विवाह पद्धति | विवाह विधि और मंत्र | जयमाला विधि सहित – वाजसनेयी – vivah vidhi
विवाह पद्धति – vivah vidhi : धूआ-पानी, जयमाला विधि आदि कई महत्वपूर्ण विधियों को समाहित करने से उपरोक्त विवाह विधि विशेष उपयोगी सिद्ध होती है। ….. vivah vidhi
कर्मकांड में पूजा, पाठ, जप, हवन, शांति, संस्कार, श्राद्ध आदि सभी प्रकरण समाहित हो जाते हैं। कर्मकांड विधि द्वारा इन सभी कर्मकांड पूजा पद्धति से संबंधित विधि और मंत्रों का यहाँ पर्याप्त संग्रहण उपलब्ध है – karmkand
विवाह पद्धति – vivah vidhi : धूआ-पानी, जयमाला विधि आदि कई महत्वपूर्ण विधियों को समाहित करने से उपरोक्त विवाह विधि विशेष उपयोगी सिद्ध होती है। ….. vivah vidhi
लग्न पत्रिका कैसे लिखें : लग्न पत्रिका (lagn patrika) लेखन में विवाह के लिये शुभ लग्न निश्चय करना आवश्यक होता है। शुभ लग्न निश्चय करने के बाद तदनुसार मासादि का उल्लेख किया जाता है।
विनायक शांति पूजा विधि | vinayak shanti – उपनयन-विवाहादि-निर्विघ्नता हेतु संकल्प : ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः श्रीमद् भगवतो ………… विनायकशांति करिष्ये ॥ मुंडन, उपनयन, विवाह, गृहारम्भ, गृहप्रवेश आदि में भी निर्धारित काल में यदि विघ्न उपस्थित हो जाये अथवा
वर वरण विधि | सगुन – sagun | हस्त ग्रहण वाग्दान कैसे करें ? वाग्दान विधि : अव्यंगेऽपतितेऽक्लीवे दशदोष विवर्जिते । इमां कन्यां प्रदास्यामि देवाग्नि द्विज सन्निधौ ॥ ………. शर्माणं (यथायोग्य) वरं कन्या प्रतिगृहीतृत्वेन त्वामहं वृणे॥
विवाह मुहूर्त – दिन की भांति रात्रि के 15 मुहूर्ताधिपति क्रमशः इस प्रकार होते हैं – ईश्वर (शिव), अजैकपाद, अहिर्बुध्न्य, पूषा, अश्विनी कुमार, यमराज, अग्नि, ब्रह्मा (धाता), चन्द्रमा, अदिति, बृहस्पति, विष्णु, सूर्य, त्वष्टा, समीरण (वायु) – रात्रौ पंचदशेश्वराज ..
विवाह गार्हस्थ जीवन का द्वार है और सृष्टि को अनवरत रखने में अपनी भूमिका निर्वहन करने के लिये अनिवार्य होता है। विवाह किये बिना किसी व्यक्ति के गृहस्थ आश्रम का प्रारम्भ नहीं होता।
किसी भी भगवान की आराधना में स्तोत्र का भी महत्वपूर्ण स्थान होता है। स्तोत्रों में अष्टक का विशेष महत्व होता है। सभी देवताओं के विभिन्न स्तोत्रों के साथ ही उनके अष्टक स्तोत्र भी होते है। इसी प्रकार महामृत्युंजय भगवान का भी अष्टक स्तोत्र है। इस आलेख में महमृत्युञ्जय अष्टक दिया गया है।
महामृत्युंजय कवच रुद्रयामल तंत्र में वर्णित है।महामृत्युंजय कवच का पाठ, श्रवण और यंत्र में धारण करने का विधान है। महामृत्युंजय कवच pdf डाउनलोड
महामृत्युंजय जाप कितने दिन का होता है – महामृत्युंजय जप को पहले दो भागों में बांटेंगे तब यह सही-सही समझा जा सकता है। स्वयं करना और ब्राह्मणों द्वारा कराना; इन दोनों को विभक्त रूप से समझने पर ही दिन संख्या निर्धारित की जा सकती है।
महामृत्युंजय जप – यदि स्वयं/सपरिवार के निमित्त जप करना हो तो त्रिकुशा, तिल, जल, पुष्प, चन्दन, द्रव्य आदि लेकर इस प्रकार संकल्प करे : ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः श्रीमद् भगवतो महापुरूषस्य,विष्णुराज्ञया …… महामृत्युंजय जप विधि pdf डाउनलोड