
शिववास विचार – शिव वास देखने का नियम , फल और परिहार।
मुख्य रूप से जब शिव का प्रथम आवाहन करना होता है तब शिववास का विचार करना आवश्यक होता है तथापि बहुत विद्वान रुद्राभिषेक के लिये भी शिववास विचार करने का मत व्यक्त करते हैं।
मुख्य रूप से जब शिव का प्रथम आवाहन करना होता है तब शिववास का विचार करना आवश्यक होता है तथापि बहुत विद्वान रुद्राभिषेक के लिये भी शिववास विचार करने का मत व्यक्त करते हैं।
जब भी घर का निर्माण करना होता है तो निर्माण से पूर्व अनेकानेक विचार करके फिर गृहारंभ का मुहूर्त बनाया जाता है। मुहूर्त निर्धारण तो पंचांगकर्ता ज्योतिर्विद ही किया करते हैं और पंचांगों में अंकित करते हैं।
यह आलेख भोजनालय व्यवसाय की वृद्धि के उपायों पर केंद्रित है, जिसमें ग्रहों के प्रसन्नता का महत्व बताया गया है। यदि किसी का व्यवसाय मिठाईयों आदि पर है, तो चंद्र ग्रह को प्रसन्न करना चाहिए, जबकि यदि नास्ते-भोजन आदि मुख्य वस्तु है, तो शुक्र ग्रह को प्रसन्न करना चाहिए।
इस पोस्ट में यदि किसी व्यापार की वृद्धि नहीं हो रही हो, तो उसके व्रद्धि के लिए उपायों पर विचार किया गया है। इसमें बताया गया है कि सेवाओं को बेहतर बनाने, ग्राहकों की आवश्यकताओं को समझने, व्यापार स्थल को स्वच्छ बनाए रखने, कर्तव्यनिष्ठा और आत्मनिरीक्षण के माध्यम से व्यापार की संभावनाएं बढ़ाई जा सकती हैं। सबसे महत्वपूर्ण उपाय के रूप में, अपने व्यापार के वस्तु के ग्रह को समझने और उसके प्रति सकारात्मक रवैया अपनाने का सुझाव दिया गया है। यहां कई तरह की वस्तुओं और उनके संबंधित ग्रहों, मंत्रों की चर