अक्षय नवमी कब है – akshaya navami
अक्षय नवमी कब है : शास्त्र पुराणों में अक्षय नवमी का बहुत अधिक महत्व बताया गया है। अक्षय नवमी करने वाला अक्षय पुण्य का भागी बनकर सुख का भाजन बनता है, उसे यम यातना नहीं मिलती अर्थात नरक नहीं जाना पड़ता है।
सनातन में सांसारिक सुख की अपेक्षा आत्मकल्याण को अधिक महत्व दिया गया है और यहां तक कहा गया है कि आत्मकल्याण हेतु यदि सम्पूर्ण संसार का भी त्याग करना पड़े तो कर दे। आत्मकल्याण हेतु मनुष्य को निरंतर आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर रहने की आवश्यकता होती है और इसी लिये वर्ष पर्यन्त अनेकानेक व्रत-पर्व (Vrat-Parv) होते हैं। इस श्रेणी में वर्ष पर्यन्त होने वाले व्रत-पर्वों की जानकारी एवं उसकी पूजा विधि, मंत्र, कथा आदि संग्रहित किये गये हैं।
अक्षय नवमी कब है : शास्त्र पुराणों में अक्षय नवमी का बहुत अधिक महत्व बताया गया है। अक्षय नवमी करने वाला अक्षय पुण्य का भागी बनकर सुख का भाजन बनता है, उसे यम यातना नहीं मिलती अर्थात नरक नहीं जाना पड़ता है।
इस आलेख में छठ पूजा विधि बतायी गयी है एवं पूजा के मंत्र भी दिये गये हैं। इसमें छठ व्रत, नहाय-खाय, खरना, सायंकाल और प्रातः काल की पूजा तथा अर्घ्य दान, नमस्कार और विसर्जन की विधि का उल्लेख है। मंत्र समेत यह पूजा विधि, आधी हिंदू धर्म और संस्कृति में बहुत ही महत्त्वपूर्ण होती है। सूर्य को प्रत्यक्ष जल देने की अनुशंसा भी की गई है।
घर में लक्ष्मी क्यों नहीं आती है : यह पोस्ट माता लक्ष्मी की अकृपा और दरिद्रता के कारणों पर आधारित है। यह सुझाव देती है कि कुण्डली दोष, वास्तु दोष, पितृ दोष, कर्म का फल, धन का दुरुपयोग, और कुदृष्टि, इन सभी चीजों से बचना महत्वपूर्ण है। पितरों का श्राद्ध-तर्पण, ब्राह्मण और गाय की सेवा, और मंदिरों की सफाई, ये सब चीजें लक्ष्मी की कृपा को बनाए रखने में मदद करती हैं। अगर धन उपलब्ध हो, तो उसका उपयोग दान और भोग में करना चाहिए, नहीं तो उसका नाश संभावित है। इस पोस्ट में लक्ष्मी की अकृपा के प्रमुख कारणों पर प्रकाश डाला गया है
काली पूजा कब है : kali puja 2024 – कार्तिक कृष्ण अमावस्या को प्रदोषकाल में जहां लक्ष्मी पूजा होती है वहीं निशीथ यानि मध्य रात्रि में काली पूजा या श्यामा पूजा भी की जाती है। काली पूजा भी दुर्गा पूजा के तरह ही बड़े-बड़े पंडाल बनाकर किये जाते हैं। बंगाल में काली पूजा विशेष रूप से होती है और बिहार में भी बहुत धूम-धाम से किया जाता है।
उल्काभ्रमण का शास्त्रीय प्रमाण क्या है? पितृ विसर्जन कब करें? पितृ विसर्जन कैसे किया जाता है? – पितृपक्ष में यमलोक से पितृगण पृथ्वी पर अन्न-जलादि की आकांक्षा से आते हैं; और पितरों के आने से ही महालय सिद्ध होता है। पितृपक्ष में तर्पण-श्राद्ध आदि के द्वारा पितरों को अन्न-जलादि प्रदान किया जाता है। यदि पितर गण यमलोक से आते हैं तो वापस भी जाना ही चाहिए। कार्तिक अमावास्या को पितर वापस यमलोक जाते हैं।
अकाल मृत्यु से बचने के लिए क्या करना चाहिए : yam deep daan – अकाल मृत्यु का वास्तविक तात्पर्य है सहज मृत्यु न होकर वृद्धावस्था से पूर्व रोग, दुर्घटना आदि कारणों से मृत्यु होना । जिस किसी घर में अकालमृत्यु होती है वह घर विपत्ति में आ जाता है, शोकाकुल रहता है। अकालमृत्यु निवारण हेतु महामृत्युंजय जप
सोमवती अमावस्या कब है – सोमवती अमावस्या पूजा विधि : जब कभी भी अमावास्या के दिन सोमवार होता है तो उसे सोमवती अमावास्या कहा जाता है। अर्थात सोमवार और अमावास्या के योग को सोमवती अमावास्या कहा जाता है। आगे हम सोमवती अमावस्या से सम्बंधित सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर शास्त्रसम्मत चर्चा करेंगे।
सूर्य और छठी मैया में क्या संबंध है? छठ पूजा से क्या लाभ होता है? छठ व्रत 2024 में कब है? बिहार में छठ पूजा कब है 2024 ? इत्यादि-इत्यादि। यहां हम आपके सभी प्रश्नों का उत्तर ढूंढने का प्रयास करेंगे।
दीपावली की रात को क्या करना चाहिए? घर में दीपावली की पूजा कैसे करें? दीपावली के दिन लक्ष्मी जी की पूजा कैसे करें? इत्यादि। यहां हम आपके इन सभी प्रश्नों पर चर्चा करेंगे और दीपावली पर की जाने वाली पूजा विधि को भी समझेंगे।