह श्राद्ध विधि pdf : हम प्रेत श्राद्ध की बात करते हैं तो वर्त्तमान में उसका तात्पर्य दो-दिवसीय एकादशाह और द्वादशाह श्राद्ध से होता है। इसे षोडश श्राद्ध भी कहा जाता है

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जानिये 16 श्राद्ध में क्या करना चाहिए ? षोडश श्राद्ध विधि – shraddh karm

जानिये 16 श्राद्ध में क्या करना चाहिए ? षोडश श्राद्ध विधि – shraddh karm

shraddh karm : षोडशी श्राद्ध विधि उसकी क्रियाओं, श्राद्ध देश, श्राद्ध के अधिकारी, पात्र, सपात्रक और अपात्रक श्राद्ध, श्राद्ध में क्या करना चाहिए आदि की विस्तृत चर्चा की गयी है जो की श्राद्ध में आस्था रखने वालों के लिये विशेष उपयोगी है।

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