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संपूर्ण कर्मकांड विधि

संपूर्ण कर्मकांड विधि

मकर संक्रांति का महत्व और दान विधि - Makar Sankranti Significance

मकर संक्रांति का महत्व और दान विधि – Makar Sankranti Significance

मकर संक्रांति का महत्व और दान विधि – Makar Sankranti Significance : मकर संक्रांति का महत्व, दान विधि और शुभ मुहूर्त की संपूर्ण जानकारी प्राप्त करें। जानें सूर्य के उत्तरायण होने का धार्मिक व वैज्ञानिक कारण और संक्रांति पर तिल, खिचड़ी व वस्त्र दान के विशेष मंत्र और नियम।

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मकर संक्रांति कब है 14 या 15 को - Makar Sankranti

मकर संक्रांति कब है 14 या 15 को – Makar Sankranti

मकर संक्रांति कब है 14 या 15 को – Makar Sankranti : मकर संक्रांति 2024 में 15 जनवरी; सोमवार को होगी। मकर संक्रांति हर बार 14 जनवरी को होता है; तो अब 15 जनवरी को क्यों होगा? इसका उत्तर यह है कि सूर्य मकर राशि में 14 जनवरी की आधी रात के बाद प्रविष्ट होंगे। पुण्यकाल का निर्धारण यह स्वीकार करता है कि सूर्य का निकटतम उदित होने का दिन ही प्रमाणिक होता है। मकर संक्रांति का अर्थ है सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना। सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो देवताओं का दिन आरम्भ होता है। मकर संक्रांति में किया गया स्नान-दान विशेष पुण्यदायक होता है।

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षोडशोपचार पूजन विधि मंत्र - क्या है ?

षोडशोपचार पूजन विधि मंत्र – क्या है ?

षोडशोपचार पूजन विधि में 16 उपचारों से पूजा की जाती है।

पूजा की कई विधियां हैं जिनमें दो मुख्य हैं पञ्चोपचार एवं षोडशोपचार।

प्रधान देवता की षोडशोपचार पूजा ही करनी चाहिये।

षोडशोपचार पूजा में 16 उपचारों से; जो कि शास्त्रवर्णित है कम या हटकर नहीं होनी चाहिये।

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सरल पूजा विधि

सरल पूजा विधि या दैनिक पूजा विधि

सरल पूजा विधि या दैनिक पूजा विधि : सरल पूजा विधि वह होती है, जिसमें ब्राह्मणों और मंत्रों की आवश्यकता नहीं होती और उपलब्ध सामग्री से पूजा की जा सकती है। इसे दैनिक पूजा विधि भी कहा जाता है। स्थान की सफाई, पवित्र और धुले वस्त्रों में पूजा करना, और दैनिक पूजा एक निर्धारित समय और स्थान पर करना कुछ मूल नियम होते हैं। पूजा के समय आत्मा को संसार से उन्मुक्त करके, भगवान में लगाना चाहिए। दैनिक पूजा में सरलता एवं शास्त्रानुसार पञ्चोपचार पूजा विधि को माना जाता है, जहाँ चंदन, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य का ही उपयोग होता है।

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पूजा विधि मंत्र सहित - कर्मकांड सीखना

पूजा विधि मंत्र सहित – कर्मकांड सीखना

कर्मकांड सीखना : यह भारतीय कर्मकांड की भौमिक को समझाने का प्रयास करता है। कर्मकांड का सीखना मिश्रित प्रक्रिया है जिसमें विभिन्न संस्कार, पूजन विधि, हवन विधि, और यज्ञ विधि शामिल हैं। एक कर्मकांडी बनने के लिए, सटीकता, इंद्रियों पर नियंत्रण, और सत्याग्रह की आवश्यकता होती है। यद्यपि ऑनलाइन साधारण कर्मकाण्ड उपयोगी मान गया है, लेकिन यह विशदीकरण के बिना शास्त्रीय कर्मकांड का प्रशिक्षण प्रदान करने में सक्षम नहीं होता है। वेबसाइट karmkandvidhi.com पर विस्तृत सामग्री उपलब्ध है जो कर्मकांड सीखने में सहायक हो सकती है।

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Dharm : धर्म क्या है ? दुनिया का सबसे पुराना धर्म कौन सा है ?

