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श्रीकृष्णमङ्गलं : कृष्ण मंगलाचरण श्लोक - krishna mangalam

श्रीकृष्णमङ्गलं : कृष्ण मंगलाचरण श्लोक – krishna mangalam

श्रीकृष्णमङ्गलं : कृष्ण मंगलाचरण श्लोक – krishna mangalam : भगवान के अनेकानेक स्तोत्रों में से एक प्रकार मंगल स्तोत्र भी होता है जिसमें भगवान के अनेकानेक नामों द्वारा उनसे मंगल प्रार्थना की जाती है, मंगल की कामना की जाती है। भगवान श्रीकृष्ण के अनेकों मंगल स्तोत्र हैं जो श्रीकृष्ण मङ्गलं (krishna mangalam), कृष्ण मंगलाचरण श्लोक, श्रीकृष्ण मङ्गल स्तोत्र आदि नामों से जाने जाते हैं।

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देवकीकृत श्री कृष्ण स्तोत्र - Devakikrita Shri krishna stotra

देवकीकृत श्री कृष्ण स्तोत्र – Devakikrita Shri krishna stotra

देवकीकृत श्री कृष्ण स्तोत्र – Devakikrita Shri krishna stotra : श्रीमद्भागवतमहापुराण में भगवान श्री कृष्ण का चरित विशेष रूप से वर्णित है और श्रीकृष्ण चरित्र दशम स्कंध में वर्णित है। कृष्णावतार में भगवान श्रीकृष्ण की एक स्तुति स्वयं देवकी ने किया है जो दशम स्कंध के तृतीय अध्याय में मिलता है। देवकी कृत श्री कृष्ण स्तुति में कुल ७ श्लोक हैं।

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श्री कृष्ण चतुर्विंशति स्तोत्रं - Shri Krishna chaturvimshati Stotram

श्री कृष्ण चतुर्विंशति स्तोत्रं – Shri Krishna chaturvimshati Stotram

श्री कृष्ण चतुर्विंशति स्तोत्रं – Shri Krishna chaturvimshati Stotram : भगवान श्री कृष्ण के अनेकानेक स्तोत्रों में एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है श्री कृष्ण चतुर्विंशति स्तोत्रं (Shri Krishnachaturvimshati Stotram) जिसमें 24 श्लोक है और इसी कारण इसका नाम श्री कृष्ण चतुर्विंशति स्तोत्र है। दो श्लोक फलश्रुति के हैं और इन दोनों श्लोकों को मिलाकर कुल 26 श्लोक हो जाते हैं।

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सुभद्राकृत अनन्तस्तव (अनंत स्तोत्र) - Anantastava

सुभद्राकृत अनन्तस्तव (अनंत स्तोत्र) – Anantastava

सुभद्राकृत अनन्तस्तव (अनंत स्तोत्र) – Anantastava : अनन्त भगवान विष्णु का ही नाम है, जब अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण से पूछा था कि अनंत कौन हैं तो भगवान श्रीकृष्ण ने कहा था मैं ही अनंत हूँ। भगवान अनंत की पूजा अनंत चतुर्दशी को की जाती है और अनंत धारण भी किया जाता है। अनंत भगवान की पूजा में स्तोत्रादि की जब आवश्यकता होती है तो सरलता से मिलना कठिन होता है।

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श्रीशङ्कराचार्यविरचित अच्युताष्टकम् - achyutashtakam

श्रीशङ्कराचार्यविरचित अच्युताष्टकम् – achyutashtakam

श्रीशङ्कराचार्यविरचित अच्युताष्टकम् – achyutashtakam : श्री शङ्कराचार्यविरचित अच्युताष्टक जिसकी प्रथम पंक्ति है “अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम्” और सभी श्रद्धालु बड़े भक्ति-भाव से इसका पाठ-गायन करते हैं। भगवान विष्णु-राम-कृष्ण की पूजा हो और स्तोत्र पाठ करना हो तो सर्वप्रथम अच्युताष्टकम् ही ध्यान में आता है।

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गरुडपुराणोक्त अच्युत स्तोत्र - achyut stotra

गरुडपुराणोक्त अच्युत स्तोत्र – achyut stotra

गरुडपुराणोक्त अच्युत स्तोत्र – achyut stotra : भगवान विष्णु का ही एक नाम है अच्युत, वह जो कभी च्युत न हो अच्युत कहलाता है। भगवान विष्णु के अच्युत नाम से स्तोत्र भी मिलते हैं और अच्युत स्तोत्र गरुड़पुराण में वर्णित है। यह स्तोत्र नारद जी के प्रश्न करने पर ब्रह्मा द्वारा वर्णित है।

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वामन विश्वरूप वर्णन - vamana vishwarup

वामन विश्वरूप वर्णन – vamana vishwarup

वामन विश्वरूप वर्णन – vamana vishwarup : जब राजा बलि ने भगवान वामन को तीन पग भूमि दान करने का संकल्प करके उन्हें मापने के लिये कहा तो उन्होंने अपनी देह का विस्तार करना आरम्भ कर दिया और इतना विस्तार किया कि दूसरे ही पग में सभी लोकों को नाप लिया। उस समय उनका स्वरूप कैसा था इसका वर्णन स्वयं वामन भगवान ने ही विष्णुधर्म में किया है जिसे वामन विश्वरूप वर्णन नाम से जाना जाता है।

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वामन स्तोत्र संस्कृत में - vaman stotra

वामन स्तोत्र संस्कृत में – vaman stotra

वामन स्तोत्र संस्कृत में – vaman stotra : विभिन्न पुराणादि में भगवान वामन के अनेकानेक स्तोत्र मिलते हैं जिनमें से कुछ महत्वपूर्ण स्तोत्रों का यहाँ संग्रह किया गया है; यथा : नारद पुराणोक्त, पद्मपुराणोक्त, भागवत महापुराणोक्त और वामन पुराणोक्त। इस प्रकार चार वामन स्तोत्र (vaman stotra) का संग्रह होने से यह विशेष महत्वपूर्ण हो जाता है और वामन उपासना काल में एक साथ चारों स्तोत्रों का अवलोकन संभव होता है।

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वामन स्तुति संस्कृत में - vamana stuti

वामन स्तुति संस्कृत में – vamana stuti

वामन स्तुति संस्कृत में – vamana stuti : भक्तप्रह्लाद के पुत्र विरोचन थे और उनका पुत्र राजा बलि था अर्थात भक्त प्रह्लाद के पौत्र थे राजा बलि। और इस प्रकार यदि विचार करें तो राजा बलि के पितामह हेतु भी भगवान विष्णु ने नृसिंहावतार लिया था और पुनः उसी कुल में राजा बलि के लिये भी वामन अवतार धारण किया था।

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अग्निपुराणोक्त परशुराम सहस्रनाम स्तोत्र - parshuram sahasranama

अग्निपुराणोक्त परशुराम सहस्रनाम स्तोत्र – parshuram sahasranama

अग्निपुराणोक्त परशुराम सहस्रनाम स्तोत्र – parshuram sahasranama : कलश पर परशुराम का स्थापन करके घृतादि द्रव्यों से स्नान-पूजन करके परशुराम सहस्रनाम स्तोत्र पाठ करने पर सहस्र यज्ञ का फल प्राप्त होता है। अयन-विषुव आदि अवसरों पर पाठ करके स्तोत्र लिखे और वैष्णव को पुस्तक प्रदान करे तो शत्रुरहित हो जाता है।

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