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भक्ति की शक्ति

होलिका दहन कब है 2025 – Holika Dahan

होलिका दहन कब है 2025 – Holika Dahan : होलिका पौर्णमासी तु सायाह्न व्यापिनी मता । भूतविद्धे न कर्तव्ये दर्शपूर्णे कदाचन ॥ ब्रह्मवैवर्त पुराण – सबसे पहला प्रमाण यह है कि होलिका दहन सायं काल में उपलब्ध पूर्णिमा को करना चाहिये अर्थात् सायं काल को कर्मकाल बताया जा रहा है यह प्रमाण ब्रह्मपुराण का है।

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महाशिवरात्रि पूजन सामग्री लिस्ट

महाशिवरात्रि पूजन सामग्री लिस्ट

प्रत्येक वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को महाशिवरात्रि महोत्सव मनाया जाता है। महाशिवरात्रि व्रत 14 वर्षों तक करने का विधान बताया गया है। महाशिवरात्रि व्रत में दिन भर उपवास करके रात में भगवान शिव की विशेष पूजा-कथा की जाती है। महाशिवरात्रि के दिन विशेष पूजा का विधान है। यहां महाशिवरात्रि में उपयोगी पूजन सामग्री की वह लिस्ट दी जा रही है जो शिवालय में पूजा करने के लिये आवश्यक होती है।

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महाशिवरात्रि पूजा विधि और मंत्र- mahashivratri puja vidhi

महाशिवरात्रि पूजा विधि और मंत्र- mahashivratri puja vidhi

भगवान शिव और पार्वती का विवाह फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को हुआ था और इसी कारण इसे महाशिवरात्रि कहा जाता है। महाशिवरात्रि व्रत १४ वर्षों तक करना चाहिए। इस व्रत में रात के चारों पहर भगवान भोलेनाथ की पूजा की जाती है, रात्रिजागरण, नृत्य-गीत, मन्त्र जप, स्तोत्र पाठ आदि करना चाहिए।

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महाशिवरात्रि कब है - Mahashivratri kab hai

महाशिवरात्रि कब है ? Mahashivratri kab hai

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का आयोजन होता है। पञ्चाङ्गों के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ 26 फरवरी 2025 बुधवार को मध्याह्न में 11 बजकर 08 मिनट पर होगा और अगले दिन यानी 27 फरवरी 2025 गुरुवार को पूर्वाह्न 8 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगी।

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स्वस्तिवाचन – चारों वेदों का – swastiwachan mantra

स्वस्तिवाचन – चारों वेदों का – swastiwachan mantra

स्वस्तिवाचन – चारों वेदों का – swastiwachan mantra : इस प्रकार यहां सम्पूर्ण स्वस्तिवाचन मंत्र (यजुर्वेदीय) के साथ-साथ ऋग्वेद स्वस्तिवाचन, सामवेद का स्वस्तिवाचन और अथर्ववेद का स्वस्तिवाचन भी संकलित किया गया जो बहुत सारे लोगों के लिये उपयोगी सिद्ध होगा।

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क्या स्त्री हवन कर सकती है ? हवन करने की विधि

क्या स्त्री हवन कर सकती है ? हवन करने की विधि

शास्त्रों द्वारा स्त्री को पति के द्वारा किये गये हवन में ही फल का भागी बताया गया है तो अलग से हवन करने की आवश्यकता ही सिद्ध नहीं होती और पतिहीन (विधवा) के लिये आचार्य का वरण करके हवन का नियम ज्ञात होता है।

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हवन विधि – महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर

हवन विधि – महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर

हवन विधि – महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर : प्रथम भाग में वो प्रश्न लिये गये हैं जो इंटरनेट पर अधिकतर पूछे जाते हैं और द्वितीय भाग में वो प्रश्न लिये गये हैं जो इंटरनेट पर तो नहीं पूछे जाते एवं श्रद्धालुओं के मन में होते हैं एवं जिनका उत्तर भी इंटरनेट पर लगभग नहीं मिलता है। इस कारण हवन को समझने के लिये यह आलेख विशेष महत्वपूर्ण है।

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अचलासप्तमी

अचला सप्तमी – अचला सप्तमी कब है – अचला का अर्थ – अचला सप्तमी 2025

अचला सप्तमी – अचला सप्तमी कब है – अचला का अर्थ – अचला सप्तमी 2025 : माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को अचला सप्तमी कहा जाता है।
इसका एक अन्य नाम रथ सप्तमी भी है।
शास्त्रों के नियमानुसार इस दिन किया गया प्रत्येक कर्म चाहे पुण्य कर्म हो या पाप कर्म अनन्त काल तक फलित होता है।

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हवन विधि – छन्दोग

हवन विधि – छन्दोग

छन्दोग हवन विधि में पञ्चभूसंस्कार के समय बांयां हाथ भूमि पर रखने का विधान है अतः पञ्चभूसंस्कार के समय अग्निस्थापन तक बांयां हाथ भूमि पर रखे और सभी क्रियायें एक ही हाथ से करें; अङ्गिरा – सव्यं भूमौ प्रतिष्ठाप्य प्रोल्लिखेद्दक्षिणेन तु । तावन्नोस्थापयेत्पाणिं यावदग्निं निधापयेत् ॥

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हवन विधि मंत्र सहित – वाजसनेयी

हवन विधि मंत्र सहित – वाजसनेयी

वैदिक हवन विधि में संपूर्ण हवन विधि को तीन भागों में बांटा गया है :
पूर्वाङ्ग – पवित्रीकरणादि के उपरान्त पञ्चभूसंस्कार से पञ्चमहावारुणी होम तक की सभी क्रियायें पूर्वाङ्ग कहलाती है। सभी प्रकार के हवनों में पूर्वाङ्ग समान ही रहता है।
मध्याङ्ग – पूजित देवी-देवता सहित मुख्य देवता का हवन मुख्य अंग होता है; जिसे समझने में सुविधा के लिये यहां मध्याङ्ग भी कहा गया है, जिसकी विधि, हविर्द्रव्य, मंत्र परिवर्तित होते रहते हैं।
उत्तराङ्ग – मध्याङ्ग अर्थात मुख्य देवता का होम करने के बाद की शेष क्रियायें उत्तराङ्ग कहलाती है। सभी प्रकार के वैदिक हवन विधि में उत्तराङ्ग भी समान रहता है।

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