
अशौच निर्णय pdf सहित । भाग १ । अशौच के प्रकार । सूतक क्या होता है
शुचि का अर्थ होता है पवित्र, शुद्ध, निर्मल, देव-पितृ कर्म के योग्य, आदि। इसी के आगे अशुचि का अर्थ होता है शुचि अर्थात शुद्धता, पवित्रता, निर्मलता, देवपितृ कर्म की योग्यता आदि का अभाव होना। अतः अशुचि अपवित्रता, अशुद्धि, देव-पितृ कर्म में अयोग्यता का बोधक है।