यहां पढ़ें कुमारी सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - kumari sahasranama stotram

यहां पढ़ें कुमारी सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में – kumari sahasranama stotram

यहां पढ़ें कुमारी सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में – kumari sahasranama stotram : रुद्रयामल तंत्र में कुमारी सहस्रनाम स्तोत्र दिया गया है जो बहुत ही प्रभावशाली है। इसमें बताया गया है कि “धनधान्यसुतप्रदम्” अर्थात यह स्तोत्र धन-धान्य-सुत प्रदायक है। इसी प्रकार यश, विजय, लाभ, शांति आदि कामनाओं को पूर्ण करने वाला है। सहस्रनामों से होमपूर्वक यजन करने से सिद्धि की प्राप्ति होती है।

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यहां पढ़ें कुमारी स्तोत्र संस्कृत में - kumari stotra

यहां पढ़ें कुमारी स्तोत्र संस्कृत में – kumari stotra

यहां पढ़ें कुमारी स्तोत्र संस्कृत में – kumari stotra : कुमारी पूजा की भी विशेष विधि और मंत्र शास्त्रों में मिलता है। कुमारी उपासना में कुमारी कवच, अष्टोत्तर शतनाम आदि भी मिलते हैं। kumari stotra : यहां कुमारी कवच स्तोत्र और कुमारी अष्टोत्तरशत नामावली दिया गया है जो कुमारी पूजन में विशेष लाभकारी है।

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यहां पढ़ें दुर्गा पञ्जर स्तोत्र संस्कृत में - durga panjar stotram

यहां पढ़ें दुर्गा पञ्जर स्तोत्र संस्कृत में – durga panjar stotram

यहां पढ़ें दुर्गा पञ्जर स्तोत्र संस्कृत में – durga panjar stotram : माता दुर्गा का पंजर स्तोत्र मार्कण्डेय पुराण में वर्णित है। यहां विनियोग और ध्यान सहित संस्कृत में दुर्गा पंजर स्तोत्र है।

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दुर्गा पूजा : पत्रिकाप्रवेश विधि, महासप्तमी पूजा, नवपत्रिका पूजा

पत्रिकाप्रवेश : नवपत्रिका पूजा, महासप्तमी पूजा – 9 patrika puja

सप्तमी के दिन किये जाने वाले पूजा को पत्रिकाप्रवेश : नवपत्रिका पूजा, महासप्तमी पूजा – पत्रिका प्रवेश और महासप्तमी पूजा कहा जाता है। यहां बिल्वानयन, पत्रिकाप्रवेश, नवपत्रिका पूजन और महासप्तमी पूजन विधि एवं मंत्र दिये गये हैं।

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दुर्गा आपदुद्धारक स्तोत्र हिन्दी अर्थ सहित – durga apaduddharaka stotram

दुर्गा आपदुद्धारक स्तोत्र हिन्दी अर्थ सहित – durga apaduddharaka stotram

दुर्गा आपदुद्धार स्तोत्र सिद्धीश्वरीतंत्र में उमामहेश्वर संवाद के रूप में वर्णित है।
इसके पाठ से सभी प्रकार के आपदाओं का निवारण होता है।
प्राणीमात्र के लिये सबसे बड़ी आपदा जन्म-मृत्यु का बंधन है।
इसके साथ ही सांसारिक जीवन में भी कई प्रकार के आपत् देखे जाते हैं।
दुर्गा आपदुद्धार स्तोत्र का पाठ करना सांसारिक आपत् का भी निवारक है।

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दुर्गा पूजा विधि मंत्र सहित

दुर्गा पूजा विधि मंत्र सहित

दुर्गा पूजा विधि – ॐ अद्यैतस्य ब्रह्मणोह्नि द्वितीय परार्द्धे ……… सपरिवारस्योपस्थित शरीराविरोधेन महाभयाभावपूर्वक विपुलधन धान्य सुतान्विताऽतुल विभूति चतुर्वर्ग फलप्राप्तिपूर्वक सर्वाऽरिष्ट निवारणार्थं सकल मनोरथ सिद्ध्यर्थं श्रीदुर्गायाः प्रीत्यर्थं साङ्गसायुधसवाहन सपरिवारायाः भगवत्याः श्रीदुर्गादेव्याः पूजनमहं करिष्ये ।

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