दुर्गा सप्तशती पाठ – मूल दुर्गा सप्तशती संस्कृत पाठ
या चण्डी मधुकैटभादिदैत्यदलनी या माहिषोन्मूलिनी
या धूम्रेक्षणचण्डमुण्डमथनी या रक्तबीजाशनी।
शक्तिः शुम्भनिशुम्भदैत्यदलनी या सिद्धिदात्री परा
सा देवी नवकोटिमूर्तिसहिता मां पातु विश्वेश्वरी॥
या चण्डी मधुकैटभादिदैत्यदलनी या माहिषोन्मूलिनी
या धूम्रेक्षणचण्डमुण्डमथनी या रक्तबीजाशनी।
शक्तिः शुम्भनिशुम्भदैत्यदलनी या सिद्धिदात्री परा
सा देवी नवकोटिमूर्तिसहिता मां पातु विश्वेश्वरी॥
श्री सत्यनारायण व्रत कथा संस्कृत में : सत्यनारायण व्रत कथा संस्कृत में अवश्य सुनें।
कथा सुनने का पुण्य संस्कृत (देववाणी) में सुनने से ही मिलता है।
हिन्दी या अन्य भाषाओं में समझने के लिये कर सकते हैं।
कथा का पुण्य पाने के लिये ब्राह्मण के द्वारा ही सुने।
कथा सुनते समय कथावाचक से नीचे आसन रखें।
हाथों में फूल रखकर कथा सुने और कथा के बाद भगवान को चढ़ा दें।
कथा के समय आपस में बातचीत न करें।
यदि संस्कृत समझ में न भी आये तो भी ध्यान से संस्कृत पाठ को अवश्य सुनें।
नरक निवारण चतुर्दशी (narak nivaran chaturdashi) कब है – पूजा विधि : लिङ्गपुराण में नरक निवारण चतुर्दशी की कथा है जिसमें इसकी महिमा बताते हुये कहा गया है : अश्वमेधसहस्राणि वाजपेयशतानि च। प्राप्नोति तत्फलं सर्वं नात्र कार्या विचारणा॥ एक हजार अश्वमेध यज्ञ और एक सौ वाजपेय यज्ञ करने से जो फल प्राप्त होता है वो फल नरक निवारण चतुर्दशी व्रत करने से प्राप्त होता है, इसमें विचार नहीं करना चाहिये अर्थात शंका नहीं करनी चाहिये।
प्रासाद के ईशानकोण अथवा नैर्ऋत्य कोण में सपत्नीक यजमान सुंदर आसन पर पवित्रीकरणादि करके त्रिकुशा, तिल, जलादि संकल्प द्रव्य लेकर संकल्प करे : ॐ अद्य …….. अस्य वास्तोः शुभता सिद्ध्यर्थं ………. देवता प्रतिष्ठाङ्गभूतं वास्तुदेवतास्थापनं पूजनं च करिष्ये ॥
जय जय देव हरे – श्री जयदेव कृत मंगल गीत बहुत अद्भुत प्रभावकारी है। इसका श्रवण मन को तरंगित कर देता है।
सब मम प्रिय सब मम उपजाये – ये भगवान राम का कथन है और इसे किसी प्रकार से नकारा नहीं जा सकता कि सारी सृष्टि ईश्वर की ही कृति है। इस अध्याय में हम बलि जिसे प्रथा कहा जाने लगा है और एक अभिशाप सिद्ध किया जा रहा है इसकी उपादेयता, प्रमाणिकता आदि की चर्चा करेंगे।
सबसे बड़े भगवान के बारे में निर्णय करना अत्यंत कठिन है और अपराध भी है, किन्तु स्वयं के लिये सबसे बड़े भगवान के बारे में जानना अत्यंत सरल है। इस विषय को गंभीरतापूर्वक चिंतन करने, बार-बार विचार करने पर ही समझा जा सकता है केवल एक बार इस अध्याय को पढ़ लेने से नहीं समझा जा सकता।
वर्षों से चल रहे ज्ञानवापी प्रकरण का सर्वे रिपोर्ट न्यायालय के आदेश से 25 जनवरी 2024 को सार्वजनिक की जा चुकी है। सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद कई महत्वपूर्ण बातें सामने आयी है। सनातनियों का दृढ विश्वास की ज्ञानवापी ही भगवान विश्वनाथ का वास्तविक मंदिर है यह और पुष्ट हो गया है।
राम राज्य का सीधा भाव यह होता है कि सभी सुखी-सम्पन्न हों, चिन्तामुक्त जीवन हो, किसी प्रकार का भय न हो इत्यादि-इत्यादि । इसको अगर थोड़ा शब्दांतर से समझने का प्रयास करें तो इस प्रकार का भी अर्थ प्रकट हो सकता है :-
पवित्रीकरणादि करके त्रिकुशा, तिलजलादि संकल्प द्रव्य लेकर संकल्प करे : ॐ अद्य …………. अस्मिन्नूतनप्रासादे सकलदोषनिवृत्ति पूर्वकं प्रासादशुद्धयर्थं आचन्द्रतारकं प्रासादपुरुष सान्निध्यहेतवे सप्रासादप्रतिष्ठाङ्गभूतं स्नपनपूर्वकं प्रासादाधिवासनं करिष्ये॥