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डिजिटल मायाजाल: क्या AI और इंटरनेट आपकी धार्मिक आस्था को भ्रमित कर रहे हैं - AI and Dharm

डिजिटल मायाजाल: क्या AI और इंटरनेट आपकी धार्मिक आस्था को भ्रमित कर रहे हैं – AI and Dharm

डिजिटल मायाजाल: क्या AI और इंटरनेट आपकी धार्मिक आस्था को भ्रमित कर रहे हैं – AI and Dharm : AI और इंटरनेट के माध्यम से फैल रहे भ्रामक धार्मिक तथ्यों का विस्तृत विश्लेषण। इस आलेख में समझें कि Deepfake तकनीक, AI Hallucination और सोशल मीडिया प्रोपेगेंडा कैसे हमारी धार्मिक समझ को प्रभावित कर रहे हैं। स्वयं को जागरूक रखें।

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मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी एक ही दिन: गृहस्थ क्या करें? व्रत रखें या खिचड़ी खाएं? जानें शास्त्रोक्त समाधान

मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी एक ही दिन: गृहस्थ क्या करें? व्रत रखें या खिचड़ी खाएं? जानें शास्त्रोक्त समाधान

मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी एक ही दिन: गृहस्थ क्या करें? व्रत रखें या खिचड़ी खाएं? जानें शास्त्रोक्त समाधान : Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी एक ही दिन होने पर व्रत और दान का सही निर्णय। जानें गृहस्थों के लिए उपवास के नियम, तिल का महत्व और खिचड़ी सेवन पर शास्त्रों के प्रमाण। पूरी जानकारी यहाँ।

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प्रगति या पतन? शोधपरक विश्लेषण: कैसे आधुनिकता ने छीना हमारा स्वास्थ्य और सुख-चैन - Modern vs. Traditional Lifestyle

प्रगति या पतन? शोधपरक विश्लेषण: कैसे आधुनिकता ने छीना हमारा स्वास्थ्य और सुख-चैन – Modern vs. Traditional Lifestyle

प्रगति या पतन? शोधपरक विश्लेषण: कैसे आधुनिकता ने छीना हमारा स्वास्थ्य और सुख-चैन – Modern vs. Traditional Lifestyle : लेख में जानें कैसे आधुनिक जीवन शैली हमारे स्वास्थ्य और मानसिक शांति को प्रभावित कर रही है। प्राचीन जीवन शैली और वर्तमान जीवन के बीच शोधपरक तुलना के साथ खोजें स्वस्थ जीवन का रहस्य और प्रकृति की ओर वापसी के उपाय।

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गया श्राद्ध और मृताह श्राद्ध

दूध का दूध और पानी का पानी, गया श्राद्ध की गजब कहानी

गया श्राद्ध की शास्त्रों में अतिशय महत्वपूर्ण स्थान और माहात्म्य है। यहां तक कहा गया है कि पितरगण लालायित रहते हैं कि मेरे वंश में कोई गया श्राद्ध करे । गया श्राद्ध की महिमा का वर्णन करना संभव नहीं है और इस असीम महिमा के कारण लोगों की धारणायें भी शास्त्र-उल्लंघन करने वाली हो रही है।

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लखि सुबेष जग बंचक जेऊ। बेष प्रताप पूजियउ तेहु॥

लखि सुबेष जग बंचक जेऊ। बेष प्रताप पूजियउ तेहु॥

लखि सुबेष जग बंचक जेऊ। बेष प्रताप पूजियउ तेहु॥ : जनभावना और भारतीय परंपरा या व्यवहार यही है कि गांवों के लोग आज भी “न जाने किस वेश में नारायण मिल जाय” में विश्वास रखते हैं भले ही कितने ही पाखंडियों ने ठगा क्यों न हो।

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भक्ति की शक्ति भाग २

भक्ति की शक्ति भाग 2

भक्ति की शक्ति का वर्णन यदि भगवान भी करना चाहें तो बड़ी विकट स्थिति उत्पन्न हो जायेगी। भगवान स्वयं भी स्वयं का पूर्ण वर्णन नहीं कर सकते हैं और जैसे भगवान स्वयं का वर्णन नहीं कर सकते वैसे ही भक्ति की महिमा या शक्ति का वर्णन भी नहीं कर सकते।

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भक्ति की शक्ति भाग - १

भक्ति की शक्ति भाग – 1

भक्ति की शक्ति : ये विज्ञान का अहंकार है जो चमत्कार को अस्वीकार करता है। ये विज्ञान की तानाशाही है जो ऐसे कानून बनवा देता है जिससे चमत्कार संबंधी वार्तालाप भी अपराध सिद्ध हो जाये। हमें उस कानून के बारे में विशेष ज्ञात तो नहीं कि वो कानून क्या कहता है और हमारा आलेख किसी प्रकार से उस कानून का उल्लंघन भी करता है या नहीं, तदपि यदि ऐसा कानून है जिसका इस आलेख से उल्लंघन हो रहा हो तो वो कानून गलत है उस कानून को बदलने की आवश्यकता है।

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भक्ति मार्ग की प्राचीनता

भक्ति मार्ग की प्राचीनता

भक्ति मार्ग की प्राचीनता : भारत की संस्कृति और सनातन का इतिहास पुस्तकों में ही नहीं नदियों और पहाड़ों में भी लिखी हुयी है किन्तु यदि उसे झुठलाने का ही दुराग्रह लेकर इतिहास लिखा जाये तो ये षड्यंत्र के अतिरिक्त और कुछ नहीं माना जा सकता। आधुनिक भारतीय इतिहास को संवत से क्यों नहीं व्यक्त किया जा सकता ?

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सुख कैसे प्राप्त करें | सुख प्राप्ति के शाश्वत उपाय

सुख कैसे प्राप्त करें | सुख प्राप्ति के शाश्वत उपाय

सुख कैसे प्राप्त करें : शांति प्राप्त करना सुख है, विश्राम करना सुख है। एक पथिक जो यात्रा (श्रम) कर रहा है वह दुःख प्राप्त कर रहा है; पैर दुखने लगता है, शरीर थक जाता है, मन व्यथित होने लगता है आदि-आदि। जब विश्राम करता है तो सुख का अनुभव करता है, जो दुःख भुगत रहा था उससे आराम मिलता है, पैर का दर्द मिलना बंद हो जाता है और दर्द दूर भी होने लगता है, शरीर की थकान दूर होने लगती है। यह सुख को समझने का एक उदहारण है।

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स्वर्ग नरक सब यहीं है, सुख ही स्वर्ग और दुःख नरक है

स्वर्ग नरक क्या है ? स्वर्ग नरक सब यहीं है, सुख ही स्वर्ग और दुःख नरक है

स्वर्ग नरक क्या है : शास्त्रों में ऐसा प्रमाण नहीं है जो यह सिद्ध करता हो कि स्वर्ग और नरक कुछ भी पृथक नहीं है और संसार में ही स्वर्ग नरक है, ऐसा प्रमाण नहीं मिलता है कि सुख ही स्वर्ग है और दुःख ही नरक है। काव्यों में सुख की स्वर्ग से और दुःख की नरक से तुलना करने की परंपरा अवश्य रही है।

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