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यहां पढ़ें 11 महत्वपूर्ण शिव स्तुति संस्कृत में - shiv stuti

यहां पढ़ें 11 महत्वपूर्ण शिव स्तुति संस्कृत में – shiv stuti

यहां पढ़ें 11 महत्वपूर्ण शिव स्तुति संस्कृत में – shiv stuti : यहां प्रमुख ग्यारह शिव स्तुति जो दिये गए हैं वो हैं : सौरपुराणोक्त कुबेर कृत शिव स्तुति, बृहद्धर्मपुराणोक्त प्रसूति (दक्षपत्नी) कृत शिव स्तुति, वराहपुराणोक्त देव कृत शिव स्तुति, नटराजाष्टकं, ब्रह्माण्डपुराणोक्त परशुराम कृत शिव स्तुति, शिवरहस्योक्त पार्वती कृत शिव स्तुति, कालिकापुराणोक्त ब्रह्मा कृत शिव स्तुति, शिवरहस्योक्त भगीरथ कृत शिव स्तुति, शिवरहस्योक्त मृकुण्डु कृत शिव स्तुति, शिवरहस्योक्त विष्णु कृत शिव स्तुति और शिवरहस्योक्त शिलाद कृत शिव स्तुति। सभी स्तुति संस्कृत में हैं।

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यहां पढ़ें महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र संस्कृत में - mahishasura mardini stotram

यहां पढ़ें महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र संस्कृत में – mahishasura mardini stotram

यहां पढ़ें महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र संस्कृत में – mahishasura mardini stotram : महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र : “जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते”; एक बहुत ही प्रसिद्ध स्तोत्र है जो माता दुर्गा अथवा भगवती के किसी भी रूप की पूजा-अराधना करते समय गाया जाता है। यह शंकराचार्य विरचित बताया जाता है और इसमें २१ पद हैं एवं बाईसवां पद फलश्रुति है।

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यहां पढ़ें चामुण्डा स्तोत्र संस्कृत में - chamunda devi stotra

यहां पढ़ें चामुण्डा स्तोत्र संस्कृत में – chamunda devi stotra

यहां पढ़ें चामुण्डा स्तोत्र संस्कृत में – chamunda devi stotra : यहां सर्वप्रथम पद्मपुराणोक्त चामुण्डा स्तुतिः दिया गया है जो रुद्रकृत है। तदनंतर द्वितीय चामुंडा स्तोत्र स्कन्द पुराण से दिया गया है जो गरुड द्वारा किया गया है एवं तृतीत चामुंडा स्तोत्र भी स्कन्द पुराण से ही है जो राजा नल द्वारा किया गया है। सभी स्तोत्र संस्कृत में हैं।

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यहां पढ़ें चंडिका स्तोत्र संस्कृत में - chandika stotram

यहां पढ़ें चंडिका स्तोत्र संस्कृत में – chandika stotram

यहां पढ़ें चण्डिका स्तोत्र संस्कृत में – chandika stotram : चण्डिका माता दुर्गा का ही एक विशेष रूप है किन्तु सामान्य जन एक स्वरूप दुर्गा में ही सभी को देखते हैं और यह शास्त्र-सम्मत ही है। श्री दुर्गा सप्तशती में भगवती की ही उक्ति है “एकैवाहं जगत्सर्वं” और यह भगवती का यह एकत्व सामान्य जनों में रहता है।

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यहां पढ़ें कात्यायनी स्तोत्र संस्कृत में - katyayani stotra

यहां पढ़ें कात्यायनी स्तोत्र संस्कृत में – katyayani stotra

यहां पढ़ें कात्यायनी स्तोत्र संस्कृत में – katyayani stotra : माता कात्यायनी को ही दशभुजा देवी महिषासुर मर्दिनी कहा गया है । कात्यायनी मुनि के द्वारा स्तुति करने पर बिल्व वृक्ष के पास आश्विन कृष्णा १४ को कात्यायनी देवी प्रकट हुई थी ।

