विष्णु दिव्य सहस्रनाम स्तोत्रम् - vishnu divya sahasranama stotram

विष्णु दिव्य सहस्रनाम स्तोत्रम् – vishnu divya sahasranama stotram

भगवान विष्णु के अनेकानेक सहस्रनाम स्तोत्रों में से एक महाभारत में भी है जो भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को उपदेश किया था। इसे विष्णु दिव्य सहस्रनाम (vishnu divya sahasranama stotram) से जाना जाता है। युधिष्ठिर ने भीष्म पितामह से पूछा था किस एक देवता की अराधना करनी चाहिये जो परम फलदायी हो, सभी धर्मों में परम धर्म क्या है, क्या जप करने से जीव जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है ? तो भीष्म पितामह ने उन्हें विष्णु दिव्य सहस्रनाम स्तोत्र का उपदेश दिया।

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विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - vishnu sahasranamam stotra

विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में – vishnu sahasranamam stotra

यदि हम भगवान विष्णु के सहस्रनाम की बात करें तो इसका मुख्य तात्पर्य होगा विष्णु नाम से वर्णित सहस्रनाम, क्योंकि भगवान विष्णु के अनेकों नाम से भी सहस्रनाम स्तोत्र (vishnu sahasranamam stotra) मिलते हैं। विभिन्न पुराणों में भगवान विष्णु के भी अनेकों सहस्रनाम स्तोत्र मिलते हैं जिनमें से दो प्रमुख विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र यहां दिया गया है। प्रथम गरुड़पुराणोक्त है और द्वितीय स्कन्द पुराणोक्त।

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