नवार्ण जप विधि , सप्तशती न्यास – श्री दुर्गा सप्तशती पाठ

नवार्ण जप विधि , सप्तशती न्यास – श्री दुर्गा सप्तशती पाठ

“ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” – यहां प्रणवरहित पक्ष का अवलंबन किया गया है।
“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” – कई पुस्तकों में और अधिकतर गीताप्रेस की पुस्तक का प्रयोग होता है इस कारण सप्रणव प्रयोग होता है।

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दुर्गा पूजा विधि मंत्र सहित

दुर्गा पूजा विधि मंत्र सहित

दुर्गा पूजा विधि – ॐ अद्यैतस्य ब्रह्मणोह्नि द्वितीय परार्द्धे ……… सपरिवारस्योपस्थित शरीराविरोधेन महाभयाभावपूर्वक विपुलधन धान्य सुतान्विताऽतुल विभूति चतुर्वर्ग फलप्राप्तिपूर्वक सर्वाऽरिष्ट निवारणार्थं सकल मनोरथ सिद्ध्यर्थं श्रीदुर्गायाः प्रीत्यर्थं साङ्गसायुधसवाहन सपरिवारायाः भगवत्याः श्रीदुर्गादेव्याः पूजनमहं करिष्ये ।

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