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यहां पढ़ें कुमारी सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - kumari sahasranama stotram

यहां पढ़ें कुमारी सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में – kumari sahasranama stotram

यहां पढ़ें कुमारी सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में – kumari sahasranama stotram : रुद्रयामल तंत्र में कुमारी सहस्रनाम स्तोत्र दिया गया है जो बहुत ही प्रभावशाली है। इसमें बताया गया है कि “धनधान्यसुतप्रदम्” अर्थात यह स्तोत्र धन-धान्य-सुत प्रदायक है। इसी प्रकार यश, विजय, लाभ, शांति आदि कामनाओं को पूर्ण करने वाला है। सहस्रनामों से होमपूर्वक यजन करने से सिद्धि की प्राप्ति होती है।

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यहां पढ़ें कुमारी स्तोत्र संस्कृत में - kumari stotra

यहां पढ़ें कुमारी स्तोत्र संस्कृत में – kumari stotra

यहां पढ़ें कुमारी स्तोत्र संस्कृत में – kumari stotra : कुमारी पूजा की भी विशेष विधि और मंत्र शास्त्रों में मिलता है। कुमारी उपासना में कुमारी कवच, अष्टोत्तर शतनाम आदि भी मिलते हैं। kumari stotra : यहां कुमारी कवच स्तोत्र और कुमारी अष्टोत्तरशत नामावली दिया गया है जो कुमारी पूजन में विशेष लाभकारी है।

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यहां पढ़ें दुर्गा पञ्जर स्तोत्र संस्कृत में - durga panjar stotram

यहां पढ़ें दुर्गा पञ्जर स्तोत्र संस्कृत में – durga panjar stotram

यहां पढ़ें दुर्गा पञ्जर स्तोत्र संस्कृत में – durga panjar stotram : माता दुर्गा का पंजर स्तोत्र मार्कण्डेय पुराण में वर्णित है। यहां विनियोग और ध्यान सहित संस्कृत में दुर्गा पंजर स्तोत्र है।

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यहां पढ़ें अनेकों दुर्गा कवच स्तोत्र संस्कृत में - durga kavach sanskrit

यहां पढ़ें अनेकों दुर्गा कवच स्तोत्र संस्कृत में – durga kavach sanskrit

यहां पढ़ें अनेकों दुर्गा कवच स्तोत्र संस्कृत में – durga kavach sanskrit : यहां सर्वप्रथम कुब्जिकातन्त्रोक्त दुर्गा कवच (श्लोक संख्या 10) दिया गया है तदनंतर मुण्डमालातन्त्रोक्त प्रथम और द्वितीय दुर्गा कवच (श्लोक संख्या 18 और 19) पुनः ब्रह्मवैवर्त पुराणोक्त दुर्गा कवच (श्लोक संख्या 19) दिया गया है। सभी दुर्गा कवच संस्कृत में हैं।

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यहां पढ़ें माँ दुर्गा ध्यान मंत्र संस्कृत में - durga dhyan mantra

यहां पढ़ें माँ दुर्गा ध्यान मंत्र संस्कृत में – durga dhyan mantra

यहां पढ़ें माँ दुर्गा ध्यान मंत्र संस्कृत में – durga dhyan mantra : “जटाजूटसमायुक्तामर्द्धेन्दुकृतशेखराम्” में कुल १३ श्लोक हैं जो विशेष पूजा आदि करते समय पाठ किया जाता है। पहले माता दुर्गा के ध्यान का “जटाजूटसमायुक्ताम्” 13 श्लोकों वाला ध्यान मंत्र दिया गया है और तदनंतर अन्य अनेकानेक ध्यान मंत्र दिये गये हैं। सभी ध्यान मंत्र संस्कृत में हैं क्योंकि मंत्र संस्कृत में होते हैं और मंत्रों के संस्कृत में होने का कारण है संस्कृत ही देववाणी है।

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