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संपूर्ण कर्मकांड विधि

संपूर्ण कर्मकांड विधि

सूर्य सहस्रनाम स्तोत्र - surya sahasranam stotra

सूर्य सहस्रनाम स्तोत्र – surya sahasranam stotra

सूर्य सहस्रनाम स्तोत्र – surya sahasranam stotra : भगवान सूर्य प्रत्यक्ष देवता है और पंचदेवताओं में से एक हैं, इसके साथ ही नवग्रहों में प्रमुख हैं और ग्रहराज के नाम से जाने जाते हैं। आरोग्य, आत्मा आदि के कारक हैं। भगवान सूर्य की अराधना में सहस्रनाम पाठ करना भी विशेष महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही हवन के लिये भी सहस्रनाम का महत्व होता है।

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गणेश हृदय स्तोत्र - Ganesh Hriday Stotaram

गणेश हृदय स्तोत्र – Ganesh Hriday Stotaram

गणेश हृदय स्तोत्र – Ganesh Hriday Stotaram : हृदय स्तोत्र के बिना साधना पथ पर आगे बढ़ाना संभव नहीं होता है। जो प्रथम पूज्य गणेश की साधना करना चाहते हैं उनके लिये गणेश हृदय स्तोत्र का विशेष महत्व हो जाता है और यहां दिया गया है।

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गणेश कवच संस्कृत में - Ganesha Kavacham

गणेश कवच संस्कृत में – Ganesha Kavacham

गणेश कवच संस्कृत में – Ganesha Kavacham : जब भावनात्मक पूजा की बात आती है, तो भाव की प्राथमिकता होती है, जबकि मंत्र-स्तोत्र के लिए भाषा का महत्व भी बढ़ जाता है। देववाणी, संस्कृत में मंत्रों का पाठ विशेष लाभकारी है, जैसे गणेश कवच। भगवान गणेश, जिन्हें प्रथम पूज्य माना जाता है, के कवचों में सुरक्षा के लिए प्रार्थना की जाती है। विभिन्न रूपों में तीन प्रमुख कवच हैं: मुद्गलकृत, महागणपति, और उच्छिष्ट। इन कवचों में नियमित जप कर मानसिक शांति और सुरक्षा प्राप्त की जा सकती है। संस्कृत में ये मंत्र चारों ओर से रक्षा प्रदान करते हैं और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता दायक होते हैं।

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गणेश स्तुति मंत्र - ganesh stuti

गणेश स्तुति मंत्र – ganesh stuti

गणेश स्तुति मंत्र – ganesh stuti : यहां एकदन्त स्तोत्र, गणपतिस्तव, संकटनाशन गणेश स्तोत्र, गणाधिपाष्टक, श्री सिद्धिविनायक स्तोत्र, सन्तानगणपति स्तोत्र, श्रीगणपतिषोडशनामावलि स्तोत्र, रुद्रयामलोक्त श्री विनायक स्तवराज, गणेशाष्टक, गणेश मङ्गलाष्टक इत्यादि अनेकों महत्वपूर्ण स्तोत्र दिये गये हैं जो आपके लिये उपयोगी हो सकते हैं।

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गणेश सहस्रनाम स्तोत्र - ganesh sahasranama stotram

गणेश सहस्रनाम स्तोत्र – ganesh sahasranama stotram

गणेश सहस्रनाम स्तोत्र – ganesh sahasranama stotram : इस आलेख में भगवान गणेश का सहस्रनाम दिया गया है। इसके साथ है महागणपति सहस्रनाम स्तोत्र भी दिया गया है।

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गणेश पूजा - गणेश अष्टोत्तरशत नाम

