देव स्नपन – प्राण प्रतिष्ठा विधि
प्रतिमा निर्माण, प्रतिमा निर्माण में मुहूर्त दोष, प्रतिमा निर्माण में हुई जीवहत्या, अनुक्तमंत्र प्रयोग, स्पृष्य दोष, स्थान दोष आदि अनेक दोषों के निवारण हेतु स्नपन अनिवार्य होता है।
प्रतिमा निर्माण, प्रतिमा निर्माण में मुहूर्त दोष, प्रतिमा निर्माण में हुई जीवहत्या, अनुक्तमंत्र प्रयोग, स्पृष्य दोष, स्थान दोष आदि अनेक दोषों के निवारण हेतु स्नपन अनिवार्य होता है।
इस आलेख में मंदिरों में शिखर की अनिवार्यता से सम्बंधित एक नये विषय के प्रकट होने की चर्चा कि गयी है, जो देश के लाखों राम और कृष्ण मंदिरों (ठाकुरवारियों) के सन्दर्भ में विचारणीय है।
कर्मकांड विधि का इस आलेख में मात्र इतना उद्देश्य है कि देशभर के श्रद्धालु रामभक्तों के मन में जो संशय उत्पन्न करने का प्रयास किया जा रहा है उसका निस्तारण हो सके। प्रलाप करने वालों के लिये समय नष्ट करना भी अनावश्यक है। प्रलाप करने वालों के लिये गोस्वामी तुलसीदास की सर्वोत्तम चौपाई जो उन्हें सचेत करती है वह है : संकर सहस विष्णु अज तोहिं । सकहिं न राखि राम कर द्रोही॥
संकल्प मंत्र : ॐ अद्यादि ……………………… प्रतिष्ठाङ्गगत्वेन प्रतिमासंशुद्ध्यर्थं ममगृहे प्रचुरधान्यपुत्र-पौत्रादिसुखसम्पत्यादि अभिवृद्धयर्थं फलाधिवासं करिष्ये ॥
इस आलेख में सभी मुख्य प्रश्नों के उत्तर समाहित किया जा रहा है जिससे श्रद्धालुओं को संशय न रहे। इस विषय में उमाशंकर पांडेय (येन केन प्रकारेण शंकराचार्य) के द्वारा भी बहुत प्रलाप किये जा रहे हैं तो निश्चित रूप से उनकी चर्चा समाहित की जानी चाहिये।
इस आलेख में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा से सबंधित विवादों ने जो नया आयाम लिया है कि न्यायालय में इसके लिये याचिका तक चली गयी तो शास्त्र-सम्मत विशेष महत्वपूर्ण विमर्श किया जायेगा। शंकराचार्यों से सम्बन्धित चर्चा करना नहीं चाहता था किन्तु पुनः करने की आवश्यकता है। इस आलेख से कर्मकांड में आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं को भी विशेष महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी।
यज्ञ-प्राणप्रतिष्ठा आदि में मंडप पूजन की विशेष विधि बताई गयी है। यहाँ आपकी सुविधा के लिये सम्पूर्ण मंडप पूजन विधि उपलब्ध किया गया है।
संकल्प मंत्र : ॐ अद्यादि ……………………… प्रतिष्ठाङ्गगत्वेन प्रतिमासंशुद्ध्यर्थं ममगृहे प्रचुरधान्यपुत्र-पौत्रादिसुखसम्पत्यादि अभिवृद्धयर्थं पुष्पाधिवासं करिष्ये ॥
प्राण प्रतिष्ठा विधि में एक क्रिया नेत्रोन्मीलन है। नेत्रोन्मीलन में एक परंपरा चल पड़ी है देवता के सामने शीशा/कांच रखने की और टूटने की। वैदिक विधि से प्राण प्रतिष्ठा में इसका क्या महत्व है हम इसे समझने का प्रयास करेंगे।
यहाँ सनातन धर्म और इस्लाम पंथ के दो ऐसे ऐतिहासिक उदाहरण को प्रस्तुत किया गया है जिसके द्वारा बिना कुछ कहे भी सनातन धर्म और इस्लाम पंथ का अंतर भलीभांति समझा जा सकता है।