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विनायक शांति पूजा विधि | vinayak shanti

विनायक शांति पूजा विधि | vinayak shanti

विनायक शांति पूजा विधि | vinayak shanti – उपनयन-विवाहादि-निर्विघ्नता हेतु संकल्प : ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः श्रीमद् भगवतो ………… विनायकशांति करिष्ये ॥ मुंडन, उपनयन, विवाह, गृहारम्भ, गृहप्रवेश आदि में भी निर्धारित काल में यदि विघ्न उपस्थित हो जाये अथवा

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वर वरण विधि | सगुन – sagun | हस्त ग्रहण वाग्दान कैसे करें

वर वरण विधि | सगुन – sagun | हस्त ग्रहण वाग्दान कैसे करें

वर वरण विधि | सगुन – sagun | हस्त ग्रहण वाग्दान कैसे करें ? वाग्दान विधि : अव्यंगेऽपतितेऽक्लीवे दशदोष विवर्जिते । इमां कन्यां प्रदास्यामि देवाग्नि द्विज सन्निधौ ॥ ………. शर्माणं (यथायोग्य) वरं कन्या प्रतिगृहीतृत्वेन त्वामहं वृणे॥

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कैसे बनता है विवाह मुहूर्त ? विवाह संबंधी सभी महत्वपूर्ण जानकारी

कैसे बनता है विवाह मुहूर्त ? विवाह संबंधी सभी महत्वपूर्ण जानकारी

विवाह मुहूर्त – दिन की भांति रात्रि के 15 मुहूर्ताधिपति क्रमशः इस प्रकार होते हैं –  ईश्वर (शिव), अजैकपाद, अहिर्बुध्न्य, पूषा, अश्विनी कुमार, यमराज, अग्नि, ब्रह्मा (धाता), चन्द्रमा, अदिति, बृहस्पति, विष्णु, सूर्य, त्वष्टा, समीरण (वायु) – रात्रौ पंचदशेश्वराज ..

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विवाह क्या है, अर्थ, परिभाषा, प्रकार, उद्देश्य, बाल विवाह आदि की विस्तृत जानकारी – Vivah

विवाह क्या है, अर्थ, परिभाषा, प्रकार, उद्देश्य, बाल विवाह आदि की विस्तृत जानकारी – Vivah

विवाह गार्हस्थ जीवन का द्वार है और सृष्टि को अनवरत रखने में अपनी भूमिका निर्वहन करने के लिये अनिवार्य होता है। विवाह किये बिना किसी व्यक्ति के गृहस्थ आश्रम का प्रारम्भ नहीं होता।

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महामृत्युंजयष्टक

महामृत्युंजयष्टक

किसी भी भगवान की आराधना में स्तोत्र का भी महत्वपूर्ण स्थान होता है। स्तोत्रों में अष्टक का विशेष महत्व होता है। सभी देवताओं के विभिन्न स्तोत्रों के साथ ही उनके अष्टक स्तोत्र भी होते है। इसी प्रकार महामृत्युंजय भगवान का भी अष्टक स्तोत्र है। इस आलेख में महमृत्युञ्जय अष्टक दिया गया है।

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महामृत्युंजय कवच हिन्दी अर्थ सहित

महामृत्युंजय कवच हिन्दी अर्थ सहित

महामृत्युंजय कवच रुद्रयामल तंत्र में वर्णित है।महामृत्युंजय कवच का पाठ, श्रवण और यंत्र में धारण करने का विधान है। महामृत्युंजय कवच pdf डाउनलोड

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महामृत्युंजय जाप कितने दिन का होता है

महामृत्युंजय जाप कितने दिन का होता है

महामृत्युंजय जाप कितने दिन का होता है – महामृत्युंजय जप को पहले दो भागों में बांटेंगे तब यह सही-सही समझा जा सकता है। स्वयं करना और ब्राह्मणों द्वारा कराना; इन दोनों को विभक्त रूप से समझने पर ही दिन संख्या निर्धारित की जा सकती है।

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महामृत्युंजय जप करने की सम्पूर्ण विधि और जानकारी – mahamrityunjay jaap

महामृत्युंजय जप करने की सम्पूर्ण विधि और जानकारी – mahamrityunjay jaap

महामृत्युंजय जप – यदि स्वयं/सपरिवार के निमित्त जप करना हो तो त्रिकुशा, तिल, जल, पुष्प, चन्दन, द्रव्य आदि लेकर इस प्रकार संकल्प करे : ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः श्रीमद् भगवतो महापुरूषस्य,विष्णुराज्ञया …… महामृत्युंजय जप विधि pdf डाउनलोड

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क्या आप तीर्थ यात्रा के महत्वपूर्ण तथ्यों को जानते हैं – tirth yatra

क्या आप तीर्थ यात्रा के महत्वपूर्ण तथ्यों को जानते हैं – tirth yatra

तीर्थ यात्रा : वह यात्रा जो पापनिवृत्ति और पुण्य प्राप्ति के उद्देश्य से विधि पूर्वक की जाती है जिसमें तीर्थदर्शन, मुण्डन, स्नान, पूजन, पितरों का पिण्डदान, दान, ब्राह्मण भोजन आदि किया जाता है, तीर्थ यात्रा कहलाती है।

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यद्यपि शुद्धं लोक विरुद्धम्। सही-सही कैसे समझें ?

यद्यपि शुद्धं लोक विरुद्धम्। सही-सही कैसे समझें ?

यद्यपि शुद्धं लोक विरुद्धम्। नाऽचरणीयं नाऽचरणीयं ॥ का अर्थ यद्यपि शुद्ध हो अर्थात सही हो किन्तु लोक विरुद्ध हो अर्थात हानिकारक हो या हानि संभावित हो तो वह वैसा आचरण मत करो वह कर्म मत करो।

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