यहां पढ़ें त्रिपुरसुन्दरी सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में – tripura sundari sahasranam
यहां पढ़ें त्रिपुरसुन्दरी सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में – tripura sundari sahasranam : यहां वामकेश्वरतन्त्रोक्त षोडशी सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है।
यहां पढ़ें त्रिपुरसुन्दरी सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में – tripura sundari sahasranam : यहां वामकेश्वरतन्त्रोक्त षोडशी सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है।
यहां पढ़ें त्रिपुरसुन्दरी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में – tripura sundari ashtottarshatnam : यहां ब्रह्मयामलोक्त षोडशी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र और श्रीकालीविलासतन्त्रोक्त त्रिपुरसुन्दरी शतनामस्तोत्र अथवा महात्रिपुरसुन्दरी शतनामस्तोत्र दोनों संस्कृत में दिया गया है।
यहां पढ़ें त्रिपुरसुन्दरी हृदय स्तोत्र संस्कृत में – tripura sundari hriday stotram : यहां विनियोग न्यास और ध्यान सहित षोडशी महाविद्या अर्थात त्रिपुर सुंदरी हृदय स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है।
यहां पढ़ें त्रिपुरसुन्दरी कवच स्तोत्र संस्कृत में – tripura sundari kavach : माता त्रिपुरसुन्दरी अर्थात षोडशी महाविद्या कवच रुद्रयामल तंत्र से लिया गया है। विनियोग और ध्यान सही यहां संस्कृत में षोडशी महाविद्या कवच स्तोत्र दिया गया है।
षोडशी महाविद्या : पढ़िये त्रिपुरसुंदरी स्तोत्र संस्कृत में – shodashi stotram : दशमहाविद्या में से एक षोडशी जिनका एक अन्य नाम श्री त्रिपुर सुंदरी भी है के अनेक स्तोत्र हैं जो यहां संस्कृत में दिया गया है। त्रिपुरसुंदरी स्तोत्र (shodashi stotram), त्रिपुरसुन्दर्याद्वादशश्लोकीस्तुतिः, त्रिपुरसुन्दरीवेदसारस्तवः, त्रिपुरसुन्दरीचक्रराज स्तोत्रं, त्रिपुरसुन्दरी पञ्चरत्न स्तोत्रं और त्रिपुरसुन्दरी अपराध क्षमापण स्तोत्रं यहां दिया गया है।
यहां पढ़िये तारा हृदय स्तोत्र – Tara Hriday stotram : भैरवीतन्त्र में तारा हृदय स्तोत्र मिलता है जिसे उग्रतारा हृदय स्तोत्र भी कहा जाता है। यहां भैरवी तंत्रोक्त उग्रतारा हृदय स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है। दशमहाविद्या में से किसी भी महाविद्या की उपासना करनी हो योग्य गुरु का मार्गदर्शन अनिवार्य होता है।
यहां पढ़िये उग्रतारा प्रत्यङ्गिरा कवच – Tara Kavach stotram : तारा कवच अथवा उग्रतारा कवच रुद्रयामल तंत्र में वर्णित है और इसके साथ ही एक अन्य तारा प्रत्यङ्गिरा कवच स्तोत्र भी है जिसे उग्रतारा प्रत्यङ्गिरा कवच, नीलसरस्वती कवच आदि नामों से भी जाना जाता है। यहां रुद्रयामोक्त तारा कवच और तारा प्रत्यंगिरा कवच दोनों दिया गया है।
यहां पढ़िये तकारादि तारा सहस्रनाम स्तोत्र – Tara Sahasranam stotram 2 : अक्षोभ्यसंहितायोक्त तारा सहस्रनाम पूर्व में प्रकाशित किया जा चुका है और यहां ब्रह्मयामलोक्त तकारादि तारा सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है जो विशेष महत्वपूर्ण है।
यहां पढ़िये तारा सहस्रनाम स्तोत्र – Tara Sahasranam stotram : दशमहाविद्या में से एक माँ तारा विशेष महत्वपूर्ण हैं और यदि सहस्रनाम की बात करें तो अनेकों सहस्रनाम देखने को मिलता है जिसमे से एक विशेष महत्वपूर्ण सहस्रनाम श्रीबृहन्नीलतन्त्र में भैरवभैरवी के संवाद रूप में मिलता है। यहां श्रीबृहन्नीलतन्त्रोक्त तारा सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है जो विशेष महत्वपूर्ण है।
यहां पढ़ें तारा स्तोत्र अष्टोत्तर शतनाम : tara stotra 108 Name : विभिन्न देवी देवताओं के स्तोत्रों में अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का अपना विशेष महत्व होता है। महाविद्या तारा के भी कई अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र हैं जिनमें से तीन तारा स्तोत्र यहां दिया गया है। प्रथम तारा अष्टोत्तर शतनाम स्वर्णमालातन्त्र और मुण्डमालातन्त्रोक्त है, द्वितीय बृहन्नीलतन्त्रोक्त और तृतीय श्रीकालीविलासतन्त्रोक्त है। तीनों तारा अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है।