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कर्म का फल भोगना ही पड़ता है तो दुःख का कारण अज्ञान कैसे

कर्म का फल भोगना ही पड़ता है तो दुःख का कारण अज्ञान कैसे

कर्म का फल : एक ओर कर्मफल के भुक्ति का प्रमाण है वहीं दूसरी ओर दुःख का कारण अज्ञान है ये प्रमाण है, परस्पर विरोधाभाषी प्रतीत होता है, यदि कर्मफल के कारण सुख-दुःख की प्राप्ति होती है तो फिर अज्ञान कैसे कारण सिद्ध होता है। वहीं कर्म के विषय में भी ऐसा प्रमाण है कि बिना भोगे कर्म का क्षय नहीं होता है तो दूसरी ओर पाप नाश का भी प्रमाण है और अनंत कथायें हैं जिसमें भगवान की कृपा से पाप का नाश भी होता है यह सिद्ध होता है।

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क्या संसार में कोई सुखी नहीं है, दुःख के प्रकार

क्या संसार में कोई सुखी नहीं है, दुःख के प्रकार

दुःख के प्रकार : “आहार निद्रा भय मैथुनं च” ये चार चीजें सभी प्राणियों में समान रूप से ही पायी जाती है। इन चार चीजों के कारण मनुष्य अन्य किसी प्राणियों से तनिक भी भिन्न नहीं है तथापि भिन्न है भी। ये भिन्नता वर्त्तमान युग में अत्यधिक दिखती है।

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दुःख ही जनम भेल दुःख ही गंवाओल, सुख सपनेहुं नहीं भेल

जन्म दुःखं जरा दुःखं : दुःख ही जनम भेल दुःख ही गंवाओल, सुख सपनेहुं नहीं भेल

जन्म दुःखं जरा दुःखं : धर्मराज युधिष्ठिर, गांडीवधारी अर्जुन, गदाधारी भीम, भाला वाला नकुल सहदेव, साथ में सहयोगी थे साक्षात् नारायणावतार भगवान श्रीकृष्ण। लेकिन कितना दुःख झेला था ये तो सोचो ? इनको दुःख क्यों मिला ? इन्हें तो संसार के सर्वश्रेष्ठ सुखी व्यक्तियों में जाना जाया चाहिये था। इनके जीवन चरित्र का अवलोकन करो और ज्ञात करो कब सुख भोगा था।

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आप दुःखी क्यों हैं - why are u sad

आप दुःखी क्यों हैं – why are u sad

why are u sad : संसार का एक नाम ही दुःखालय है। जैसे पुस्तकालय में पुस्तक मिलता है, औषधालय में औषधि, चिकित्सालय में चिकित्सा, विद्यालय में विद्या, वस्त्रालय में वस्त्र उसी प्रकार दुःखालय में क्या होगा या मिलेगा यह समझना अधिक कठिन नहीं है, समस्या इसे मानने और न मानने की है।

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जागते रहो : सच्चे बाबा और पाखंडी बाबा को कैसे पहचाने

दूध के धुले नेता और दूध की धुली मीडिया लालटेन लेकर ढूंढने पर भी नहीं मिलेंगे लेकिन सच्चे बाबा की कमी नहीं है हां कुछ पाखंडी भी अपना व्यापार चला रहे हैं और उन पाखंडियों से सच्चे बाबा स्वयं भी त्रस्त हैं क्योंकि कभी बाबा को चोर समझकर पीटा जाता है तो कभी कुछ और समझकर। कई जगहों पर झूठा आधार कार्ड बनाकर मुसलमान भी बाबा बना हुआ पकड़े जाते रहे हैं।

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वर्ण व्यवस्था की उत्पत्ति के सिद्धांत

जागते रहो : बाबाओं का लगा है मेला, हो रहा है ठेलम-ठेला

यत्र-तत्र-सर्वत्र उन चोर-उचक्कों ने वेष बदल कर, तिलक लगाकर, मालाओं का बोझ उठाते हुये बाबाओं का रूप धारण कर लिया है और इनसे बचाने वाला कोई नहीं है। जो भी हैं इनका सहयोग ही करते हैं चाहे मीडिया हो या राजनीति, सिस्टम हो या इको सिस्टम ! सबकी मोटी कमाई होती है, किसी को नोट मिलता है तो किसी को वोट।

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एक्सीडेंटल हिन्दू जवाहर लाल नेहरू के परनाती, फिरोज खान का पोता राहुल गांधी क्या हिन्दू है

हिंदूद्रोही राहुल गांधी के अक्षम्य अपराध और हिन्दुओं से असीमित घृणा रखने के कारण इसे एक ही शब्द से सम्बोधित किया जाना चाहिये वो शब्द हिन्दुद्रोही है। ये सम्मान का पात्र नहीं है भले ही कितने भी बड़े पद पर हो, इसके लिये सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करना अनुचित है।

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ये कौन लोग मंदिरों में जमे हुये हैं जब-जैसे जो करे पूजा करा देते हैं

किन्तु पुनः प्रश्न है कि ज्ञाननगरी काशी में भगवान विश्वनाथ मंदिर में भी ऐसे ब्राह्मण किस प्रकार जमे हुये हैं जो बिना धोती-धारण किये पूजा करा रहे थे ? अमित शाह ने एक हाथ से प्रणाम किया, तो ब्राह्मणों ने बताया क्यों नहीं कि दोनों हाथ से प्रणाम करें ?

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क्या आप दृष्टिकोण का अर्थ जानते हैं ? दृष्टिकोण के प्रकार, उपादेयता समग्र जानकारी

दृष्टिकोण का अर्थ : दृष्टिकोण में दो शब्द हैं दृष्टि और कोण। दृष्टि का अर्थ देखना है और कोण का अर्थ एक आंशिक भाग होता है। प्रत्यक्ष नेत्रों से भी जब हम किसी वस्तु को देखते हैं तो वह आंशिक भाग ही दिखता है सम्पूर्ण नहीं।

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व्रात्य - Vraty

उपनयन संस्कार और व्रात्य

उपनयन संस्कार और व्रात्य, व्रात्य का अर्थ – ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य तीनों वर्णों के लिये यज्ञोपवीत की एक सुनिश्चित अवधि है, व्रात्य का अर्थ होता है उस अवधि का अतिक्रमण हो जाना। निर्धारित अवधी व्यतीत हो जाने पर जिस व्यक्ति का उपनयन नहीं होता अथवा 10 संस्कारों का लोप हो जाता है उसे व्रात्य कहा जाता है ।

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