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भविष्यपुराणोक्त सत्यनारायण व्रत पूजा कथा – Satyanarayan Vrat Puja Katha

भविष्यपुराणोक्त सत्यनारायण व्रत पूजा कथा - Satyanarayan Vrat Puja Katha भविष्यपुराणोक्त सत्यनारायण व्रत पूजा कथा - Satyanarayan Vrat Puja Katha

तत्पश्चात कथा श्रवण करें। सम्पूर्ण श्रीसत्यनारायण व्रत कथा पृष्ठ पर जाने के लिये यहां क्लिक करें।

कथा श्रवण करने के पश्चात् पूर्णाहुति, आरती, पुष्पांजलि, प्रार्थना, प्रदक्षिणा, साष्टांग प्रणाम आदि करके विसर्जन करे और दक्षिणा करे।

आरती एवं भजन के लिये यहां क्लिक करें।

पुष्पांजलि

सत्यरूपं सत्यसंधं सत्यनारायणं हरिम् । यत्सत्यत्वेन जगतस्तं सत्यं त्वां नमाम्यहम् ॥
त्वन्मायामोहितात्मानो न पश्यंत्यात्मनः शुभम् । दुःखांभोधौ सदा मग्ना दुःखे च सुखमानिनः ॥
मूढोहं धनगर्वेण मदांधीकृतलोचनः । न जाने स्वात्मनः क्षेमं कथं पश्यामि मूढधीः ॥
क्षमस्व मम दौरात्म्यं तपो धाम्ने हरे नमः। आज्ञापयात्मदास्यं मे येन ते चरणौ स्मरे ॥

एष मंत्रपुष्पाञ्जलिः ॐ भूर्भुवः स्वः भगवते श्रीसत्यनारायणाय नमः ॥

प्रार्थना

प्रणमामि जगन्नाथ जगत्कारणकारकम् । अनाथनाथं शिवदं शरण्यमनघं शुचिम् ॥
अव्यक्तं व्यक्ततां यातं तापत्रयविमोचनम् ॥
नमः सत्यनारायणायास्य कर्त्रे नमः शुद्धसत्त्वाय विश्वस्यभर्त्रे ।
करालाय कालाय विश्वस्य हर्त्रे नमस्ते जगन्मङ्गलायात्ममूर्ते ॥
धन्योस्म्यद्य कृती धन्यो भवोद्य सफलो मम । वाङ्मनोगोचरो यस्त्वं मम प्रत्यक्षमागतः ॥

प्रदक्षिणा

यानि कानि च पापानि जन्मान्तर कृतानि च।
तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिण पदे-पदे ॥
पदे पदे या परिपूजकेभ्यः सद्योऽश्वमेधादिफलं ददाति ।
तां सर्वपापक्षयहेतुभूतां प्रदक्षिणां ते परितः करोमि ॥

साष्टांग प्रणाम

पापोऽहं पापकर्माऽहं पापात्मा पापसंभवः। त्राहिमां पुण्डरीकाक्षः सर्वपापहरो हरी॥

विसर्जन

  • ॐ श्रीर्पूजितासि प्रसीद प्रसन्ना भव क्षमस्व ; मयि रमस्व ॥
  • ॐ सरस्वती पूजितासि प्रसीद प्रसन्ना भव क्षमस्व ; मयि रमस्व ॥
  • ॐ आवाहित सर्वे विसर्जनीयादेवताः पूजिताःस्थ प्रसीदत प्रसन्नाः भवत क्षमस्व ; स्व-स्व स्थानं गच्छ ॥

ॐ यान्तु देवगणाः सर्वे पूजामादाय मामकीम्। इष्टकामप्रसिद्ध्यर्थं पुनरागमनाय च॥
ॐ भूर्भुवः स्वः भगवन् श्रीसत्यनारायण पूजितोसि प्रसीद प्रसन्नो भव क्षमस्व ; स्व स्थानं गच्छ ॥

दक्षिणा

ॐ अस्यां रात्रौ कृतैतत् श्रीसत्यनारायण पूजनकथाश्रवण प्रतिष्ठार्थं एतावद्द्रव्यमूल्यक (द्रव्याभाव में यद्दीयमानद्रव्यमूल्यक) हिरण्यं अग्निदैवतं यथानामगोत्रायब्राह्मणाय दक्षिणां दातुमहमुत्सृजे ॥

सत्य ही प्रत्यक्ष ब्रह्म है

मुहूर्ते समतीते तु भवेच्छतगुणा च सा। त्रिरात्रे तद्दशगुणा सप्ताहे द्विगुणा मता ॥
मासे लक्षगुणा प्रोक्ता ब्राह्मणानां च वर्द्धते । संवत्सर व्यतीते तु त्रिकोटिगुणा भवेत् ॥
कर्म्मं तद्यजमानानां सर्वञ्च निष्फलं भवेत् । सब्रह्मस्वापहारी च न कर्मार्होशुचिर्नर: ॥

प्रसाद वितरण

“सत्य ही प्रत्यक्ष ब्रह्म है, और कलियुग में सत्यनारायण ही प्रत्यक्ष फलदाता हैं।”

कर्मकांड विधि में शास्त्रोक्त प्रमाणों के साथ प्रामाणिक चर्चा की जाती है एवं कई महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा पूर्व भी की जा चुकी है। तथापि सनातनद्रोही उचित तथ्य को जनसामान्य तक पहुंचने में अवरोध उत्पन्न करते हैं। एक बड़ा वैश्विक समूह है जो सनातन विरोध की बातों को प्रचारित करता है। गूगल भी उसी समूह का सहयोग करते पाया जा रहा है अतः जनसामान्य तक उचित बातों को जनसामान्य ही पहुंचा सकता है इसके लिये आपको भी अधिकतम लोगों से साझा करने की आवश्यकता है।

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