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त्रिक/त्रीतर (तेतर दोष) शांति विधि – trik shanti puja

त्रिक/त्रितर (तेतर) शांति विधि - Trik shanti त्रिक/त्रितर (तेतर) शांति विधि - Trik shanti

त्रीतर शांति पूजन विधि

सपत्नीक यजमान नवग्रह मण्डल देवताओं का पूजन कर ले। यदि वास्तु वेदी बनायी गयी हो तो पहले वास्तु पूजन करके फिर नवग्रह मंडल पूजन करे। आहुति की संख्या अष्टोत्तर शत ग्रहण की गयी हो तो वास्तु मंडल की आवश्यकता नहीं होगी।

तदनन्तर नवग्रह मंडल के ईशान कोण में पांच धान्यराशि बनाकर उसपर पांच कलश स्थापन करे। फिर यदि ब्रह्मादि देवताओं की स्वर्ण प्रतिमा आदि हो तो अग्न्युत्तारण करके प्राण-प्रतिष्ठा करे अन्यथा कलश पर ही क्रमशः आवाहन पूजन करे।

ब्रह्मा का आवाहन मंत्र (पूर्व कलश) : ॐ ब्रह्म यज्ञानं प्रथमं पुरस्ताद्विसीमतः सुरुचो वेनऽआवः। सबुध्न्या उपमाऽअस्य विष्ठाः सतश्च योनिमसश्च विवः॥ ॐ भूर्भुवःस्वः ब्रह्मणे नमः, ब्रह्मन् इहागच्छ, इह तिष्ठ॥

विष्णु का आवाहन मंत्र (दक्षिण कलश) : ॐ इदं विष्णुर्विचक्रमे त्रेधा निदधे पदं। समूढमस्य पा ᳪ सुरे स्वाहा ॥ ॐ भूर्भुवः स्वः विष्णो इहागच्छ इह तिष्ठ। ॐ भूर्भुवः स्वः विष्णवे नमः, विष्णो इहागच्छ, इह तिष्ठ ॥

महेश आवाहन मंत्र (पश्चिम कलश) : ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ ॐ भूर्भुवः स्वः महेशाय नमः, महेश विष्णो इहागच्छ, इह तिष्ठ ॥

इन्द्र का आवाहन मंत्र (उत्तर कलश) : ॐ यत इन्द्र भयामहे ततो नोऽअभयं कृधि । मघवञ्छग्धि तव तन्न ऊतये उतिभिर्विद्विषो विमृधो जहि ॥ ॐ भूर्भुवः स्वः इन्द्राय नमः, इन्द्र इहागच्छ, इह तिष्ठ ॥

रुद्र का आवाहन मंत्र (मध्य कलश) : ॐ नमस्ते रुद्र मन्यव ऽउतो त ऽइषवे नमः॥ बाहुब्भ्यामुत ते नमः॥ ॐ भूर्भुवः स्वः एकादशरुद्रेभ्यो नमः, एकादशरुद्राः इहागच्छत इह तिष्ठत॥

कलश में देवताओं के आवाहन का यदि क्रम सिद्ध होता है और कर्मकांड रत्नाकर में भी यही क्रम दिया गया है। तदनन्तर सूक्त जापक (वैदिक ब्राह्मण) रुद्र कलश को स्पर्श करके चारों रुद्रसूक्त का ग्यारह बार पाठ करके शांति सूक्त का पाठ करें :

विनियोग : ॐ कद्रुद्रायेति रुद्रसूक्त स्याष्टमंत्राणां कण्वऋषिर्गायत्रीछन्दो रुद्रोदेवता पाठेविनियोगः ॥

विनियोग : ॐ यास्तेइत्यस्य कण्वऋषिरनुष्टुप्छन्दः रुद्रोदेवता पाठेविनियोगः ॥

विनियोग : ॐ इमामद्रायेतिरुद्रसूक्तस्य नव मंत्राणां कृत्सऋषिर्जगतीछन्दः रुद्रोदेवतापाठे विनियोगः ॥

विनियोग : ॐ उपते, इतिरुद्रसूक्तस्य मन्त्रयोः कुत्सऋषिस्त्रिष्टुप छन्दः रुद्रोदेवता पाठेविनियोगः ॥

इतिद्वितीयः ।

विनियोग : ॐ आतेपितः, इतिपश्चदशमन्त्राणां गृत्समदऋषिर्जगतीछन्दांसि रुद्रोदेवता तृतीयरुद्रसूक्त पाठे विनियोगः ॥

इतितृतीयसूक्तः ॥

विनियोग : ॐ इमारुद्रायेतिचतुर्णामन्त्राणां वशिष्ठऋषिर्जगतीछन्दो रुद्रोदेवता शान्तिकर्मणिचतुर्थ रुद्रसूक्तपाठे विनियोगः ॥

इन चारों ऋग्वेदोक्त रुद्रसूक्तों की एकादशावृत्ति पाठ करके शांतिसूक्त पाठ करे

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