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भविष्यपुराणोक्त श्री सत्यनारायण व्रत कथा संस्कृत में

भविष्यपुराणोक्त श्री सत्यनारायण व्रत कथा संस्कृत में भविष्यपुराणोक्त श्री सत्यनारायण व्रत कथा संस्कृत में

पञ्चमोध्यायः

षष्ठोऽध्यायः

श्रीसत्यनारायण व्रत कथा केवल निर्धनता दूर करने का साधन नहीं है, बल्कि यह ‘सत्य’ (ब्रह्म) के प्रति निष्ठा का संकल्प है। भविष्य पुराण की यह षडध्यायी कथा स्पष्ट करती है कि मनुष्य का दुःख उसके कर्मों का फल है और सत्य की शरण में जाने से उन प्रारब्ध कर्मों का क्षय संभव है। यह व्रत कलियुग में ‘प्रत्यक्ष फलदाता’ है। जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक संस्कृत में इन ६ अध्यायों का श्रवण करता है, वह न केवल इस लोक के सुख भोगता है, बल्कि अंत में विष्णुलोक (वैकुंठ) को प्राप्त होता है।

विशेष आग्रह : उपरोक्त श्री सत्यनारायण व्रत कथा में कहीं कोई अशुद्धि दृष्टिगत हो तो टिपण्णी करके …. अवश्य सूचित करें।

FAQ

प्रश्न: क्या सत्यनारायण कथा केवल पूर्णिमा को ही की जा सकती है?

उत्तर: पूर्णिमा और संक्रान्ति श्रेष्ठ हैं, किन्तु भगवान के वचनानुसार इसे किसी भी दिन सायंकाल (प्रदोष काल) में किया जा सकता है।

प्रश्न: क्या बिना ब्राह्मण के कथा सुनी जा सकती है?

उत्तर: शास्त्रानुसार, मन्त्रों और कथा का वाचन ब्राह्मण द्वारा होना ही फलदायी है।

कर्मकांड विधि में शास्त्रोक्त प्रमाणों के साथ प्रामाणिक चर्चा की जाती है एवं कई महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा पूर्व भी की जा चुकी है। तथापि सनातनद्रोही उचित तथ्य को जनसामान्य तक पहुंचने में अवरोध उत्पन्न करते हैं। एक बड़ा वैश्विक समूह है जो सनातन विरोध की बातों को प्रचारित करता है। गूगल भी उसी समूह का सहयोग करते पाया जा रहा है अतः जनसामान्य तक उचित बातों को जनसामान्य ही पहुंचा सकता है इसके लिये आपको भी अधिकतम लोगों से साझा करने की आवश्यकता है।

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