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दुर्गा पूजा विधि मंत्र सहित

दुर्गा पूजा विधि मंत्र सहित

दुर्गा पूजा विधि – ॐ अद्यैतस्य ब्रह्मणोह्नि द्वितीय परार्द्धे ……… सपरिवारस्योपस्थित शरीराविरोधेन महाभयाभावपूर्वक विपुलधन धान्य सुतान्विताऽतुल विभूति चतुर्वर्ग फलप्राप्तिपूर्वक सर्वाऽरिष्ट निवारणार्थं सकल मनोरथ सिद्ध्यर्थं श्रीदुर्गायाः प्रीत्यर्थं साङ्गसायुधसवाहन सपरिवारायाः भगवत्याः श्रीदुर्गादेव्याः पूजनमहं करिष्ये ।

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दुर्गा पूजा सामग्री

दुर्गा पूजा सामग्री – durga puja samagri

दुर्गा पूजा सामग्री – durga puja samagri : यह सामग्री दुर्गा पूजा की पूजन विधि, सामग्री और महत्वपूर्ण तिथियों के बारे में जानकारी देती है। दुर्गा पूजा की सामग्री विशेष रूप से उल्लेखित की गयी है और उनकी सूची दी गयी है, जिसे डाउनलोड भी किया जा सकता है। यह विशेष रूप से नवरात्री और अक्षय नवमी आदि के दौरान दुर्गा पूजा के लिए है।

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पूजा विधि मंत्र सहित - कर्मकांड सीखना

पूजा विधि मंत्र सहित – कर्मकांड सीखना

कर्मकांड सीखना : यह भारतीय कर्मकांड की भौमिक को समझाने का प्रयास करता है। कर्मकांड का सीखना मिश्रित प्रक्रिया है जिसमें विभिन्न संस्कार, पूजन विधि, हवन विधि, और यज्ञ विधि शामिल हैं। एक कर्मकांडी बनने के लिए, सटीकता, इंद्रियों पर नियंत्रण, और सत्याग्रह की आवश्यकता होती है। यद्यपि ऑनलाइन साधारण कर्मकाण्ड उपयोगी मान गया है, लेकिन यह विशदीकरण के बिना शास्त्रीय कर्मकांड का प्रशिक्षण प्रदान करने में सक्षम नहीं होता है। वेबसाइट karmkandvidhi.com पर विस्तृत सामग्री उपलब्ध है जो कर्मकांड सीखने में सहायक हो सकती है।

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कर्मकांड के प्रकार

कर्मकांड के प्रकार

कर्मकांड के प्रकार : कर्मकांड के विभाजन की चर्चा करते समय हमें ‘कर्म (actions)’ के प्रकार को समझना नहीं चाहिए। यह भी स्पष्ट है कि वेदों के आधार पर कर्मकांड के प्रकार का विभाजन करने का विचार भी प्रासंगिक नहीं होता है। कर्मकांड को वास्तव में केवल दो प्रकार से विभाजित किया जा सकता है: 1) अब्राह्मण कर्मकांड, जिसे स्वयं किया जा सकता है और इसमें ब्राह्मण की आवश्यकता नहीं होती। 2) सब्रह्माण कर्मकांड, जिसे बिना ब्राह्मण के सम्पादन नहीं किया जा सकता है। अत: कर्मकांड की प्रकारों का निर्धारण कर्मों के आधार पर होता है, लेकिन वे कर्म के प्रकार से भिन्न हो

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कर्मकांड क्या है – Karmkand kya hai

कर्मकांड क्या है – Karmkand kya hai : कर्मकांड से पहले ‘कर्म’ और ‘कांड’ को समझना जरूरी है। कर्म जीवन में हमारे द्वारा किए गए सभी कार्य हैं, जो अनेक दृष्टीकोणों से विश्लेषित किए जा सकते हैं। ‘कांड’ हमारे द्वारा किए गए कार्यों के खंड, भाग या घटना होते हैं। ‘कर्मकांड’ में, ‘कर्म’ अध्यात्मिकता का एक खंड होता है और इस खंड के विधान को ‘कर्मकांड’ कहते हैं। इसका उद्देश्य लौकिक और पारलौकिक सुख की प्राप्ति का मार्ग प्रदान करना है।

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