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श्री जानकी स्तवराज - Shri Janaki Stavaraja

श्री जानकी स्तवराज – Shri Janaki Stavaraja

श्री जानकी स्तवराज – Shri Janaki Stavaraja : अगस्त्यसंहिता में माता सीता का एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है जिसका नाम है श्री जानकी स्तवराज (Shri Janaki Stavaraja)। यह स्तुति भगवान शिव के द्वारा की गयी है जो श्रुतियों के प्रश्न करने पर भगवान श्री संकर्षण जी द्वारा वर्णन किया गया है।

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श्री सीता स्तुति - shri sita stuti

श्री सीता स्तुति – shri sita stuti

श्री सीता स्तुति – shri sita stuti : भुशुण्डि रामायण में माता सीता की अनेकानेक स्तुतियां हैं जिसमें से अग्निकृत, इन्द्रकृत, कुबेरकृत, शिवकृत आदि मुख्य स्तुति है। माता सीता की आराधना में इन स्तुतियों का व्यापक लाभ मिलता है। यहां ये सभी श्री सीता स्तुति (shri sita stuti) संस्कृत में दिये गये हैं।

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सकारादि सीता सहस्रनाम स्तोत्र – sakaradi sita sahasranama stotram

सकारादि सीता सहस्रनाम स्तोत्र – sakaradi sita sahasranama stotram

सकारादि सीता सहस्रनाम स्तोत्र – sakaradi sita sahasranama stotram : श्री रुद्रयामल तन्त्र में माता सीता का सकारादि सहस्रनाम मिलता है जो देवी और महादेव संवाद रूप में वर्णित है । यहां श्रीरुद्रयामलतन्त्रोक्तम् सकारादि सीता सहस्रनाम स्तोत्र (sakaradi sita sahasranama stotram) संस्कृत में दिया गया है।

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श्रीरामकृत सीता सहस्रनाम स्तोत्र - sita sahasranama stotram

श्रीरामकृत सीता सहस्रनाम स्तोत्र – sita sahasranama stotram

श्रीरामकृत सीता सहस्रनाम स्तोत्र – sita sahasranama stotram : अद्भुतरामायण में माता सीता का सहस्रनाम मिलता है जो रामकृत है और ये इसकी विशेषता है। यहां श्रीरामकृत सीता सहस्रनाम स्तोत्र (sita sahasranama stotram) संस्कृत में दिया गया है।

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सीता शतनाम स्तोत्र - sita ashtottara shatanama stotram

सीता शतनाम स्तोत्र – sita ashtottara shatanama stotram

सीता शतनाम स्तोत्र – sita ashtottara shatanama stotram : यहां माता सीता के दो प्रमुख अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र आनन्द रामायणोक्त और ब्रह्मयामलोक्त दिया गया है। आनन्द रामायणोक्त सीता शतनाम स्तोत्र अगस्त्य जी द्वारा कहा गया है जिसमें कुल २२ श्लोक हैं एवं ब्रह्मयामलोक्त सीता शतनाम स्तोत्र में कुल १८ श्लोक हैं।

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सीता कवच स्तोत्र - sita kavacham

सीता कवच स्तोत्र – sita kavacham

सीता कवच स्तोत्र – sita kavacham : ऐसा प्रायः होता है कि हम भगवान राम के अनेकानेक स्तोत्रों का पाठ तो करते हैं किन्तु सीता के किसी स्तोत्र को जानते तक नहीं और सीता कवच स्तोत्र में ऐसा भी कहा गया है कि बिना सीता कवच पाठ किये राम कवच का पाठ करना वृथा है। इसमें कवच चतुष्टय का पाठ करने का निर्देश प्राप्त होता है।

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सीताराम स्तोत्र - sita ram stotra

सीताराम स्तोत्र – sita ram stotra

सीताराम स्तोत्र – sita ram stotra : सीताराम स्तोत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह अनन्य रामभक्त हनुमानकृत है और इस कारण यह स्तोत्र विशेष महत्वपूर्ण हो जाता है। इस स्तोत्र में अनन्य रामभक्त हनुमान ने राम और सीता के युगल जोड़ी की स्तुति किया है।

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श्री राघवेन्द्र अष्टकम् - shri raghavendra ashtakam

श्री राघवेन्द्र अष्टकम् – shri raghavendra ashtakam

श्री राघवेन्द्र अष्टकम् – shri raghavendra ashtakam : रघुवंशी होने के कारण भगवान श्री राम का एक नाम राघव है और इसी नाम से पुनः राघवेन्द्र भी कहा गया क्योंकि रघुवंशी होने के कारण यदि श्रीराम राघव हैं तो अन्य सभी रघुवंशी भी राघव हैं। किन्तु यदि राघवेन्द्र कहा जाता है तो अन्य सभी रघुवंशी नहीं हो सकते वो श्री राम ही हो सकते हैं।

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श्री राघवयादवीयम् - shri raghav yadaviyam

श्री राघवयादवीयम् – shri raghav yadaviyam

श्री राघवयादवीयम् – shri raghav yadaviyam : सतरहवीं सदी में कांचीपुरम के वेंकटाध्वरि द्वारा रचित श्री राघवयादवीयम् एक अनुपम काव्य है जिसे अनुलोम विलोम काव्य नाम से भी जाना जाता है। जैसे कवि सूर्य कृत “श्रीरामकृष्ण विलोम काव्यं” स्वयं में अद्वितीय है उसी प्रकार से और उसी कड़ी में ही श्री राघवयादवीयम् भी है जिसमें ३० श्लोक उपलब्ध हैं और यथावत पढ़ने पर रामचरित है तो विलोम करके पढ़ने पर कृष्ण चरित हो जाता है।

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राम हृदय स्तोत्र - ram hridaya stotra

राम हृदय स्तोत्र – ram hridaya stotra

राम हृदय स्तोत्र – ram hridaya stotra : अध्यात्म रामायण के बालकाण्ड में महादेव द्वारा श्री राम हृदय स्तोत्र (ram hridaya stotra) कहा गया है। यहां संस्कृत में श्री राम हृदय स्तोत्र दिया गया है।

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