राम हृदय स्तोत्र – ram hridaya stotra
राम हृदय स्तोत्र – ram hridaya stotra : अध्यात्म रामायण के बालकाण्ड में महादेव द्वारा श्री राम हृदय स्तोत्र (ram hridaya stotra) कहा गया है। यहां संस्कृत में श्री राम हृदय स्तोत्र दिया गया है।
राम हृदय स्तोत्र – ram hridaya stotra : अध्यात्म रामायण के बालकाण्ड में महादेव द्वारा श्री राम हृदय स्तोत्र (ram hridaya stotra) कहा गया है। यहां संस्कृत में श्री राम हृदय स्तोत्र दिया गया है।
श्रीरघुनाथमङ्गलस्तोत्रम् – Shri Raghunatha Mangala Stotram : श्रीरघुनाथमङ्गलस्तोत्रम् में भगवान राम के अनेकानेक नामों के साथ मंगलकामना की गयी है और इस स्तोत्र का विशेष महत्व बताते हुये अंत में बताया गया है कि इस स्तोत्र का जो पाठ करते हैं उनके सामने मंगलायतन हरि रहते हैं अर्थात मंगल ही मंगल होता है।
रामकृष्ण विलोम काव्य – ramakrishna viloma kavyam : दैवज्ञ सूर्य पंडित द्वारा रचित चौदहवीं शताब्दी का संस्कृत साहित्य की अप्रतिम रचना “रामकृष्ण विलोम काव्यम्” (रामकृष्णविलोमकाव्यं) एक बहुत ही रोचक व दुर्लभ काव्य रचना है।
श्रीराम आपदुद्धारकस्तोत्रम् – Shri Rama ApaduddhAraka stotram : संसार का एक नाम दुःखालय भी है अर्थात यहां दुःख-ही-दुःख मिलता है। जीव जन्म से मरणोपरांत आपदाओं से ही ग्रस्त रहता है और सबसे बड़ा दुःख या आपदा स्वयं संसारचक्र में पड़ा रहना ही है। सभी इस आपदा से मुक्ति चाहते हैं और भगवान श्रीराम के एक स्तोत्र आपदा से उद्धार करने वाला है जिसे श्रीराम आपदुद्धारकस्तोत्रम् (Shri Rama ApaduddhAraka stotram) नाम से जाना जाता है।
श्रीराघवस्तोत्रम् – Shri Raghava Stotram : रघु के वंशज होने के कारण भगवान श्रीराम को ही राघव भी कहा जाता है अर्थात भगवान राम का ही एक नाम राघव भी है। इनके लिये एक विशेष स्तोत्र भी है जिसका नाम राघव स्तोत्र “श्रीराघवस्तोत्रम्” (Shri Raghava Stotram) है जिसका भी विशेष महत्व बताया गया है और कहा गया है कि जो इस स्तोत्र का पाठ उनके लिये मोक्ष का द्वार खुल जाता है।
श्रीराम दुर्ग स्तोत्रम् – shri ram durga stotram : श्रीराम दुर्ग स्तोत्र नाना प्रकार के दुर्गम दुःखों का नाश करने वाला है, शत्रु बाधाओं का निवारण करने वाला है। श्रीराम दुर्ग स्तोत्र भी दो मिलते हैं और यहां दोनों ही श्रीराम दुर्ग स्तोत्र संस्कृत में दिये गये हैं।
राम कवच स्तोत्र – ram kavach stotra : भगवान श्रीराम का एक कवच आनन्द रामायण में अगस्त्यकृत”आजानुबाहुमरविन्ददलायताक्षमाजन्म” है और एक कवच स्तोत्र ब्रह्माण्डपुराण में है जो श्रीराम त्रैलोक्यमोहन वज्रपञ्जर स्तोत्र नाम से भी जाना जाता है।
पढ़िये श्री राम सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में – ram sahasranam : आनन्द रामायण में पार्वती द्वारा पूछने पर भगवान श्री शिव ने जो श्री राम सहस्रनाम का उपदेश किया वह बहुत ही महत्वपूर्ण है। यहां विनियोग, न्यास और ध्यान सहित आनन्द रामायणोक्त श्री राम सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है जिसमें कुल 171 श्लोक हैं।
यहां पढ़ें राम अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में – ram ashtottara shatanamavali : यदि हम भगवान श्री राम के अष्टोत्तर शतनाम की चर्चा करें तो अनेकानेक अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र हैं जिनमें से दो प्रमुख श्रीराम अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र यहां दिये गये हैं प्रथम पद्मपुराणोक्त रामाष्टोत्तर शतनाम और द्वितीय आनन्दरामायणोक्त रामाष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र।
पढ़िये श्री रामाष्टकं स्तोत्र संस्कृत में – ramashtakam stotram : जिस प्रकार से सभी देवी-देवताओं के लिये अष्टक स्तोत्र होते हैं भगवान श्री राम के भी अष्टक स्तोत्र हैं अर्थात 8 श्लोक में की गयी स्तुति जिसे रामाष्टकं स्तोत्र (ramashtakam stotram) कहा जाता है। यहां भगवान श्री राम के दो अष्टक स्तोत्र दिये गये हैं प्रथम आनन्द रामायणोक्त शिवकृत रामाष्टकं स्तोत्र और द्वितीय व्यास कृत रामाष्टकं स्तोत्र।