Dharm : धर्म क्या है ? दुनिया का सबसे पुराना धर्म कौन सा है ?

Dharm – धर्म क्या है ? दुनिया का सबसे पुराना धर्म कौन सा है – धर्म एक जटिल विषय है जिसे समझने के लिए शास्त्रों का सन्दर्भ लेना पडता है। धर्म की परिभाषा ही है – वास्तविकता की सत्य धारणा जो वेदों द्वारा प्रेरित कर्त्तव्यों का पालन और अकर्त्तव्यों का त्याग करवाती है। वेद-विहित कार्य, वेद निषिद्ध कार्य, कर्त्तव्य और अकर्त्तव्य, सभी शास्त्रीय सिद्धांतों का हिस्सा होते हैं। सनातन धर्म, जो अनादि और अनंत है, किसी विचारधारा के समूह को नहीं इंगित करता, बल्कि एक कोणतीय धनुष की तरह सत्य जीवन के मार्ग को दर्शाती है। धर्मपालन के बिना आत्मकल्याण असंभव है। धर्म एक

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सनातन धर्म की स्थापना किसने की ?

सनातन धर्म की स्थापना किसने की ? कब कैसे और कहां ?

सनातन धर्म की स्थापना किसने की – सनातन धर्म का अर्थ है वह धर्म जो अनादि काल से है और अनंत काल तक रहेगा। इसकी स्थापना का प्रश्न इतिहासकारों के लिए कठिन है, क्योंकि यह अत्यंत पुराना है। वैज्ञानिकों द्वारा पृथ्वी की उम्र करीब 2 अरब वर्ष मानी जाती है, जबकि सनातन धर्म सृष्टि के आरम्भ होने को करीब 1955885124 वर्ष पुराना बताता है। सनातन धर्म की स्थापना भगवान ने की और जब भी धर्म की हानि होती है, तभी भगवान मनुष्य रूप में अवतरित होकर उसकी पुनर्स्थापना करते हैं।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत की ज्योतिष विद्या

विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत की ज्योतिष विद्या

भारतीय ज्योतिष शास्त्र रोगों की उत्पत्ति और उनके उपचार के लिए आवश्यक ज्ञान प्रदान करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन को इसका समुचित उपयोग करके विश्व को लाभान्वित करने की आवश्यकता है। इससे चिकित्सा विज्ञान और रोगी दोनों का लाभ होगा। भारत को इस विषय पर ढेर सारे शोध और संशोधन करके पाठ्यपुस्तकों में जोड़ने की जरूरत है ताकि विश्व को चिकित्सा में नए आयाम देखने को मिलें। ज्योतिष शास्त्र पर किए गए शोध और उनके नतीजों को साझा करने में आंतरराष्ट्रीय स्थापनाओं को उत्साहित करना चाहिए।

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कमजोर चंद्रमा के लक्षण और उपाय - आत्महत्या विषय के सन्दर्भ में

कमजोर चंद्रमा के लक्षण और उपाय – आत्महत्या विषय के सन्दर्भ में

चन्द्रमा मन का कारक होता है, मन के द्वारा सोच-विचार किया जाता है। विचारों की उत्पत्ति मन में होती है और आत्महत्या संबंधी विचार का जन्म भी मन में ही होता है; लेकिन इससे यह कैसे सिद्ध होता है कि चन्द्रमा आत्महत्या का भी कारक है? जितने भी शुभ-अशुभ विचार होते हैं सभी मन में…

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धर्मो रक्षति रक्षितः का अर्थ

धर्मो रक्षति रक्षितः – पूर्ण श्लोक अर्थ सहित

धर्मो रक्षति रक्षितः पूर्ण श्लोक क्या है ? धर्मो रक्षति रक्षितः श्लोक का अर्थ क्या है ? इस लेख में हम इस श्लोक के ऊपर विस्तृत चर्चा करेंगे। क्या आप धर्मो रक्षति रक्षितः पूर्ण श्लोक को जानते हैं ? यह श्लोक किस ग्रंथ का है ? धर्मो रक्षति रक्षितः का क्या अर्थ है ? हम यहाँ इस विषय पर गंभीरता से विचार करेंगे। इसके संदर्भ को समझने का प्रयास करेंगे।

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