
नवार्ण जप विधि , सप्तशती न्यास – श्री दुर्गा सप्तशती पाठ
“ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” – यहां प्रणवरहित पक्ष का अवलंबन किया गया है।
“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” – कई पुस्तकों में और अधिकतर गीताप्रेस की पुस्तक का प्रयोग होता है इस कारण सप्रणव प्रयोग होता है।