दुर्गा सप्तशती पाठ अध्याय 3

दुर्गा सप्तशती पाठ अध्याय 3

द्वितीय चरित्र में के तीन अध्यायों में से दूसरे और सप्तशती के तीसरे अध्याय में देवी के साथ महिषासुर का भयंकर युद्ध होता है और सेनापतियों के साथ महिषासुर के वध की कथा है। देवी द्वारा पहले चिक्षुर, चामरादि सेनापतियों का वध होता है तत्पश्चात महिषासुर का जिसके पश्चात् देवताओं में हर्ष का संचार होता है। तृतीय अध्याय में उवाचादि सहित कुल ४४ श्लोक हैं जो प्रथम अध्याय से गणना करने पर कुल २१७ होते हैं। तृतीय अध्याय में ३ उवाच और ४१ श्लोक हैं। यहां दुर्गा सप्तशती का तीसरा अध्याय दिया गया है।

॥ ध्यानम् ॥

दुर्गा सप्तशती तृतीय अध्याय का सारांश :

  • दुर्गा सप्तशती के तृतीय अध्याय में महिषासुर की सेना और महिषासुर से युद्ध का वर्णन है।
  • बहुत सारी सेनाओं के नाश से महिषासुर का सेनापति चिक्षुर कुपित होकर युद्ध करने आया और देवी के हाथों मारा गया।
  • चिक्षुर के बाद देवताओं को बहुत पीड़ित करने वाला चामर नामक दैत्य हाथी पर सवार होकर देवी से लड़ने के लिए आया।
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ
  • कुछ ही काल में चामर भी मारा गया फिर क्रमशः वाष्कल, अन्धक, उग्रास्य, उग्रवीर्य, महाहनु, विडाल, दुर्धर, दुर्मुख सहित बहुत सारी सेना को देवी ने यमलोक पहुंचा दिया।
  • जब महिषासुर ने देखा कि देवी ने मेरी सेना को नष्ट कर दिया है तो वह भैंसे का रूप धारण कर देवी के गणों को दु:ख देने लगा।
  • देवी के साथ महिषासुर का भयंकर युद्ध हुआ। महिषासुर ने कई प्रकार की माया का भी प्रयोग किया किन्तु अंततः देवी के हाथों मारा गया।
  • इसके पश्चात सारी राक्षस सेना हाहाकार करती हुई वहाँ से भाग खड़ी हुई और सब देवता अत्यन्त प्रसन्न हुए तथा ऋषियों महर्षियों सहित देवी की स्तुति करने लगे, गन्धर्वराज गान करने तथा अप्सराएँ नृत्य करने लगी।

॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः सुशांतिर्भवतु सर्वारिष्ट शान्तिर्भवतु

आगे सम्पूर्ण दुर्गा सप्तशती के अनुगमन कड़ी दिये गये हैं जहां से अनुसरण पूर्वक कोई भी अध्याय पढ़ सकते है :

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