उपनयन संस्कार मुहूर्त 2024
उपनयन संस्कार मुहूर्त 2024 – उपनयन संस्कार मुहूर्त से मुख्य तात्पर्य उपनयन संस्कार ही होता है, किन्तु उपनयन संस्कार मुहूर्त में ही उपनयन के साथ मुंडन, वेदारम्भ और समावर्तन भी किये जाते हैं।
उपनयन संस्कार मुहूर्त 2024 – उपनयन संस्कार मुहूर्त से मुख्य तात्पर्य उपनयन संस्कार ही होता है, किन्तु उपनयन संस्कार मुहूर्त में ही उपनयन के साथ मुंडन, वेदारम्भ और समावर्तन भी किये जाते हैं।
मुंडन संस्कार मुहूर्त 2024 –
8 जुलाई 2024, सोमवार, आषाढ़ शुक्ल तृतीया, नक्षत्र पुष्य 6:02 am तक।
12 जुलाई 2024, शुक्रवार, आषाढ़ शुक्ल (षष्ठी) सप्तमी में 12:32 pm से, नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी और हस्त दोनों प्रशस्त।
हेमाद्रि संकल्प बृहद् होने के कारण सामान्यतः प्रयोग नहीं किया जाता है किन्तु, प्रयास करना चाहिये। इसमें भारत का विशद विवरण किया गया है और जो लोग भारत को किसी मुगल या आक्रमणकारी से जोड़कर सिद्ध करने का प्रयास करते हैं उनको इसका विशेष रूप से अध्ययन करना चाहये।
समावर्तन संस्कार – सामान्य जन एक ही दिन में उपनयन के उपरान्त प्रतीकात्मक रूप से वेदारम्भ और पारायणरहित ही समावर्तन करते हैं।
वेदारम्भ संस्कार – वेदाध्ययन का मूल स्वरूप गुरुकुल में आचार्य से दीक्षित होकर ब्रह्मचर्यधारण पूर्वक सभी नियमों का पालन करते हुये वेदाध्ययन करना है। सामान्य जनों की वेदाध्ययन से निवृत्ति हो गयी है।
उपनयन संस्कार (upnayan sanskar) – उपनयन के द्वारा इन तीनों वर्णों का नया जीवन आरम्भ होता है जिसमें गायत्री, वेद, यज्ञ आदि का अधिकार प्राप्त होता है। उपनयन होने के बाद ही उपनीत को श्रौत और स्मार्त कर्म का अधिकार प्राप्त होता है।
मुंडन संस्कार – विशेष विधि से केशाधिवासन पूर्वक संस्कार की प्रक्रिया से हवनादि करके प्रथम बार मुंडन किया जाता है तो वह चूडाकरण कहा जाता है।
उपनयन संस्कार विधि – यद्यपि उपनयन एक ही संस्कार है तथापि युगव्यवस्था से उपनयन में एक साथ 4 संस्कार सम्पन्न किया जाता है :- चूडाकरण, उपनयन, वेदारंभ व समावर्तन ।
हनीमून क्या होता है : हनीमून – “वास्तविक भारतीय वो नहीं है जिसनें भारत में जन्म लिया है, वास्तविक भारतीय वो है जिसके विचार भी भारतीय हैं, आलेख को समझने हेतु भारतीय विचार होना अनिवार्य है”
विवाह मुहूर्त 2024 – 2024 के विभिन्न महीनो में प्राप्त सभी शुद्ध विवाह मुहूर्त दिये गए हैं। यहां जो विवाह मुहूर्त या विवाह दिन दिया गया है वह गौणकाल का विचार करके ही दिया गया है। गौणकाल से तात्पर्य है न्यूनतम शुद्धाशुद्ध काल, मास, पक्ष, तिथि, नक्षत्र, वार का विचार।