अनेकानेक विष्णु नाम स्तोत्र - vishnu naam stotra

अनेकानेक विष्णु नाम स्तोत्र – vishnu naam stotra

यदि हम भगवान विष्णु के नाम स्तोत्र की बात करें तो अनेकानेक नाम स्तोत्र मिलते हैं और इस आलेख की विशेषता यह है कि यहां भगवान विष्णु के अनेकों नाम स्तोत्र संकलित किये गये हैं यथा : विष्णोरष्टनामस्तोत्रम्, विष्णोरेकादशनामस्तोत्रं, विष्णु षोडश नाम स्तोत्र, श्रीविष्णुनामाष्टकं और विष्णोरष्टाविंशतिनामस्तोत्रम्। इसके अतिरिक्त नरसिंह पुराण में एक महादेवोक्त श्रीविष्णोर्नामस्तोत्रम् भी मिलता है और यहां विष्णु नाम स्तोत्र (vishnu naam stotra) भी संस्कृत में दिया गया है।

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पद्म पुराणोक्त विष्णु विजय स्तोत्र - vishnu vijaya stotram

पद्म पुराणोक्त विष्णु विजय स्तोत्र – vishnu vijaya stotram

पद्म पुराण में देवताओं द्वारा किया गया भगवान विष्णु का एक विशेष महत्वपूर्ण स्तोत्र है जिसे विष्णु विजय स्तोत्र (vishnu vijaya stotram) कहा गया है। इस स्तोत्र में देवताओं ने भगवान विष्णु के दशावतारों का वर्णन करते हुये स्तवन किया है, जिसके पश्चात् भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर देवताओं को वरदान दिया। व्यास जी फलश्रुति बताते हुये कहते हैं भक्ति व आदर पूर्वक इस स्तोत्र का जो पाठ करता है उसके लिये तीनों लोकों में कुछ भी दुर्लभ नहीं होता। इसके पाठ-श्रवण से शत गोदान जन्य पुण्य की प्राप्ति होती है।

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नारद पुराणोक्त श्री विष्णु रक्षा स्तोत्र - vishnu raksha stotram

नारद पुराणोक्त श्री विष्णु रक्षा स्तोत्र – vishnu raksha stotram

भगवान विष्णु भक्तों की रक्षा किस प्रकार करते हैं यह प्रह्लाद, ध्रुव, अम्बरीष, अर्जुन आदि की कथाओं से ज्ञात होता है। भगवान विष्णु जिसकी रक्षा करते हैं उसका कोई भी बाल बांका नहीं कर सकता है। हम सभी जानते हैं कि भगवान विष्णु का विशेष मंत्र द्वादशाक्षर है और यदि श्री विष्णु रक्षा स्तोत्र (vishnu raksha stotram) की बात करें तो इसमें द्वादश नामों से रक्षा कामना की गयी है। यह विष्णु रक्षा स्तोत्र नारद पुराण में वर्णित है जो यहां संस्कृत में दिया गया है।

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विष्ण्वष्टकम् : विष्णु अष्टक स्तोत्र संस्कृत में - vishnu ashtakam stotram

विष्ण्वष्टकम् : विष्णु अष्टक स्तोत्र संस्कृत में – vishnu ashtakam stotram

विष्णु अष्टक स्तोत्र (vishnu ashtakam stotram) भगवान विष्णु के प्रति अपनी भक्ति और श्रद्धा व्यक्त करने का एक सरल और प्रभावी माध्यम है। यह आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और सांसारिक कल्याण की प्राप्ति में सहायक होता है। स्तोत्र का पाठ मन को शांति और पवित्रता से भर देता है। भगवान विष्णु को जगत के पालनहार के रूप में स्मरण करने से भक्तों में सुरक्षा और स्थिरता की भावना आती है। यहां भगवान विष्णु के 3 अष्टक स्तोत्र दिये गये हैं।

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विष्णु स्तवन संस्कृत में - vishnu stavan

