राम राज्य कब आयेगा ?
राम राज्य का सीधा भाव यह होता है कि सभी सुखी-सम्पन्न हों, चिन्तामुक्त जीवन हो, किसी प्रकार का भय न हो इत्यादि-इत्यादि । इसको अगर थोड़ा शब्दांतर से समझने का प्रयास करें तो इस प्रकार का भी अर्थ प्रकट हो सकता है :-
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राम राज्य का सीधा भाव यह होता है कि सभी सुखी-सम्पन्न हों, चिन्तामुक्त जीवन हो, किसी प्रकार का भय न हो इत्यादि-इत्यादि । इसको अगर थोड़ा शब्दांतर से समझने का प्रयास करें तो इस प्रकार का भी अर्थ प्रकट हो सकता है :-
बुद्धिमान वो होता है जो गलतियों से सीख ले, विद्वान वो होता है जो आत्म कल्याण करते हुए औरों का कल्याण करने में सक्षम हो। मंदिर, मूर्ति, प्राण-प्रतिष्ठा, महोत्सव आदि सभी विषयों पर कुछ विवाद भी उत्पन्न हुए, जिससे आगे काशी, मथुरा आदि के संबंध में कुछ सीख प्राप्त हुई ।
भारतीय संस्कृति का इतिहास धरती के ऊपर ही नहीं धरती के भीतर तक लिखा हुआ है, नदियों से समुद्र तक लिखा हुआ है, पत्थरों पर ही नहीं पहाड़ों पर भी लिखा हुआ है, सूर्य-चन्द्रमा-नक्षत्र-तारों तक लिखा हुआ है जिसे पन्नों में इतिहास लिखने-पढ़ने वाले कैसे पढ़ें ? उन्हें तो यह भाषा/विधा ही नहीं आती है।
जिस प्रकार से ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद इस बात को लेकर अड़े हुये हैं कि बिना शिखर के मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा नहीं की जा सकती और यदि अयोध्या राम मंदिर में ऐसा किया जा रहा है तो वह आसुरी हो जायेगा तो इससे एक नया प्रश्न उठ गया है : क्या देश के लाखों ठाकुरबाड़ी में भगवान राम की नहीं असुर की पूजा हो रही है ?
यहाँ सनातन धर्म और इस्लाम पंथ के दो ऐसे ऐतिहासिक उदाहरण को प्रस्तुत किया गया है जिसके द्वारा बिना कुछ कहे भी सनातन धर्म और इस्लाम पंथ का अंतर भलीभांति समझा जा सकता है।
इस आलेख में हम चर्चा करेंगे की सनातन धर्म और इस्लाम में मुख्य अंतर क्या है। दोनों के बीच बहुत सारे बाह्य अंतर भी हैं लेकिन मुख्य अंतर जो कि आंतरिक है, विचार या सोच का है हम उसे ऐतिहासिक उदहारण से समझने का प्रयास करेंगे।
Dharm – धर्म क्या है ? दुनिया का सबसे पुराना धर्म कौन सा है – धर्म एक जटिल विषय है जिसे समझने के लिए शास्त्रों का सन्दर्भ लेना पडता है। धर्म की परिभाषा ही है – वास्तविकता की सत्य धारणा जो वेदों द्वारा प्रेरित कर्त्तव्यों का पालन और अकर्त्तव्यों का त्याग करवाती है। वेद-विहित कार्य, वेद निषिद्ध कार्य, कर्त्तव्य और अकर्त्तव्य, सभी शास्त्रीय सिद्धांतों का हिस्सा होते हैं। सनातन धर्म, जो अनादि और अनंत है, किसी विचारधारा के समूह को नहीं इंगित करता, बल्कि एक कोणतीय धनुष की तरह सत्य जीवन के मार्ग को दर्शाती है। धर्मपालन के बिना आत्मकल्याण असंभव है। धर्म एक
सनातन धर्म की स्थापना किसने की – सनातन धर्म का अर्थ है वह धर्म जो अनादि काल से है और अनंत काल तक रहेगा। इसकी स्थापना का प्रश्न इतिहासकारों के लिए कठिन है, क्योंकि यह अत्यंत पुराना है। वैज्ञानिकों द्वारा पृथ्वी की उम्र करीब 2 अरब वर्ष मानी जाती है, जबकि सनातन धर्म सृष्टि के आरम्भ होने को करीब 1955885124 वर्ष पुराना बताता है। सनातन धर्म की स्थापना भगवान ने की और जब भी धर्म की हानि होती है, तभी भगवान मनुष्य रूप में अवतरित होकर उसकी पुनर्स्थापना करते हैं।
भारतीय ज्योतिष शास्त्र रोगों की उत्पत्ति और उनके उपचार के लिए आवश्यक ज्ञान प्रदान करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन को इसका समुचित उपयोग करके विश्व को लाभान्वित करने की आवश्यकता है। इससे चिकित्सा विज्ञान और रोगी दोनों का लाभ होगा। भारत को इस विषय पर ढेर सारे शोध और संशोधन करके पाठ्यपुस्तकों में जोड़ने की जरूरत है ताकि विश्व को चिकित्सा में नए आयाम देखने को मिलें। ज्योतिष शास्त्र पर किए गए शोध और उनके नतीजों को साझा करने में आंतरराष्ट्रीय स्थापनाओं को उत्साहित करना चाहिए।