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भविष्यपुराणोक्त सत्यनारायण व्रत पूजा कथा - Satyanarayan Vrat Puja Katha

भविष्यपुराणोक्त सत्यनारायण व्रत पूजा कथा – Satyanarayan Vrat Puja Katha

“भविष्यपुराण के अनुसार श्रीसत्यनारायण व्रत की प्रामाणिक विधि। जानें पंच-कलश स्थापन, स्वर्णयुक्त शालिग्राम पूजन, और कर्माधिकार के वे सूक्ष्म नियम जो सामान्यतः लुप्त हो चुके हैं। प्रातः संकल्प से लेकर प्रसाद वितरण तक का शास्त्रीय विश्लेषण।”

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सत्यनारायण पूजा विधि मंत्र सहित

सत्यनारायण पूजा विधि मंत्र सहित – Satyanarayan Puja Vidhi

सत्यनारायण पूजा विधि मंत्र सहित – Satyanarayan Puja Vidhi : १. पवित्रीकरण मंत्र : ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थाङ्गतोऽपि वा। य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: बाह्याऽभंतर: शुचि:॥ ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु ॥ हाथ में गंगाजल/जल लेकर इस मंत्र से शरीर और सभी वस्तुओं पर छिड़के ।२. आसन पवित्रीकरण मंत्र : ॐ पृथ्वि त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुनाधृता। त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्॥ इस मंत्र से आसन पर जल छिड़क कर आसनशुद्धि करें।

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पूजा क्या है ?

पूजा क्या है – Puja Kya hai

पूजा क्या है – Puja Kya hai : प्रत्येक मनुष्य जीवन में सुख, समृद्धि, शांति आदि की इच्छा करता है और जीवन के बाद भी स्वर्गादि की प्राप्ति हो। ये सभी कामना हैं जो दो प्रकार के सिद्ध होते हैं; पहला लौकिक और दूसरा पारलौकिक। शास्त्रों में चार पुरुषार्थ कहे गये हैं – धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। लेकिन पुरुषार्थ चतुष्टय भी इन दोनों प्रकारों में सन्निहित है। पूजा की सामान्य परिभाषा इस प्रकार से की जाती है कि जो लौकिक व पारलौकिक सुखों/भोगों को उत्त्पन्न करती है वह पूजा है। वास्तविक अर्थ में कल्याण कामना से भगवान, देवताओं, गुरु और ब्राह्मणों की विविध द्रव्यों से आराधना करना ही पूजा है। अन्यत्र आदर-सम्मान-सेवा-सुश्रुषा करना पूजा का समानार्थी है।

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