विष्णु स्तवन संस्कृत में – vishnu stavan

देवताओं के कुछ स्तोत्र ऐसे होते हैं जिनका नाम स्तवन होता है। भगवान विष्णु को प्रमुख देवता माना गया है और इनके अनेकों स्तवन पुराणों में मिलते हैं। यदि आप भगवान विष्णु के भक्त हैं और उनकी अराधना करते हैं तो आपको भगवान विष्णु के स्तवन की भी आवश्यकता होती है। यहां ३ प्रमुख विष्णु स्तवन (vishnu stavan) संस्कृत में दिया गया है जो इस प्रकार हैं : अदितिकृत बृहद्धर्मपुराणोक्त विष्णु स्तवन, गौरमुखकृत वराहपुराणोक्त विष्णु स्तवन और नरसिंह पुराणोक्त विष्णु स्तवन।

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विष्णु स्तवराज स्तोत्र संस्कृत में : Vishnu stavaraja stotram

विष्णु स्तवराज स्तोत्र संस्कृत में : Vishnu stavaraja stotram

किसी भी देवता के अनेकानेक स्तवनों में जो विशेष महत्वपूर्ण स्तोत्र होता है उसे स्तवराज स्तोत्र कहा जाता है। भगवान विष्णु के स्तवराज की भी चर्चा करें तो अनेकों मिलते हैं। यहां दो प्रमुख विष्णु स्तवराज स्तोत्र (Vishnu stavaraja stotram) संस्कृत में दिये गये हैं प्रथम नरसिंह पुराणोक्त है जो नारद जी के प्रश्न करने पर महेश्वर द्वारा बताया गया और दूसरा कल्किपुराणोक्त है जो पद्मा कृत है।

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विष्णु दिव्य सहस्रनाम स्तोत्रम् - vishnu divya sahasranama stotram

विष्णु दिव्य सहस्रनाम स्तोत्रम् – vishnu divya sahasranama stotram

भगवान विष्णु के अनेकानेक सहस्रनाम स्तोत्रों में से एक महाभारत में भी है जो भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को उपदेश किया था। इसे विष्णु दिव्य सहस्रनाम (vishnu divya sahasranama stotram) से जाना जाता है। युधिष्ठिर ने भीष्म पितामह से पूछा था किस एक देवता की अराधना करनी चाहिये जो परम फलदायी हो, सभी धर्मों में परम धर्म क्या है, क्या जप करने से जीव जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है ? तो भीष्म पितामह ने उन्हें विष्णु दिव्य सहस्रनाम स्तोत्र का उपदेश दिया।

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विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - vishnu sahasranamam stotra

विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में – vishnu sahasranamam stotra

यदि हम भगवान विष्णु के सहस्रनाम की बात करें तो इसका मुख्य तात्पर्य होगा विष्णु नाम से वर्णित सहस्रनाम, क्योंकि भगवान विष्णु के अनेकों नाम से भी सहस्रनाम स्तोत्र (vishnu sahasranamam stotra) मिलते हैं। विभिन्न पुराणों में भगवान विष्णु के भी अनेकों सहस्रनाम स्तोत्र मिलते हैं जिनमें से दो प्रमुख विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र यहां दिया गया है। प्रथम गरुड़पुराणोक्त है और द्वितीय स्कन्द पुराणोक्त।

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विष्णु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - vishnu ashtottara shatanama stotram

विष्णु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में – vishnu ashtottara shatanama stotram

क्या आप भगवान विष्णु का अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र (vishnu ashtottara shatanama stotram) ढूंढ रहे हैं ? यदि हां तो यहां आपको एक नहीं दो विष्णु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र मिलेगा। प्रथम स्तोत्र को श्रीविष्णोरष्टोत्तरशत दिव्यस्थानीयनाम स्तोत्र नाम से जाना जाता है और द्वितीय स्तोत्र शाक्तप्रमोद में वर्णित है।

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ब्रह्माण्डपावन विष्णु कवच स्तोत्र संस्कृत में - Brahmandapavan vishnu kavach

ब्रह्माण्डपावन विष्णु कवच स्तोत्र संस्कृत में – Brahmandapavan vishnu kavach

ब्रह्मवैवर्त पुराण में शौनक – सौति संवाद रूप में भगवान विष्णु का एक अद्भुत कवच वर्णित है जिसे ब्रह्माण्डपावन कवच (Brahmandapavan vishnu kavach) नाम से जाना जाता है। इस कवच पाठ का फल सहस्र अश्वमेध यज्ञ और शत वाजपेय यज्ञतुल्य बताया गया है। यह भी कहा गया है कि इस कवच को धारण करने वाला जीवन्मुक्त हो जाता है, विष्णुतुल्य हो जाता है।

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