गणेश अष्टोत्तर शतनामावली | गणेश पूजा मंत्र | ganesha ashtottara shatanamavali

गणेश अष्टोत्तर शतनामावली | गणेश पूजा मंत्र | ganesha ashtottara shatanamavali : भगवान गणपति की पूजा में 21 नामों से पूजा करने का महत्व तो है ही इसके साथ विशेष पूजन में गणेश अष्टोत्तर शतनामावली से भी दूर्वा, मोदक, विविध फल आदि द्रव्यों द्वारा पूजन किया जाता है। सिद्धिविनायक पूजा विधि और संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि पूर्व से प्रकाशित है और उन पुजनों में 21 नामों से अतिरिक्त यदि अष्टोत्तर शतनाम से भी पूजा करनी हो तो यहां दिया गया है।

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संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत विधि - sankashti ganesh chaturthi

संकष्टहर या संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत विधि – sankashti ganesh chaturthi

संकष्टहर या संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत विधि – sankashti ganesh chaturthi : यहां संकष्टहर गणेश चतुर्थी व्रत की पूजा विधि व कथा दी गयी है। संकष्टी गणेश चतुर्थी का विशेष महत्व है और विशेष पूजा विधि भी है जिसके मंत्रों का भी ऊपर वर्णन किया गया है। व्रत कथा में चमत्कारिक प्रभाव भी देखने को मिलता है विशेष रूप से पुत्र प्राप्ति व पुत्र रक्षा हेतु यह व्रत अधिक महत्वपूर्ण है।

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तुलसी स्तोत्र अर्थ सहित | मंगलाष्टक | tulsi stotram

तुलसी स्तोत्र अर्थ सहित | मंगलाष्टक 8 | tulsi stotram

तुलसी स्तोत्र अर्थ सहित | तुलसी माहात्म्य – tulsi stotram : यहां भगवती तुलसी की प्रसन्नता प्रदान करने वाला स्तोत्र दिया गया है एवं तुलसी स्तोत्र का अर्थ भी दिया गया है। साथ ही तुलसी का माहात्म्य भी दिया गया है। एवं तुलसी विवाह में मंगलाष्टक पाठ का विधान होने से मंगलाष्टक भी दिया गया है।

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तुलसी विवाह विधि : Tulsi vivah vidhi

तुलसी विवाह विधि : Tulsi vivah vidhi

तुलसी विवाह विधि : Tulsi vivah vidhi – व्याघ्रपदगोत्रोत्पन्नाय वैयाघ्रपदगार्ग्यवशिष्ठेति त्रिप्रवराय, देवमीढ़वर्मणः प्रपौत्राय, सूरसेनवर्मणः पौत्राय, वसुदेववर्मणः पुत्राय, अनेककोटिब्रह्माण्डनायकाय श्रीकृष्णाय (गोपालाय, श्रीधराय) वराय, आलंबायनदेवलगौतमेति त्रिप्रवरां, विश्वकर्मणः प्रपौत्रीं, प्रजापतेः पौत्रीं, ईश्वरस्यपुत्रीं तुलसींकन्यां ज्योतिर्विदादिष्टे सुमहूर्ते दास्ये॥

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Tulsi vivah kab hai : जानिये तुलसी विवाह कैसे किया जाता है

Tulsi vivah : जानिये तुलसी विवाह कैसे किया जाता है

Tulsi vivah kab hai : जानिये तुलसी विवाह कैसे किया जाता है – तुलसी विवाह भी एक विस्तृत कर्मकांड है जिसकी विधि का शास्त्र में वर्णन मिलता है और ऊपर शास्त्रोक्त प्रमाण सहित तुलसी विवाह की विधियों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है जिससे यह भी सिद्ध होता है कि मूर्ख-मंडली द्वारा अंतर्जाल पर जो ढेरों सामग्रियां प्रचारित-प्रसारित की गयी है वो शास्त्र-सम्मत नहीं है और भ्रामक है। क्योंकि शास्त्रसम्मत का तात्पर्य होता है जो शास्त्र में बताया गया हो। श्रद्धालु जनों को शास्त्रोक्त विधि से ही किसी भी धर्म-कृत्य को संपन्न करना चाहिये।

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